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गुजरात का घटनाक्रम बीजेपी के लिए कड़ी परीक्षा, कांग्रेस पर सवाल

कांग्रेस को भी जवाब देना होगा कि आखिर उसके एक विधायक लोगों में जहर क्यों घोल रहे, पार्टी से जुड़े नेताओं पर हिंसा भड़काने के आरोप क्यों लग रहे?

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गुजरात का घटनाक्रम बीजेपी के लिए कड़ी परीक्षा, कांग्रेस पर सवाल
गुजरात में उत्तर भारतीयों के खिलाफ हिंसा के बाद कांग्रेस के विधायक अल्पेश ठाकोर पर हिंसा के लिए उकसाने और उत्तर भारतीयों के खिलाफ नफरत भरी बातें कहने का आरोप लग रहा है. बिहार में सत्तारूढ़ जेडीयू ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर ठाकोर के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. ठाकोर के संगठन गुजरात क्षत्रिय ठाकोर सेना पर उत्तर भारतीयों के खिलाफ माहौल बनाने और उनके खिलाफ हिंसा भड़काने का आरोप लग रहा है.

दरअसल, गुजरात के हिम्मतनगर में पिछले हफ्ते 14 महीने की एक बच्ची से बलात्कार के मामला काफी गर्मा गया है. इस मामले में गुजरात के कई इलाकों में रहने वाले यूपी और बिहार के प्रवासियों को निशाना बनाया जा रहा है और उन पर हमले किए जा रहे हैं. इसके बाद कई इलाकों से सैकड़ों प्रवासी लोग अपने कामकाज छोड़कर गुजरात से निकल रहे हैं. दरअसल साबरकांठा के हिम्मतनगर में 14 महीने की बच्ची से बलात्कार के आरोप में बिहार के एक व्यक्ति रवींद्र साहू को गिरफ़्तार किया गया. इसके बाद से ही यूपी और बिहार से आए प्रवासियों को कई स्थानीय संगठनों ने निशाना बनाना शुरू कर दिया है और कई जगह उन पर हमले भी हुए हैं. इन इलाकों में गांधीनगर, अहमदाबाद, पाटन, साबरकांठा और मेहसाणा शामिल हैं. पुलिस इन इलाकों पर निगाह बनाए हुए है और अब तक ऐसे हमलों के आरोप में 450 से ज़्यादा लोगों की धरपकड़ की गई है. इसके बावजूद प्रवासियों में डर का माहौल है. गुजरात के डीजीपी शिवानंद झा के मुताबिक पुलिस हालात पर निगाह बनाए हुए है और हमला करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई जारी है.

गुजरात सरकार का कहना है कि चंद मुट्ठी भर लोग हैं जो लोगों को भगाने में लगे हैं. ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है. सरकार की नजरें सोशल मीडिया पर भी है जहां उत्तर भारतीयों के खिलाफ भड़काऊ संदेश दिए जा रहे हैं.

इस बीच उत्तर भारतीय मजदूरों के गुजरात से पलायन को राजनीतिक रंग भी दिया जाने लगा है. इस मुद्दे पर बीजेपी कांग्रेस के विधायक अल्पेश ठाकोर पर लोगों को उत्तर भारतीयों के खिलाफ भड़काने का आरोप लगा रही है. कहा जा रहा है कि ठाकोर के समर्थकों ने हिम्मतनगर की घटना के बाद लोगों को भड़काया. जेडीयू नेता और प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र भी लिखा है. उन्होंने लिखा कि आपने अल्पेश ठाकोर को बिहार का प्रभारी बनाया. लेकिन उनका संगठन गुजरात क्षत्रिय ठाकोर सेना उत्तर भारतीय को गुजरात से भगा रहा है.

यही नहीं, इस मुद्दे पर हार्दिक पटेल भी अल्पेश ठाकोर से नाराज हैं. उन्होंने कहा दोस्ती अपनी जगह पर है,  लेकिन अगर वे ऐसा करेंगे तो यह गलत बात है.

गुजरात क्षत्रिय ठाकोर सेना अल्पेश ठाकोर का संगठन है. अल्पेश ठाकोर इसके अध्यक्ष हैं. यह संगठन राज्य में स्थानीय लोगों के लिए 80 फीसदी आरक्षण की मांग कर रहा है. गुजरात पुलिस के मुताबिक इस संगठन से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है. एक वीडियो की भी चर्चा है जिसमें उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को गुजरात छोड़कर जाने की धमकी दी जा रही है और इसमें डेडलाइन भी बताई जा रही है. इस वीडियो में गांधीनगर तालुका पंचायत के पूर्व सदस्य महोतजी ठाकोर हिंदी भाषियों को धमकी देते सुनाई दे रहे हैं. अब गुजरात पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है. खुद गृह राज्यमंत्री प्रदीप सिंह जड़ेजा ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि की है.

गुजरात पुलिस साजिश के आरोपों की भी जांच कर रही है. जडेजा कहते हैं कि जो लोग पिछले 22 साल से सत्ता से बाहर हैं उन्होंने पहले भी जातिवाद फैलाने की कोशिश की थी. वे एक बार फिर गुजरात के माहौल को बिगाड़ना चाहते हैं. लेकिन अल्पेश ठाकोर तमाम आरोपों से साफ इनकार कर रहे हैं.

उधर, कांग्रेस पलटवार कर रही है. कांग्रेस आरोप लगा रही है कि ऐसा क्यों है कि गुजरात की बीजेपी सरकार उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों की सुरक्षा नहीं कर पा रही है. कांग्रेस गुजरात के इस मुद्दे में प्रधानमंत्री मोदी को भी लपेट रही है. पार्टी पूछ रही है कि पीएम के गृह राज्य में ऐसा क्यों हो रहा है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा कि गरीबी से बड़ी कोई दहशत नहीं है. गुजरात में हो रही हिंसा की जड़ में वहां के बंद पड़े कारखाने और बेरोज़गारी है. व्यवस्था और अर्थव्यवस्था दोनों चरमरा रही हैं. प्रवासी श्रमिकों को इसका निशाना बनाना पूर्णत गलत है. मैं पूरी तरह से इसके खिलाफ खड़ा रहूंगा.

उधर, बीजेपी इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए इसे एक बड़ा मुद्दा बनने से रोकने की कोशिश कर रही है. पार्टी नहीं चाहती है कि मध्यप्रदेश के चुनावों से पहले कांग्रेस को इस रूप में एक बड़ा मुद्दा मिले. बीजेपी पहले से ही मध्यप्रदेश में एससी-एसटी कानून में बदलाव की वजह से सवर्णों और पिछड़ों की नाराजगी झेल रही है. इसी तरह आरक्षण को लेकर भी कुछ लोग मुद्दा गर्माने में लगे हैं. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से फोन पर बात की है. इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले तीन दिनों से वहां कोई घटना नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि गुजरात विकास का मॉडल है. जो लोग विकास नहीं चाहते, वे समाज के सौहार्द को अफवाह फैलाकर बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे स्थानीय प्रशासन पर भरोसा रखें. हर किसी की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है. सभी लोगों को शासन और प्रशासन को पूरा सहयोग देना चाहिए.

गुजरात से पलायन करने वालों में बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूर हैं. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस मुद्दे पर गुजरात के मुख्यमंत्री से बात की है. नीतीश कुमार ने गुजरात के लोगों से अपील की है कि अन्य राज्यों के लोगों के प्रति भावना गलत नहीं रखें. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुजरात में उत्तर भारतीयों के खिलाफ हिंसा और वहां से उनकी वापसी को लेकर चिंतित हैं.

सोमवार को गुजरात में हुई घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए नीतीश ने कहा कि वहां की घटना पर नजर है. लेकिन सबसे यही आग्रह है कि जिसने जो भी अपराध किया है, उसको निश्चित रूप से सजा मिलनी चाहिए. ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि रविवार को वहां के मुख्यमंत्री विजय रूपानी से बातचीत हुई और उन्होंने बताया कि सख्त कारवाई हो रही है.

नीतीश ने कहा कि इस घटना को लेकर अन्य उत्तर भारतीय लोगों के प्रति गलत धारणा नहीं रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सब लोगों से कहेंगे कि ऐसे मसले पर दूसरे राज्य के लोगों के प्रति ऐसी भावना नहीं रखनी चाहिए. इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी शांति की अपील कर रहे हैं.

जाहिर है गुजरात का ताजा घटनाक्रम बीजेपी नेतृत्व के लिए एक कड़ी परीक्षा है. गुजरात छोड़ कर गए हिंदी भाषियों को वापस लाना भी उनके लिए एक चुनौती होगी. उधर कांग्रेस को भी भी जवाब देना होगा कि आखिर उसके एक विधायक इस तरह का जहर क्यों घोल रहे हैं. ऐसा क्यों हो रहा है कि कांग्रेस से जुड़े नेताओं पर हिंसा भड़काने के आरोप लग रहे हैं.

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(अखिलेश शर्मा NDTV इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

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