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कर्नाटक चुनाव : मठ और जाति हैं हावी

कर्नाटक के चुनाव प्रचार में सभी दलों ने अपना सब कुछ झोंक दिया है, मगर वहां का चुनाव भी पूरी तरह जाति के आधार पर ही लड़ा जाता है.

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कर्नाटक चुनाव : मठ और जाति हैं हावी
कर्नाटक के चुनाव प्रचार में सभी दलों ने अपना सब कुछ झोंक दिया है, मगर वहां का चुनाव भी पूरी तरह जाति के आधार पर ही लड़ा जाता है. यह केवल बिहार या उत्तर प्रदेश की कहानी नहीं है, कर्नाटक के चुनाव का गणित भी जाति के आधार पर ही तय हो रहा है. कर्नाटक में लिंगायत सबसे मजबूत जाति है, जिसकी संख्या 17 फीसदी है. वोक्कालिगा की आबादी 15 फीसदी है, जबकि 23 फीसदी दलित और आदिवासी हैं, तो 9 फीसदी मुसलमान भी हैं. यही वजह है कि सभी दलों ने टिकट भी इसी आधार पर बांटे हैं.

कर्नाटक विधानसभा की 224 सीटों में से BJP ने 68 सीटें लिंगायत समुदाय के लोगों को दी हैं, वहीं कांग्रेस ने 49 और JDS ने 41 सीटें इस समुदाय को दी हैं. जबकि दूसरी बड़ी जाति वोक्कालिगा पर JDS की पकड़ है, क्योंकि देवेगौड़ा इसी जाति से आते हैं. JDS ने वोक्कालिगा समुदाय के 55 लोगों को टिकट दिया है, तो कांग्रेस ने 46 और BJP ने 38 सीटें इस समुदाय को दी हैं.

कर्नाटक ऐसा राज्य है, जहां मठों की पकड़ जनता पर काफी मजबूत है. यही वजह है कि सभी दलों के नेता मठों के चक्कर लगाते नजर आ रहे हैं. सबसे बड़ा और प्रसिद्ध मठ है सिद्धगंगा मठ, जो तुमकुर में है. यहां के स्वामी शिवकुमारा जी हैं, जिनकी उम्र 111 साल की है. श्रद्धालु इन्हें भगवान का दर्जा देते हैं. BJP अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दोनों यहां मत्था टेक चुके हैं. चूंकि यह लिंगायत का प्रमुख मठ है, इसलिए BJP, खासकर येदियुरप्पा को यहां से समर्थन की खासी उम्मीद है. एक और मठ है - चित्रदुर्ग में मुरुघा मठ. जब यहां पिछली बार अमित शाह गए थे, तो मठ की तरफ से उन्हें एक ज्ञापन दिया गया था, जिसमें लिंगायत को अल्पसंख्यकों का दर्जा देने की मांग की गई थी. एक और लिंगायत मठ है श्रीगेरे मठ, ज़ाहिर है, BJP के पक्ष में जाएगा.

वहीं मांडया में आदिचुनचानागिरी मठ है, जिसके प्रमुख हैं स्वामी निर्मलानंदनाथ, जो M.Tech. हैं और IIT मद्रास से पढ़े हैं. यहां अमित शाह, राहुल गांधी और योगी आदित्यनाथ मत्था टेक चुके हैं. यह वोक्कालिगा मठ है. ज़ाहिर है, यहां JDS को फायदा है, मगर कांग्रेस भी यहां सेंध लगाने की फिराक में है. उसी तरह उडुपि में कृष्णा मठ है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह जा चुके हैं. यहां से BJP को काफी उम्मीद है. उसी तरह चित्रदुर्ग में मदारा गुरुपीठ है. यह दलित पीठ है, जहां अमित शाह मत्था टेक चुके हैं.

ऐसा नहीं है कि लिंगायत कांग्रेस को वोट नहीं करते थे. दरअसल, 1989 में जब मुख्यमंत्री वीरेन पाटिल को दंगों की वजह से तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने हटा दिया था, तब से लिंगायत कांग्रेस से नाराज हो गए. उसके बाद के चुनाव में BJP का वोट प्रतिशत 4.14 फीसदी से बढ़कर16.99 फीसदी हो गया. सीटें भी चार से बढ़कर 40 हो गईं, जबकि कांग्रेस को 26.95 फीसदी वोट मिले और सीटें मिलीं 34. अब बात करते हैं सिद्धारमैया की जाति कुरबा की, जो सात फीसदी हैं, मगर इस जाति को 17 टिकटें मिली हैं. इस चुनाव में 30 ऐसी सीटें हैं, जहां लिंगायत बनाम लिंगायत की सीधी टक्कर है.

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कर्नाटक में BJP ने सारा दम झोंक दिया है, मगर यह भी सच्चाई है कि पिछले 35 साल में कर्नाटक में कांग्रेस को कभी BJP से कम वोट नहीं मिले हैं. मगर इस बार अधिकतर सर्वे या तो कांग्रेस को बढ़त दे रहे हैं या त्रिशंकु विधानसभा दिखा रहे हैं, यानी टक्कर कांटे की हो सकती है. देखना यह है कि कर्नाटक इस बार BJP के लिए दक्षिण के दरवाज़े खोलता है या कांग्रेस फिर वापसी कर नया इतिहास रचती है.

मनोरंजन भारती NDTV इंडिया में 'सीनियर एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर - पॉलिटिकल न्यूज़' हैं...

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