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ट्रेनों की लेटलतीफ़ी कब तक आम बात रहेगी?

जयनगर से चलने वाली ट्रेन नंबर 12561 स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस को 1 मई को 12,30 बजे दिल्ली पहुंच जाना था, मगर पहुंची 2 मई की सुबह 10 बजे.

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ट्रेनों की लेटलतीफ़ी कब तक आम बात रहेगी?
आपको आज एक ट्रेन की कहानी बताता हूं. नाम तो इसका स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस है, लेकिन इसकी हालत किसी गुलाम जैसी है. स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस बिहार के जयनगर से चलकर दिल्ली के आनंद विहार स्टेशन पर आती है. कुल 22 स्टेशनों से होते हुए यह ट्रेन अपना सफर पूरा करती है. आए दिन यात्री मैसेज करते रहते हैं कि इस ट्रेन का कुछ कीजिए. हम समझ नहीं पाते थे कि लोग क्यों इस ट्रेन को लेकर परेशान हैं. आज जब रेल मंत्रालय की वेबसाइट चेक की तो डर गया.

जयनगर से चलने वाली ट्रेन नंबर 12561 स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस को 1 मई को 12,30 बजे दिल्ली पहुंच जाना था, मगर पहुंची 2 मई की सुबह 10 बजे. अगर यह ट्रेन तय समय से चलती तो यात्री को 25 घंटे तक ट्रेन में रहना पड़ता, लेकिन वह 34 घंटे तक ट्रेन में बिताता है. अगर वह ट्रेन के चलने के समय स्टेशन पहुंचा होगा तो 46 घंटे लग गए होंगे सफर को पूरा करने में. जयनगर से ही 1 मई वाली ट्रेन 2 मई को दोपहर बारह बजे खुलती है. यानी 22 घंटे 5 मिनट की देरी से. स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर चलने वाली इस ट्रेन का यह हाल है, जो सोचिए बाकी ट्रेन की क्या हालत होगी.

वेबसाइट से पता चलता है कि स्वतंत्रता सेनानी सुपरफास्ट ट्रेन है. भारत में ही सुपरफास्ट ट्रेन 20-22 घंटे की देरी से चलती है. कब चलती है, कब पहुंचती है, स्वतंत्र भारत में किसी को मालूम नहीं है. देर से चलना इस ट्रेन की आदत हो गई है. रेल मंत्री के एक बयान की खूब चर्चा है कि उन्होंने राहुल गांधी से कहा है कि वे कानून और सीए की पढ़ाई के टॉपर रहे हैं. राहुल गांधी तो डाइनास्ट हैं. मतलब वंशवादी हैं. वैसे पीयूष गोयल के पिता भी केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे हैं.

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इस तरह के बयानों पर खूब चर्चा होती है मगर कितना अच्छा होता कि स्वतंत्रता सेनानी ट्रेन को लेकर राहुल गांधी ट्वीट करते और पीयूष गोयल इस ट्रेन के समय में हमेशा के लिए सुधार कर देते. कम से कम इन इलाकों के सांसद ही रेल मंत्री से कह देते कि आप स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस का कुछ कर दीजिए. भारत को अगर आप नेता की जगह सिस्टम की नज़र से देखेंगे तो आपको वही दिखेगा जो दिखता आया है या फिर कुछ दिखेगा ही नहीं. क्या इस ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के समय की कोई कीमत ही नहीं है.

अगर यह ट्रेन हफ्ते भर के भीतर समय से नहीं चलती है तो मैं हर दिन प्राइम टाइम की शुरुआत इस ट्रेन के समय से करूंगा. आप भी जब भी किसी मीडिया कॉन्क्लेव में रेल मंत्री से मिलें तो उनसे निवेदन करें कि स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस समय से कब चलेगी. उन पर भरोसा रखिए वे समय से चलवा देंगे. मुझे भरोसा है. उन पर भी है और खुद भी पर है कि नहीं चलवाएंगे तो हर दिन इस ट्रेन का टाइम टेबल बताऊंगा. वैसे तो मुज़फ्फरपुर से आनंद विहार के बीच चलने वाली सप्तक्रांति भी 4 से 7 घंटे लेट चलती है.


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