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क्या बीजेपी वाकई ढलान पर है?

अगर 2014 से तुलना की जाए तो ये सारे सर्वे बीजेपी के लिए अच्छा इशारा नहीं देते. हालांकि बीजेपी के लिए अब भी राहत की बात यह है कि कांग्रेस कड़ी चुनौती देती नहीं दिख रही.

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क्या बीजेपी वाकई ढलान पर है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

लोकसभा चुनाव अगर समय पर होते हैं तो सिर्फ आठ महीने ही बचे हैं. जहां जाइए अब लोग पूछते हुए मिल जाएंगे कि 2019 में क्या होगा? पान की दुकानों पर, चाय के ठेलों पर, भीड़ में, बाज़ार में, राजनीतिक चर्चाओं का दौर है. क्या मोदी वापसी करेंगे? या राहुल की किस्मत बुलंद होगी? या फिर मायावती या ममता बनर्जी में से कोई पीएम बनेगा? ऐसे सवालों के जवाब तो ज़ाहिर है नतीजे से ही मिलेगें. लेकिन अलग-अलग चैनलों के ओपीनियन पोल 2019 की भावी तस्वीर का इशारा देने लगे हैं. इन चैनलों के सर्वे में आम राय है कि अगर आज चुनाव हों तो एनडीए के अगुवा नरेंद्र मोदी वापसी करेंगे. लेकिन बीजेपी को भारी नुकसान की संभावना जताई जा रही है. उधर, कांग्रेस की सीटें बढ़ने की बात तो है मगर वह इस हालत में नहीं पहुंचती दिखती जिससे बीजेपी को रोक सके.

इंडिया टुडे के मूड ऑफ़ नेशन सर्वे के मुताबिक़ पिछली बार की तरह बीजेपी को इस बार अकेले बहुमत नहीं मिलने जा रहा. 282 सीटों के मुक़ाबले बीजेपी को 245 सीटों से संतोष करना पड़ सकता है. वहीं कांग्रेस को 83 सीटें आ सकती हैं. सर्वे में 281 सीटों के साथ एनडीए को स्पष्ट बहुमत है, जबकि 122 सीटों के साथ यूपीए काफ़ी पीछे है. अन्य के खाते में 140 सीटें आने की संभावना है. इस सर्वे के मुताबिक एनडीए को 36%, यूपीए को 31% और अन्य को 33% वोट मिल सकते हैं.

वहीं टाइम्स नाऊ के सर्वे के मुताबिक बीजेपी 227 सीटें और कांग्रेस 78 सीटें जीत सकती है. जबकि मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर कराए गए एबीपी सीएसडीएस के सर्वे में कहा गया है कि एनडीए 274 और यूपीए 164 सीटें जीत सकता है.

तो अलग-अलग समय पर कराए गए ये तीनों ही सर्वे बीजेपी की ज़मीनी ताकत में कमी का इशारा कर रहे हैं. लेकिन इंडिया टुडे के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अब भी बरकरार है और वे भारत के अब तक के सबसे बेहतरीन प्रधानमंत्री माने जा रहे हैं. वैसे इसी साल जनवरी की तुलना में उनकी लोकप्रियता में थोड़ी कमी आई है. 49% लोग मोदी के पक्ष में है जबकि राहुल गांधी के पक्ष में सिर्फ 27%. हालांकि राहुल के लिए राहत की बात यह है कि विपक्ष के पीएम उम्मीदवारों में 46% मतों के साथ वे सबसे लोकप्रिय बने हुए हैं. 8% लोग ममता बनर्जी और छह-छह फीसदी लोग पी चिदंबरम और प्रियंका गांधी के पक्ष में हैं.

अगर मुद्दों की बात करें तो आम आदमी के लिए बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार अब भी बड़े मुद्दे बने हुए हैं. इंडिया टुडे के मुताबिक जनवरी की तुलना में ये तीनों मुद्दे अब लोगों को ज्यादा चिंतित कर रहे हैं. बेरोजगारी के मुद्दे पर पिछले सर्वे की तुलना में लोगों की चिंता पांच फीसदी बढ़ गई है. नोटबंदी, नारी सुरक्षा और किसानों के मुद्दे लोगों के लिए ज्यादा अहम नहीं दिख रहे. वहीं टाइम्स नाऊ के मुताबिक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय संबंध और इंफ्रास्ट्रक्चर पर लोगों ने एनडीए को पांच में से साढ़े तीन स्टार दिए.

एक ओपनीयन पोल बीजेपी के लिए इस साल के अंत में हो रहे विधानसभा चुनावों में भी खतरे की घंटी बजा रहा है. एबीपी सी वोटर के मुताबिक मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ तीनों ही राज्यों में बीजेपी हार जाएगी. हालांकि पोल कहता है कि लोग राज्य में तो परिवर्तन चाहते हैं लेकिन केंद्र में वे बीजेपी को बरकरार रखना चाहते हैं. प्रधानमंत्री के लिए इन चुनावी राज्यों में नरेंद्र मोदी सबसे पहली पसंद बने हुए हैं. सर्वे के मुताबिक मध्य प्रदेश में कांग्रेस को 230 में से 117 और बीजेपी को 106, राजस्थान में 200 में से 130 और बीजेपी 57 तथा छत्तीसगढ़ में 90 में से 54 और बीजेपी को 33 सीटें मिल सकती हैं.

जाहिर है अगर 2014 से तुलना की जाए तो ये सारे सर्वे बीजेपी के लिए अच्छा इशारा नहीं देते. हालांकि बीजेपी के लिए अब भी राहत की बात यह है कि कांग्रेस कड़ी चुनौती देती नहीं दिख रही. बिखरा हुआ विपक्ष भी बीजेपी के लिए अच्छी खबर है. लेकिन चुनाव के नजदीक आने के साथ ही यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, बंगाल जैसे राज्यों में विपक्षी एकता बीजेपी के लिए गंभीर चुनौती पेश कर सकती है. तो क्या बीजेपी वाकई ढलान पर है? क्या पीएम मोदी का करिश्मा बीजेपी की वापसी करवा सकता है?

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(अखिलेश शर्मा NDTV इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति एनडीटीवी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार एनडीटीवी के नहीं हैं, तथा एनडीटीवी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.


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