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राफेल पर विपक्ष में ही पड़ी फूट

पीएम नरेंद्र मोदी को एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार की क्लीन चिट के बाद एनसीपी में टूट, तारिक अनवर ने एनसीपी और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे डाला

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राफेल पर विपक्ष में ही पड़ी फूट
राफेल के मुद्दे पर विपक्ष में टूट खुलकर सामने आ गई है. अब तक कांग्रेस को इस मुद्दे पर किसी पार्टी का साथ नहीं मिल रहा था. अब राफेल सौदे पर पीएम नरेंद्र मोदी को एनसीपी अध्यक्ष और पूर्व रक्षा मंत्री शरद पवार की क्लीन चिट के बाद एनसीपी में ही टूट हो गई. पार्टी के संस्थापकों में से एक और वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने आज एनसीपी और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे डाला.

दरअसल, गुरुवार को एक मराठी चैनल टीवी 18 लोकमत को दिए गए इंटरव्यू में पवार ने कहा था कि राफेल सौदे पर पीएम मोदी की मंशा पर कोई संदेह नहीं है. वे यहीं नहीं रुके, पूर्व रक्षा मंत्री शरद पवार ने यह भी कहा कि विपक्ष की तरफ से लड़ाकू विमान की तकनीक की जानकारी मांगने का कोई तुक नहीं है. हालांकि पवार ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार को राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत का खुलासा करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह कोई तकनीकी विषय नहीं है.

इसके बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने उनके बयान का स्वागत किया था. अमित शाह ने एक ट्वीट में कहा था कि "मैं पूर्व रक्षा मंत्री और वरिष्ठ सांसद शरद पवार जी को इस बात के लिए धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी और सच कहा. राहुल गांधी अगर आप अपने सहयोगी और पवार साहब जैसे कद के नेता की बात को मानें तो आप ज़्यादा समझदार नज़र आएंगे."

हालांकि एनसीपी सफाई दे रही है कि शरद पवार ने जेपीसी की मांग की है. वैसे तारिक अनवर की अपनी सियासी मजबूरियां भी हैं. वे एक ऐसी पार्टी के सदस्य रहे जिसका आधार महाराष्ट्र में है. उन्हें दो बार वहां से राज्यसभा भेजा गया. पिछले चुनाव में मोदी लहर के बावजूद बिहार के कटिहार से जीतकर उन्होंने अपनी ताकत दिखाई. लेकिन अब बदले हालात में माना जा रहा है कि वे कांग्रेस में घरवापसी कर सकते हैं या फिर आरजेडी में जा सकते हैं. शरद पवार, तारिक अनवर और पीए संगमा ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रेस छोड़ दी थी.

लेकिन इससे एक बड़ा सवाल बाहर निकल कर आ रहा है जिसका जवाब एनसीपी की सफाई के बावजूद मिलता नहीं दिख रहा. वह सवाल यह है कि शरद पवार का अगला कदम क्या होगा? पवार पिछले कुछ महीनों से बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन की नींव रखने में काफी सक्रिय नजर आ रहे थे. उन्होंने कई क्षेत्रीय नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की थीं. माना जा रहा है कि यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनसे पीएम मोदी को हटाने के लिए अगले लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने की पहल करने को कहा. इसके बाद कई इंटरव्यू में पवार कह चुके हैं कि अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराया जा सकता है. लेकिन अब पवार ने यह भी कहना शुरू कर दिया है कि चुनाव से पहले महागठबंधन संभव नहीं दिखता.

पवार राहुल गांधी को पीएम उम्मीदवार के तौर पर पेश करने की कोशिशों को भी पलीता लगा चुके हैं. उन्होंने कहा था कि चुनाव के बाद जिस पार्टी के ज्यादा सांसद हों उसी का पीएम बने. दिलचस्प बात यह है कि वरिष्ठ पत्रकार एन राम ने अगले लोकसभा चुनाव के बारे में दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि शरद पवार विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद के मजबूत दावेदार हो सकते हैं. इसी बीच राफेल पर उनका यह बयान आ गया. इस बयान में वे साफ कहते सुनाई दे रहे हैं कि जनता को प्रधानमंत्री की मंशा पर कोई संदेह नहीं है. यह बयान पीएम मोदी पर लगातार हमलावर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के हमले की धार को कुंद कर देता है क्योंकि राहुल सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साध रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की तरफ से लड़ाकू विमान की तकनीक की जानकारी मांगने में कोई तुक नहीं है.

महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन पर बात काफी आगे पहुंच चुकी है, तो पवार के बयानों के क्या हैं सियासी मायने? या इस पर तिल का ताड़ बनाया जा रहा है? जो लोग शरद पवार की सियासत को नजदीक से देखते आए हैं उन्हें लगता है कि पवार के अगले कदम के बारे में कोई भी भविष्यवाणी करना जोखिम भरा होता है.

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(अखिलेश शर्मा NDTV इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति एनडीटीवी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार एनडीटीवी के नहीं हैं, तथा एनडीटीवी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.



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