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बीजेपी के गढ़ गुजरात में कांग्रेस की बैठक के पीछे क्या है गणित

2019 के लोकसभा चुनाव की लड़ाई को कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के घर तक ले गई है और इसी उम्मीद में कांग्रेस की पूरी कार्यसमिति गुजरात में इकट्ठा हुई है.

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बीजेपी के गढ़ गुजरात में कांग्रेस की बैठक के पीछे क्या है गणित

लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनैतिक दलों ने भी अपनी कमर कसनी शुरू कर दी है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों में मीटिंग का दौर जारी है. बीजेपी में लगातार पार्टी अध्यक्ष अमित शाह वरिष्ठ नेताओं से सलाह -मशविरा करने में जुटे हैं और राजनाथ सिंह घोषणा पत्र को अंतिम रूप दे रहे हैं. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी अपने वरिष्ठ नेताओं से मंत्रणा में जुटे हुए हैं. इसी के मद्देनजर पूरी कांग्रेस कार्यसमिति गुजरात पहुंची हुई है, जहां कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हो रही है. मतलब साफ है कि कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गढ़ से शुरुआत कर एक संदेश देना चाहती है. पाटीदार नेता हार्दिक पटेल भी कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. उन्होंने जब गांधीनगर में संवाददाताओं से बात की तो उनके बगल में अल्पेश ठाकोर भी खड़े दिखाई दे रहे थे. यानि अल्पेश ने हार्दिक के बगल में अपनी उपस्थिति से उन बातों पर विराम लगा दिया है कि वे बीजेपी में शामिल हो रहे हैं.

गुजरात में 58 सालों बाद कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हो रही है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि गुजरात को इसलिए चुना गया कि वहां राहुल गांधी ने नरेन्द्र मोदी को विधान सभा चुनावों में कड़ी टक्कर दी थी. 182 सीटों वाली विधानसभा में जहां बीजेपी के पास 100 सीटें हैं, तो वहीं कांग्रेस 71 सीटों पर विजयी रही थी. यदि इन सीटों को लोकसभा सीटों में बदलें तो कांग्रेस कम से कम 8 सीटों पर बाजेपी को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में है. गुजरात में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर है. गुजरात में लोकसभा की 26 सीटें हैं और 2014 में सभी सीटों पर बीजेपी जीती थी, मगर विधानसभा चुनाव के बाद इन आंकड़ों में बदलाव हो सकता है. कम से कम 8-9 सीटों पर कांग्रेस बीजेपी को अच्छी टक्कर का देने की हालत में है. गुजरात के विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन जहां कांग्रेस के लिए किसी सफलता से कम नहीं थी, तो वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल का राज्य सभा में जीतना दूसरी बडी सफलता थी.


अब तीसरी बड़ी सफलता हार्दिक पटेल का कांग्रेस में आना है. यानि 2019 के लोकसभा चुनाव की लड़ाई को कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के घर तक ले गई है और इसी उम्मीद में कांग्रेस की पूरी कार्यसमिति गुजरात में इकट्ठा हुई है. साथ ही यहां से रैली करके और राहुल और प्रियंका को एक साथ लाकर कांग्रेस लोगों को एक संदेश भी देना चाहती है. हालांकि राजनीति के जानकार यह भी मानते हैं कि भले ही गुजरात के लोग विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को वोट दिये हों, मगर लोकसभा चुनाव में उनकी पसंद केवल मोदी ही होंगे और और संभव है कि फिर गुजरात की 26 में से 26 सीटें बीजेपी की झोली में चली जाएं. इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

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(मनोरंजन भारती NDTV इंडिया में 'सीनियर एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर - पॉलिटिकल न्यूज़' हैं...)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.


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