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अस्तित्व में कैसे आया IGL का स्मार्ट कार्ड

कभी-कभी कुछ घटनाएं आपके लिए सुखद आश्चर्य के रूप में सामने आती हैं. खासतौर से हैरानी तब होती है जब आपको उम्मीद न हो और अचानक ऐसा आपके साथ हो जाए.

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अस्तित्व में कैसे आया  IGL का स्मार्ट कार्ड
कभी-कभी कुछ घटनाएं आपके लिए सुखद आश्चर्य के रूप में सामने आती हैं. खासतौर से हैरानी तब होती है जब आपको उम्मीद न हो और अचानक ऐसा आपके साथ हो जाए. ऐसा ही कुछ वाकया मेरे साथ आज सवेरे हुआ जब मैंने अखबारों में इंप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) का स्मार्ट कार्ड का विज्ञापन देखा. इसमें कहा गया कि तेल और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान आज केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के साथ इसे जारी करने वाले हैं.
 
मुझे सुखद आश्चर्य इसलिए हुआ क्योंकि मॉनसून सत्र के दौरान संसद भवन में मैंने पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इसके बारे में सुझाव दिया था. उन्हें अपना व्यक्तिगत अनुभव बताते हुए कहा था कि कार में सीएनजी डलवाने में नकदी के चक्कर में बहुत समय बर्बाद होता है. क्रेडिट या डेबिट कार्ड से भुगतान करने में भी समय लगता है क्योंकि जिस स्टेशन पर मैं जाता हूं वहां पीओएस मशीन बिल्डिंग के अंदर है और हर बार वहां जाकर आपको पिन डालना होता है. इसी तरह, छुट्टे पैसों का चक्कर भी परेशानी बढ़ाता है. मैंने उनसे कहा कि जिस तरह बीपीसीएल वगैरह पेट्रोल डलवाने के लिए प्रीपेड पेट्रोल कार्ड देते हैं, ठीक वैसे ही आईजीएल को भी ऐसे कार्ड देने चाहिए. ऐसे कार्ड में न सिर्फ ऑनलाइन रिचार्ज होता है बल्कि बाकी बची रकम पर नज़र भी रखी जा सकती है. धर्मेंद्र प्रधान ने मेरे सामने ही अपने मंत्रालय के अधिकारियों को फोन पर इसके बारे में स्थिति पता करने और इस तरह का कार्ड जारी करने को कहा.
 
इस बात को करीब तीन महीने हो गए. मैं भी इस बारे में भूल चुका था. लेकिन आज अखबारों में इस कार्ड के जारी होने के विज्ञापन देखा तो पूरा किस्सा समझ गया. यानी मंत्री ने न सिर्फ सुझाव पर गौर किया बल्कि उन्होंने इस पर नजर भी रखी और इसे तार्किक परिणिति तक ले गए. मैंने इस विज्ञापन को ट्वीट कर दिया और इस कदम का स्वागत किया. अपने ट्वीट में मंत्री को भी टैग कर दिया.

इसके बाद कहानी में एक नया मोड़ भी आ गया. दोपहर को मुझे धर्मेंद्र प्रधान ने फोन कर इस कार्ड के बारे में जानकारी दी. मैंने अपने सुझाव पर अमल के लिए उन्हें धन्यवाद दिया. उन्होंने इसके बाद कहा कि वो मुझे एक और सरप्राइज देना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि वो आईजीएल का ये पहला स्मार्ट कार्ड मुझे देना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी मुझसे संपर्क करेंगे. और ऐसा ही हुआ. शाम होते-होते तक स्मार्ट कार्ड मुझ तक पहुंच भी गया.
 
ये सब लिखने की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि अमूमन सरकार से हम इन बातों की अपेक्षा कम रखते हैं. आमतौर पर शिकायत यही होती है कि कोई सुझाव या शिकायत पर अमल की बात तो दूर, वो संबंधित अधिकारी या मंत्री तक भी नहीं पहुंचते. लेकिन इस घटना ने मुझे अपनी राय बदलने पर कुछ हद तक मजबूर किया. हालांकि यहां पर ये याद दिलाना भी जरूरी है कि इन्हीं मंत्री ने कई बार ट्विटर पर मिली शिकायतों या सुझावों को गंभीरता से लिया है. ऐसा ही एक किस्सा एक अन्य पत्रकार से जुड़ा है जिसके घर पर गैस लीक होने की शिकायत थी. जिस नंबर पर वो शिकायत कर रही थीं, वो सेवा में नहीं था. तंग आकर उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री और पीएमओ को टैग करते हुए ट्वीट कर दिया. दोनों ही जगह से इस पर आगे कार्रवाई हुई. संबंधित एजेंसी से कहा गया कि वो चालू हालत के नंबरों को ही आम लोगों को बताएं और गैस लीक जैसी इमरजेंसी की शिकायत पहुंचाने के लिए सही नंबर दें जिन पर तत्काल कार्रवाई की जाए.
 
ये बातें बहुत बड़ी नहीं हैं. मुद्दे भी ज्यादा बड़े नहीं हैं. लेकिन एक नागरिक के नाते ऐसे मामलों में सरकार की तुरंत प्रतिक्रिया सुखद आश्चर्य से भर देती है.
 
आईजीएल स्मार्ट कार्ड: आईजीएल स्मार्ट कार्ड से नकदी का झंझट काफी हद तक कम हो सकता है. इसकी कई खासियतें हैं. इसमें सीएनजी डलवाने के बाद नकदी से भुगतान से बचा जा सकता है. वहीं पर मौजूद कर्मचारी मशीन में आपका कार्ड लगाएगा और रकम डालेगा. आप अपना पिन डालेंगे जिसके बाद आपको रसीद का प्रिंटआउट मिल जाएगा. आपके कार्ड में बाकी बची रकम के बारे में जानकारी आपके रजिस्टर्ड मोबाइल और ईमेल पर भेज दी जाएगी.
 
इसकी खास बात ये है कि आप अपने सारे लेनदेन पर ऑनलाइन नजर रख सकते हैं. इसमें बची हुई रकम के बारे में भी जानकारी मिलती रहेगी ताकि कम होने पर आप इसमें और पैसा डाल सकें.
 
पैसा डालने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन है. इसमें आरटीजीएस, एनईएफटी और आईएमपीएस शामिल है. कार्ड खोने की स्थिति में इसे ऑनलाइन ही ब्लॉक या अनब्लॉक किया जा सकता है. साथ ही, ये जानकारी भी मिलेगी कि इंप्रस्थ गैस लिमिटेड के सीएनजी स्टेशन कहां-कहां पर हैं. ताकि आप नजदीक के स्टेशन जाकर गैस डलवा सकते हैं. इसमें एसएमएस सुविधा है जिससे आपको हर बार कार्ड के इस्तेमाल पर जानकारी मिलेगी. कार्ड में लेनदेन की सुरक्षा के लिए पिन आधारित व्यवस्था है. 

(अखिलेश शर्मा एनडीटीवी इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति एनडीटीवी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार एनडीटीवी के नहीं हैं तथा एनडीटीवी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.


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