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ऐसे बच सकती है बीजेपी की कर्नाटक सरकार

एक बीजेपी नेता के अनुसार येदियुरप्पा के पक्ष में बहुमत साबित होने की 70 फीसदी संभावना है, पार्टी तीन फार्मूलों पर काम कर रही है

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ऐसे बच सकती है बीजेपी की कर्नाटक सरकार
कर्नाटक में सरकार पर सस्पेंस कल खत्म हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को कल चार बजे विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने को कहा है. प्रोटेम स्पीकर यानी अस्थाई स्पीकर सदन की कार्यवाही चलाएंगे. हाल के वर्षों में यह दूसरी बार है जब प्रोटेम स्पीकर की अध्यक्षता में विश्वास मत हासिल किया जाएगा. इससे पहले 2005 में झारखंड में सुप्रीम कोर्ट के ही आदेश के बाद प्रदीप कुमार बालमुचु के प्रोटेम स्पीकर रहते हुए संयुक्त विश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही की गई थी.

वैसे तो सबसे अनुभवी विधायक को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता है. लेकिन राज्यपाल ने पांच बार के विधायक केजी बोपैया को यह ज़िम्मेदारी दी. कांग्रेस-जेडीएस ने इस पर ऐतराज किया लेकिन बीजेपी का कहना है कि बोपैया दस साल पहले 2008 में भी स्पीकर रह चुके हैं. तब उन्होंने येदियुरप्पा को विश्वास मत हासिल करने में मदद दी थी. दरअसल, बीजेपी इसमें फायदा देख रही है. अगर प्रोटेम स्पीकर के बजाए स्पीकर की अध्यक्षता में विश्वास मत की बात होती तो सबसे पहले तो स्पीकर का ही चुनाव कराना होता और उसी में पता चल जाता कि आंकड़े किस के साथ हैं. साथ ही टाई होने पर प्रोटेम स्पीकर वोट डाल सकते हैं.

अब बात करते हैं कि क्या येदियुरप्पा विश्वास मत जीत पाएंगे. एक बीजेपी नेता के अनुसार इसकी 70 फीसदी संभावना है. पार्टी तीन फार्मूलों पर काम कर रही है.

जीत का फार्मूला 1
अभी विधानसभा में संख्या इस तरह है- कुल संख्या 222, बीजेपी 104, कांग्रेस 78, जेडीएस 38 और दो निर्दलीय. चूंकि कुमारस्वामी दो सीटों से जीते इसलिए सदन की संख्या 221 और बहुमत का आंकड़ा 111 हो जाता है. लेकिन जादुई आंकड़ा सदन में मौजूद और विश्वास मत में भाग लेने वाले विधायकों की संख्या पर निर्भर करता है. यानी अगर कम विधायक मौजूद रहें तो उनकी संख्या के हिसाब से ही आंकड़ा तय होता है. इसीलिए बीजेपी की कोशिश है कि कांग्रेस- जेडीएस के करीब 15 विधायक विश्वास मत के दौरान गैरहाजिर रहें. इससे सदन की संख्या 221 से घटकर 206 रह जाएगी और जादुई आंकड़ा 104 पर आ जाएगा. प्रोटेम स्पीकर समेत बीजेपी के 104 विधायक हैं. प्रोटेम स्पीकर तभी वोट डाल पाएंगे जब टाई हो. ऐसे में बीजेपी को एक निर्दलीय विधायक का वोट भी हर हाल में चाहिए.

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक तो हुई लेकिन अभी तक न तो नेता चुना गया और न ही चीफ व्हिप. ऐसे में कांग्रेस विधायकों को व्हिप कैसे जारी होगी और उसका पालन कैसे कराया जाएगा. वैसे पार्टी अध्यक्ष भी व्हिप जारी कर सकते हैं.

जीत का फार्मूला 2
विश्वास मत के दौरान कांग्रेस और जेडीएस के नौ विधायक बीजेपी के पक्ष में वोट दें. इससे बीजेपी को मिलने वाले वोट 112 हो जाएंगे. हमने प्रोटेम स्पीकर का वोट नहीं गिना. कांग्रेस जेडीएस और दो निर्दलीयों के वोट 118 हैं. कुमारस्वामी दो सीटों से जीते. उनका एक ही वोट माना जाएगा. यानी वोट हुए 117. अगर 8 विधायक पाला बदलते हैं तो कांग्रेस-जेडीएस के 108 वोट ही बचे.

इसके अलावा बीजेपी एक और रास्ते पर काम कर रही है.

जीत का फार्मूला 3
कुछ विधायक गैरहाजिर रहें और कुछ खुलकर बीजेपी के पक्ष में वोट डालें. मत विभाजन से पता चलेगा कि दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल कानून के मुताबिक व्हिप का उल्लंघन हुआ या नहीं. इस पर स्पीकर फैसला करते हैं. वे विधायक को अयोग्य घोषित कर सकते हैं. लेकिन इसकी कोई समय सीमा नहीं है.

जाहिर है अगर कांग्रेस और जेडीएस के विधायक आखिरी वक्त तक साथ रहे तो बीजेपी के ये सारे फार्मूले नाकाम हो जाएंगे और येदियुरप्पा के हाथ से तीसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी निकल जाएगी. वैसे सुप्रीम कोर्ट ने आज येदियुरप्पा को सरकार बनाने के लिए बुलाने के राज्यपाल के फैसले पर कुछ नहीं कहा. लेकिन माना जा रहा है कि बाद में सुप्रीम कोर्ट त्रिशंकु विधानसभाओं के बारे में व्यापक फैसला दे. तो कर्नाटक में किसकी सरकार इसका जवाब तो शायद कल मिल जाए लेकिन राज्यपाल के फैसले से उठी बहस लंबी चलेगी.

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(अखिलेश शर्मा एनडीटीवी इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति एनडीटीवी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार एनडीटीवी के नहीं हैं, तथा एनडीटीवी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.



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