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प्राइम टाइम : सरकार की नाक के नीचे घोटाला कैसे हुआ ?

डावोस में नीरव मोदी की इस तस्वीर ने मीडिया में सनसनी फैला दी है. डावोस में प्रधानमंत्री के साथ उद्योगपतियों के झुंड में नीरव मोदी भी हैं. इन्हीं की कंपनी पर गबन का आरोप है.

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प्राइम टाइम : सरकार की नाक के नीचे घोटाला कैसे हुआ ?
किसी एक बैंक से, उस बैंक की एक शाखा से, उस शाखा से किसी एक आदमी को, उस आदमी की तीन कंपनियों को 11,300 करोड़ का लेटर ऑफ इंटेंट मिल जाए, चार पांच साल बाद फ्रॉड हो जाने के बाद बैंक को ही पता चलता है 11,300 करोड़ का फ्रॉड हुआ है ऐसा चमत्कार जम्बूद्वीपे भरतखण्डे आर्यावर्त ऐक देशांतर्गते में ही हो सकता है. बैंकिंग की दुनिया में कुछ नहीं बहुत कुछ गड़बड़ है. यहां के लाखों कर्मचारी से पूछिए जो अपनी सैलरी के बढ़ने का इंतज़ार कर रहे हैं, जो घंटों घंटों काम कर रहे हैं, मगर डर के कारण बोल नहीं पा रहे हैं. उनकी सैलरी बढ़ नहीं पा रही है, काम के बोझ से बीमारी बढ़ती जा रही है. वे एक ऐसा टापू पर बैठे हैं जहां हर कोई डरा हुआ है. इन सब चरमराती व्यवस्था के बीच आखिर वो लोग कहां से यह हौसला लाते हैं जो बैंकों से मिलकर 11,300 करोड़ का गबन कर जाते हैं. यही नहीं वो गुनाह करने के बाद भी प्रधानमंत्री के पीछे जाकर खड़े हो जाते हैं. तो डर डकैती और डावोस नाम की इस फिल्म की कहानी का प्लॉट अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है. कहानी खुल रही है, इसलिए आरोप और कथित रूप से ही किरदारों का नाम लिया जाएगा.

डावोस में नीरव मोदी की इस तस्वीर ने मीडिया में सनसनी फैला दी है. डावोस में प्रधानमंत्री के साथ उद्योगपतियों के झुंड में नीरव मोदी भी हैं. इन्हीं की कंपनी पर गबन का आरोप है. शब्दावली बदलने लगी है. 11,300 करोड़ की चपत को चूना कहा जा रहा है, फ्रॉड कहा जा रहा है, घोटाला नहीं कहा जा रहा है. एक शख्स इस फ्रेम में खड़े सभी को संदिग्ध बना देता है. क्या प्रधानमंत्री की सोहबत पाने का रास्ता इतना आसान है. हर ब्लैकसूट, ब्लैक मनी से नहीं आता है, मगर ब्लैक मनी से अच्छा ब्लैक सूट ज़रूर आ जाता है. सवाल तो पूछा ही जाना चाहिए कि प्रधानमंत्री के पास पहुंचने से पहले बैकग्राउंड चेक होता है या नहीं. यह जिसकी भी ज़िम्मेदारी हो उसे बताना चाहिए कि कैसे 11,300 करोड़ का कथित रूप से घोटालेबाज़ प्रधानमंत्री के फ्रेम में पहुंच जाता है.

आप ज्ञानचंद को नहीं जानते हैं. यूपी के महमूदाबाद के किसान ज्ञानचंद ने ट्रैक्टर ख़रीदने के लिए एक फाइनेन्स कंपनी से कर्ज़ लिया. सारी किश्तें जमा कर दीं, 90 हज़ार बाकी रह गया. कंपनी के लोग आए, ज्ञानचंद से ट्रैक्टर छिनने लगे. किसान अपने ट्रैक्टर को जाता देख सहन नहीं कर सका मगर कंपनी के लोगों ने उस ट्रैक्टर से ज्ञानचंद को कुचल कर मार दिया. दे किल्ड ज्ञानचंद यू नो एंड नथिंग हैपंड बिकॉज़ ज्ञानचंद ही नॉट नीरव मोदी. हिन्दी में यह हुआ कि 90,000 के कर्च न चुका पाने के कारण फाइनेंस कंपनी के लोगों ने ज्ञानचंद को मार दिया, क्योंकि ज्ञानचंद नीरव मोदी नहीं था.

ये तस्वीर नीरव मोदी की नहीं है, जसवंत सिंह. 36 साल का एक गबरू नौजवान. पंजाब के साहिबान गांव का रहने वाला. एक रोज़ अपने पांच साल के बेटे जसकरण को लेकर बाइक पर निकला. अगले दिन नहर से दोनों की लाश मिली.चश्मदीदों ने बताया कि जसवंत बेटे को सीने से लगाकर नहर में कूद गया. पांच साल के बेटे को सीने से लगाकर जसवंत नहर में कूद गया. अगर जसवंत को नीरव मोदी का पता होता तो उनके साथ वो भी डावोस जाता और प्रधानमंत्री के पीछे खड़ा रहता. डेढ़ एकड़ के जोतदार किसान जसवंत पर 10 लाख का लोन था. घटना 5 अक्तूबर 2016 की है.

इस बात को कैसे समझा जाए कि कोई हज़ारों करोड़ों का घोटाला करके विदेश घूमता है, भाग जाता है, प्रधानमंत्री के साथ रहता है, कोई पांच दस लाख का लोन लेने वाला किसान न शहर से भाग पाता है न मौत से. वह नहर में कूदकर मर जाता है. 11, 300 करोड़ का यह फ्रॉड उस बैंक में हुआ है, जिसने मई 2016 में 5,370 करोड़ का घाटा दिखाया था. यह घाटा बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा घाटा था. इसकी दोगुनी राशि का घोटाला एक ब्रांच से हो गया है. पंजाब नेशनल बैंक के प्रमुख सुनील मेहता ने प्रेस कांफ्रेंस की है. घोटाले से ज़्यादा बैंक के इतिहास का ज्ञान दिया. आज कल हर प्रेस कांफ्रेंस में हिस्ट्री पर लेक्चर ज़रूर होता है. सुनील मेहता ने फ्रॉड के शुरू होने का साल 2011 तो बताया मगर यह क्यों नहीं बताया कि 11, 300 करोड़ का गबन कब कब हुआ. उसके लिए लेटर ऑफ अंडरस्टेंडिंग कब कब निकली.

पंजाब नेशनल बैंक के सुनील मेहता मीडिया से सहयोग चाहते हैं कि ज़्यादा बातें न करें ताकि जांच एजेंसी के काम में बाधा न आए. वो क्यों चाहते हैं? आप प्राइम टाइम देखने के बाद किसी से इसके बारे में बात नहीं कीजिएगा, उसे प्राइम टाइम दिखा दीजिएगा. यह सब सवाल अभी है कि 11,300 करोड़ में कौन-कौन से हिस्सेदार हैं. उनका पैसा कहां कहां पहुंचा, किस-किस के पास पहुंचा.

दो कर्मचारियों ने लेटर ऑफ अंडर टेकिंग जारी कर दिया, जिसके सहारे नीरव मोदी की कंपनी को पैसा उधार पर मिल जाता है. इस लेटर ऑफ इंटेंट का ज़िक्र बैंक सिस्टम में नहीं किया. बैंक ने यह नहीं बताया कि किसी चीज़ की गिरवी रखने के बाद लेटर ऑफ अंडरटेकिंग दी गई या ऐसे ही दे दिया गया. लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के ज़रिए एक बैंक दूसरे बैंक को भरोसा देता है कि उपभोक्ता का कर्ज़ वो चुका देगा. इसका इस्तमाल अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग लेन देन में होता है. जब आपके नाम से लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग जारी होगा तो बैंक इसे स्वीफट के ज़रिए दुनिया के बैंकों को बता देगा. स्वीफ्ट का मतलब हुआ सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइट इंटरबैंक फिनांशियल टेलीकम्यूनिकेशन. दुनिया में इस सिस्टम का बड़ा भरोसा है. अभी तक कहीं से इसमें फ्रॉड करने की जानकारी नहीं आई है.

16 जनवरी 2018 को जब पंजाब नेशनल बैंक से विवादित कंपनी ने लेटर ऑफ अंडरस्टेंडिंग लेने की गुज़ारिश की तो अधिकारी ने पाया कि पहले के लेटर की बैंक के हिसाब किताब में एंट्री ही नहीं है. यह भी हो सकता है. उम्मीद है दूसरे बैंकों में ऐसा न हुआ हो. नीरव मोदी विदेश में हैं. 31 जनवरी को नीरव मोदी के घर पर और अन्य ठिकाने पर आयकर विभाग के छापे पड़े थे. आज 15 फरवरी है. इसके बाद भी नीरव मोदी भारत नहीं आए हैं. नीरव मोदी किसी किसान का नाम होता तो बैंक वाले घर से खटिया तक खींच कर ले गए होते. 

'बिजनेस स्टैंडर्ड' के पवन लाल की रिपोर्ट है कि हफ्ताभर पहले नीरव मोदी ने मकाऊ में अपना एक शो रूम खोला है. आयकर विभाग के छापे पड़ने के बाद मोदी बेफिक्र होकर बाहर शो रूम खोल रहे हैं यानी भारत में नहीं हैं. पवन लाल ने लिखा है कि कुआलालंपुर में भी एक नया शो रूम खुलने वाला है. अखबार ने तो लिखा है कि पंजाब नेशनल बैंक ने नीरव मोदी को ईमेल किया है, फोन किया है मगर जवाब नहीं आया. मगर नीरव मोदी ने पैसा लौटाने की बात की चिट्ठी तो लिखी है. इसके बारे में पंजाब नेशनल बैंक के प्रमुख ने कहा कि उसपत्र में पैसा लौटाने का कोई ठोस प्लान नहीं बताया है.

अब आते हैं कांग्रेस और बीजेपी पर. क्या दोनों इस मामले में सही सवाल कर रहे हैं ? सही सवाल के जवाब दे रहे हैं या आगे पीछे की बातें हो रही हैं. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि 9 फरवरी 2017 से 14 फरवरी 2017 के बीच 8 फर्जी लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग जारी हुए. क्या यह बात सही है? क्या यह बात सही नहीं है कि हर साल लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग को रिन्यू किया जाता है और यह चेयरमैन के स्तर से होता है, जिसे शाखा प्रमुख जारी करता है. 7 साल तक रिन्यू होता रहा मगर किसी की नज़र न पड़ी. ये बात पक्की है कि इतनी बड़ी राशि का लेटर ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग किसी चेयरमैन या इग्ज़ेक्यूटिव डायरेक्टर के ही स्तर पर होता है और इसे ब्रांच हेड ही जारी करता है. तो क्या इस मामले में कभी किसी चेयरमैन की जवाबदेही तय होगी. बैंकों का हर महीने ऑडिट होता है. तिमाही पर ऑडिट होता है और साल बीतने पर होता है. तब भी नहीं पकड़ आया.

क्या रणदीप सुरजेवाला की बात सही है कि 29 जनवरी 2018 की एफआईआर में बैंक ने कहा है कि नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया जाए ताकि वे देश छोड़ कर नहीं भागे. क्या लुकआउट नोटिस जारी हो चुकी है? रणदीप सुरजेवाला अपनी प्रेस कांफ्रेस में गीताजंली जेम्स लिमिटेड का भी ज़िक्र करते हैं जिसके बारे में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद अपनी प्रेस कांफ्रेस में कहते हैं कि गीतांजली जेम्स लिमिटेड के मेहुल चौकसी के साथ कांग्रेसी नेताओं की अंतरंग तस्वीरे हैं. मगर वे जारी नहीं करेंगे, क्योंकि ये उनका लेवल नहीं है. हम कानून मंत्री के बयान का यह हिस्सा सुनेंगे, लेकिन अभी रणदीप सुरजेवाला की प्रेस कांफ्रेंस के सवाल देख लेते हैं. रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिग के आधार पर जो पैसा लिया जाता है, उसका भुगतान 90 दिनों के भीतर कर देना होता है. बैंक को इसका जवाब देना चाहिए कि 90 दिनों के अंदर भुगतान नहीं हुआ तो जिस बैंक से नीरव मौदी और चौकसी ने उधार लिए, उस बैंक ने किस स्तर के अधिकारियों को सूचित किया. क्या इसकी सूचना बैंक के चीफ को पहुंचती है या उसी ब्रांच में पहुंचती है. ये मेरा सवाल है? अगर रणदीप सुरजेवाला का सवाल सही है तो फिर दूसरे बैंको ने हल्ला क्यों नहीं किया, क्या इस खेल में दूसरे बैंक के लोग भी शामिल हैं?

पहला सवाल
फर्जी लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग के आधार पर नीरव मोदी और मेहुल चौकसी इस देश के बैंकिंग सिस्टम के साथ कैसे खेल रहे थे ? इस देश के सत्तर साल के सबसे बड़े बैंक के लूट के लिए जो मोदी सरकार के नाक के नीचे हुआ इसके लिए कौन जिम्मेदार है ?

दूसरा सवाल
प्रधानमंत्री जी को इसकी जानकारी 2016 को दे दी गई थी. प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसका संज्ञान लिया, इसके बावजूद भी है प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर फाइनेंस मिनिस्ट्री से लेकर फाइनेंसियल इंटैलिजेंस यूनिट से लेकर सभी ऑथरिटीज और मोदी सरकार सोई पड़ी थी और क्यों?

तीसरा सवाल 
29 जनवरी 2018 को पंजान नेशनल बैंक के ज्वाईंट जेएम ने पत्र लिखकर कहा कि देश छोड़कर भाग जाने वाले है इसके लिए कार्यवाई कीजिए, इसका बावजूद नीरव मोदी जी देश का पैसा लूटकर देश छोड़कर क्यों भाग गए, इसके लिए कौन जिम्मेदार है ?

इसके बाद आए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद. उन्होंने एतराज़ जताया कि नीरव मोदी के नाम में चूंकि मोदी है इसलिए 'छोटा मोदी' कहकर प्रधानमंत्री मोदी से मिलान करने की राजनीति डिमिनिंग और डेरोगेटरी है. दूसरी आपत्ति थी कि फोटो में कोई भी हो सकता है, फोटो को दिखाकर संबंध कायम करना ठीक नहीं है. रविशंकर प्रसाद की ये बात ठीक है कि फोटो में कोई मौजूद है उसे लेकर आप तुरंत किसी नतीजे पर न पहुंचे न ही गंभीर आरोप लगाएं. पर क्या रविशंकर प्रसाद की पार्टी ने कभी ऐसा नहीं किया होगा, किसी फोटो को लेकर निष्कर्ष नहीं निकाले या आरोप नहीं लगाया? 

उम्मीद है कि रविशंकर प्रसाद गीतांजली लिमिटेड के चौकसी जी के साथ कांग्रेसी नेताओं की तस्वीरों को जारी कर देना चाहिए वरना यह संकेत जा सकता है कि वे एक तरह से चुप रहने को कह रहे हैं कि ज़्यादा उजागर मत कीजिए वरना हम ये दिखा देंगे. यह अच्छा नहीं होगा. रविशंकर प्रसाद ने दो बार किसी मेहुल चौकसी जी का नाम लिया. उन्हें नाम ठीक से याद नहीं आ रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को मेहुल भाई का नाम ठीक से याद है. यू ट्यूब पर 5 नवंबर 2015 का एक वीडियो मिला. उस रोज़ सोने का सिक्का जारी हुआ था. समारोह में हीरे जवाहारात के कारोबीर थे, तबके गवर्नर रघुराम राजन भी थे. पहले आप रविशंकर प्रसाद को सुनिए कि वो मेहुल चौकसी का नाम कैसे लेते हैं, और फिर प्रधानमंत्री को सुनिये कि वे कैसे लेते हैं. राम का नाम लीजिए कि दोनों अलग अलग मेहुल की बात कर रहे हैं, न कि उस मेहुल चौकसी की, जिन्होंने नीरव मोदी के साथ मिलकर कथित रूप से पंजाब नेशनल बैंक के साथ साथ कई बैंकों को चपत लगा दी है. राम का नाम लीजिएगा.

मेहुल भाई यहां बैठे हैं, मेहुल भाई डावोस में भले नहीं हैं मगर सरकारी कार्यक्रम में तो हैं. डावोस में नीरव मोदी की तस्वीर है, जिनके बारे में रविशंकर प्रसाद का कहना है कि सीआईआई लेकर गई. वैसे भी जब प्रधानमंत्री को यह पता है कि कितना भी बड़ा जौहरी क्यों न हो, सोना खरीदने पर लोग अपने गांव के सुनार से चेक कराते हैं तो क्या डावोस में फोटो खींचाने के पहले इसी तरह की चेक प्रधानमंत्री को नहीं करवानी चाहिए थी. यह भी एक तथ्य है कि फोटो खींचा लेने से नीरव मोदी को छूट नहीं मिली. 29 जनवरी और 5 फरवरी को उनके खिलाफ एफआईआर हुई. अब ये अलग बात है कि एफआईआर होने के बाद भी वे 15 दिनों से विदेशों में अपना शो रूम खोलने में व्यस्त हैं.

नीरव का मतलब होता है सन्नाटा. इतनी खामोशी से 11,300 करोड़ का घोटाला हो गया किसी को पता ही नहीं चला. कांग्रेस ने कहा कि एफआईआर में कहा गया है कि 9 फरवरी 2017 से 14 फरवरी 2017 के बीच आठ फर्जी लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग जारी की गई. क्या रविशंकर प्रसाद ने इसका जवाब दिया? 

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अगर वे विदेश में है तो विदेश में भी कार्रवाई हुई है. एफआईआर यहां हुई है तो वहां क्या कार्रावई हो रही है. क्या एफआईआर के बाद शो रूम का उदघाटन भी कार्रवाई है? उन्हें बताना चाहिए था कि क्या नीरव मोदी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी हुआ है? पंजाब नेशनल बैंक का शेयर 11 फीसदी गिर चुका है. इसके निवेशकों को 3000 करोड़ का नुकसान हो चुका है. यह सब वापस तो नहीं आएगा मगर बैंकिंग सेक्टर और हीरा व्यापार के इस कारनामे को आप तस्वीरों पर मत जाइये. किसकी तस्वीर किसके साथ है. कौन किसका किरायेदार है, ये सब हल्के सवाल हैं, सवाल एक ही है कि 11,300 करोड़ का घोटाला फ्रॉड कैसे हो गया? बैंकिंग सेक्टर पर नज़र रखिए, जिसकी हालत पहले से ख़राब है. पंजाब नेशनल बैंक के घोटाले से संबंधित दो ख़बरों का ज़िक्र करना चाहता हूं. जो मध्य प्रदेश के अखबार नई दुनिया में छपी है.

19 जनवरी 2018 की ख़बर है कि भोपाल के कोयला व्यापारी के यहां सीबीआई ने छापे मारे. जिन पर पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों से मिलकर 80 करोड़ का घोटाला किया है. 2011 से 2016 के बीच घोटाला हुआ है. 30 मार्च 2016 की ख़बर है कि पंजाब नेशनल बैंक ने इंदौर के 27 व्यापारियों को विलफुल डिफाल्टर घोषित किया है, जिन पर 217 करोड़ का लोन था. क्या आप जानते हैं कि भारतीय स्टेट बैंक को तीसरी तिमाही में 2416 करोड़ का घाटा हुआ. 17 साल में पहली बार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को इतना अधिक घाटा हुआ है. पिछले साल इसी तिमाही में बैंक को 1820 करोड़ का लाभ हुआ था, इस साल की तीसरी तिमाही में 2416 करोड़ का घाटा हुआ.

टिप्पणियां
क्या आपको पता है कि भारतीय स्टेट बैंक ने रिज़र्व बैंक को 31 मार्च 2017 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष का हिसाब सौंपा तो उसमें कितनी गड़बड़ी थी. एक साल बाद एसबीआई ने रिजर्व बैंक को बताया कि मुनाफा 36 फीसदी ज़्यादा बता दिया और एनपीए का हिस्सा 21 फीसदी कम बता दिया. क्या इतने बड़े बैंक में कोई मुनाफा 100 की जगह 136 रुपये यूं ही बता सकता है. क्या पानी लगाकर उंगलियों से नोट गिने जा रहे थे. क्या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में इतनी बड़ी गलती के कारण किसी बड़े अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हुई ?

नीरव मोदी की करतूत का सवाल का जवाब इधर-उधर की बातों से कम, करतूत की जांच से दिया जाना चाहिए न कि कभी एनपीए तो कभी ये घोटाला कभी वो घोटाले की बात हो. 2 जी घोटाले की इतनी बात हुई, मगर सारे आरोपी बरी हो गए. याद रखना चाहिए.


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