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मेक्सिको ने 311 भारतीयों को वापस भेजा, मानव तस्‍करी रैकेट को कड़ा संदेश

अवैध रूप से किसी भी देश में नहीं जाना चाहिए. मेक्सिको ने इन्हें डिटेंशन सेंटर में नहीं रखा. न ही नेशनल रजिस्टर बनवाया. वापस भेज कर अच्छा ही किया.

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बहुत दिनों से मेक्सिको का झगड़ा अमरीका से चल रहा था, ट्रंप साहब मेक्सिको की सीमा पर दीवार चिनवा रहे थे कि वहां से कोई माइग्रेंट नहीं आ जाए. हम समझ रहे थे कि ये दोनों मुल्क आपस में समझ रहे हैं, हमारा क्या है. मगर मेक्सिको ने तो 311 भारतीयों को जहाज़ में बिठाकर दिल्ली भेज दिया. अच्छी बात है कि इन्हें रेगुलर फ्लाइट से नहीं भेजा, चार्टर्ड फ्लाइट से भेजा है. दिल्ली पहुंचे इन लोगों की उम्र 18 से 35 साल की है. पंजाब और हरियाणा के हैं. कहा जा रहा है कि ये सभी अवैध रूप से वहां गए थे. मेक्सिकों के आठ राज्यों में फैले हुए थे. मेक्सिको की सीमा पार कर अमरीका में प्रवेश करना चाहते थे. लेकिन इसी जून में अमरीका और मेक्सिको ने एक डील कर ली थी. उसी डील के तहत मेक्सिको ने इन्हें भारत भेज दिया है. इस कदम का अमरीका ने स्वागत किया है. भारत ने कुछ नहीं कहा है. अमरीका के कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के कार्यवाहक कमिश्नर ने कहा है कि भारतीय नागरिकों को इस तरह वापस भेजा जाना एक कड़ा संदेश है. मानव तस्करों के लिए कड़ा संदेश है. भारत के लोग आखिर दूसरे देश में अवैध रूप से कैसे जा कर बस सकते हैं. ये सभी नौकरी की तलाश में मेक्सिको गए थे जहां से इन्हें अमरीका जाना था. वीज़ा एजेंट ने इनसे वादा किया था कि मेक्सिको की सीमा के ज़रिए अमरीका में प्रवेश कर जाएंगे. वीज़ा एजेंट ने इनसे लाखों रुपये लिए थे. एक्वाडर लैंड करते हैं, फिर 15-20 दिनों तक पनामा के जंगलों में चलते हुए कोस्टा रिका पहुंचते हैं. फिर वहां से मेक्सिको पहुंचते हैं. इन सभी को मेक्सिको की सीमा से सटे एक शिविर में रखा गया था.

अवैध रूप से किसी भी देश में नहीं जाना चाहिए. मेक्सिको ने इन्हें डिटेंशन सेंटर में नहीं रखा. न ही नेशनल रजिस्टर बनवाया. वापस भेज कर अच्छा ही किया. कम से कम से अपने परिवार के पास तो जा सकेंगे, अगर जेल हुई तो भारत में ही रह सकेंगे. इनके ज़रिए वीज़ा एजेंट भी पकड़े जाएंगे. जून महीने में राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर मेक्सिको ने अवैध माइग्रेशन को नहीं रोका तो उसे मिलने वाली रियायतें बंद कर दी जाएंगी. मेक्सिकों ने आराम से चार्टर्ड फ्लाइट से वापस भेज दिया.


भारत के असम में सारी आबादी को नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन की प्रक्रिया से गुज़रना पड़ा. इसकी राजनीति दूसरे राज्यों में भी चल रही है. कहीं भी एनआरसी का मुद्दा उठ जाता है. अभी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत आईं थीं. उनसे इस संबंध में कोई बात नहीं हुई. बांग्लादेश यही कहता है कि ये हमारे लोग नहीं हैं. आज सुप्रीम कोर्ट ने अचानक नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन के कोर्डिनेटर प्रतीक हाजेला को असम से मध्य प्रदेश भेज दिया. कोर्ट में कारण नहीं बताया गया. प्रतीक हाजेला 1995 बैच के आईएएस हैं. असम मेघालय काडर के. अदालत ने कोर्ट में कारण नहीं बताया. प्रतीक हाजेला मध्य प्रदेश के ही हैं. गुवाहाटी से हमारे सहयोगी रतनदीप चौधरी तबादले के पीछे कि स्थियों को बताना चाहते हैं.

31 अगस्त को नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन की अंतिम सूची आ गई थी. 19 लाख लोग बाहर हो गए थे. ज़्यादातर मुसलमान बताए जाते हैं मगर इसमें हिन्दू भी हैं. इस रजिस्टर को लेकर प्रतीक हाजेला पर तमाम पक्षों से कई तरह के आरोप लगते रहे हैं. असम बीजेपी के प्रवक्ता भी कह रहे हैं कि हाजेला ने उनकी आपत्तियों को कोर्ट के सामने नहीं रखा. बीजेपी का कहना है कि एनआरसी में बहुत से विदेशी हैं. भारतीय नागरिक का नाम इस रजिस्टर में नहीं है.

जिस रजिस्टर को लेकर इतनी राजनीति हो रही है उसी पर बीजेपी को पूरी तरह भरोसा नहीं है जबकि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुआ है. जब एक राज्य में ही यह विश्वसनीय तरीके से नहीं हो सकता है तो पूरे देश में इसे लागू करने की बात कैसे की जा सकती है. बंगलुरू में भी डिटेंशन सेंटर बनाया गया है. मेक्सिकों वाले 311 भारतीय किस्मत वाले थे. उन्हें किसी डिटेंशन सेंटर में नहीं रखा, वापस घर भेज दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एंड महाराष्ट्र कोपरेटिव बैंक के मामले में जनहित याचिका सुनने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने याचिकार्ता से कहा है कि हाईकोर्ट जाएं. सरकार के वकील ने कहा कि इस मामले में ईडी ने 88 संपत्तियों को ज़ब्त किया है. कार्रवाई चल रही है. याचिकाकर्ता बेल आउट पैकेज की मांग कर रहा था.

मुरली धर का निधन हो गया. उनका भी पंजाब एंड महाराष्ट्र कोपरेटिव बैंक में अकाउंट था. बेटे ने बताया कि बायपास सर्जरी होनी थी मगर पैसे पीएमसी बैंक में फंसे थे. इस वजह से सर्जरी नहीं हो सकती. इस बैंक में अलग-अलग अकाउंट में 80 लाख जमा हैं. मुरलीधर का निधन हो गया. इसके पहले भी तीन और लोगों के निधन की खबरें आईं. संजय गुलाटी, फत्तू मल पंजाबी, डॉ. निवेदिता बिजवानी की मौत हो गई. पैसे न मिलने के तनाव के कारण. निवेदिता का इस बैंक में एक करोड़ रुपया जमा था. पुलिस मौत को इस कारण से नहीं जोड़ती है.

सोशल मीडिया पर अचानक एचडीएफसी बैंक के खाताधारक अपने पासबुक पर लगा स्टैंप वायरल करने लगे जिस पर लिखा था कि बैंक में जमा राशि में से सिर्फ एक लाख रुपया ही बीमित है, इंश्योर्ड है. यानी अगर पीएमसी जैसी हालत हुई तो आप सिर्फ एक लाख के ही हकदार होंगे. यह कानून है तो इसमें बैंक क्या कर सकता है. आपने कभी मांग ही नहीं की, पूछा ही नहीं कि ऐसा कानून क्यों है.

मगर खाताधारक पीएमसी बैंक के खाताधारकों की मौत और खुदकुशी की खबरों को पढ़कर बेचैन होने लगे. एचडीएफसी ने कहा है कि भरोसा रखें. बैंक सुरक्षित हैं. लेकिन एक लाख रुपये ही मिलेंगे वाला स्टैंप सही है. 22 जून 2017 को भारतीय रिजर्व बैंक ने सर्कुलर जारी किया था कि ग्राहकों को जागरूक किया जाए तो उसी के तहत ग्राहकों को जागरूक किया जा रहा है. वो एक लाख भी आसानी से नहीं मिलेगा. लिक्वीडेटर जब लिस्ट देगा तो दो महीने के भीतर एक लाख मिल जाएगा.

पश्चिम उत्तर प्रदेश के हापुड़ में 35 साल के एक व्यक्ति की हिरासत में मौत हो गई. तीन पुलिसवालों पर हत्या के आरोप लगे. इस मामले की जांच सब इंस्पेक्टर को सौंपी गई है. एक आरोपी तो जांचकर्ता से सीनियर भी है. परिवार का आरोप है कि पुलिस ने हिरासत में बेरहमी से मारा था. प्रदीप तोमर की मौत हो गई. 10 साल का बेटा वहीं खड़ा रो रहा था. उसे उन्हीं पुलिस वालों ने चिप्स का पैकेट दिया चुप कराने के लिए.

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आज लखनऊ में एक निर्मम हत्या हुई है. अखिल भारत हिन्दू महासभा के खुद को अध्यक्ष बताने वाले कमलेश तिवारी की उनके घर में ही हत्या कर दी गई. घटना 18 अक्तूबर के सुबह की है. सुबह दो लोग कमलेश तिवारी से मिलने आए थे जिन्हें तिवारी ने भीतर बुलाया. फिर अपने साथी से कहा कि सिगरेट लेकर आएं. जब वह लौटा तो कमलेश तिवारी की हत्या हो चुकी थी. घर से एक पिस्तौल बरामद हुआ है. कोई गिरफ्तार नहीं हुआ है. कमलेश तिवारी का संबंध कई तरह के विवादों से रहा है लेकिन पुलिस का कहना है कि आपसी रंज़िश में उनकी हत्या हुई है. ये लोग दिवाली की मिठाई देने के बहाने आए थे. डिब्बे में हथियार थे. पुलिस ने हत्यारे को पकड़ने के लिए दस टीमें बनाईं हैं.

आज का दिन भारत के इतिहास में कोई ख़ास महत्व का नहीं है लेकिन यही महत्वपूर्ण बात है कि जिस दिन कुछ नहीं होता उस दिन भी कुछ न कुछ हो जाता है. आज ही के दिन राष्ट्रवाद को बीएसएनएल होना था. उसे भरोसा था कि बीएसएनएल होकर सारे लोग अपना सिम बदल लेंगे. एयरटेल या जियो से बीएसएनएल हो जाएंगे. राष्ट्रवाद टू इन वन नहीं होता है. यह ट्रेंड कराने से न आता है और न स्विच होता है. यही होता है जब आप राष्ट्रवाद का मतलब व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी से सीखते हैं. डेढ़ लाख ट्वीट किसी को उपलब्धि हो सकती है लेकिन कई ट्रेंड को रिपोर्ट करने के बाद मेरा अनुभव कहता है कि सभी लोकतांत्रिक क्रियाएं आवश्यक नहीं होती हैं. कुछ फालतू भी होती हैं. ऐसी ही एक फालतू लोकतांत्रिक प्रक्रिया का नाम है ट्विटर पर ट्रेंड कराना. बीएसएनएल वालों को लगता होगा कि ट्रेंड कराने से चर्चा में आ गए लेकिन इससे कुछ होता है, मैं भी देखना चाहूंगा.
 



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