कहीं BJP-शिवसेना की तनातनी में राष्ट्रपति शासन ही न लग जाए महाराष्ट्र में...

शिवसेना के 56 और NCP के 54 मिलाकर भी कुल 110 विधायक होते हैं, सो, इस गठबंधन को भी 13 अन्य विधायकों की ज़रूरत होगी

कहीं BJP-शिवसेना की तनातनी में राष्ट्रपति शासन ही न लग जाए महाराष्ट्र में...

महाराष्ट्र में चुनाव परिणाम आए दो हफ्ते होने को आए, मगर अभी भी वहां सरकार बनती नहीं दिख रही है. महाराष्ट्र में साथ-साथ चुनाव लड़ने वाली BJP और शिवसेना अब आपस में इस तरह लड़ रही हैं, जैसे जन्म-जन्म की दुश्मन हों. दरअसल, दोनों दलों के नेताओं के बीच आपसी विश्वास इतना कम हो गया कि दोनों दलों के बीच बातचीत एक दम बंद है. ऐसा लगने लगा है, जैसे दोनों दलों के बीच संपर्क का कोई ज़रिया ही नहीं है. महाराष्ट्र के आंकड़े भी कुछ इसी तरह के हैं कि BJP और शिवसेना साथ आएं, तभी स्थिर सरकार बन और चल सकती है.

महाराष्ट्र विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 288 है और बहुमत के लिए 145 चाहिए. अब BJP के पास 105, शिवसेना के पास 56, NCP के पास 54 और कांग्रेस के पास 44 विधायक हैं. सदन में निर्दलीय विधायकों की संख्या 13 है और छोटी पार्टियों के 14 विधायक हैं, जिनमें से अधिकतर BJP या शिवसेना को समर्थन देने की घोषणा कर चुके हैं. सो, BJP और शिवसेना का साथ आना लाज़मी है.

मगर यहां कई तरह के पेंच हैं. शिवसेना का कहना है कि BJP के केंद्रीय नेतृत्व और उनके बीच यह समझौता हुआ था कि महाराष्ट्र में सरकार बनने की हालत में ढाई-ढाई साल का शासन बारी-बारी से होना चाहिए. शिवसेना का तर्क है कि हमारा मुख्यमंत्री बनना चाहिए. इसके पीछे वजह यह है कि पहली बार ठाकरे परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़ा और जीता है. यही नहीं, शिवसेना महाराष्ट्र में कुछ मलाईदार मंत्रालय भी चाहती है और दिल्ली में भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपने मंत्रियों की संख्या बढ़ाना चाहती है.

अब अगर किसी कारण से ऐसा नहीं हो पाता है, तो दूसरा विकल्प है कि शिवसेना को NCP समर्थन दे और कांग्रेस वोटिंग के दौरान सदन से गैरहाज़िर रहे. ऐसे में बहुमत का आंकड़ा 123 हो जाएगा, लेकिन शिवसेना के 56 और NCP के 54 मिलाकर भी कुल 110 विधायक होते हैं, सो, इस गठबंधन को भी 13 अन्य विधायकों की ज़रूरत होगी. तीसरा विकल्प है BJP और NCP मिलकर सरकार बना लें. जो यह सुझाव दे रहे हैं, उनका कहना है कि जिस तरह प्रवर्तन निदेशालय (ED) प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार पर कार्रवाई कर रहा है, यह संभव हो सकता है. वैसे यही नहीं, शरद पवार के भतीजे अजित पवार पर भी कई मुकदमे हैं, सो, ऐसे में शरद पवार को BJP को सर्मथन देने के लिए तैयार किया जा सकता है.

इस बीच महाराष्ट्र में सरकार बनाने की कवायद के तहत कई तरह की बैठकों का दौर भी जारी है. यह भी खबर आई है कि BJP देवेंद्र फडणवीस के स्थान पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और BJP प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के नामों पर विचार कर रही है, तो फडणवीस ने संघ मुख्यालय की शरण ली. जिस तरह फडणवीस ने यह घोषणा कर दी थी कि मुख्यमंत्री तो वही बनेंगे, वह कई नेताओं को नागवार गुज़रा था. दूसरी ओर, शिवसेना नेता संजय राउत ने NCP प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की, तो पवार ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वह सोनिया गांधी से एक बार मिलेंगे. लेकिन साथ ही पवार ने यह भी कहा कि अगले दो दिन में महाराष्ट्र में क्या होगा, यह वह नहीं बता सकते. उधर, दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने गडकरी से मुलाकात की, लेकिन यह भी कहा कि उनकी इस मुलाकात का महाराष्ट्र में सरकार बनाने से कोई लेना-देना नहीं है.

इस तरह, यह साफ कहा जा सकता है कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने का रास्ता तभी साफ होगा, जब शिवसेना के लिए BJP दो कदम पीछे हटे और शिवसेना भी एक कदम पीछे हटे, वरना कहीं ऐसा न हो कि दोनों पार्टियों की तनातनी और 'मैं बड़ा, मैं बड़ा' के चक्कर में महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन ही लग जाए.

मनोरंजन भारती NDTV इंडिया में 'सीनियर एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर - पॉलिटिकल न्यूज़' हैं...

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