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क्या भारत कभी हिंदू पाकिस्तान बन सकता है?

थरूर ने तिरुवनंतपुरम में बुधवार को एक कार्यक्रम में कहा था कि अगर 2019 में बीजेपी अपनी मौजूदा ताकत के साथ वापस आई तो वो संविधान बदल कर भारत को हिंदू पाकिस्तान में बदल देगी.

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क्या भारत कभी हिंदू पाकिस्तान बन सकता है?

कांग्रेस नेता शशि थरूर (फाइल फोटो)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के हिंदू पाकिस्तान बयान से उठा विवाद अब कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन गया है. बीजेपी की मांग है कि उनके बयान के लिए राहुल गांधी माफी मांगें जबकि कांग्रेस ने खुद को थरूर के बयान से अलग कर लिया. थरूर ने तिरुवनंतपुरम में बुधवार को एक कार्यक्रम में कहा था कि अगर 2019 में बीजेपी अपनी मौजूदा ताकत के साथ वापस आई तो वो संविधान बदल कर भारत को हिंदू पाकिस्तान में बदल देगी. हंगामा होने के बाद थरूर ने गुरुवार को अपनी बात दोहराई. उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि बीजेपी आरएसएस का हिंदू राष्ट्र पड़ोसी असहिष्णु और धार्मिक देश पाकिस्तान जैसा ही है.

थरूर हिंदू पाकिस्तान की बात कर हैं या फिर हिंदू राष्ट्र की. ऐसा लगता है वे दोनों की ही बात कर रहे हैं. उन्हें डर है कि अगर 2019 में बीजेपी फिर जीती तो संविधान को बदल कर भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कर देगी और भारत का वही हाल हो जाएगा जो आज पाकिस्तान का है. 2014 में बीजेपी की अपने बूते सरकार आने के बाद से संघ प्रमुख मोहन भागवत कई बार कह चुके हैं कि 'भारत में रहने वाले सभी लोग हिंदू हैं चाहे उनका खान-पान, पूजा पद्धति, भाषा और संस्कृति अलग हो.' भागवत हिंदू को परिभाषित भी करते हैं. वे कहते हैं कि 'जो भारत माता को अपनी माता मानते हैं वही सच्चे हिंदू हैं.' भागवत ने ये बातें इस साल मेरठ में भी संघ के कार्यक्रम में कही थीं. वहीं चुनाव से पहले मोदी खुद को हिंदू राष्ट्रवादी बता चुके हैं. लेकिन क्या सबका साथ सबका विकास की बात करने वाली बीजेपी का हिंदू राष्ट्र इस्लामी देश पाकिस्तान जैसा है? क्या आरएसएस के हिंदू राष्ट्र में अल्पसंख्यकों का दोयम दर्जा होगा? क्या भारत कभी पाकिस्तान जैसा बन सकता है? क्या थरूर की चिंता जायज है? क्या संविधान बदलना इतना आसान है? आइए देखते हैं कि संविधान क्या कहता है.

भारत का संविधान सबको बराबरी का अधिकार देता है. अनुच्छेद 25 धर्म और उसके प्रचार की आजादी देता है. अनुच्छेद 29 नस्ल, धर्म, जाति या भाषा के आधार पर भेदभाव रोकता है. अगर आपातकाल के 18 महीनों को छोड़ दें तो भारत में हमेशा लोकतांत्रिक ढंग से चुनी सरकार ने शासन किया. इसी दौरान संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्ष जोड़ा गया यानी सभी धर्मों को आजादी और बराबरी का सम्मान. यही नहीं, केशवनांद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि संविधान के मूल ढांचे से छेड़छाड़ नहीं हो सकती. सेक्यूलर चरित्र संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है. देश की सेना सेक्यूलर है. भारत में अल्पसंख्यक राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और सेना प्रमुख तक रह चुके हैं.

अब पाकिस्तान की बात करते हैं जो धर्म पर आधारित द्विराष्ट्र सिद्धांत से बना. लेकिन बांग्लादेश बनने के साथ ही द्विराष्ट्र सिद्धांत की धज्जियां उड़ गईं. जिन्ना ने मुसलमानों के लिए पाकिस्तान बनाया और कहने को तो सबकी बराबरी की बात की लेकिन पहले प्रधानमंत्री लियाक़त अली खान ने भेदभाव की नींव रख दी. वहां संविधान किसी भी अल्पसंख्यक को देश का प्रमुख बनने की इजाज़त नहीं देता. हिंदू, ईसाई, सिख और अहमदिया अल्पसंख्यकों पर पिछले सत्तर साल से दमन, अत्याचार और हत्याओं का सिलसिला जारी है. पूर्व सांसद फरहनाज़ इस्पाहनी अपनी किताब प्यूरीफाइंग द लैंड ऑफ प्यूर-पाकिस्तांस रिलीजियस माइनोरिटिज़ में लिखती हैं कि ईशनिंदा कानून के जरिए अल्पसंख्यकों पर निशाना साधा जाता है. अमेरिकी विदेश विभाग पाकिस्तान को धार्मिक आजादी के गंभीर उल्लंघनों के कारण स्पेशल वॉच लिस्ट में रखता है.

भारत में पिछले कुछ वर्षों में मुसलमानों पर अत्याचार की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है. लव जेहाद, घर वापसी और गोरक्षा के नाम पर हुई गुंडागर्दी में कई मुसलमानों को निशाना बनाया गया. भारत में सांप्रदायिक हिंसा का इतिहास भी रहा है और भीषण दंगे हुए हैं. लेकिन सवाल यही है कि क्या भारत कभी हिंदू पाकिस्तान बन सकता है? क्या थरूर का यह बयान भगवा आतंकवाद और हिंदू आतंकवाद की तरह कांग्रेस पर भारी तो नहीं पड़ेगा? शायद कांग्रेस को इसका एहसास है. इसीलिए बिना देरी के उसने खुद को थरूर के बयानों से अलग कर लिया. साथ ही उन्हें यह चेतावनी भी दी कि वे बीजेपी की 'नफरत की राजनीति' का जवाब देने में भाषा का संयम बरतें. लेकिन इस बात की संभावना कम है कि बीजेपी इतनी आसानी से इस मुद्दे को खत्म होने देगी.

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(अखिलेश शर्मा एनडीटीवी इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

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