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क्या 2019 के आम चुनाव में मायावती हो सकती हैं 'तुरुप का इक्का'...?

क्या मायावती को एहसास है कि 2019 में उनका दौर भी आ सकता है... क्यों नहीं आ सकता...? पिछले दिनों मायावती ने जो राजनीति की है, वह इसी ओर इशारा करती है...

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क्या 2019 के आम चुनाव में मायावती हो सकती हैं 'तुरुप का इक्का'...?

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ( फाइल फोटो )

बहुजन समाज पार्टी, यानी BSP ने पिछले महीने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसके तहत अब मौजूदा BSP अध्यक्ष या उनके बाद जो भी BSP अध्यक्ष बनेगा, उसके जीते-जी या न रहने के बाद भी उसके परिवार के किसी नज़दीकी सदस्य को पार्टी संगठन में किसी पद पर नहीं रखा जाएगा... राष्ट्रीय अध्यक्ष के परिवार के किसी नज़दीकी सदस्य को कभी चुनाव नहीं लड़वाया जाएगा, या उसे राज्यसभा सदस्य या विधानपरिषद सदस्य भी नहीं बनाया जाएगा... मगर राहत की बात है कि बाकी स्तर के पदाधिकारियों के परिवार पर विशेष परिस्थितियों में यह शर्तें लागू नहीं होंगी...

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अब इसका मतलब क्या है, और क्या यह मायावती की छवि को बेहतर करने की राजनैतिक कवायद है... खासकर तब, जब दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में ही मुलायम सिंह यादव का कुनबा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है, और वहां जो भी 25 साल का होता है, उसके लिए एक सीट तैयार रहती है, चाहे लोकसभा की हो या विधानसभा की... दरअसल, मायावती की नज़र अब दिल्ली पर है... सोशल मीडिया पर BSP का कैम्पेन भी चल रहा है कि 'हाथी' दिल्ली जाएगा...

बिहार में JDU-BJP गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं ?

क्या मायावती को एहसास है कि 2019 में उनका दौर भी आ सकता है... क्यों नहीं आ सकता...? पिछले दिनों मायावती ने जो राजनीति की है, वह इसी ओर इशारा करती है... 22 साल बाद मायावती की पार्टी ने किसी पार्टी से चुनाव से पहले गठबंधन किया है... इससे पहले वर्ष 1996 में पीवी नरसिम्हा राव और कांशीराम के बीच समझौता हुआ था, और तब कांग्रेस ने BSP को उत्तर प्रदेश में 300 से अधिक सीटें दी थीं, और कांग्रेस 125 विधानसभा सीटों पर ही चुनाव लड़ी थी... इसी गठबंधन के लिए बहुत साल पहले राहुल गांधी ने कहा था कि यह गठबंधन नहीं, पार्टी को बेचना था...

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खैर, अब उससे आगे बढ़ते हैं... गोरखपुर, फूलपुर और कैराना में BSP गठबंधन में गई और नतीजों ने सबको चौंका दिया... कर्नाटक विधानसभा चुनाव भी BSP ने JDS के साथ मिलकर लड़ा... अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल, यानी RLD और JDS ने मायावती को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार भी बना दिया है... बेंगलुरू में जेडी कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह में सोनिया गांधी और मायावती की हाथ में हाथ डाले तस्वीर सबको याद होगी... लोग कहते हैं कि कांग्रेस ने देश में पहला दलित राष्ट्रपति बनवाया था, पहला दलित चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, पहला दलित गृहमंत्री, और पहली दलित महिला स्पीकर भी बनवाई थी, तो पहली दलित महिला प्रधानमंत्री क्यों नहीं... अगर ऐसी नौबत आती है, तो बाकी दलों को इससे इंकार कर पाना मुश्किल होगा, क्योंकि यह राजनैतिक रूप से सही निर्णय नहीं होगा...

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वैसे, मायावती का रिकॉर्ड भी उनके पक्ष में है... वह उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं... उनकी छवि एक कठोर प्रशासक की रही है, वह अफसरों को हावी नहीं होने देतीं... उनके कार्यकाल में कोई भी बड़ा दंगा नहीं हुआ, गोरक्षकों के उत्पात की तो बात ही छोड़ दें... जहां तक पार्क, स्मारक और हाथी के बड़े-बड़े बुत बनाने की बात है, मायावती पहले ही कह चुकी हैं कि वह इन सबसे तौबा कर चुकी हैं, क्योंकि जनता इससे खुश नहीं होती और इसका खासा नुकसान वह चुनाव में पहले ही उठा चुकी हैं...

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सो, अब यह कैसे संभव होगा कि मायावती प्रधानमंत्री बन जाएं...? ऐसा मुमकिन हो सकता है, यदि समाजवादी पार्टी और BSP का गठबंधन हो जाए, SP विधानसभा की अधिक सीटों पर लड़े और BSP लोकसभा की ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़े... दूसरी तरफ कांग्रेस को पूर्ण बहुमत न मिले और कांग्रेस यह तय करे कि कांग्रेस गठबंधन की सरकार नहीं बनाना चाहेगी और देश को पहली दलित महिला प्रधानमंत्री के रूप में मायावती को समर्थन देगी... यह एक ऐसा कदम हो सकता है, जिसका विरोध करना किसी भी दल के लिए मुश्किल होगा...


मनोरंजन भारती NDTV इंडिया में 'सीनियर एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर - पॉलिटिकल न्यूज़' हैं...


 डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

 
 


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