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विचार
  • चैनलों पर युद्ध का मंच सजा है, नायक विश्व शांति पुरस्कार लेकर लौटा है
    रवीश कुमार
    मनमोहन सिंह ने ऐसा किया होता तो भाजपा मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस हो रही होती कि जब हमारे जवान मारे जा रहे हैं तो हमारे प्रधानमंत्री शांति पुरस्कार ले रहे हैं. चैनल युद्ध का माहौल बनाकर कवियों से दरबार सजवा रहे हैं और प्रधानमंत्री हैं कि शांति पुरस्कार लेकर घर आ रहे हैं. कहां तो ज्योति बने ज्वाला की बात थी, मां कसम बदला लूंगा का उफ़ान था लेकिन अंत में कहानी राम-लखन की हो गई है. वन टू का फोर वाली. मोदी को पता है.
  • क्या न्यूज़ चैनल आम आदमी की आवाज़ हैं?
    रवीश कुमार
    11 लाख आदिवासियों को उनकी ज़मीन से बेदखल किया जाएगा क्या ये स्टोरी चैनलों की दुनिया से गायब नहीं कर दी गई. 900 चैनलों में से दो चार पर आई होगी तो उस पर ध्यान न दें. जब 11 लाख लोगों से जुड़ी स्टोरी गायब कर दी गई तो क्या आप वाकई आश्वास्त हैं कि जिस माध्यम के सामने बैठे हैं वो आपकी आवाज़ का प्रतिनिधि है. वो आपकी आवाज़ का प्रतिनिधि है या आप उसके प्रोपेगैंडा के प्रतिनिधि बनते जा रहे हैं. दर्शक बनना रिमोट से चैनल बदलना नहीं होता है.
  • आधा दर्जन छोटे दलों के संपर्क में हैं प्रियंका
    मनोरंजन भारती
    कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने पांव जमाने की कोशिश में लगी है. जब से पूर्वी उत्तर प्रदेश का जिम्मा प्रियंका गांधी को मिला है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ज्योतिरादित्य सिंधिया को, दोनों ने अपने-अपने ढंग से कांग्रेस को फिर से खड़ा करने के लिए काम करना शुरू कर दिया है. इसके लिए प्रियंका अपनी खास कोशिशों में जुट गई हैं. इसी रणनीति का हिस्सा है कि प्रियंका ने उत्तर प्रदेश के सभी छोटे-छोटे दलों की खोज खबर लेना शुरू कर दिया है.
  • पुलवामा हमला : शास्त्रों में शस्त्र की भूमिका देखने का वक्त
    सुधीर जैन
    पुलवामा हमला हुए आठ दिन हो गए. अब तक नहीं सोच पाए कि क्या करें. हमले के बाद फौरन ही कुछ नया कहना भी जरूरी था. सो राजनीतिक तौर पर सेना को कुछ भी करने की छूट देने का बयान जारी किया गया. सरकार ने कहा कि सेना जो करना चाहे उसे वह करने की अनुमति है. इसके अलावा एक और काम हुआ. सरकार ने पाकिस्तान का सर्वाधिक तरजीही देश का दर्जा खत्म कर दिया.
  • पुलवामा हमले की ख़बरों के बीच प्रधानमंत्री मोदी डिस्कवरी चैनल की शूटिंग में रहे व्‍यस्‍त
    रवीश कुमार
    कांग्रेस का आरोप है कि हमले की घटना 3:10 बजे हुई थी. जिम कार्बेट में 6:45 तक शूटिंग हुई. इस बीच पीएम ने चाय-नाश्ता भी किया. अब इसके लिए रसोइया से पूछताछ की ज़रूरत नहीं है कि उन्होंने उस अच्छे मौसम में क्या खाया था, जिसे उड़ान भरने के लिए ख़राब माना गया था. सरकारी सूत्रों के खंडन में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं खाया था. चलिए जब सरकारी ही महत्व दे रहे हैं तो कोई बात नहीं वरना मेरे लिहाज़ से खाना कोई बुरी बात नहीं है. बुरी बात यही है कि क्या वे घटना के बाद पोज़ दे रहे थे?
  • क्या राष्ट्रपति मेरा नंबर जारी कर लोगों को उकसाने वाले BHU के प्रो. कौशल मिश्रा को बर्खास्त करेंगे?
    रवीश कुमार
    2014 के पहले बनारसी लोगों की ठाठ सुना करता था कि पप्पू चाय की दुकान पर व्हाइट हाउस की पॉलिटिक्स का धुआं उड़ा देते हैं लेकिन अब क्या हो गया है. उनके बनारस का प्रोफेसर फेसबुक पर लोगों को उकसा रहा है. भड़का रहा है. पप्पू चाय की दुकान है या बुद्धिजीवी बनारस छोड़ गए हैं?
  • कब होगी आम आदमी के मुद्दे पर राजनीति?
    रवीश कुमार
    राजनीति फिर से अपने तेवर में आ गई है. तरह तरह की आवाज़ें आने लगी हैं. गठबंधन की आलोचना हो रही है, गठबंधन भी हो रहा है. सीटों का बंटवारा होने लगा है. बयानों के संघर्ष में मुद्दे अपने लिए संघर्ष का रास्ता खोजने लगे हैं. आम आदमी के मुद्दे पर राजनीति होगी या नेताओं के भाषण पर आम आदमी राजनीति करेगा.
  • आधे दाम में आयात हो सकता है तो दुगनी लागत पर यूरिया का उत्पादन क्यों
    रवीश कुमार
    हम सब जानते हैं कि यूरिया खेती और खेत के लिए अच्छा नहीं है. इसका असर हम सबके स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है. लेकिन यूरिया की दुनिया में क्या चल रहा है, हम नहीं जानते हैं. इंडियन एक्सप्रेस में खेती के पन्ने पर जी रवि प्रसाद का एक लेख देखा. जी रवि प्रसाद के परिचय में लिखा है कि वे कृषि रसायन और खाद प्रबंधन के विशेषज्ञ हैं. इनका सवाल है कि भारत को आखिर कितना यूरिया चाहिए.
  • नामवर सिंह : मरेंगे हम किताबों पर, वरक होगा कफ़न अपना...
    प्रभात उपाध्याय
    बनारस की 'ऊसर भूमि' जीयनपुर से निकल नामवर सिंह (Namwar Singh) ने बीएचयू, सागर और जेएनयू में हिंदी साहित्य की जो पौध रोपी, उनमें से तमाम अब ख़ुद बरगद बन गए हैं. 93 साल...एक सदी में सिर्फ 7 बरस कम. पिछले दो ढाई महीनों को छोड़कर नामवर सिंह लगातार सक्रिय रहे और हिंदी की थाती संजोते-संवारते रहे. आखिरी घड़ी तक लगे रहे.
  • अपराधी को क्यों दें सबूत?
    अखिलेश शर्मा
    पुलवामा के बाद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में भारत को कामयाबी मिलती नजर आ रही है. न्यूजीलैंड की संसद ने पुलवामा आतंकी हमले की निंदा में एक प्रस्ताव पारित किया है. संसद में निंदा प्रस्ताव पारित करने वाला न्यूजीलैंड पहला देश बन गया है.
  • गठबंधन : बीजेपी का दक्षिण दर्द
    मनोरंजन भारती
    बीजेपी ने तमिलनाडु में अपने गठबंधन की घोषणा कर दी है. एक ही दिन में महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु दूसरा राज्य है जहां बीजेपी ने गठबंधन बनाने में देरी नहीं की है. वहां बीजेपी और शिवसेना में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ में लड़ने पर सहमति बन चुकी है.
  • आख़िरकार चले गए नामवर सिंह..
    प्रियदर्शन
    हिंदी की आलोचना परंपरा में जो चीज़ नामवर सिंह को विशिष्ट और अद्वितीय बनाती है, वह उनकी सर्वसुलभ सार्वजनिकता है. वे किन्हीं अध्ययन कक्षों में बंद और पुस्तकों में मगन अध्येता और विद्वान नहीं थे, वे सार्वजनिक विमर्श के हर औजार का जैसे इस्तेमाल करते थे. उन्होंने किताबें लिखीं, अख़बारों और पत्रिकाओं में लेख लिखे और साहित्यिक पत्रिकाओं का संपादन किया.
  • बीजेपी भी 'महागठबंधन' के सहारे!
    अखिलेश शर्मा
    सोचिए अगर इस आम चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत न मिले. किसी गठबंधन को भी न मिले. त्रिशंकु संसद की हालत में क्या होगा? यह एक ऐसा सवाल है जो बार-बार पूछा जा रहा है. इसका एक जवाब यह भी है कि ऐसे हालात में राष्ट्रपति सबसे बड़ी पार्टी या फिर चुनाव पूर्व सबसे बड़े गठबंधन को सरकार बनाने के लिए बुला सकते हैं. ऐसा पहले भी हुआ है. हम यह बात इसलिए उठा रहे हैं कि चुनाव नजदीक आते ही बीजेपी ने न सिर्फ अपना कुनबा बढ़ाना शुरू कर दिया है.
  • सभी तरफ 'महामिलावट' का जमाना
    मनोरंजन भारती
    देश में लोकसभा चुनाव की तैयारी राजनैतिक दलों ने युद्ध स्तर पर शुरू कर दी है और जैसे जंग के मैदान में होता है लड़ाई के लिए एक लकीर सी खींच दी गई है...दोनों तरफ गठबंधन करने की होड़ सी लगी हुई है. एक-एक दल और एक-एक राज्य के हिसाब से नफे नुकसान का जायजा लेने के बाद पार्टियां आपस में बात कर रही हैं.
  • क्या भाजपा अब 'सहयोगी शरणम् गच्छामि' हो गई है?
    मनीष कुमार
    लोकसभा चुनाव सिर पर है और हर दल अपने-अपने हिसाब से राजनीतिक दांव खेलने में व्यस्त हैं. जहां एक ओर राष्ट्रीय दल भाजपा और कांग्रेस के बीच सहयोगियों को जोड़ने की होड़ लगी है. वहीं, क्षेत्रीय दल भी अपने-अपने हिसाब से यानी कांग्रेस या BJP के साथ अब तालमेल को अंतिम रूप दे रहे हैं. कांग्रेस अगर सहयोगी या क्षेत्रीय दलों से समझौता कर रही है तो उसकी मजबूरी समझ में आती है लेकिन अचानक बीजेपी जिस तरह से महत्वपूर्ण राज्यों में अपने पुराने स्टैंड से 360 डिग्री घुमकर समझौते कर रही है, उससे तो यही लगता है कि भाजपा को अब सहयोगियों का महत्व समझ में आ रहा है. इतना ही नहीं, बीजेपी को शायद उनके बिना चुनाव में जाना आत्मघाती लग रहा है. इसलिए भाजपा एक बार फिर 'सहयोगी शरणम् गच्छामी' के मुद्रा में है. 
  • माँ-बहन की गालियों पर मां-बहन ही चुप हैं, क्यों चुप हैं?
    रवीश कुमार
    मैंने देखा तो नहीं कि उस खेमे की महिला नेताओं और समर्थकों ने कभी इन गालियों का प्रतिकार किया हो. विरोध किया हो. यहाँ तक कि जब महिला पत्रकारों को गालियाँ दी जाती हैं उसका भी विरोध नहीं करती हैं. इस तरह माँ बहन की गालियाँ देने वालों को उस दल की माँ बहन का भी समर्थन प्राप्त हैं. पहली बार माँ और बहने माँ बहनों के नाम पर दी जाने वाली गालियों का समर्थन कर रही हैं. उस दल की सभी माँ बहनों को मैं अपनी माँ और बहन मानता हूँ. तमाम गालियाँ आप सभी के लिए पेश करता हूँ जो मुझे दी जा रही हैं.
  • 66-A पर सुप्रीम कोर्ट का यूटर्न और सरकार की विफलता
    विराग गुप्ता
    भारत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-A के तहत सोशल मीडिया साइटों पर आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री पोस्ट करने वाले के लिए तीन साल तक की जेल की सजा का प्रावधान था. श्रेया सिंघल मामले में सन 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्ट की धारा 66-A को गैर-संवैधानिक बताते हुए उसे निरस्त कर दिया था. पीयूसीएल नामक संगठन ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाकर बताया था कि निरस्त होने के बावजूद धारा 66-A के तहत देशभर में अनेक गिरफ्तारियां और मामले चल रहे हैं.
  • कश्मीरी छात्रों की मदद के लिए आगे आया सीआरपीएफ, मेरे फोन पर ट्रोल अटैक
    रवीश कुमार
    आईटी सेल का काम शुरू हो गया है. मेरा, प्रशांत भूषण, जावेद अख़्तर और नसीरूद्दीन शाह के नंबर शेयर किए गए हैं. 16 फरवरी की रात से लगातार फोन आ रहे हैं. लगातार घंटी बजबजा रही है. वायरल किया जा रहा है कि मैं जश्न मना रहा हूं. मैं गद्दार हूं. पाकिस्तान का समर्थक हूं.
  • पुलवामा हमला : मरने से पहले आतंकवादि‍यों का सबसे बड़ा डर बता गया आदिल अहमद डार...
    अनिता शर्मा
    खबरों के अनुसार सीआरपीएफ काफिले पर हमले को अंजाम देने वाले आतंकी आदिल अहमद डार ने इस हमले से ठीक पहले अपना एक वीडि‍यो मैसेज बनाया था. जि‍से उसने अपने साथि‍यों के लि‍ए बनाया था.
  • प्रियंका गांधी वाड्रा: अपना भी टाइम आएगा
    मनोरंजन भारती
    तीन दिनों के अपने लखनऊ प्रवास के दौरान प्रियंका ने दिन रात बैठकें करके करीब चार हजार कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात की. यदि उत्तर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर की माने तो प्रियंका ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के चार हजार कार्यकत्ताओं से मुलाकात कर इन ईलाकों के लिए एक खाका तैयार कर लिया है और उनके पास एक रणनीति भी है जो कांग्रेस को इन ईलाकों में फिर से जिंदा कर सकती है.
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