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हिदायतुल्लाह नेशनल यूनिवर्सिटी के छात्र आंदोलन पर, शिक्षकों पर गंभीर आरोप

छात्राओं में से कल कोई वकील बनेगी, जज बनेगी, क्या पता चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बनेगी, ऐसी छात्राओं के कॉलेज जीवन का ये अनुभव होगा, इस पर शर्म आने से ज़्यादा कार्रवाई होनी चाहिए

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हिदायतुल्लाह नेशनल यूनिवर्सिटी के छात्र आंदोलन पर, शिक्षकों पर गंभीर आरोप
हमें चाहिए आज़ादी, 2016 में जेएनयू से निकले इस नारे को चार चैनल के लोग एंटी नेशनल फ्रेमवर्क में फिट करते रहे मगर यह नारा धारा अपनी रफ्तार से भ्रष्टाचार से लेकर तमाम तरह की अव्यवस्था से आज़ादी का स्लोगन बनता चला गया. जेएनयू सिर्फ जेएनयू में नहीं होता है. जेएनयू होने का मतलब यही था या है कि जो गलत हो रहा है उसके खिलाफ बोलेंगे. कैंपस के भीतर भी और यमन में हो रही बमबारी के खिलाफ भी. आज न सही, कभी न कभी जेएनयू होना पड़ता है और अपने कैंपस में मशाल मार्च निकालना पड़ता है. जैसे हिदायतुल्ला नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 1000 के छात्र इन दिनों कर रहे हैं. 27 अगस्त से वे एक निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हैं. उन सीनियरों के बदले भी जो सहते रहे और चुपचाप यूनिवर्सिटी से डिग्री लेकर चले गए. उनके बदले भी ये छात्र लड़ रहे हैं, ताकि उन्हें और आने वाली पीढ़ियों को अब और न झेलना पड़े. इसलिए ये छात्र नारे लगा रहे हैं, हमें चाहिए आज़ादी. मीडिया की दुनिया से दूर ये छात्र अपने हाथों में मोबाइल को मशाल की तरह जलाते हुए रात को मार्च करते हैं और दिन में पोस्टर उठाकर नारे लगाते हैं.

पहले ही बता दें कि एनएलयू रायपुर में एडमिशन इतना आसान नहीं है. क्लैट की अखिल भारतीय प्रतियोगिता में चुने जाने के बाद इन छात्रों को यहां एडमिशन मिला है. इनका कहना है कि हम वकील बनकर दूसरे के अधिकारों के लिए ख़ाक लड़ेंगे जब अपने ही अधिकारों के लिए बोल न सके. मोबाइल को मशाल की तरह उठाए जा रहे ये नौजवान उस व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के नहीं हैं जहां फर्जी मैसेज को ही लोग दिन भर की पढ़ाई मान लेते हैं, बल्कि ये असली यूनिवर्सिटी वाले हैं जिनकी मांग है कि लाइब्रेरी रात के साढ़े दस बजे बंद करने का क्या तुक है. लाइब्रेरी तो 24 घंटे खुली रहनी चाहिए. क्या आप एक दर्शक के रूप में समझ रहे हैं कि इनकी क्लास दोपहर तीन बजे ख़त्म होती है. उसके बाद खा पीकर थोड़ा आराम कर 5 बजे भी लाइब्रेरी पहुंचेंगे तो पढ़ने के लिए कितना कम समय मिलेगा. यहां की लाइब्रेरी अच्छी है तो छात्रों को पूरा इस्तेमाल करने का मौका मिलना ही चाहिए. इनका कहना है कि बाकी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ की लाइब्रेरी 10 बजे रात से लेकर 3 बजे सुबह तक खुली रहती हैं, इसलिए हिदायतुल्ला नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ की लाइब्रेरी भी रात भर खुली रहे.

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ नलसर की लाइब्रेरी तो 4 बजे तक खुली रहती है तो फिर रायपुर की लाइब्रेरी किस हिसाब से 10.30 बजे बंद हो जाती है. लाइब्रेरी रात भर खुली होनी चाहिए, दिन रात जो आपको विदेश की तरह भारत बना देने का सपना बेचते हैं उन विदेशों की यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरी 24 घंटे खुली रहती है. पर इन छात्रों की लड़ाई सिर्फ लाइब्रेरी के समय को लेकर नहीं है. कुछ मसले ऐसे हैं, जिन्हें फोन पर सुनकर यकीन नहीं हुआ कि लॉ कालेज की लड़कियों के साथ शिक्षक ऐसा करने की हिम्मत कर सकते हैं.

भारत के मुख्य न्यायाधीश को तुरंत इसे नोटिस में लेना चाहिए. क्योंकि एनएलयू रायपुर जिनके नाम पर है जस्टिस हिदायतुल्लाह भी भारत के 11वें मुख्य न्यायाधीश थे. इसलिए ज़रूरी है कि छात्राओं की शिकायत पर गंभीरता से जांच हो और इस पर निर्णायक फैसला हो. सुनिए हिदायतुल्ला नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ की छात्राएं क्या कह रही हैं. एक लॉ यूनिवर्सिटी में कोई छात्रा यह कहे कि उसे भरी क्लास में यह कहा गया कि तुम बहुत सुंदर दिखती हो, आगे आकर बैठो ताकि पढ़ाने वाले का मन लगे और पढ़ने वालों का भी. एक लॉ यूनिवर्सिटी की छात्रा से यह कहा जाए कि कॉलेज के कार्यक्रम में तुमने डांस अच्छा किया है, अब कमरे में डांस करके दिखाओ. यह इतना सीरियस मामला है कि इसकी जांच होनी ही चाहिए. हिदायतुल्ला नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ की छात्राओं के बीच 180 पन्ने की कॉपी घुमाई गई. उनसे कहा गया कि वे अपना अनुभव इस कॉपी में दर्ज कराएं तो 177 पन्ना देखते-देखते भर गया. हर पन्ने पर सेक्सुअल हैरासमेंट की कोई न कोई घटना दर्ज है. यही नहीं गूगल पर एक फॉर्म तैयार किया गया और पूर्व छात्रों से भी पूछा गया तो वहां भी 78 पेज शिकायतें हो गईं, जिनमें सेक्सुअल हैरासमेंट और कमेंटबाज़ी की घटनाओं का ज़िक्र है. इन छात्राओं में से कल कोई वकील बनेगी, जज बनेगी, क्या पता चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बनेगी, ऐसी छात्राओं के कॉलेज जीवन का ये अनुभव होगा. इस पर शर्म आने से ज़्यादा कार्रवाई होनी चाहिए. 

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार का कहना है कि उनके पास यौन उत्पीड़न की कोई औपचारिक शिकायत अभी तक नहीं आई है. शुरू के दिनों में डर के कारण इन शिकायतों को औपचारिक रूप नहीं दिया गया, यानी लिखित शिकायतें कम जमा हुईं मगर आंदोलन कर रहे इन छात्र छात्राओं का कहना है कि काफी शिकायतें की गईं हैं मगर कार्रवाई नहीं हुई है. इसीलिए इस कैंपस में हमें चाहिए आज़ादी का नारा लग रहा है. 

भारत के मुख्य न्यायाधीश को 180 पेज की कापी मंगवा लेनी चाहिए और लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों की शिकायतों पर गंभीर एक्शन लेना चाहिए. इस कैंपस में पिंजड़ा तोड़ आंदोलन भी चला है. मतलब छात्राएं देर रात तक लाइब्रेरी में पढ़ने और साढ़े दस बजे के बाद हास्टल से बाहर जाने की आज़ादी मांग रही हैं. कुछ छात्रों ने बताया कि एक मिनट भी देर हो जाती है, साढ़े दस की जगह 10 बज कर 31 मिनट हो जाता है तो सीधा फोन घर चला जाता है. वहां फिर तरह तरह की बातें बताई जाने लगती हैं. कपड़ों का ब्यौरा भी दिया जाने लगता है कि कालेज में क्या पहनती है क्या नहीं. यहां तक कि एक छात्रा के घर फोन गया कि वह शराब पीती है, ड्रग्स लेती है, सिगरेट पीती है. जिसका कोई तुक नहीं था. एक छात्रा ने गैर हाज़िरी में रूप चेक करने का भी आरोप लगाया है. 

हिदायतुल्ला नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों ने जोखिम लिया है. सेक्सुअल हैरासमेंट से लेकर साढ़े दस बजे तक लाइब्रेरी बंद हो जाने से लेकर तमाम तरह की गड़बड़ियों पर चुप रह जाने की परंपरा को तोड़ दिया है. उन्हें पता है कि अगर जीत नहीं मिली, लोगों का साथ नहीं मिला तो फिर से उन्हीं के सामने खड़े होंगे जिनसे सेक्सुअल हैरासमेंट की शिकायतें हैं. मामला यही नहीं है. इस लॉ यूनिवर्सिटी में 65 साल से ज़्यादा उम्र तक वाइस चांसलर नहीं रह सकता. वाइस चांसलर ने कार्यसमिति में उम्र सीमा बढ़ाकर 70 साल कर ली. उसी यूनिवर्सिटी के एक शिक्षक ने जब हाई कोर्ट में चुनौती दी तो वाइस चांसलर केस हार गए. उनकी नियुक्ति रद्द हो गई क्योंकि वे 65 साल से ज़्यादा के हो चुके हैं. इसी के बाद से छात्र आंदोलन पर उतर आए क्योंकि वाइस चांसलर अपनी कुरसी बचाने का प्रयास कर रहे हैं. 

आंदोलन तेजी पकड़ता जा रहा है. छात्रों का कहना है कि उन्हें फैसला चाहिए. वे आश्वासन से पीछे नहीं हटेंगे. रवि शंकर शर्मा को अंतरिम तौर पर कुलपति नियुक्त किया गया है. उन्होंने छात्रों को संबोधित किया और समस्याएं भी सुनीं. गुज़ारिश की कि छात्र जल्दी क्लास रूम में लौट आए. अंतरिम कुलपति ने छात्राओं को आश्वासन दिया है कि शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. मगर छात्रों का कहना है कि उनकी सभी मांगें नहीं मानी जा रही हैं इसलिए वे अपने आंदोलन को खत्म नहीं करेंगे. इनकी मांग यह भी है हास्टल का वार्डन टीचर न हो वर्ना हास्टल का गुस्सा वे क्लास रूम में निकालते हैं. क्लास में देख लेने की धमकी देते हैं. 

9 जुलाई के प्राइम टाइम में हमने बताया था कि मणिपुर यूनिवर्सिटी में 40 दिनों से पढ़ाई ठप्प है और वहां के छात्रों के समर्थन में करीब 28 विभागों के अध्यक्ष ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अलग-अलग अकादमिक स्कूलों के 5 डीन ने भी इस्ताफा दे दिया है. हमारी उस दिन की खबर के बाद भी 45 दिन और आंदोलन चला था. यानी 85 दिनों तक आंदोलन चला जो 30 मई से शुरू हुआ था. फिर खबर आई कि मानव संसाधन मंत्रालय ने वहां के वीसी एपी पांडे को छुट्टी पर भेज दिया है. अब एपी पांडे छुट्टी से लौट आए हैं और आते ही फैसला किया है कि यहां शिक्षक संघ बंद, कर्मचारी संघ बंद और छात्र संघ बंद. बैन बैन बैन, ढैन ढैन ढैन... एक ही बार में सारा बर्तन इधर से उधर. 

शनिवार को आए नोटिफिकेशन में पांडे ने कहा कि उन्होंने अपनी ड्यूटी जॉइन कर ली है... 1 सितंबर के आदेश में पांडे ने कहा है कि मणिपुर यूनिवर्सिटी ऐक्ट 2005 में MUTA और MUSA जैसी कर्मचारियों की संस्थाओं का कोई प्रावधान नहीं है... आदेश में कहा गया कि ये दोनों ही संस्थाएं यूनिवर्सिटी में विघटनकारी गतिविधियों में लिप्त हैं जिससे यूनिवर्सिटी में मौजूदा हालात बने... आदेश से यूनिवर्सिटी कैंपस में इन संस्थाओं की गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी गई है और कहा गया है कि अगर कोई इन गतिविधियों में शामिल होगा तो उसके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी... 

वाइस चांसलर पांडे ने इंडियन एक्सप्रेस को भी बताया है कि उन्होंने ऐसा किया है क्योंकि शिक्षक और कर्मचारी संघ छात्रों को विरोध और यूनिवर्सिटी का माहौल ख़राब करने के लिए उकसा रहे थे... वो छात्रों को तोड़फोड़ की ओर धकेल रहे थे जिससे कई छात्रों का भविष्य ख़राब हो रहा था... 
छात्रों और शिक्षकों ने इस आदेश का विरोध करते हुए उसे virtual यानी आभासी बताया है...MUTA की एक आपात बैठक में प्रस्ताव पास किया गया कि पांडे को तब तक यूनिवर्सिटी कैंपस में नहीं घुसने दिया जाएगा जब तक उनके ख़िलाफ़ जांच और उसके बाद की कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती... 

प्रस्ताव में कहा गया है कि पांडे का वर्चुअल ऑर्डर बताता है कि वो कितना अलोकतांत्रिक और तानाशाह हैं...  MUSU, MUTA और MUSA की एक साझा बैठक में पास एक अन्य प्रस्ताव में कहा गया है कि सरकार 4 सितंबर से पहले पांडे के आदेशों पर उचित कार्रवाई करे... उन्होंने कहा कि छुट्टी के दौरान दिए गए पांडे के आदेशों की आलोचना की जाए और उन्हें null and void घोषित किया जाए ताकि वो किसी पर बाध्यकारी ना रहें... MUTA के प्रवक्ता प्रोफ़ेसर एनएन सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि अगर 4 सितंबर की शाम तक हमारी मांगों पर कोई जवाब नहीं आता तो हम अपनी हड़ताल फिर शुरू कर देंगे... 

आवाज़ बंद करने की फैक्ट्री कोई खोल ले तो उसका धंधा भारत में खूब चल पड़ेगा. तरह-तरह के बहाने अपनाए जा रहे हैं मगर आवाज़ उठाने की सुविधा न होती तो हिदायतुल्ला नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ की छात्राओं की कहानी आप तक कैसे पहुंचती. 

लखनऊ के हज़रतगंज की सड़कों पर बारिश में कार की सफाई करते नौजवान इसलिए ऐसा कर रहे हैं ताकि सरकार का इन पर ध्यान जाए और उनकी मांग सुनी जाए. इनकी मांग यह है कि उत्तर प्रदेश में सब इस्पेक्टर के 26000 से अधिक हज़ारों पद ख़ाली हैं. इन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया है कि सब इंस्पेक्टर की 2011 के बाद से भर्ती नहीं हुई है. अब जब 6500 लोग पास हुए हैं तो सभी को रखा जा सकता है क्योंकि ढाई साल की प्रक्रिया के बाद ये पास हुए हैं. अगर सरकार 3308 पदों पर ही बहाली करेगी तो बाकी 3000 से अधिक छात्र पास होकर भी नौकरी से वंचित हो जाएंगे और अगली भरती के लिए उनके पास उम्र नहीं बचेगी. इसलिए ये कभी कार साफ कर रहे हैं तो कभी धरना दे रहे हैं ताकि सरकार उनकी सुने.रविवार को इन लोगों ने धरना भी दिया मगर हुआ कुछ नहीं. भारतीय रेल ने हाल ही में परीक्षा शुरू होने से कुछ दिन पहले सीटों की संख्या बढ़ा दी थी लेकिन रिज़ल्ट होने के बाद क्या सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, इस पर फैसला सरकार को ही लेना होगा. 2015 में सब इंस्पेक्टर की बहाली निकली जो रद्द हो गई. फिर 2016 में आई 3308 पदों की. इसका रिज़ल्ट आ गया है मगर भरती की प्रक्रिया अभी तक चल ही रही है. 2016 से लेकर 2018 आ गया. दो-दो बार परीक्षा हुई और पेपर लीक होने के कारण रद्द भी हुई. छात्र यह भी पूछ रहे हैं कि दारोगा की नई भरती परीक्षा क्यों नहीं आ रही है. आठ महीने पहले खबर छपी थी कि जल्दी आएगी मगर अभी तक नहीं आई है. 

2017 के साल में तमिनलाडु की एक प्रतिभाशाली लड़की एस अनिता ने आत्महत्या कर ली थी. वे डाक्टर बनना चाहती थीं लेकिन मेडिकल परीक्षा नीट पास नहीं कर सकीं. अनिता की आत्महत्या के बाद तमिलनाडु में नीट को लेकर काफी प्रदर्शन भी हुए थे. तमिनलनाडु में राज्य स्तर पर अनिता टॉपर में से एक थी. वहां राज्य स्तर पर मेरिट बनता था और उसी के हिसाब से मेडिकल कालेज मिल जाता था. नीट आने से गरीब छात्रों के लिए मुश्किल हो गया क्योंकि परीक्षा का पैटर्न बदल गया था. तमिलनाडु स्तर पर 12 वीं में अनिता 1200 में से 1176 लाई थी. फिजिक्स में 100 में 100 नंबर लाई थी फिर भी नीट के कारण डाक्टर नहीं बन सकी और अनिता ने आत्महत्या कर ली. 

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अनिता की मौत के एक साल बाद उसकी याद में एक लाइब्रेरी बनाई गई है. 45 लाख की लागत से यह लाइब्रेरी बनी है. अनिता की मौत के बाद कई राजनीतिक दलों और संगठनों ने उसके परिवार को पैसे दिए थे, जिसका इस्तमाल कर उसके माता पिता ने अनिता की याद में एक लाइब्रेरी ही बना दी. इसमें 2500 किताबें हैं. अनिता के मां-बाप मज़दूरी करते थे. चाहते तो बेटी की याद में मिले पैसे से अपना जीवन बेहतर कर सकते थे मगर टीन षणमुगम और मां एस अनंथम उन्होंने एक लाइब्रेरी बनाई ताकि बाकियों के बच्चों का जीवन बेहतर हो सके. अनिता की प्रतिमा भी यहां लगी है और उसके पोट्रेट भी लगाए गए. नीट की व्यवस्था आने से पहले नंबर के आधार पर तमिलनाडु के गांवों के बच्चे भी डाक्टर बन जाते थे मगर जब से नीट आया है अनिता जैसी छात्राओं के लिए मुश्किल हो गया है. 

डॉलर के मुकाबले रुपया आज और गिर गया. एक डॉलर की कीमत 71 रुपये 21 पैसे हो गई. इतना अधिक तो रुपया कभी नहीं गिरा था. 16 अगस्त से लेकर 3 सितंबर तक पेट्रोल की कीमतों में करीब 2 रुपया की बढ़ोत्तरी हो चुकी है. कई शहरों में पेट्रोल 86-87 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है.


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