NDTV Khabar

मैंने देख ली 'बाहुबली 2' : 10 खास बातें, जो वर्ष 2017 की सबसे बड़ी फिल्म में मैंने पाईं...

22 Shares
ईमेल करें
टिप्पणियां
मैंने देख ली 'बाहुबली 2' : 10 खास बातें, जो वर्ष 2017 की सबसे बड़ी फिल्म में मैंने पाईं...
आप निश्चित रूप से मेरे प्रति ईर्ष्यालु हो उठेंगे, जब आप जानेंगे कि मैं सिनेमाघरों में आधिकारिक रूप से रिलीज़ किए जाने से पहले ही 'बाहुबली : द कन्क्लूज़न' देख पाने में सफल रही... मैं खुद भी इसे लेकर बेहद उत्साहित हूं, और अब मैं कहानी के बारे में कोई खास जानकारी दिए बिना 10 प्वाइंट में बताऊंगी कि इस फिल्म में मैंने क्या-क्या पाया... आज, यानी शुक्रवार को 8,000 स्क्रीन पर एक साथ रिलीज़ हो रही 'बाहुबली : द कन्क्लूज़न' दरअसल बेहद भव्य स्तर पर बनाई गई निर्देशक एसएस राजामौली की फिल्म 'बाहुबली : द बिगिनिंग' का वह दूसरा भाग है, जिसका देश और दुनियाभर में बेहद बेसब्री से इंतज़ार किया जाता रहा... 'बाहुबली : द बिगिनिंग', या 'बाहुबली 1' ने ब्लॉकबस्टर फिल्म कहलाने के सभी रिकॉर्ड तोड़ डाले थे, और उसे सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था, सो दूसरे भाग से उम्मीदें तो हद से ज़्यादा हैं ही, इस रहस्य से पर्दा उठने का भी इंतज़ार सारा देश कर रहा है कि क्यों माहिष्मती के सेनापति कटप्पा (यह भूमिका सत्यराज ने निभाई है) ने नायक बाहुबली (अभिनेता प्रभास) को मार डाला था... अब पढ़िए, राजामौली और उनकी टीम ने पांच साल लगाकर जो फिल्म बनाई है, उसमें मैंने क्या-क्या पाया...

1. यह कहने के कतई ज़रूरत नहीं कि देखने में फिल्म बेहद शानदार है, और अधिकतर हिस्सा इतना भव्य और दर्शनीय है कि आपको एक फ्रेम के भी छूट जाने का अफसोस होगा...

2. 'बाहुबली : द कन्क्लूज़न' मुझे 'बाहुबली : द बिगिनिंग' से बेहतर लगी, और इस दूसरे भाग में मध्यांतर (इंटरवल) से पहले की फिल्म बेहतर है, क्योंकि उसमें हास्य भी है, और वह भावनात्मक स्तर पर भी बेहतर तरीके से बांधे रखती है...

दूसरे भाग में कटप्पा का चरित्र ऐसे रूप में ढला हुआ नज़र आता है, जो पहले भाग से काफी अलग है, और इस कारण वह चरित्र भी अमरेंद्र बाहुबली के रूप में प्रभास के साथ-साथ हास्य उत्पन्न करता है...
 
3. भले ही संघर्ष बाहुबली और भल्लालदेव (अभिनेता राणा डग्गूबती) के बीच ही होना है, परंतु फिल्म में महिलाओं के बेहद मजबूत चरित्र हावी रहे हैं, जिन्हें सुनकर दिल में उनके लिए सम्मान पैदा होना स्वाभाविक-सा हो गया है...

'शिवगामी' के रूप में रम्या कृष्ण बेहद प्रभावी रही हैं... राजसी, सुंदर तथा भव्य - बहुत कुछ उन्होंने सिर्फ अपनी आंखों से ही कह डाला है...

'देवसेना' के रूप में अनुष्का शेट्टी की भूमिका भी काफी दमदार है... वह खूबसूरत और गरिमापूर्ण दिखी हैं, और पहले भाग में निभाई ज़ंजीरों से जकड़ी बूढ़ी मां की भूमिका से कतई उलट रही हैं... 'अवंतिका' के रूप में तमन्ना लगभग गायब रही हैं...

4. पहले भाग में 'महेंद्र बाहुबली' का किरदार अदा कर रहे प्रभास और 'अवंतिका' की भूमिका निभा रहीं तमन्ना (निडर और साहसी महिला योद्धा, जो पुरुष के स्पर्श मात्र से प्रेमातुर हो उठती है) के बीच फिल्माए गए प्रेमदृश्य को लेकर हुई आलोचना के बाद एसएस राजामौली ने 'बाहुबली : द कन्क्लूज़न' में विशेष ध्यान रखा है कि महिला चरित्रों को बुद्धिमान, स्पष्टवक्ता और निर्णय लेने में सक्षम दर्शाया जाए... इस भाग में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों तथा यौन उत्पीड़न जैसे विषयों की ओर इंगित किया जाना यह भी दिखाता है कि निर्देशक लिंगभेद के प्रति काफी संवेदनशील हैं...

5. 'कटप्पा' के रूप में सत्यराज तथा 'बिज्जलदेव' के रूप में नासिर बेहद प्रभावशाली रहे हैं, और जिस स्तर के अभिनेताओं के रूप में हम उन्हें जानते हैं, यह कतई आश्चर्यचकित नहीं करता... 'बाहुबली' की भूमिका में प्रभास तथा 'भल्लालदेव' की भूमिका में राणा डग्गूबती भी प्रभावी रहे हैं, हालांकि मैं समझती हूं कि निर्देशक एसएस राजामौली को इस बात की कुछ ज़्यादा गहराई से जानकारी देनी चाहिए थी, कि क्यों एक जैसे लालन-पालन के बाद भी वे दोनों एक दूसरे से अलग क्यों और कैसे हो गए...

ऐसा संभवतः इसलिए हुआ, क्योंकि एनिमेशन तथा कुछ अन्य ज़रियों से निर्देशक ने बेहद समझदारी से इन चरित्रों के बारे में गहराई से कुछ-कुछ बताया है, जो इनके प्रति आपकी जिज्ञासा और उत्सुकता को और बढ़ा देता है...

भले ही राजामौली और उनकी टीम ने लगातार पांच साल तक अथक परिश्रम कर इस भव्य स्तर के प्रोजेक्ट को पूरा कर काम के प्रति अपनी लगन को भी साबित किया है, और उसमें अत्याधुनिक तकनीक, दिल को छू लेने वाले, और कहीं-कहीं सांसों को थाम देने वाले दृश्यों और रंगों का समावेश बेहद प्रभावी है, लेकिन फिर भी मुझे यह भी साथ में कहना पड़ेगा कि यह नई राह बनाने वाला नए युग का 'इंटेलिजेंट' सिनेमा नहीं है...

7. आप इस बात को लेकर इस फिल्म पर गर्व महसूस कर सकते हैं कि बड़े-बड़े साम्राज्यों, बेहद साहसी तथा शक्तिशाली सम्राटों, अति सुंदर राजकुमारियों के अतिरिक्त विश्वासघात तथा महलों में चलने वाले षडयंत्रों को लेकर आपकी कल्पनाओं को बेहतरीन तरीके से इस फिल्म ने अमर कर दिया है, लेकिन इसमें नए आयाम नहीं खोजे या दर्शाए गए हैं... आप इस बात से गौरवान्वित हो सकते हैं कि इसमें एक भारतीय कहानी को प्रस्तुत करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन अंततः यह बेहद पुरानी कहानी ही है, जिसे बेहद भव्य तरीके से बेहद ऊंचे स्तर पर बयान किया गया है...

8. फिर भी ऐसा बहुत कुछ है, जो पहली बार किया गया, और काफी प्रभावी रहा - ट्रांसमीडिया का अभूतपूर्व प्रयोग किया गया, लाइसेंस व फ्रैंचाइज़ी रिलेशनशिप्स, तथा मर्चेंडाइज़ का स्तर अभूतपूर्व रहा, जिसमें पुस्तकें तथा एनिमेशन सीरीज़ भी शामिल हैं - कुल मिलाकर 'बाहुबली' को ऐसी फिल्म बना डालते हैं कि थिएटर से बाहर निकलने के बाद भी 'बाहुबली' मन में बसे रहते हैं...

9. युद्ध के दृश्यों में नवोन्मेषी या इनोवेटिव तकनीक का समझदारी से इस्तेमाल किया गया है... दंड संहिता, शपथग्रहण, पद की शपथ लेना और गार्ड ऑफ ऑनर जैसी प्रक्रियाओं का ज़िक्र रुचिकर साबित होता है... प्रोमो में सुनाई दे रहा संगीत ज़ुबान पर चढ़ जाने वाला है, और कई दिन से गुनगुनाया जा रहा है...



10. कुल मिलाकर यही कहूंगी कि टिकट बुक कराने के लिए की गई मेहनत और बड़े पर्दे पर जाकर फिल्म देखने में बिताया समय पूरी तरह वसूल हो जाएगा...

उमा सुधीर NDTV की रेज़िडेंट एडिटर हैं...

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement