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फीफा वर्ल्ड कप : जर्मनी की हार और साउथ कोरिया की जीत के मायने...

वर्ल्ड कप मैचों में एशिया की टीमें भले ही दूसरे राउंड में नहीं जा पाई हों मगर उसने अपने खेल से सबको प्रभावित किया

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फीफा वर्ल्ड कप : जर्मनी की हार और साउथ कोरिया की जीत के मायने...
फीफा वर्ल्ड कप मैच में साउथ कोरिया ने जर्मनी को 2-0 से हराकर इस वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा अपसेट किया है. वैसे भी इस वर्ल्ड कप में जर्मनी की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी. जर्मनी को अपने पहले ही मैच में मैक्सिको के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. 2014 की वर्ल्ड चैंपियन अपने फर्स्ट राउंड के तीन मैच में से दो में हार जाएगी, इसका किसी को भी अंदाजा नहीं था. 

टूर्नामेंट के पहले जर्मनी फेवरेट मानी जा रही थी मगर पहले ही मैच से जानकारों को लग गया था कि इस टीम में वो बात नहीं है जो 2014 की वर्ल्ड कप टीम में थी. 2014 के वर्ल्ड कप मैच में जर्मनी ने ब्राज़ील को 7 गोल मारे थे और 7-1 से मैच जीता था. मगर वही टीम साउथ कोरिया से हारेगी इस बात का भी अंदाज़ा किसी को नहीं था. जर्मनी की यह टीम थकी हारी टीम लग रही थी, एकदम से उम्रदाज़ों की टीम. 2014 की टीम के कई खिलाड़ी इस टीम में थे जो अब ढलान पर नज़र आ रहे थे. 

वर्ल्ड कप फुटबॉल के इतिहास में केवल 6 बार हुआ है जब कोई चैंपियन टीम फर्स्ट राउंड में बहार हुई हो. पिछली बार 2014 में चैंपियन स्पेन बहार हुई थी. 2010 में इटली के साथ भी यही हुआ था. 2002 में फ्रांस फर्स्ट राउंड में बहार हुई थी. और तो और 1996 में ब्राज़ील भी फर्स्ट राउंड में हार गई थी. 

अब बात करते हैं दक्षिण कोरिया और जर्मनी की. थोड़ा इतिहास में जाना पड़ेगा 2002 में साउथ कोरिया और जापान ने मिलकर वर्ल्ड कप का आयोजन किया था. साउथ कोरिया की टीम को टैगक वारियर भी कहा जाता है. उस वक्त कोरिया टीम के कोच गुस्स हिडिंक थे. हॉलैंड के इस कोच के नेतृत्व में साउथ कोरिया ने काफी अच्छा किया था. 2002 वर्ल्ड कप में साउथ कोरिया ने पहले पुर्तगाल को हराया, राउंड ऑफ 16 में इटली की मात दी. क्वार्टर फाइनल में स्पेन को पेनल्टी शूट आउट में 5-3 से हराया. मगर सेमी फाइनल में जर्मनी के हाथों 0-1 से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई. कई जानकर मानते हैं कि साउथ कोरिया ने जर्मनी से 2002 वर्ल्ड की हार का बदला ले लिया और चैंपियन जर्मनी को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया. 

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे एशियाई फुटबॉल में बदलाव आएगा. इस बार के वर्ल्ड कप मैचों में एशिया की टीम भले ही दूसरे राउंड में नहीं जा पाई हो मगर उसने अपने खेल से सबको प्रभावित किया है. ईरान ने तो लगभग अर्जेंटीना को वर्ल्ड कप से बाहर ही कर दिया था. इजिप्ट के स्ट्राइकर मो सालाह जो इंग्लिश प्रीमियर लीग में लिवरपूल की तरह से खेलते हैं, अभी दुनिया के सबसे बेहतरीन स्ट्राइकर माने जाते हैं. उसी तरह जापान ने अपने पहले मैच में जिस तरह से कोलंबिया को मात दी, पूरी दुनिया दंग रह गई. जापान का यह लगातार 6 वर्ल्ड कप है. 

दरअसल में एशिया में उस तरह का फुटबाल कल्चर नहीं पनप पाया है जैसा कि साउथ अमेरिका या यूरोप में है. यहां तक कि अफ्रीका भी फुटबॉल के मामले में एशिया से काफी आगे है. जिस तरह का क्लब कल्चर यूरोप में है वैसा एशिया में नहीं है. इंग्लैंड का प्रीमियर लीग हो या स्पेन की ला लीगा, दुनिया के सभी बड़े फुटबॉलर यहीं खेलते हैं और सैकड़ों करोड़ के मालिक हैं. आबादी के लिहाज से दुनिया के सबसे बड़े दो देश चीन और भारत फुटबॉल में कहीं नहीं हैं. इतना जरूर है हम फुटबॉल देखना जरूर पसंद करते हैं. अभी भी एशिया में फुटबाल गरीबों द्वारा खेला जाने वाला खेल हैय. मगर साउथ कोरिया, जापान, ईरान और इजिप्ट ने एक आस तो बढ़ाई है. जरूरत है इसको आगे ले जाने की. 

अगला फीफा वर्ल्ड कप 2022 में दोहा, जो कि क़तर की राजधानी है, में होने वाला है. एक बार फिर फीफा वर्ल्ड कप एशिया में होगा और उम्मीद यही की जानी चाहिए कि यहां से एशियाई फुटबॉल एक नई दिशा पकड़ेगी जिसका भविष्य भी उज्जवल होगा.

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मनोरंजन भारती NDTV इंडिया में 'सीनियर एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर - पॉलिटिकल न्यूज़' हैं...

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