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झारखंड में शक के नाम पर हत्यारी होती भीड़, हिन्दू भी मारे गए, मुसलमान भी

इतनी हिम्मत लोगों में कहां से आ रही है कि वे किसी को घर से निकाल कर ले जाते हैं और जहां चाहते हैं वहां घेर कर मार देते हैं.

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झारखंड में शक के नाम पर हत्यारी होती भीड़, हिन्दू भी मारे गए, मुसलमान भी
झारखंड में भीड़ ही अदालत होती जा रही है. कभी धर्म के नाम पर किसी धर्म के ख़िलाफ तो कभी किसी के भी ख़िलाफ. कहीं हलीम और नईम को भीड़ ने मार दिया तो कहीं गौतम कुमार और गंगेश कुमार को भी भीड़ ने मार दिया. क्या ऐसा हो सकता है कि कोई समूह यह टेस्ट कर रहा हो कि अलग अलग अफवाहों के कारण भीड़ किसी को मार सकती है या नहीं. कभी यह भीड़ गाय के नाम पर बन जा रही है तो अब सुनने में आ रहा है कि बच्चा चोरी के नाम पर बन रही है. इस सवाल पर गंभीरता से सोचा जाना चाहिए कि व्हाट्सऐप पर ग्रुप बनाकर अफवाह बनाने वाले क्या यह टेस्ट कर रहे हैं कि लोग वाकई कितने मूर्ख हैं, और उन्हें किन किन मसलों में भीड़ के भेड़ की तरह हांक कर हत्यारे में बदला जा सकता है. ऐसी भीड़ के सामने प्रशासन भी बेबस नज़र आता है. कुछ तो है कि न प्रशासन इस भीड़ की राजनीति को समझ रहा है न ही समाज और न ही राजनीति. झारखंड में बच्चा चोरी की घटना होगी तो पुलिस का काम है पकड़ना या भीड़ किसी को भी शक के आधार पर घेर कर मार देगी. हाल फिलहाल में झारखंड में ऐसी कई घटनाएं हो गई हैं.

सरायकलां खरसावां ज़िला है झारखंड में. यहां के राजनगर में सुबह सुबह बच्चा चोरी के संदेह में चार लोगों को पीट पीट कर मार दिया गया. सभी मुसलमान थे और कारोबारी थे. भीड़ का हौसला देखिये कि चारों की हत्या अलग अलग जगहों पर ले जाकर की गई. एक की हत्या शोभापुर में, दूसरे की डांडू, तीसरे व्यक्ति का शव सोसोमाली गांव में मिला, जबकि चौथे व्यक्ति का शव धोबो डुंगरी के जंगल में मिला. हल्दीपोखर निवासी शेख हलीम, मोहम्मद नईम, सज्जाद और सिराज रात दो बजे राजनगर की तरफ़ जा रहे थे. अचानक उनकी कार रोकने की कोशिश की गई. डर कर पड़ोस के गांव में रिश्तेदार के घर चले गए. लेकिन भीड़ वहां भी पहुंची, सीधी धमकी दी गई की सबको सौंप दो नहीं तो पूरे घर को आग लगा देंगे. चारों को भीड़ अपने साथ ले गई और फिर हत्या कर दी.

इतनी हिम्मत लोगों में कहां से आ रही है कि वे किसी को घर से निकाल कर ले जाते हैं और जहां चाहते हैं वहां घेर कर मार देते हैं. इस काम में हम सिर्फ मरने वाले को देखते हैं, यह नहीं देखते कि इस भीड़ की राजनीति में हमारे नौजवान हत्यारे हो रहे हैं. हिंदुस्तान अख़बार के वरिष्ठ पत्रकार अनीस ख़ान ने जो जानकारी वहां लोगों से बात कर बताई वो वाकई ख़तरनाक है. बच्चा चोरी की अफवाह को लेकर वाट्सऐप ग्रुप बनाया गया, फिर युवकों की टोली बनाई गई और बच्चा चोरी की बात फैलाई जाने लगी. यही इस समस्या की जड़ हो सकती है, क्या कोई ग्रुप है जो अलग अलग अफवाहों के ज़रिये यह टेस्ट कर रहा है कि भीड़ किसी को घेर कर मार सकती है या नहीं. अभी तक हम इसे इस रूप मे देखते रहे हैं कि भीड़ ने मुसलमानों को घेर कर मार दिया लेकिन गौतम कुमार वर्मा, विकास कुमार वर्मा और उनके दोस्त गंगेश कुमार भी इस भीड़ के शिकार हुए हैं.

यह घटना 18 मई की रात की है. बागबेड़ा के नागाडीह गांव में बच्चा चोरी के आरोप में जुगसलाई के गौतम कुमार वर्मा, विकास कुमार वर्मा और उसके दोस्त गंगेश कुमार की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. यही नहीं, 65 साल की रामचंद्र देवी की बुरी तरह पिटाई की गई. इनकी हालत गंभीर है. गौतम और विकास सगे भाई हैं. उनके तसीरे भाई उत्तम को भी भीड़ ने पकड़ लिया था, लेकिन वो बचकर भागने में कामयाब रहे. उत्तम ने ही बताया कि भीड़ ने उनसे पूछताछ की और अचानक बच्चा चोर की बात कहकर उनपर हमला बोल दिया गया. झारखंड के सारे अखबारों इन ख़बरों से भरे पड़े हैं. इन्हीं से पता चलता है कि गौतम और विकास को पहले बिजली के खंभे से बांधकर पीटा गया. वहां आसपास के गांव के लोग बड़ी संख्या में जमा हुए थे. हैरानी की बात है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग जुट रहे मगर किसी ने रोका नहीं. थानेदार साहब साढ़े आठ बजे पहुंचे, भीड़ को समझाने की कोशिश की, लेकिन उल्टा पुलिस पर भी हमला किया गया. थानेदार घायल हो गए. आखिर रात 10 बजे सिटी एसपी पहुंचे, तब जाकर कार्रवाई शुरू हुई. तब तक गौतम विकास और गंगेश की हत्या हो चुकी थी.

कुछ तो है जिसे अब नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है. हमें देखना ही चाहिए कि यह भीड़ किस पैटर्न पर बन रही है, कौन है जो भीड़ बना रहा है. सिर्फ बच्चा चोरी की अफवाह के ज़रिये नहीं, बल्कि तरह तरह के आरोप लगाकर भी भीड़ ने कानून अपने हाथ में लिया है और हत्या की है. हमारे सहयोगी हरिवंश ने बताया कि झारखंड में लगातार ऐसे मामले बढ़ते जा रहे है. इसमें ज़्यादतर संख्या मुसलमानों की भी है लेकिन भीड़ ने दूसरे समुदाय को भी नहीं छोड़ा है. कोलहान प्रमंडल जिसमें पांच ज़िले हैं, वहां 8 लोगों की हत्या हो चुकी है. अगर पूरे झारखंड की बात करें तो अब तक अफ़वाह के नाम पर 18 लोगों की हत्या की गई. पिछले महीने बोकारो में शम्सुद्दीन की भीड़ ने पिटाई की और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

2 मई 2017 : डुमरिया में 60 साल के बुज़ुर्ग की इसी तरह हत्या कर दी गई थी
2 मई : जादूगोड़ा के यूसिल बैराज के पास जॉन एंथनी की पिटाई की गई
2 मई : गालूडीह में बच्चा चोर बताकर एक अज्ञात व्यक्ति की बुरी तरह पिटाई
1 मई : आसनबनी तालाब के पास मोहम्मद असीम की हत्या, उसी दिन राखा माइंस स्टेशन के पास सद्दाम अंसारी उर्फ़ छोटू की पिटाई
- गालूडीह के पुतड़ू गांव के पास सुधीर सिंह की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. सुधीर भीख मांगकर गुज़ारा करते थे.
13 मई : घाटशिला थाना क्षेत्र में सलमान मियां को पीटा गया
14 मई : जमशेदपुर के पोटका थाने में एक व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डाला
14 मई : जादूगोड़ा में मानसिक रूप से कमज़ोर महिला को बुरी तरह पीटा गया
15 मई : सुंदर नगर के खुकराडीह में सत्यपाल सिंह को भीड़ ने पीटा
16 मई : घाटशिला में दिमागी तौर पर कमज़ोर युवक की पिटाई की गई
17 मई : जादूगोड़ा में उग्र भीड़ ने दिमागी तौर पर कमज़ोर युवक पर बच्चा चोरी का आरोप लगाया गया और पिटाई की गई

लोगों में इन हत्याओं के बाद गुस्सा दिखने लगा है. प्रदर्शनकारियों ने जुगसलाई रेलवे फाटक के पास सड़क को जाम कर दिया और वाहनों के आवागमन को रोककर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की. पुलिस बार बार कह रही है कि बच्चा चोरी की घटना राज्य में नहीं हो रही है. जो भी अफवाह फैला रहा है, उसे पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है. सवाल है कि क्या पुलिस अब जागी है जब चंद घंटों के भीतर 8 लोगों की भीड़ ने हत्या कर दी.


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