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राफेल : पीएम को चोर कहने की परंपरा है हमारे यहां

राजीव गांधी के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान जब बोफोर्स का मामला आया था तब विपक्ष ने नारा दिया था - गली-गली में शोर है, राजीव गांधी चोर है...

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राफेल : पीएम को चोर कहने की परंपरा है हमारे यहां

राफेल मामले पर बयानबाजी एकदम निचले स्तर पर पहुंचती जा रही है. राफेल मामले पर राहुल गांधी ने फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद के बयान के बाद कहा कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने हमारे पीएम को चोर कहा है..फिर क्या था सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री का मजाक बनाया जाने लगा..सोशल मीडिया पर मेरा पीएम चोर है जैसे जुमलों की बाढ़ आ गई ..वहां पर जैसे मानो कि चोर-चोर का शोर होने लगा...

केन्द्रीय कानून मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि राहुल गांधी बेशर्म और गैरजिम्मेदार हैं...यही नहीं प्रसाद ने आगे कहा कि हमारा आरोप है कि राहुल गांधी के परिवार को कमीशन नहीं मिला इसलिए राफेल डील को दुबारा 2012 में किया गया. राहुल गांधी का परिवार बिना कमीशन काम नहीं करता चाहे वो बोफोर्स हो, 2जी हो या कोयला घोटाला हो. बीजेपी को इस बात का गुस्सा है कि पीएम को चोर क्यों बताया जा रहा है.

रविशंकर प्रसाद को जवाब दिया कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला ने. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का नाम बदलकर मोदी बाबा चालीस चोर रख देना चाहिए और रविशंकर प्रसाद आरोपों का जवाब गाली से दे रहे हैं. सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार पाकिस्तान की आड़ में छुप रही है. टेंडर ही 2012 में खुला तो 2008 की बात कैसे? एक झूठ छिपाने के लिए बहुत छूट बोलने पड़ते हैं. साथ ही सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि मोदी अंबानी के पीएम हैं या देश के?


मगर भारतीय राजनीति में प्रधानमंत्री को चोर कहना कोई नई बात नहीं है. हमारे यहां पीएम को चोर बोलने का एक गैारवशाली इतिहास रहा है. साल 2013 में तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चोर बोला गया. यूपीए सरकार के समय पीएम चोर है हैश टैग खूब चला. बीजेपी आईटी सेल की तरफ से ट्वीट किया गया कि कल पूरा देश जान जाएगा कि हमारा पीएम चोर है. भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने लिखा था कि पीएम चोर है, नहीं यह सरकार चोरों की बारात है, भष्ट्र, हेल्पलेस, पपेट पीएम...

अब थोड़े और पीछे चलते हैं.. राजीव गांधी के समय जब बोफोर्स का मामला आया था तब विपक्ष ने नारा दिया था कि गली-गली में शोर है, राजीव गांधी चोर है. मगर अब जब हालात पलट रहे हैं तो रविशंकर प्रसाद को यही नारा नागवार लग रहा है. सबसे बड़ा सवाल है कि मुद्दों पर बात क्यों नहीं हो रही है. यदि आरोप लग रहा है तो सरकार उन सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक क्यों नहीं करती. सरकार क्यों नहीं कहती कि वो राफेल पर श्वेत पत्र लाने के लिए तैयार है. यही तो संशय की स्थिति पैदा होती है, क्या कुछ छुपाया जा रहा है? रही सही कसर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद के बयान ने पूरी कर दी है.

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हालात ये हो गए हैं कि एक पार्टी प्रेस कॉन्फ्रेंस करती है, कुछ इल्जाम लगाती है, दूसरा घंटे भर के भीतर नया आरोप लेकर आ जाता है...भारतीय राजनीति के इस काजल की कोठरी के युग में सब एक-दूसरे को कालिख पोत रहे हैं और चोर साबित करने पर तुले हैं..मगर सवाल फिर भी वही रहेगा कि जब फ्रांस सरकार या डेसाल्ट कंपनी की तरफ से यह बार-बार कहा जा रहा है कि उनकी बात तो हिंदुस्तान ऐरोनोटिक्स लिमिटेड से हो रही थी, आखिर ये सौदा एक निजी कंपनी को कैसे चला गया, जिसे किसी भी तरह के हथियार बनाने का कोई अनुभव नहीं है.


मनोरंजन भारती NDTV इंडिया में 'सीनियर एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर - पॉलिटिकल न्यूज़' हैं...

 
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