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कांटेदार होगा राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव

राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन इसी 1 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं और इसी के साथ नए उपसभापति को लेकर सियासत तेज हो गई है.

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कांटेदार होगा राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव
राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन इसी 1 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं और इसी के साथ नए उपसभापति को लेकर सियासत तेज हो गई है. सरकार की तरफ से ये संकेत मिल रहे हैं कि वह भी इस पद के लिए उम्मीदवार उतारने वाली है, जबकि कांग्रेस की तरफ से ये संकेत मिल रहे हैं कि वो अपना उम्मीदवार तो नहीं उतारेगी मगर विपक्ष की तरफ से अगर कोई दल उम्मीदवार देता है तो उसे अपना सर्मथन दे सकती है.

कयास लगाया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारने जा रही है, जिसमें राज्यसभा सांसद शुखेन्दु रॉय के नाम की चर्चा है. कांग्रेस अगर शुखेन्दु रॉय को अपना सर्मथन देती है तो मामला दिलचस्प हो जाएगा. यदि राज्यसभा के आंकड़ों को देखें तो बात साफ हो जाती है राज्य सभा में एनडीए के पास अभी भी बहुमत नहीं है. राज्यसभा में बीजेपी के साथ एआईएडीएमके, सीपीआई, अकाली दल, शिवसेना, जेडीयू, निर्दलीय, बाकी बचे छोटे दलों के अलावा मनोनित सदस्यों को जोड़ लें तो भी एनडीए के पास 110 की ही संख्या होती है, क्योंकि 5 मनोनित सदस्यों में से एक केटीएस तुलसी कांग्रेस के समय मनोनित हुए थे. 6 निर्दलीय विधायकों में से भी कुछ इधर-उधर जा सकते हैं.

बीजेपी को जगन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस का साथ मिल सकता है, जिसके पास 2 सांसद हैं. दूसरी तरफ विपक्ष के आंकड़े कुछ और कह रहे हैं. विपक्ष में कांग्रेस, तृणमूल, जेडीएस, बीएसपी, सीपीएम, सीपीआई, डीएमके, एनसीपी, सपा, आरजेडी, टीडीपी के साथ टीआरएस और पीडीपी की संख्या जोड़ दें तो यह 130 तक पहुंच जाती है. इस हालात में विपक्ष के उम्मीदवार का जीतना तय है. ऐसी हालात में सरकार अपना उम्मीदवार खड़ा कर रही है तो जरूर उनके पास प्लान-बी भी होगा.

आखिर क्या हो सकता है वो प्लान. अगर एनडीए बीजू जनता दल को मना ले कि वो अपना उम्मीदवार उतारे उपसभापति के लिए और एनडीए उसको सर्मथन दे तो आंकड़ें क्या कहते हैं. बीजेडी के 9 सांसदों के साथ एनडीए के पास 119 सांसद होंगें और विपक्ष के पास 121. ऐसे में यह मुकाबला दिलचस्प हो जाएगा यही वजह है कि बीजेपी ने नवीन पटनायक को एक पासा फेंका है. अब बीजेडी को यह तय करना है कि वो इसे स्वीकार करती है भी या नहीं. वैसे ओडिशा विधानसभा चुनाव में बीजेपी और बीजेडी दोनों आमने-सामने होंगें, मगर वह चुनाव 2019 में होना है लोकसभा चुनाव के साथ. तब तक यदि बीजेडी के सांसद यदि राज्यसभा का उपसभापति बन जाए तो क्या बुरा है. यदि ऐसे हालात बनते हैं तो उपसभापति जो भी बनेगा वह क्षेत्रीय दल का होगा.

वैसे परंपरा यही रही है कि लोकसभा के उपाध्यक्ष और राज्यसभा के उपसभापति का पद मुख्य विपक्षी दल को जाता है मगर लोकसभा में कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या न होने के कारण उसे मुख्य विपक्षी दल की मान्यता नहीं मिली और बीजेपी ने एआईएडीएमके के थम्बी दुरई को लोकसभा का उपाध्यक्ष बना दिया. लगता है कुछ ऐसा ही राज्यसभा में शायद हो मगर सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या बीजेडी बीजेपी के पस्ताव को मानेगी. यदि बीजेडी इस पर तैयार होती है तो क्या ये संदेश नहीं जाएगा कि भीतरखाने बीजेपी और बीजेडी मिले हुए हैं. क्या बीजेडी ये खतरा लेने को तैयार होगी. बहरहाल जो भी फैसला बीजेडी लेगी राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव भी अब एक शक्ति परीक्षण हो गया है सरकार और विपक्ष के बीच साथ ही दिलचस्प भी. 

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मनोरंजन भारती NDTV इंडिया में 'सीनियर एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर - पॉलिटिकल न्यूज़' हैं...

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