प्रियंका गांधी को सरकारी घर खाली करने का नोटिस, क्या बदले की राजनीति?

कांग्रेस के कुछ नेता कहते हैं कि बीजेपी के इस दौर में उस लोक लिहाज की राजनीति का दौर खत्म हो गया जो अटल बिहारी वाजपेयी के जमाने तक थी

प्रियंका गांधी को सरकारी घर खाली करने का नोटिस, क्या बदले की राजनीति?

प्रियंका गांधी को केंद्र सरकार ने बंगला खाली करने का नोटिस दिया है. सरकार नियमों का हवाला दे रही है कि यदि आपके पास एसपीजी की सुरक्षा नहीं है तो आप एक विशेष टाईप के बंगले की हकदार नहीं हैं. इस नियम के तहत प्रियंका गांधी लोधी रोड के अपने 35 नंबर के बंगले की हकदार नहीं हैं. इस सबकी शुरुआत उसी वक्त हो गई थी जब मौजूदा सरकार ने सोनिया गांधी, राहुल और प्रियंका गांधी की एसपीजी सुरक्षा हटा ली थी. तब यह दलील दी गई थी कि अब उनके ऊपर उतना खतरा नहीं है. ये सब सरकार की एक समिति ने तय किया था. उसी वक्त यह भी तय किया गया था कि पूर्व प्रधानमंत्री को भी अब एसपीजी की सुरक्षा नहीं मिलेगी. 

पहले के नियम के अनुसार प्रधानमंत्री को अपने पद से हटने के बाद दस साल तक एसपीजी की सुरक्षा मिलती थी. उस वक्त भी इस मुद्दे को लेकर संसद में कांग्रेस ने जमकर हंगामा किया था. उस वक्त भी राहुल गांधी के तुगलक रोड और सोनिया गांधी के 10 जनपथ के बड़े बंगले पर सवाल उठाए गए थे. मगर बाद में सरकार ने कहा कि चूंकि सोनिया और राहुल दोनों सांसद हैं और कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं या रह चुके हैं इसलिए उनको अपने पुराने बंगले में रहने दिया जाए. 

अब प्रियंका को एक महीने का नोटिस दिया गया है कि वे 31 अगस्त तक लोधी रोड का बंगला खाली कर दें नहीं तो उनसे बाजार की तय किराया दर से किराया वसूला जाएगा. कांग्रेसी अब सवाल उठा रहे हैं कि यदि प्रियंका के बारे में यह दलील दी जा रही है कि वे सांसद नहीं हैं तो लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी भी सरकारी बंगले में रह रहे हैं. अब यह कहा जा रहा है कि आडवाणी और जोशी दोनों के पास जेड प्लस की सुरक्षा है और उनको बंगला देने के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन एकोमोडेशन ने मंजूरी दे रखी है. तर्क यह भी दिया जा रहा है कि दोनों के पास एनएसजी की सुरक्षा है और वे नियम के तहत बंगले के हकदार हैं. जबकि प्रियंका,आडवाणी और एमएम जोशी, तीनों को जेड प्लस सुरक्षा है.

बीजेपी सरकार ने 2015 में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रहमण्यम स्वामी को सरकारी बंगला अलॉट किया था. उन्हें सुरक्षा का हवाला देते हुए बंगला दिया गया  था. जबकि वे न तो उस समय मंत्री थे, न सांसद थे और न ही सरकारी तंत्र में कोई जिम्मेदारी का वहन कर रहे थे. अब वे सांसद हैं लेकिन सरकारी आवास उनके पास पहले से है. 

अब कांग्रेसी सवाल उठा रहे हैं कि यदि सरकार चाहती तो प्रियंका को भी उनके बंगले में रहने की इजाजत दे सकती थी, मगर हाल के दिनों में, खासकर लॉकडाउन के वक्त मजदूरों के पलायन से लेकर  अब तक प्रियंका गांधी ने उत्तप्रदेश के मुद्दे पर योगी सरकार को घेरने की कोशिश की है जो कि केन्द्र और यूपी की बीजेपी सरकारों को नागवार गुजरी है. 

कांग्रेसी लखनऊ की सड़कों पर गाहे बगाहे धरना प्रदर्शन करते नजर आते दिख जाते हैं और खूब लाठियां भी खा रहे हैं. कांग्रेसी नेताओं की मानें तो यह तो होना ही चाहिए था क्योंकि गांधी परिवार के तेवर हाल के दिनों में सरकार के प्रति और भी तीखे हो गए हैं. ऐसे में सरकार से और क्या उम्मीद की जा सकती है. कांग्रेसी नेताओं की मानें तो हाल के दिनों में अहमद पटेल से ईडी की लंबी-लंबी पूछताछ भी इसी बदले की राजनीति का हिस्सा है. कांग्रेसी नेताओं की मानें तो इस सबसे उनका इस सरकार के प्रति विरोध कम नहीं होगा बल्कि वे और जोरशोर से सड़कों पर उतरेंगे. 

कांग्रेस के कुछ नेता तो यहां तक कहते हैं कि बीजेपी के इस दौर में लोक लिहाज की राजनीति का दौर खत्म हो गया है. यह लिहाज अटल बिहारी वाजपेयी के जमाने तक था. तब नेताओं के बच्चों को इस तरह की राजनीति से अलग रखा जाता था. मगर अब वो खत्म हो गया है.

(मनोरंजन भारती NDTV इंडिया में 'सीनियर एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर - पॉलिटिकल न्यूज़' हैं.)


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