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मोदी सरकार में नौकरियां घट रही हैं या बढ़ रही हैं या आप उल्लू बन रहे हैं

यह संख्या पिछले छह महीने में सबसे कम है. जनवरी 2018 की तुलना में फरवरी 2018 में 22 प्रतिशत की गिरावट आई है.

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मोदी सरकार में नौकरियां घट रही हैं या बढ़ रही हैं या आप उल्लू बन रहे हैं

ईपीएफओ कर्मचारियों की भविष्य निधि का प्रहरी है.

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन EPFO में जुड़ने वाले नए नामों के आधार पर आंकलन निकाला जा रहा है कि कितनी नौकरियां बढ़ी हैं. इस विधि को कई अर्थशास्त्रियों ने चुनौती दी है. फिर भी आपने इसके बारे में कई अख़बारों में ख़बरें देखी होंगी. फरवरी 2018 में EPFO में 4 लाख 72 हज़ार नए कर्मचारी ही जुड़े हैं. यह संख्या पिछले छह महीने में सबसे कम है. जनवरी 2018 की तुलना में फरवरी 2018 में 22 प्रतिशत की गिरावट आई है. सितंबर 2017 से फरवरी 2018 के बीच EPFO में 31 लाख 10 हज़ार कर्मचारियों ने पंजीकरण कराया है. क्या ये सभी नए कर्मचारी थे या सरकारी की योजना का लाभ उठाने के लिए पुराने कर्मचारियों का पंजीकरण हुआ है? इस सवाल का जवाब ज़रूरी है.

EPFO के इस आंकड़े के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और ग़ैर सरकारी क्षेत्र के संस्थानों में नौकरी पाने वालों को शामिल किया गया है. इस हिसाब से पूरे देश में छह महीने में 31 लाख लोगों को रोज़गार मिलने का आंकड़ा कुछ भी नहीं है. EPFO डेटा के लिए उन कंपनियों या संस्थाओं को लिया जाता है जहां 20 से ज़्यादा लोग काम करते हैं. भारत में 99.35 प्रतिशत कंपनियां ऐसी हैं जहां 20 से कम लोग काम करते हैं. कोई भी डेटा जिसमें 99.35 फर्म शामिल न हों, बोगस ही होगा.

भारतीय रिज़र्व बैंक ने हाल ही में एक डेटा प्रकाशित किया है जिसे KLEMS डेटा कहते हैं. आप रिज़र्व बैंक की साइट पर जाकर देख सकते हैं. हमारे सहयोगी aunindyo chakravarty ने सिंपल समाचार में सरलता से बताया है. रिज़र्व बैंक के इस डेटा के अनुसार मोदी सरकार के चार साल के दौरान नौकरियां घटी हैं. -0.13% की दर से घटी हैं. इसका मतलब यह हुआ कि 100 लोग अगर रोज़गार की तलाश में निकले तो उन्हें कोई काम नहीं मिला, बल्कि जो लोग पहले से काम कर रहे थे उनमें से 13 लोगों की नौकरी चली गई.

2014-15 के बीच नौकरी बढ़ने की नहीं घटने की दर है. -0.2% की दर से नौकरियां घटी हैं. 2015-16 में -0.1% की दीर से नौकरियां घटी हैं. ऑनिंद्यो ने यह भी बताया है कि जब भी जीडीपी की दर बढ़ती है, नौकरियां घटने लगती हैं. यूपीके के दस साल के दौरान नौकरियां घटी तो नहीं मगर बढ़ने की दर बेहद मामूली थीं. आधा प्रतिशत की दर से नौकरियां बढ़ी हैं. इस लिहाज़ से 1980 से 1989 के दौरान जब जीडीपी 5.61% प्रतिशत थी तब उस दौरान नौकरियां बढ़ने की दर आबादी बढ़ने की दर से ज़्यादा थी. 80 के दशक में 1.7%प्रतिशत की रफ्तार से नौकरियां बढ़ रही थीं. मैं सिम्पल समाचार का लिंक दे रहा हूं, आप देख सकते हैं.

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VIDEO: घटती नौकरियों पर खास कार्यक्रम

पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं. मारे ख़ुशी के लोग चुप ही हो गए हैं. महाराष्ट्र के रत्नागिरी में पेट्रोल 83 रुपये 43 पैसे प्रति लीटर मिल रहा है. मुंबई में भी 82 रुपये 48 प्रतिशत प्रति लीटर मिल रहा है. विपक्ष चुप है क्योंकि उसे पता है कि उसकी नीतियां भी वही हैं. सत्ता में आने का मौका मिला तो बदलाव तो कर नहीं पाएंगे इसलिए सांकेतिक हाय हाय करने के बाद चुप हो जाता है. विपक्ष ने अभी तक आर्थिक नीतियों की जनरल और अस्पष्ट आलोचना की है. कोई विकल्प पेश नहीं किया है. विपक्ष राम भरोसे हैं. सत्ता पक्ष तो राम राम कर ही रहा है. 

 


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