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क्‍या पायलट की रिहाई पाकिस्तान पर दबाव का नतीजा?

विंग कमांडर अभिनंदन की बहादुरी और वापसी दोनों शानदार हो और युद्ध की बात करने वाले कम से कम समझदार हों, यही मैसेज है आज का.

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क्‍या पायलट की रिहाई पाकिस्तान पर दबाव का नतीजा?

विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान (फाइल फोटो)

आज दो बड़ी बातें हुई हैं. पाकिस्तान ने विंग कमांडर अभिनंदर को वापस भेजने का एलान किया तो शाम को भारत में तीनों सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने एफ-16 मार गिराए जाने के सबूत मीडिया के सामने रखे. दोनों से जुड़ी सूचनाएं और महत्व अलग ट्रीटमेंट की मांग करती हैं. हम पहले पायलट की बात करेंगे. उसके बाद भारत के दिखाए सबूत की. सोशल मीडिया और चैनलों पर बनाए माहौल के बीच क्या आप में शुक्रिया कहने का साहस बचा है कि पाकिस्तान ने विंग कमांडर अभिनंदन को वापस भेजने का एलान किया है. क्या आपमें भारत की तरफ से किए गए उन कूटनीतिक प्रयासों के लिए शुक्रिया कहने का साहस बचा है जिनके कारण विंग कमांडर अभिनंदन की वापसी हो रही है. अगर आप युद्ध नहीं चाहते तो आज आपको शुक्रिया कहना चाहिए. आज का दिन उन ख्वाहिशों को शुक्रिया कहने का है, जो चाहती हैं कि युद्ध न हो. इस डर के कारण आप खुद को इतना कमज़ोर और छोटा न बनाएं कि शुक्रिया कहने से रह जाएं. विंग कमांडर अभिनंदन की बहादुरी और वापसी दोनों शानदार हो और युद्ध की बात करने वाले कम से कम समझदार हों, यही मैसेज है आज का. प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने जब नेशनल एसेंबली में एलान किया तो सदन में तालियां गूंज उठीं.

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में तालियों की यह गूंज पाकिस्तान में युद्ध युद्ध करने वालों पर गुलाब जल का काम करेंगी जिसके चैनलों के एंकर और रिटायर सेना अधिकारी ग्राफिक्स के ज़रिए मिसाइल और तोप बनाकर गोले दाग रहे थे. गुलाब जल की ज़रूरत भारत में भी है. इमरान ख़ान लगातार संवाद की बात करते रहे. आज के एलान से उन्होंने यह साबित किया है कि वे बातचीत की बात को लेकर गंभीर हैं. प्रधानमंत्री ने कोई शर्त नहीं रखी है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा था कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान प्रधानमंत्री नरेंद मोदी से बात करने की कोशिश कर रहे हैं. भारत के लिए भी दो दिन चुनौती के रहे. विंग कमांडर अभिनंदन की वापसी के लिए भारत ने कूटनीतिक प्रयास तेज़ किए. क्या उन्हीं प्रयासों का नतीजा था कि वियतमान की राजधानी हनोई में अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत और पाकिस्तान से आकर्षक ख़बरें आ रही हैं.


ट्रंप ने जो कहा वो आकर्षक खबर शाम होने से पहले आ गई. कहीं ट्रंप ने इस झगड़े में सरपंच की भूमिका तो नहीं निभाई. जल्दी किसी निष्कर्ष पर न पहुंचे. ज़रूर दिखाई दे रहा है कि दबाव काम कर रहा है. यही राहत की बात है कि दबाव ने बातचीत के पक्ष में काम किया. 26 फरवरी के भारत की कार्रवाई के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय दबाव की बात हो रही थी मगर उसके बीच पाकिस्तान ने दिन दहाड़े भारतयीय वायु सीमा का उल्लंघन कर दिया. तब वो दबाव काम नहीं किया. मगर उसके बाद दबाव काम किया जब दोनों देश अपनी अपनी कार्रवाई कर चुके थे. वरना विंग कमांडर अभिनंदन का मामला संवेदनशील था. विंग कमांडर की वापसी की खबर से करोड़ों भारतीयो को राहत पहुंची है. उनकी चिन्ताएं शांत हुई हैं. भारत के प्रयास भी कम उल्लेखनीय नहीं रहे. भारत ने इस बार चीन, इरान, सऊदी का समर्थन अपने पक्ष में हासिल किया. उम्मीद है इस समर्थन के बाद संयुक्त राष्ट्र में चीन मसूद अज़हर के मामले में भारत का साथ देगा.

इशारे में कही गई बातों का महत्व होता है. प्रधानमंत्री ने यह बात वैज्ञानिकों के बीच कही, शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार के समारोह में. ग़ज़ब ही संयोग है. 26 फरवरी की सुबह ऑपरेशन बालाकोट के बाद प्रधानमंत्री गांधी शांति पुरस्कार समारोह में थे. 28 फरवरी को विंग कमांडर अभिनंदन की वापसी के एलान के बाद प्रधानमंत्री विज्ञान के सबसे बड़े पुरस्कार शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार समारोह में थे. भारतीय मीडिया को जो ऑफ दि रिकार्ड ब्रीफ दिया गया उसमें बताया गया कि हम पायलट को कॉन्स्युलर एक्सेस की बात नहीं कर रहे. हमें हमारा पायलट तुरंत वापस लौटाया जाए. पायलट के मामले में कोई सौदेबाज़ी नहीं होगी.

इस एक मामले में आज की कामयाबी बहुत बड़ी है. मगर कौन झुका और किसने झुका दिया करने वालों को एक बात समझनी चाहिए कि हालात सुधरे हैं. बीमारी नहीं. आतंकवाद का कैंसर आज खत्म नहीं हो गया है. निरंतर दबावों से. अगर 26 फरवरी को ऑपरेशन बालाकोट के बाद नया भारत बना था तो क्या 28 फरवरी को एलान के बाद पाकिस्तान में भी कोई नया पाकिस्तान बना है. हमें दोनों तरफ के इस नएपन में आगे का रास्ता खोजना चाहिए. भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव सिर्फ सीमा पर ही नहीं था. कूटनीति और धारणा के क्षेत्र में था. इस पर विचार होता रहेगा कि कूटनीति में किसने बाज़ी मारी और परसेप्शन यानी धारणा में किसने बाज़ी मारी.

तो क्या इमरान खान ने पहले एलान कर बाज़ी मार ली, जब ट्रंप ने एलान कर दिया था कि आकर्षक खबर आने वाली है तब इस देरी के क्या कारण रहे होंगे या फिर भारत की एलान के समय में कोई दिलचस्पी नहीं होगी.

क्या तनाव का मौजूदा दौर ख़त्म हो गया है? अभी इस मामले को खत्म नहीं मान लिया जाना चाहिए मगर आज जो हुआ है वो दोनों देशों को युद्ध के मुहाने से खींच लाया है. दक्षिण एशिया के खित्ते में नए हालात पैदा हुए हैं. भारत को पता है कि उसके हित क्या हैं. उसके कदम उठाने के रास्ते और तरीके क्या होंगे मगर कूटनीति और युद्ध का फैसला अगर ट्वि‍टर के खलिहर लोगों और चुनावी रैलियों में ताली बजवाने के लिए होगा तो यह खिलवाड़ होगा. भारत ने पहले भी रणनीतिक जीत हासिल की है. आज भी की है. मगर इस रणनीतिक जीत से आतंकवाद खत्म नहीं हुआ है. कपिल देव वाला वो विज्ञापन याद है...इसलिए याद कर रहा था कि मूंछ का सवाल बनाकर आप युद्ध का माहौल खड़ा नहीं कर सकते हैं. मूंछें बड़ी हो गई हैं तो सलून जाइये. किसी अच्छे से शेविग क्रीम का इस्तमाल कीजिए. रेज़र अच्छा हो और फिटकरी भी साफ सुथरी हो. कोलोन भी लगा सकते हैं. मूंछें हर किसी पर नहीं जंचती हैं, वैसे विंग कमांडर अभिनंदन पर खूब जमती हैं. हमारा पायलट काफी हैंडसम है. कहिए सही बोला कि नहीं. आपने शुक्रिया बोला कि नहीं.

आईपीएल मैच को वैसे भी नुकसान नहीं होना चाहिए. आज ही दफ्तर आते वक्त एफएम पर सुना कि एक आईपीएल टीम अपनी जरसी बेच रही है. बताइये यहां एंकर फौजी की वरदी पहन रहे हैं और आईपीएल वाले जरसी बेच रहे हैं. क्लाइमेक्स में आइटम सांग डाल देने की आदत जाएगी नहीं हमारी. आज का दिन वो दिन है, जिसके लिए बार बार कहा जाता है कि संवाद होते रहना चाहिए. इसमें कभी पाकिस्तान तो कभी हिन्दुस्तान के पक्ष भारी पड़ेंगे मगर युद्ध से बेहतर है कि यही होते रहना चाहिए. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने बातें अच्छी की हैं. तर्क और संयम की भाषा बोली है मगर आतंकवाद पर एक दिन उन्हें करके दिखाना होगा. भाषणों से बनी धारणाएं बहुत देर तक नहीं टिकती हैं. वर्ना आतंकवाद फिर से दोनों मुल्कों के बीच कोई चुनौती पैदा कर देगा.

अच्छी बात रही कि पाकिस्तान में भी कुछ लोग रहे जो भारतीय विंग कमांडर की वापसी के लिए प्रदर्शन कर रहे थे. हमें इन नेक लोगों को मजबूत करना होगा. पहले अपने यहां के नेक लोगों को धमकाना बंद कर लें यही बहुत है. लाहौर से आई तस्वीर प्रेस क्लब की है जहां लोगों ने विंग कमांडर की सुरक्षित वापसी के लिए प्रदर्शन किए. ये तस्वीरें छोटी हैं मगर इनका संदेश बहुत बड़ा है. यही कि माहौल के खिलाफ बोलने की पहल करने वाले दो चार ही होते हैं. यही दो चार लोग कई बार माहौल को छोटा कर जाते हैं. भारत में भी युद्ध के विरोध की आवाज़ें बुलंद हुई हैं. बस पाकिस्तान का यह प्रदर्शन बताता है कि पाकिस्तान के चैनलों और सोशल मीडिया को माहौल खराब करने में और मेहनत करनी होगी वरना भारत में शायद ही कोई साहस कर पाता ऐसे प्रदर्शन करने की. चैनल उन्हें आतंकवादी बता देते और देशद्रोही भी.

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आज जो हुआ उस पर ठहर कर सोचा जाना चाहिए. हमने कपिल काक से बात की. भारतीय वायुसेना का एयर वाइस मार्शल रहे हैं. कपिल काक का मानना है कि बातचीत का रास्ता लंबा सफर तय करता है. सबको इसी रास्ते पर चलकर देखना चाहिए. पहले भी नतीजे मिले हैं और अब भी मिलेंगे. उनका कहना था कि वाजपेयी के दौर में बातचीत की पहल शुरू हुई जो मनमोहन सिंह के दौर तक जारी रही. इसका नतीजा यह हुआ कि घाटी में मरने वालों की संख्या घटती चली गई.

माहौल बनाने में होने वाली तमाम मेहनत में कर्नाटक से बीजेपी के सांसद ने पानी डाल दिया है. जो चर्चा दबी ज़ुबान चल रही थी कि कहीं ये सब चुनाव के समय तो नहीं हुआ है. लोग राहौत इंदौरी का शेर पढ़ रहे थे. सरहदों पर बहुत तनाव है क्या, कुछ पता तो करो चुनाव है क्या. राहौत इंदौरी ने येदियुरप्पा से नहीं कहा था मगर उन्होंने एंट्री मारी और बयान दे डाला कि एयर स्ट्राइक से बीजेपी कर्नाटक में 28 में से 22 से ज़्यादा सीटें जीत लेगी.



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