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कमाल की बात : यूपी में राज बदला, राज का रंग बदला

उत्तर प्रदेश में राज बदलते ही राज-पाट का रंग भी भी बदल गया है. समाजवादियों के लाल-हरे रंग की जगह अब भगवा ने ले ली है.

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कमाल की बात : यूपी में राज बदला, राज का रंग बदला
उत्तर प्रदेश में सफ़र के लिए अब भगवा रंग की बसें मिलेंगी. सीएम योगी आदित्यनाथ ने आज भगवा रंग की 50 बसों को झंडी दिखाकर रवाना किया. इसका नाम 'संकल्प बस सेवा' है. उत्तर प्रदेश में राज बदलते ही राज-पाट का रंग भी भी बदल गया है. समाजवादियों के लाल-हरे रंग की जगह अब भगवा ने ले ली है. अब तो सरकार बसें ही नहीं, गरीबों को सब्‍जी के ठेले भी भगवा रंग के ही बांट रही है. सरकारी इश्तेहार के रंग भगवा हैं. सरकारी पंडाल के रंग भगवा और अक्‍सर सरकारी कार्यक्रमों में फूलों की सजावट भी भगवा ही होती है.

योगी के वस्‍त्र तो भगवा होते ही है लेकिन अब तो योगी की बसें भी भगवा हो गई हैं. और जो लोग रंगों के प्रभाव में यकीन रखते हैं उन्‍हें लगता है कि अगर जनता भगवा रंग की बसों में बैठेगी तो उसका असर भी होगा. लेकिन सरकार कुछ और कहती है. परिवहन मंत्री स्‍वतंत्र देव सिंह कहते हैं, ''मुझे मालूम नहीं कि लोग रंग का मुद्दा क्‍यों उठाते हैं और जहां तक भगवा रंग का सवाल है तो उसमें तो सभी समाहित हैं. इसलिए बस का रंग नहीं बस का काम देखि‍ए.''

और ये बस तो अभी भगवा हुए हैं. बस से पहले उसकी छोटी बहन ई-रिक्‍शा भी भगवा हो चुकी थी. पीएम मोदी ने अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी में सितंबर, 2015 में गरीबों को जो ई-रिक्‍शा बांटे उसका रंग भगवा ही था. लेकिन ई-रिक्‍शा से ज्‍यादा चटक रंग तो उन ठेलों का था जिन्‍हें गरीबों को सब्‍जी वगैरह बेचने के लिए उन्‍होंने बांटा था. यही नहीं रिक्‍शा और ठेला पाने वालों को भगवा गमछा भी पहनाये गए.

अब सीएम चूंकि योगी हैं, लिहाजा वे तो भगवा वस्‍त्र पहनते ही हैं लेकिन अफसर उनकी कुर्सी पर भी भगवा तौलिया बिछाते हैं. उनके कार्यक्रमों में भगवा पंडाल लगाए जाते हैं और तो और कोशिश होती है कि सरकारी कार्यक्रमों में सजावट के फूल भी भगवा ही हो. अब सरकारी इश्तेहार और होर्डिंग्‍स भगवा रंग में लगती है. यही नहीं सरकारी डायरी भी भगवा रंग की छापी गई है.

अखिलेश यादव की हुकूमत में उनकी पार्टी का रंग चलता था. उनकी शुरू की लोहिया ग्रामीण बस सेवा की बसें उनकी पार्टी के झंडे के रंग में रंगे गए थे और मायावती के वक्‍त बसें सफेद के अलावा नीले रंग में रंगे गए थे.

(कमाल खान एनडीटीवी इंडिया के रेजिडेंट एडिटर हैं.)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.



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