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मंत्री जी, बलात्कार पर बयान देने से पहले आंकड़ों पर तो जरा नज़र डाल लेते...

जहां बच्चियों के साथ बलात्कार को लेकर लोग परेशान हैं, वहीं गंगवार ने कहा कि इतने बड़े देश में एक दो घटनाएं हो जाएं तो बात का बतंगड़ नहीं बनाना चाहिए.

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मंत्री जी, बलात्कार पर बयान देने से पहले आंकड़ों पर तो जरा नज़र डाल लेते...

केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार (फाइल फोटो)

आज सुबह-सुबह खबर आई की राष्ट्रपति ने POCSO एक्ट पर हस्ताक्षर कर दिया है. यानी बच्चियों के साथ हो रहे बलात्कार के मामलों को लेकर सरकार काफी गंभीर है. अब इस एक्ट के तहत 12 साल से कम उम्र की बच्‍ची के साथ हुए दुष्कर्म के लिए दोषी साबित होने पर कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी जिसमें फांसी भी शामिल है. लेकिन केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने एक ऐसा बयान दिया है जिसकी जितनी निंदा की जाए कम है. जहां बच्चियों के साथ  बलात्कार को लेकर लोग परेशान हैं, वहीं गंगवार ने कहा कि इतने बड़े देश में एक दो घटनाएं हो जाएं तो बात का बतंगड़ नहीं बनाना चाहिए. ऐसा बयान देने से पहले केंद्रीय मंत्रीजी को आंकड़ों पर एक नजर डाल लेनी चाहिए थी. देश के अंदर बलात्कार के केस की रिपोर्टिंग नहीं होती है, इसका मतलब यह नहीं कि बलात्कार में कोई कमी आयी है. अगर आंकड़ों को देखें तो हर साल क्राइम बढ़ते ही जा रहे हैं.

बच्चों के खिलाफ क्राइम बढ़ा है
2012 में दिल्ली में हुआ निर्भया कांड आज भी लोगों के जेहन में ज़िंदा है. उस वक्त़ भी पूरी देश में आक्रोश का माहौल था. बलात्कार विरोधी कानून में संशोधन की मांग की गई थी. संशोधन के लिए सरकार ने तुरंत कमेटी भी बनाई थी जिसमें जस्टिस वर्मा, लीला सेठ जैसे जाने-माने कानून के जानकर शामिल थे. संशोधन को लेकर 80000 के करीब लोगों ने सुझाव दिए थे. सरकार द्वारा लोकसभा और राज्यसभा में विधेयक पास होने के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी ने इस पर हस्ताक्षर किए थे. यह उम्मीद की जा रही थी की 2014 में बीजेपी की सरकार आने के बाद देश में हो रहे बलात्कार के मामलों में कमी आएगी, लेकिन ऐसा नहीं है. सबसे पहले बच्चों के खिलाफ हो रहे क्राइम की बात करते हैं. NCRB के आंकड़ों के हिसाब से बच्चों के खिलाफ क्राइम बढ़ता जा रहा है. 2014 के बच्चों के खिलाफ 89,423 केस सामने आए थे. 2015 में यह बढ़कर 94,172 हो गया जबकि 2016 में यह 1,06,958 तक पहुंच गया. अगर 2013 की बात की जाए तो बच्चों के खिलाफ कुल मिलाकर 58,224 केस सामने आए थे, यानी 2014 में 53.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुयी थी. NCRB के डाटा के हिसाब से बच्चों के खिलाफ सबसे ज्यादा 16.9 प्रतिशत क्राइम मध्य प्रदेश में हुए हैं जबकि 16.6 फीसदी उत्तर प्रदेश, 10.5 फीसदी दिल्ली और 9.1 फीसदी महाराष्ट्र में.

बच्चियों के साथ बलात्कार की संख्या बढ़ती जा रही है
बच्चियों के साथ हो रही बलात्कार की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं. 2012 में कुल मिलाकर 8541 रेप केस सामना आए थे जबकि 2013 में यह बढ़कर 12,363 हो गए. 2014 में यह संख्या 13,766 हुई, 2015 में यह कम होकर 10,854 हो गई थी लेकिन 2016 में करीब 82 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ यह 19,765 पहुंच गई. 2016 में मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 2467 बच्चों के साथ रेप हुआ है जबकि महाराष्ट्र में 2292 के साथ और उत्तर प्रदेश में 2115 के साथ. मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार है जबकि 2016 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी. केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार जी को यह ध्यान में रखना चाहिए कि केंद्र में बीजेपी की सरकार और मध्यप्रदेश में और महाराष्ट्र में बीजेपी के सरकार होने के बावजूद बच्चियों के साथ रेप बढ़ा है.

महिलाओं के खिलाफ भी क्राइम बढ़ा है
महिलाओं के खिलाफ भी क्राइम बढ़ता जा रहा है. बलात्कार कानून में सुधार होने के बावजूद भी क्राइम में कोई कमी नहीं आ रही है. 2012 में महिलाओं के खिलाफ कुल-मिलाकर 2,44,270 केस सामने आये थे जिसमें 24,923 रेप केस शामिल थे जबकि 2013 में यह संख्या बढ़कर 3,09,546 हो गई जिसमें 33,707 रेप केस थे. 2014 में महिलाओं के खिलाफ क्राइम बढ़कर 3,39,457 पहुंच गया जिसमें 36,735 रेप केस थे. 2015 में महिलाओं के खिलाफ क्राइम में गिरावट आई थी. इस साल महिलाओं के खिलाफ कुल-मिलाकर 3,29,243 मामले हुए थे जिसमें 34,651 रेप केस शामिल थे. 2016 में यह संख्या बढ़कर 3,38,954 हो गई और रेप केस बढ़कर 38,947 पर पहुंच गए. 2016 में जिन तीन राज्यों में महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा रेप हुए थे वह था मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र. 2016 में मध्यप्रदेश में 4882 रेप केस सामने आए थे, उत्तर प्रदेश में 4816 जबकि महाराष्ट्र में 4189 केस सामने आये थे. यह सब आंकड़े देखने के बाद केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार जरूर कहेंगे कि उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया गया.

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सुशील मोहपात्रा NDTV इंडिया में Chief Programme Coordinator & Head-Guest Relations हैं

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.


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