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मॉब लिंचिंग पर केंद्र सरकार बना सकती है मॉडल कानून

भीड़ के कानून हाथ में लेने की घटनाओं के आरोपियों को सख्त सजा देने और ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट से करवाए जाने का प्रावधान संभव

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मॉब लिंचिंग पर केंद्र सरकार बना सकती है मॉडल कानून
देश भर में मॉब लिचिंग की लगातार बढ़ रही घटनाओं के बाद दोषियों को सजा दिलाने में तेज़ी और कड़े से कड़ा दंड दिलाने के लिए कानूनों में बदलाव पर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है. एनडीटीवी को मिली जानकारी के मुताबिक इन विकल्पों में एक प्रमुख विकल्प एक मॉडल कानून बनाना भी है जो राज्य सरकारों को दिया जा सकता है. क्योंकि कानून-व्यवस्था राज्यों का विषय है इसलिए इसमें केंद्र की सीमित भूमिका को देखते हुए यह विकल्प महत्वपूर्ण माना जा रहा है. राज्य सरकारें अपने हिसाब से इस प्रस्तावित कानून में फेरबदल कर सकती हैं.

सुप्रीम कोर्ट भी लिंचिंग मामलों से निपटने के लिए एक सख्त कानून बनाए जाने का सुझाव दे चुका है. सूत्रों के अनुसार इसके बाद बनाई गई उच्च स्तरीय समिति कई विकल्पों पर गौर कर रही है और यह जल्द ही अपनी रिपोर्ट गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बने मंत्रियों के समूह को देगी.

सूत्रों के मुताबिक भीड़ के कानून हाथ में लेने की घटनाओं के आरोपियों को सख्त सजा देने और ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट से करवाए जाने का प्रावधान हो सकता है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि देश भर में हो रही इस तरह की घटनाओं को काफी गंभीरता से लिया गया है. वे झारखंड का उदाहरण देते हैं जहां फास्ट ट्रैक कोर्ट को ऐसे मामले सौंप कर दो महीनों के भीतर ही दोषियों को उम्र कैद की सजा भी दी गई है.

इस बीच, राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने आज अलवर का दौरा किया जहां शुक्रवार को रकबर खान की मौत हो गई थी. कटारिया ने बताया कि सबूतों के आधार पर लगता है कि मौत पुलिस हिरासत में पिटाई के बाद हुई है. इसकी न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं. कटारिया रकबर खान के परिवार वालों से भी मिले और एक लाख पच्चीस हजार रुपए के मुआवजे का एलान किया. राज्य सरकार ने तीन पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई भी की है. एक एएसआई को सस्पेंड कर दिया गया है जबकि दो पुलिसवालों को लाइन हाजिर कर दिया गया.

रकबर खान और उनके दोस्त असलम की शुक्रवार रात को गांव वालों ने गायों की तस्करी के शक में पिटाई कर दी थी. हमले के तीन घंटे बाद पुलिस रकबर खान को अस्पताल ले गई थी तब तक उनकी मौत हो गई थी. रकबर को अस्पताल ले जाने से पहले पुलिस वालों ने गायों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और रास्ते में चाय भी पी. इस बीच रकबर खान की पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट आ गई है. इसके मुताबिक उनकी मौत चोट के कारण अंदरूनी खून बहने से हुई. राज्य में अगले कुछ महीनों में चुनाव हैं और कांग्रेस इसे लेकर राज्य की बीजेपी सरकार पर निशाना साध रही है.

इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बार फिर से राज्यों के लिए एडवाइजरी जारी की है. इसमें कहा गया है कि भीड़ की हिंसा चिंता की बात है. सभी राज्य कार्रवाई करें. अदालत ने भी असरदार कदमों के लिए कहा है. एक तरफ केंद्र सरकार राज्यों से कड़ी कार्रवाई को कहती है वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा मॉब लिचिंग के आरोपियों को माला पहनाते हैं. तो वहीं कुछ दूसरे केंद्रीय मंत्री दंगाइयों को कानूनी मदद की बात करते हैं और इस तरह की घटनाओं को मोदी सरकार को बदनाम करने की साजिश बताते हैं. इस बीच आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश का भी बयान आता है जो कहते हैं कि अगर गायों की हत्या बंद हो जाए तो इस तरह की घटनाएं रुक सकती हैं. तो सवाल है कि क्या भीड़ की हिंसा को लेकर सरकार का रवैया दोहरा है? मॉब लिचिंग को रोक पाने में सरकारें क्यों हैं नाकाम?

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(अखिलेश शर्मा इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति एनडीटीवी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार एनडीटीवी के नहीं हैं, तथा एनडीटीवी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.



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