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कर्नाटक चुनाव : लिंगायत वोटों पर टिकीं कांग्रेस और बीजेपी की उम्मीदें

बीजेपी की कमान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संभाली, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी पूरी ताकत झोंकी

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कर्नाटक चुनाव : लिंगायत वोटों पर टिकीं कांग्रेस और बीजेपी की उम्मीदें
कर्नाटक चुनाव को हफ्ते भर से भी कम समय बचा है और कांग्रेस और बीजेपी ने भी एक-दूसरे पर हमले तेज कर दिए हैं. बीजेपी की कमान खुद प्रधानमंत्री ने संभाल रखी है तो राहुल ने अपना सब कुछ झोंक रखा है. दोनों पार्टियों ने अपनी उम्मीद लिंगायत वोट पर लगा रखी हैं. 17 फीसदी लिंगायत वोट सबसे अहम है. कर्नाटक जीतने के लिए बीजेपी ने इस वोट बैंक को लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रखी है.

येदियुरप्पा खुद लिंगायत हैं इसलिए परंपरागत रूप से लिंगायत वोट बीजेपी को जाता रहा है, मगर पिछले चुनाव में कांग्रेस को कुल लिंगायत वोट में से 15 फीसदी वोट मिले थे. पार्टी इस बार इसे बढ़ाना चाहती है. यही वजह है कि कांग्रेस अध्यक्ष लिंगायत समुदाय के मठ में जाते हैं, मत्था टेकने के लिए. और तो और सबसे बड़ा दांव खेला मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जब उन्होंने लिंगायत को एक अलग धर्म का दर्जा देते हुए उसे अल्पसंख्यकों में शामिल करने की घोषणा कर दी. कई लोग इसे बड़ा राजनैतिक जुआ बता रहे हैं.

यही नहीं सोनिया गांधी को भी इस कर्नाटक चुनाव में घसीट लिया गया है. पहले उनका चुनाव प्रचार करने का कोई प्रोगाम नहीं था. आपको याद होगा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बनारस में रोड शो के बाद उनकी तबियत बिगड़ गई थी और उन्हें एयर एंबुलेंस से दिल्ली लाकर अस्पताल में भर्ती किया गया था. मगर इस बार उन्होंने अपने प्रचार की शुरुआत की है उत्तरी कर्नाटक के विजयापुरा से. यह लिंगायत बहुल इलाका है. सोनिया गांधी का कर्नाटक से पुराना नाता है. बेल्लारी से वे चुनाव लड़ चुकी हैं. तब उन्होंने  सुषमा स्वराज को शिकस्त दी थी. आपको याद होगा इंदिरा गांधी भी चिकमंगलूर से चुनाव जीत चुकी हैं. यानि गांधी परिवार का कर्नाटक से खास रिश्ता है.

कांग्रेस ने एसआर पाटिल के नेतृत्व में एक समिति बनाई है जिसका काम केवल उत्तरी कर्नाटक पर फोकस करना है. कांग्रेस एमबी पाटिल,शरण पाटिल,बासवाराज रायारेड्डी जैसे नेताओं की बदौलत लिंगायत वोटों में सेंघ लगाने के चक्कर में है और अपने वोटों का प्रतिशत 15 से बढ़ाकर 20 के ऊपर ले जाना चाहती है. इसमें मुख्यमंत्री के लिंगायत को अल्पसंख्यकों का दर्जा देना एक बड़ा कदम बताया जा रहा है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कर्नाटक के मंदिरों का चक्कर लगाने का सिलसिला लगातार जारी है. आपको याद होगा इसकी शुरुआत गुजरात में हुई थी. यानि राहुल गांधी कांग्रेस की अल्पसंख्यक सर्मथक की छवि को तोड़ना चाहते हैं. दूसरी तरफ बीजेपी के नेताओं ने वोक्कालिगा के मठों के भी चक्कर लगाना शुरू कर दिए हैं. हालांकि वोक्कालिगा वोट पर देवगौडा बैठे हैं, जिनको एकमुश्त वोक्कालिगा वोट मिलता हैं क्योंकि गौडा भी वोक्कालिगा हैं. अब चुनौती सिद्धारमैया के लिए है कि वे बीजेपी के हिंदुत्व के एजेंडे की तोड़ निकालते हैं.

बीजेपी ने इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को योगी आदित्यनाथ को उतार रखा है. बीजेपी को पता है कि यदि मुद्दा हिंदुत्व बना तो उसकी जीत पक्की है. अब देखना है कि सिद्धारमैया कैसे इससे निबटते हैं. यदि सिद्धारमैया अपनी नैया पार लगा लेते हैं तो रामकृष्ण हेगड़े के बाद दूसरे मुख्यमंत्री होंगे जो यह करिश्मा कर पाएंगे. हेगड़े 1988 में लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बने थे.

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(मनोरंजन भारती एनडीटीवी इंडिया में सीनियर एक्जीक्यूटिव एडिटर - पॉलिटिकल, न्यूज हैं)

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