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प्राइम टाइम इंट्रो : क्या जीडीपी में सुधार का दौर शुरू हो गया?

ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट और संचार सेवाओं का ग्रोथ रेट पहली तिमाही के 11.1 प्रतिशत की तुलना में घट कर 9.9 प्रतिशत पर आ गया है मगर इसे आप 2016-17 की दूसरी तिमाही की तुलना में देखेंगे तो इसमें वृद्धि हुई है.

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प्राइम टाइम इंट्रो : क्या जीडीपी में सुधार का दौर शुरू हो गया?

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

सेंट्रल स्टैटिस्टिकल ऑफिस ने इस वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही का जीडीपी आंकड़ा जारी कर दिया है. पहली तिमाही की तुलना में जीडीपी की दर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. इसके पहले 31 अगस्त को पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून की जीडीपी आई थी, इस बार जुलाई से सितंबर की जीडीपी आई है. पहली तिमाही में जीडीपी दर 5.7 प्रतिशत पर आई तो काफी हंगामा हुआ, सरकार की आलोचना हुई, सरकार कहती रही कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण रफ्तार धीमी हुई है मगर आने वाले महीनों में इसमें सुधार आता चला जाएगा. उसी संदर्भ में इस बार की जीडीपी को देखा जा रहा है. 5.7 प्रतिशत से बढ़कर जीडीपी 6.3 हो गई है. एक बात का ध्यान रखिएगा. इन आंकड़ों की तुलना इस साल की पहली तिमाही से की जाएगी और पिछले साल की दूसरी तिमाही से की जाती है. देखने के लिए कि हम पहली तिमाही की तुलना में कहां हैं और पिछले साल के इसी समय की तुलना में कहां खड़े हैं.

सीएसओ की रीलीज़ में बताया गया है कि पिछले साल की दूसरी तिमाही में भारत की कुल जीडीपी 29.79 लाख करोड़ की थी, इस बार बढ़कर 31.66 लाख करोड़ की हो गई है. यानी पिछले साल की तुलना में 1 लाख 87 हज़ार करोड़ बढ़ गया है. जो बताता है कि विकास दर 6.3 प्रतिशत हो गई है. अब इसके बाद देखा जाता है कि किस सेक्टर में आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी आई है, किस सेक्टर में गिरावट आई है और किस सेक्टर में कोई सुधार नहीं हुआ है. आम तौर पर मैन्यूफैक्चरिंग का संबंध नौकरियों से जोड़ा जाता है इसलिए यह सेक्टर हर बार महत्वपूर्ण हो जाता है.

2016-17 की दूसरी तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग का ग्रोथ रेट था 7.7 प्रतिशत. 2017-18 की दूसरी तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग का ग्रोथ रेट है 7.0 प्रतिशत. 2017-18 की पहली तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग का ग्रोथ रेट 1.2 प्रतिशत पर आ गया था. पिछले पांच साल में यह रिकार्ड गिरावट थी. क्योंकि इसके पहले की तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग का ग्रोथ रेट 5.3 प्रतिशत था और 10.7 प्रतिशत था. पहली तिमाही के 1.2 प्रतिशत से बढ़कर अगर ग्रोथ रेट 7.0 प्रतिशत हुआ है. मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में एक तिमाही के भीतर 5.8 प्रतिशत की वृद्धि काफी महत्वपूर्ण है. इलेक्ट्रिसिटी, गैस, जल आपूर्ति और अन्य सेवाओं में भी 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है. इस सेक्टर में पिछले साल की दूसरी तिमाही में विकास दर 5.1 प्रतिशत थी. निर्माण क्षेत्र भी नौकरियां देने वाला सेक्टर माना जाता रहा है. निर्माण क्षेत्र में विकास दर पहली तिमाही के 2.0 प्रतिशत से बढ़कर 2.6 प्रतिशत दर्ज हुई है. पिछले साल की दूसरी तिमाही में ये 4.3 प्रतिशत थी. यानी निर्माण क्षेत्र का ग्रोथ रेट कम हुआ है. इस क्षेत्र में स्टील और सीमेंट की खपत घट गई है. एक और पैमाना होता है बैंकों के कर्ज़ देने के ग्रोथ रेट का. इससे आम तौर पर देखा जाता है कि कंपनियां कर्ज़ लेकर निवेश करती हैं. सितंबर 2016 में बैंकों के कर्ज़ का ग्रोथ रेट 10.1 प्रतिशत था, इस बार 6.8 है. पहली तिमाही के वक्त बैंकों के कर्ज़ का ग्रोथ रेट था 8.6 प्रतिशत. पहली तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही में बैंक क्रेडिट घट गया है.

उसी तरह ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट और संचार सेवाओं का ग्रोथ रेट पहली तिमाही के 11.1 प्रतिशत की तुलना में घट कर 9.9 प्रतिशत पर आ गया है मगर इसे आप 2016-17 की दूसरी तिमाही की तुलना में देखेंगे तो इसमें वृद्धि हुई है. पिछले साल की दूसरी तिमाही में इन सेक्टरों का ग्रोथ रेट था 7.7 प्रतिशत था. खेती के सेक्टर से अच्छी ख़बर नहीं है. सीएसओ के मुखिया टीसीए अनंत ने भी कहा कि खेती में विकास दर की रफ्तार धीमी पड़ गई है. कृषि, वन एवं मत्स्य का ग्रोथ रेट 1.7 प्रतिशत ही रहा है. पहली तिमाही के 2.3 प्रतिशत से घटकर 1.7 प्रतिशत पर आया है. पिछले साल की दूसरी तिमाही का ग्रोथ रेट 4.1 प्रतिशत था.

आप अंदाज़ा कर सकते हैं कि खेती में पिछले साल की दूसरी तिमाही की तुलना में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट का क्या असर होता है. शायद उसी का असर है कि किसान सड़कों पर नज़र आते हैं, खेतों में नहीं. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि हम सिर्फ एक बार 6 प्रतिशत से नीचे गए हैं. आपको याद दिला दें कि 2016 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर की जीडीपी 7.9 प्रतिशत थी. पिछले साल से तुलना करेंगे कि तो क्या हम कह सकते हैं कि उबर सकेंगे. अभी भी हम 1 प्रतिशत से ज्यादा पीछे हैं. आंकड़े बताते हैं कि जीएसटी जैसे सुधारों के कारण जो अड़चने आईं थीं, वो अब दूर हो रही हैं, हम सुधार की तरफ बढ़ने लगे हैं. तीसरी और चौथी तिमाही में बढ़ने की प्रक्रिया बनी रहेगी. 28 फरवरी 2018 को अक्‍टूबर से दिसंबर तिमाही के नतीजे आएंगे.

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पहली तिमाही के नतीजे आने पर बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने काफी मुखरता से आलोचना की थी, सरकार ने उसके बाद जीएसटी की प्रक्रियाओं और दरों में भी कई बदलाव किए थे. राहुल गांधी भी गुजरात के चुनावों में जीएसटी और जीडीपी का मसला उठा रहे हैं. यशवंत सिन्हा ने ट्वीट कर कहा है कि भारत को 8 से 10 फीसदी की रफ्तार से ग्रोथ करना होगा, तभी जाकर नौकरियां पैदा होंगी, लेकिन सरकार की महान कामयाबी के तौर पर 6.3 प्रतिशत का ही जश्न मनाया जाए. अब हमारी सारी समस्याएं समाप्त होती हैं. यशवंत सिन्हा अभी भी अपनी आलोचनाओं पर कायम हैं और नए आंकड़ों से संतुष्ट नहीं दिखते हैं. कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट किया है कि अच्छी बात है कि जुलाई-सितंबर के बीच जीडीपी दर 6.3 प्रतिशत रही है. पिछली पांच तिमाही से हो रही गिरावट में रुकावट आई है. मगर हम नहीं कह सकते हैं कि इसके आगे भी बढ़ने के लक्षण हैं.

सारे आंकड़े आते हैं मगर ये आंकड़े नहीं आते हैं कि कितनी नौकरियां बढ़ी हैं, मिली हैं या उनके स्वरूप बदल गए हैं. शायद भविष्य में इसकी कोई व्यवस्था बने, सारी गतिविधियां जब रोज़गार के अनुमान के लिए होती हैं तो रोज़गार के आंकड़े क्यों नहीं होते हैं. 5 मई 2015 को इकनोमिक टाइम्स की खबर है जिसमें वित्त मंत्री कहते हैं कि भारत 9 से 10 फीसदी की जीडीपी हासिल कर सकता है.


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