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प्राइम टाइम की मुहिम का असर, CBDT ने 505 नौजवानों की लिस्ट जारी की

यह प्रक्रिया अटकी हुई थी जिसकी वजह से नियुक्ति पत्र मिलने में देरी हो रही थी. अब उम्मीद है कि नियुक्ति पत्र जल्दी मिलने लगेगा.

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प्राइम टाइम की मुहिम का असर, CBDT ने 505 नौजवानों की लिस्ट जारी की

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

आज एक अच्छी ख़बर बताता हूं, हमारी नौकरी सीरीज़ का असर हुआ है, थोड़ा हुआ है मगर गाड़ी आगे बढ़ी है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) ने इनकम टैक्स इंस्पेक्टरों का स्टेट आवंटित कर दिया है. यानी अब 505 उम्मीदवार देख सकेंगे कि उन्हें किस किस राज्य में जाना है. यह प्रक्रिया अटकी हुई थी जिसकी वजह से नियुक्ति पत्र मिलने में देरी हो रही थी. अब उम्मीद है कि नियुक्ति पत्र जल्दी मिलने लगेगा. हम पिछले सोमवार से लगातार यह अभियान चला रहे थे कि 3287 छात्रों को नियुक्ति पत्र कब मिलेगा जो आयकर विभाग, उत्पाद व शुल्क विभाग के लिए चुने गए हैं. आज नहीं बल्कि अगस्त 2017 में इनका रिज़ल्ट आ गया था मगर दस महीने से ये छात्र घर बैठकर बेचैन हो रहे थे. बहुतों की मानसिक और आर्थिक स्थिति ख़राब होने लगी थी. इन्हें कोई जवाब नहीं दे रहा था मगर सिस्टम पर हमारी नौकरी सीरीज का असर पड़ा है और इस वक्त जब दिल्ली की हवा आंधियों में बदल रही है, 505 नौजवान अपने मां बाप के साथ गले मिल रहे होंगे, रिश्तेदारों को फोन कर रहे होंगे.

मगर हम सबके लिए खुश होना चाहते हैं, उम्मीद है बाकी के 2,782 नौजवानों को भी नियुक्ति पत्र और ज़ोन का आवंटन अगले हफ्ते तक मिल जाएगा जब हम सोमवार को फिर से नौकरी सीरीज़ में इस मामले की समीक्षा करेंगे. इसी सीबीडीटी में 1,114 आयकर सहायकों के भी ज़ोन आवंटित कर दिए हैं. एक्साइज़ विभाग के 855 अफसरों की नियुक्ति की सूचना नहीं आई है. बहरहाल जिन 505 छात्रों की सूची आई है, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है और बाकी को भी उम्मीद होने लगी है. इसी के साथ मेरी मुसीबत बढ़ जाएगी कि प्राइम टाइम में अपना मामला उठवाने के लिए लोगों की भीड़ बढ़ती जाएगी जिसका असर ये हो रहा है मैं सभी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा हूं. कई लोग नाराज़ भी हो जाते हैं मगर आप आज वो सब छोड़कर ये देखिए कि दस महीने से काम नहीं हो रहा था, प्राइम टाइम के कारण हो गया. इनमें से कई हैं जो नौकरी छोड़ कर आए और कई हैं जिनके लिए एक एक दिन भारी पड़ रहा है. आप दर्शकों को बताते हुए खुशी हो रही है कि सीबीडीटी के 505 नौजवानों का ज़ोन अलॉट हो गया है. करण गुप्ता को नागपुर मिला है, विशाखा को मुंबई ज़ोन मिला है. राधा रमण को कोच्ची, अजय सिंह को चंडीगढ़, प्रसून पंकज को पटना मिला है. हम पिछले सोमवार से अड़े थे कि इन छात्रों का ज़ोन मिलना चाहिए और नियुक्ति पत्र मिले. इस कड़ी में 3287 नौजवान नियुक्ति पत्र का इंतज़ार कर रहे हैं मगर इनमें से आज 505 नौजवानों की गाड़ी आगे बढ़ गई है. सीबीडीटी सेट्रल बोर्ड आप डायरेक्ट टैक्सेस ने अपनी वेबसाइट पर 505 इंकम टैक्स इंस्पेक्टरों की सूची डाल दी है. एक बार जोन अलॉट हो जाने से नियुक्ति पत्र मिलने की प्रक्रिया कुछ ही दिनों की बात रह जाती है.

सीबीडीटी की वेबसाइट पर लिस्ट आने से पहले यही नौजवान दुखी था. उसका विश्वास हिल रहा था क्योंकि गांवों में लोग पूछने लगे थे कि झूठ तो नहीं बोला था कि नौकरी हो गई है.

प्राइम टाइम की नौकरी सीरीज़ की कामयाबी आप दर्शकों की वजह से हुई है. आपने हिन्दू मुस्लिम का टॉपिक छोड़ कर मीडिया के संपादकों के बीच नीरस माने जाने वाले विषय का साथ नहीं दिया होता तो सरकार को होश नहीं आता. अभी भी देखिए सूचना प्रसारण मंत्रालय ने सौ से अधिक नौजवानों को नियुक्ति पत्र नहीं दिया है. मैं कब से उनकी व्यथा उठा रहा हूं. क्या हमारी सरकार अपने ही नौजवानों से दुश्मनी रखती है. सीबीडीटी ने 505 इनकम टैक्स इंस्पेक्टरों के ज़ोन के आवंटन की सूची निकाल दी है. 1000 कर सहायकों के मामले में भी तेज़ी आनी चाहिए. एक छात्र ने मुझे पत्र लिखा है.

आपको बता दें, फरवरी में जब हमारी नौकरी सीरीज़ उफान पर थी तब उसके दबाव में 3287 नौजवानों से ज़ोन का विकल्प पूछा गया. नौजवानों ने फार्म भर दिया मगर गाड़ी रुक गई. उन्हें लगा कि प्राइम टाइम का यह एंकर भी हिन्दू मुस्लिम वाले टॉपिक में फंस जाएगा लेकिन मैं लौट आया. अगले हफ्ते तक सभी 3287 छात्रों को नियुक्ति पत्र मिल जाना चाहिए. क्या वित्त मंत्री पीयूष गोयल से ये उम्मीद की जा सकती है, उनके दूसरे मंत्रालय की एक कहानी बताता हूं. यह कहानी बताती है कि हम डिजिटल इंडिया के मामले में कितनी तरक्की कर पाए हैं. जैसे ही बड़ी चुनौती आई, रेल मंत्रालय की रफ्तार धीमी हो गई. क्या आपको याद है कि रेल मंत्रालय ने करीब एक लाख पदों के लिए परीक्षा लेने का ऐलान किया था, उसकी ताज़ा स्थिति क्या है. जिस भरती को पीयूष गोयल अपने ट्वीट में सुनामी बता रहे थे, वो सुनामी किधर है. 16 फरवरी के ट्वीट में पीयूष गोयल लिखते हैं कि @PiyushGoyal सुनामी! भारतीय रेल में 90,000 नौकरियां. महा भरती अभियान की शुरुआत. सैलरी से लेकर आनवाइन कैसे आवेदन करें, सबकुछ यहीं से जानें.

@PiyushGoyal भारतीय रेल दुनिया के सबसे बड़े भरती अभियान का ऐलान करता है. ग्रुप सी लेवल 1 लेवल 11 श्रेणी के 89,409 पदों पर भरती होगी. रेलवे में कैरियर बनाएं और नए भारत में अपना योगदान करें.

वित्त मंत्री पीयूष गोयल न तो 3287 आयकर सहायकों के हाथ में नियुक्ति पत्र दिला सके न ही जिस परीक्षा को दुनिया का सबसे बड़ा भरती अभियान बता रहे थे उसकी परीक्षा की तारीख का एलान कर सके हैं. 31 मार्च फार्म भरने की अंतिम तारीख थी, 31 मई तक इम्तहान का पता नहीं. दो महीने बाद भी तारीख का ऐलान नहीं हुआ है.

10 फरवरी को रेल मंत्रालय ने 90,000 से अधिक वैकेंसी भरने का ऐलान किया था. इसके फार्म भरने की अंतिम तारीख 31 मार्च थी. उस वक्त कहा गया था कि परीक्षा अप्रैल मई में हो सकती है मगर जब तारीख का पता नहीं चला तब फार्म भरने वाले बेचैन होने लगे. इसी बीच रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ट ने 31 मई को एक नोटिस जारी किया है. उसमें कहा कि इस बार अप्रत्याशित रूप से 2 करोड़ 37 लाख फार्म भरे गए हैं. आवेदन फार्म की जांच चल रही है और कंप्यूटर आधारित परीक्षा की तैयारी भी चल रही है. इन कार्यों के पूरा हो जाने पर वेबसाइट पर परीक्षा की तारीख का ऐलान हो जाएगा. यह बात सही है कि 2 करोड़ 37 लाख फार्म बहुत हैं मगर क्या ऑनलाइन सिस्टम में इनते फार्म की स्क्रूटनी करने की क्षमता नहीं होगी. फिर ऑनलाइन का मतलब क्या हुआ. क्या रेलवे को पता नहीं कि यह काम कब तक पूरा हो जाएगा, क्या यह अच्छा नहीं होता कि परीक्षा की तारीख का ऐलान हो जाता और छात्र निश्चिंत होकर तैयारी करते.

रेलवे की संसदीय समिति की रिपोर्ट थी कि 2 लाख से अधिक पद ख़ाली हैं मगर भर्ती निकली एक लाख से कुछ कम. उसकी भी परीक्षा कब पूरी होगी और कब नतीजे आएंगे और कब नियुक्ति पत्र मिलेगा कोई नहीं जानता. आम तौर पर रेलवे की परीक्षा का औसत निकालेंगे तो विज्ञापन निकालने से लेकर अंतिम रिज़ल्ट आने में दो से तीन साल का समय लग जाता है. 2019 में कौन जीतेगा उससे ज़्यादा ज़रूरी है कि नौजवानों को नियुक्ति पत्र कब मिलेगा. बैंकर उदास हैं, कि इतने संघर्ष के बाद उनकी सैलरी और अन्य मांगों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया. भारत के ग्रामीण डाक सेवकों की हड़ताल 18 दिन से जारी है. डाकघरों में चिट्ठी पत्री का वितरण रुक गया है. लोगों के ज़रूरी कागज़ात फंस गए हैं फिर भी इन हड़ताल का कोई नतीजा नहीं निकला है. योगी सरकार ने 12460 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देने का वादा किया था, कहा था कि मार्च में ही नियुक्ति पत्र मिल जाएगा, मगर इन शिक्षकों का कहना है कि सिर्फ 4000 शिक्षकों को ही नियुक्ति पत्र मिला है, बाकी 8000 फिर से संघर्ष पर आ गए हैं. हमारी सरकारें नौकरी देने के मामले में साफ साफ क्यों नहीं कहती हैं.

अगले दस दिनों तक देश के कई गांव बंद रहेंगे. किसान एकता मंच ने एक जून से 10 जून के लिए किसान कर्फ्यू का ऐलान किया है. इस संगठन में 65 किसान संगठन शामिल हैं. इस दौरान किसान शहरों को दूघ और सब्ज़ियों की सप्लाई नहीं करेंगे. वे सिर्फ गांवों को ही बेचेंगे.

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महाराष्ट्र की सड़कों पर टैंकर से दूध गिराते इस वीडियो को देखकर कलेजा कांप जाता है. हमारे सहयोगी सुनील सिंह ने बताया है कि अहमदनगर में हजारों दुग्ध उत्पादक तहसील का दरवाज़ा खोलकर अंदर घुस गए. उनकी मांग है कि दूघ की न्यूनतम कीमत 27 रुपये प्रति लीटर हो. दूध के दाम गिरने से किसान काफी परेशान हो गए हैं. पंजाब के दुग्ध उत्पादकों की भी वही हालत है. वे भी दूध फेंक कर अपना रोष जता रहे हैं. क्विंट की एक रिपोर्ट है कि महाराष्ट्र में एक गाय के पीछे रोज़ का खर्चा 300 रुपया है मगर आमदनी 200 रुपये भी नहीं हो पाती है. पिछले साल जून में सरकार ने किसानों की मांग मान ली थी और गाय के दूध का दाम 24 से बढ़ाकर 27 रुपये प्रति लीटर कर दिया था लेकिन सरकारी घोषणा के बाद भी कोपरेटिव ये भाव नहीं दे रहे हैं. सरकार भी कार्रवाई नहीं कर रही है. दूध के दाम को लेकर मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के किसान काफी उत्तेजित हैं. महाराष्ट्र में हर दिन 2 करोड़ 30 लाख लीटर दूध हर दिन जमा किया जाता है. दुग्ध उत्पादकों का कहना है कि सरकार रेट तय करती है 27 रुपये प्रति लीटर मगर कोपरेटिव और डेरी वाले 17 रुपये प्रति लीटर देते हैं जो कि बहुत कम हैं. एक तरीका और हो सकता था कि दूध फेंकने की जगह गरीब बच्चों को ही पिला देते. पिछले साल किसान आंदोलन की शुरूआत ताम्बा गांव से हुई थी वहां पर किसानों ने सरकार की वादाखिलाफी को लेकर सामूहिक श्राद्ध किया. कई जगहों पर सब्ज़ियां फेंक दी गईं.

किसान लागत का डेढ़ गुना दाम चाहते हैं. किसान सिर्फ दाम नहीं मांग रहे बल्कि पेंशन भी मांग रहे हैं. राजस्थान और मध्यप्रदेश में पुलिस की सक्रियता देखी गई. मध्यप्रदेश में 18 ज़िलों में एसएएफ की 18 कंपनियां, 5000 अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं. इन इलाकों में मंदसौर गोलीकांड के दोषियों को सज़ा दिलवाना भी है. मध्यप्रदेश में किसान यह भी चाहते हैं कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री तुरंत बांटी जाए. गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाए, किसानों को डीजल सब्सिडी दी जाए. कृषि उपकरण को जीएसटी से मुक्त किया जाए. यह बहुत बड़ा मसला है किसानों के लिए उनके लिए उपकरण खरीदना मुश्किल होता जा रहा है. एक मांग दिलचस्प है और बहुत जरूरी है. भारत के हर किसान को इस मांग को लेकर अड़ जाना चाहिए. कि गांवों में उच्चस्तरीय शिक्षा और स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधा दी जाए. मगर सरकारें उन्हें बीमा का झांसा दे देंगी कि हम स्वास्थ्य बीमा देंगे, लेकिन किसान गांव में क्वालिटी का अस्पताल मांग रहा है. यूपी में गन्ना किसानों के बकाये के मुद्दे का नतीजा आपने देखा ही लेकिन आगरा की तरफ जाइये तो आलू किसान दाम को लेकर टूट चुके हैं. उनकी परेशानी दूर नहीं हो सकी है. प्राइम टाइम में ही आपने देखा था कि बिहार के दलहन किसानों को दाम नहीं मिल रहा है. किसान परेशान हैं. आखिर कब तक किसान बार-बार आंदोलन के तेवरों के साथ लौटते रहेंगे. इनकी समस्या का समाधान कब होगा.


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