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उधार के सर्वरों से कैसे हो 'डिजिटल इंडिया' की क्रांति?

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उधार के सर्वरों से कैसे हो 'डिजिटल इंडिया' की क्रांति?
‘डिजिटल इंडिया’’- कंप्यूटर, मोबाइल, सॉफ्टवेयर तथा इंटरनेट के बहुआयामी प्रयोग से समाज, शासन तथा अर्थव्यवस्था में विकास के अभियान का नाम है. देश में कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क एवं इंटरनेट से वंचित वर्ग को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना मुश्किल है परन्तु डिजिटल इंडिया को स्वदेशी बनाकर इसे सफल बनाया जा सकता है.

‘इंडियन डाटा भारतीय सर्वर्स’ अभियान से बढ़ाएं रोजगार
 भारत में व्यापार कर रही इंटरनेट कंपनियों ने अधिकांश सर्वर यूरोप और अमेरिका में लगा रखे हैं. मेक इन इंडिया के तहत यदि  इंडियन डाटा भारत के सर्वरों में रखने का कानून बन जाए तो राष्ट्रीय सुरक्षा बेहतर तरीके से सुनिश्चित हो सकेगी. अमेरिका में ट्रंप की नई वीजा नीति के फलस्वरूप अनेक आईटी प्रोफेशनल्स भारत लौट रहे हैं. सर्वर भारत में लगने के नियम का पालन होने से देशी उद्योगों के विकास के साथ प्रति सर्वर औसतन हज़ार लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा.

सरकारी अधिकारियों द्वारा विदेशी ई-मेल का गैर-कानूनी इस्तेमाल बंद हो
संसद द्वारा पारित पब्लिक रिकॉर्डस् कानून के अनुसार अधिकारी लोगों द्वारा सरकारी काम के लिए जीमेल और याहू जैसी विदेशी ई-मेल सेवा का इस्तेमाल करने पर 3 साल की जेल हो सकती है. दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा अगस्त 2013 में पारित आदेश के बावजूद केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारियों को स्वदेशी ‘एनआईसी’ की ईमेल सेवा नहीं मिल पाई जिससे अधिकांश सरकारी कर्मचारी निजी ईमेल का गैर-कानूनी इस्तेमाल कर रहे हैं. सभी अधिकारियों को एनआईसी ई-मेल की सुविधा सुनिश्चित करने के बाद ही देशभर में डिजिटल इंडिया का स्वप्न साकार हो सकता है.

विदेशी इंटरनेट और आईटी कंपनियों से भारत में हो टैक्स की वसूली
भारत में डिजिटल इंडिया के नाम पर एप्पल, फेसबुक, गूगल, ट्विटर, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी विदेशी कंपनियां बड़ा कारोबार कर रही हैं. ऑक्सफैम की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार 50 बड़ी कंपनियों द्वारा भारत जैसे विकासशील देशों में टैक्स चोरी करके 100 लाख करोड़ से अधिक की रकम आयरलैंड जैसे टैक्स हेवन देशों में जमा करने से असमानता और मंदी आ रही है. डिजिटल इंडिया से उपजे बड़े व्यापार को टैक्स कानून के दायरे में लाने की बड़ी जिम्मेदारी सरकार और संसद जल्द पूरा क्यों नहीं कर रहीं?    

डाटा सुरक्षा के लिए बने कानूनों का सख्ती से हो पालन
हैकर्स ने गृह-मंत्रालय तथा एनएसजी की वेबसाइट्स को हैक करके भारत सरकार को गंभीर चुनौती दी. आधार का डाटा कितना सुरक्षित है इसका फैसला आने वाले समय में होगा. परन्तु कुछ महीने पहले 32 लाख से अधिक बैंक डेबिट कार्डों का डाटा चोरी हो गया था पर अभी तक अपराधी दंडित नहीं हुए. क्या अब भारत में भी यूरोपियन यूनियन की तर्ज पर नया डाटा सुरक्षा कानून बनाने का समय नहीं आ गया?

डिजिटल इंडिया में प्राइवेसी तथा ई-सिग्नेचर की मान्यता हेतु बनें कानून
डिजिटल इंडिया अभियान के साथ जनता की प्राइवेसी उल्लंघन पर कठोर दंड हेतु सरकार संसद के माध्यम से जल्द से जल्द सख्त कानून क्यों नहीं लाती? देश में अब ई-सिग्नेचर्स को मान्यता दिए जाने का नियम बनना चाहिए जिससे ई-मेल तथा डिजिटल माध्यम से किए गए एग्रीमेंटों को कानूनी मान्यता मिल सके.    

अदालतों में भी हो डिजिटल इंडिया की क्रांति
प्रधानमंत्री मोदी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की 150वीं जयंती पर तकनीकी के इस्तेमाल से अदालतों में न्यायिक क्रांति पर जोर दिया था. सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देश के अनुसार कुछ निचली अदालतों में सैंपल तौर पर वीडियो कैमरे लगाए जाने हैं, परंतु उनमे ऑडियो रिकॉर्डिंग नहीं होने से लोगों को क्या लाभ मिलेगा? संसद की तर्ज पर अदालतों की कार्यवाही का सीधा प्रसारण न हो परंतु अदालतों की वीडियो रिकॉर्डिंग यदि शुरू हो जाए तो लोगों को न्याय दिखेगा भी. हरियाणा में व्हाट्सऐप द्वारा सम्मन जारी करने का नया प्रयोग हुआ है. सीपीसी कानून के अनुसार अदालतों द्वारा यदि ई-मेल से नोटिस, सम्मन और वारंट तामील किया जाए तो मुकदमों में अनावश्यक विलंब रुकने से जनता को लाभ मिलेगा. डिजिटल इंडिया से जनहित सुरक्षित होने के साथ लोगों को लाभ भी मिलने लगेगा तो इसे मनाने के लिए सरकारी पर्व की जरूरत नहीं होगी!


विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ हैं...

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.



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