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विचार
  • पूर्ण विजय तो दूर, जीत आधी भी नहीं हुई और आसमान से कराई जा रही है पुष्प वर्षा
    रवीश कुमार
    कोविड-19 के कारण पिछले 24 घंटे में 83 लोगों की मौत हुई है. इससे पहले 24 घंटे में इतनी मौतें नहीं हुईं. संक्रमण से मरने वाले मरीज़ों की संख्या 1300 से अधिक हो चुकी है. क्या यह हर्ष और उल्लास का समय है कि हम आसमान से पुष्प वर्षा करें और वो भी सेना को आगे करके ताकि सेना के नाम पर सारे सवाल देशद्रोही बताए जाने लगें?
  • केरल में 92 दिनों में कोविड-19 के 495 मरीज़ ही जबकि गुजरात में 44 दिनों में ही संख्या 5000 पार
    रवीश कुमार
    हिन्दू अख़बार ने राज्यों के आंकड़ों के लिए एक ग्राफ बनाया है. आपको प्रत्येक राज्य पर क्लिक करते ही पता चल जाता है कि राज्य में कोविड-19 का पहला केस किस तारीख को आया और उसके बाद अभी कितनी संख्या है. यानी कितने कम समय में किस राज्य में मरीज़ों की संख्या में तेज़ी आई है.
  • लालू प्रसाद ने कोसी के बाढ़ पीड़ितों के लिए मुफ्त ट्रेनें चलाईं, पीयूष गोयल ने किराया लेकर घर पहुंचाया
    रवीश कुमार
    2008 में बिहार के कोसी में बाढ़ आई थी. उस समय रेल मंत्री लालू प्रसाद थे. उन्होंने कोसी के बाढ़ पीड़ितों के लिए छह ट्रेनें मुफ्त में चलवाई थीं. सहरसा-मधेपुरा, पूर्णिया-बमनखी, सहरसा-पटना के बीच चार ट्रेनें और समस्तीपुर से सहरसा के बीच दो ट्रेनें. बाढ़ ने सबको आर्थिक रूप से उजाड़ दिया था इसलिए लालू प्रसाद ने मुफ्त में ये ट्रेनें चलवाई थीं.
  • लेंस बदल देने से चांद नहीं बदल जाता, WHO ने 30 जनवरी को जारी की थी सबसे बड़ी चेतावनी
    रवीश कुमार
    पैनडेमिक. यह एक ऐसा शब्द है जिससे कोविड-19 के प्रसार को बयां किया जाने लगा है. हिन्दी में इसे वैश्विक महामारी कहते हैं. इस शब्द की खासियत यह रही है कि यह सबसे बड़ी चेतावनी की निशानी बन गया. हम सभी के दिमाग़ में यह बात बैठ गई कि विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने 11 मार्च को पैनडेमिक की घोषणा की और यही सबसे बड़ा अलर्ट था, अलार्म था. चेतावनी की सबसे बड़ी घंटी थी. वैश्विक महामारी के ख़िलाफ़ युद्ध का बिगुल था. यह सही नहीं है.
  • जब इरफान खान ने कहा चलो 'बाथरूम' में फोटो शूट कर लेते हैं...
    नरेंद्र सैनी
    इरफान खान (Irrfan Khan) ऐसे एक्टर थे जो बहुत ही सादगी लिए बनावटीपन से काफी दूर थे. उनसे जुड़ा एक यादगार वाकया...
  • यादों में बसी हैं इरफान खान से हुई मुलाकातें : बोलते कम थे, सुनते ज़्यादा...
    विमल मोहन
    इरफ़ान ख़ान से बस दो-तीन मुलाक़ातें ही हो पाईं, बेहद छोटी. लेकिन हर मुलाक़ात यादगार रही. आख़िरी मुलाक़ात एनडीटीवी के पार्किंग एरिया में हुई. वे शायद 'पान सिंह तोमर' फ़िल्म के प्रमोशन के लिए एनडीटीवी के के स्टूडियो आए थे. उन्हें देखते ही मैंने कहा, आपकी 'एक डॉक्टर की मौत'.. के बाद ये सबसे अच्छी फ़िल्म लगी. उन्हें बहुत अच्छा लगा कि किसी पत्रकार ने उनसे इतने लंबे वक्त के बाद 'एक  डॉक्टर की मौत' का ज़िक्र किया. मुझे लगता है वो बोलते कम और सुनते ज़्यादा थे. वो दूसरों की बातों को आंखों में एक चमक और बड़े ही कौतूहल से सुनते थे. सुनते रहे. इस बीच अपनी जो भी कही, अलग ही अंदाज़ में कही.
  • दोस्तों, हारना नहीं है...
    रवीश कुमार
    भरोसा रखिए जब आपने एक बार शून्य से शुरू कर यहाँ तक लाया है तो एक और बार शून्य से शुरू कर आप कहीं पहुँच जाएँगे. बस यूँ समझिए कि आप लूडो खेल रहे थे. 99 पर साँप ने काट लिया है लेकिन आप गेम से बाहर नहीं हुए हैं. क्या पता कब सीढ़ी मिल जाए. हंसा कीजिए. थोड़े दिन झटके लगेंगे. उदासी रहेगी लेकिन अब ये आ गया है तो देख लिया जाएगा यह सोच कर रोज़ जागा कीजिए.
  • कोरोना के मामले में तीन राज्यों को अकेले टक्कर दे रहा अहमदाबाद, देशभर में सबसे अधिक मृत्यु दर
    रवीश कुमार
    अहमदाबाद में कोविड-19 से मरने वालों की दर राष्ट्रीय औसत और कई बड़े शहरों के औसत से अधिक है. यह मृत्यु दर 4.71 प्रतिशत है. दिल्ली में 2,919 मरीज़ों पर 50 लोगों की मौत हुई थी. मुंबई में 5407 मरीज़ों पर 205 मरीज़ों की मौत हुई थी तो अहमदाबाद में मृत्यु दर मुंबई और दिल्ली से भी अधिक है.
  • बात जो वॉट्सएप से आगे न बढ़नी थी, न बढ़ी...
    संजय किशोर
    सोशल मीडिया पर वर्चुअल योद्धा सिर्फ नारा बुलंद करते हैं-“वीर तुम बढ़े चलो, हम तुम्हारे साथ हैं.” मगर आगे कोई नहीं आता. शायद इसलिए भी क्योंकि आगे बढ़कर कोई परचम थाम भी ले तो उसके पीछे कोई नहीं जाएगा. खासकर जब मामला संवेदनशील हो. पुलिस और प्रशासन से जुड़ा हुआ हो. कौन कोर्ट, कचहरी और पुलिस के पचड़ों में पड़ना चाहता है. किसके पास फ़ुर्सत है. जो सचमुच उस दर्ज़ी को अवैध क़ब्ज़े से बेदख़ल करना चाहते, वे खुद आगे बढ़कर शिकायत दर्ज करा सकते थे. अपने रसूख़ का इस्तेमाल कर उसको हटवा सकते थे. लेकिन बात वॉट्सएप से आगे न बढ़नी थी, न बढ़ी.
  • बिहार के नियोजित शिक्षकों के बहाने लोकतंत्र का सत्य
    रवीश कुमार
    बिहार के नियोजित शिक्षक पत्र लिखते रहते हैं. अब उनका दावा है कि पचास से अधिक शिक्षकों की असामयिक मौत हो चुकी है. यूपी में कई शिक्षामित्रों के साथ यही हुआ लेकिन वही लोग चुनाव में जनता कम समर्थक ज़्यादा बने रहे. सांप्रदायिक मीम में डूबे रहे. उनकी भी संख्या कई हज़ार और परिवारों की मिलाकर लाख थी. बिहार में चार लाख शिक्षकों का वर्ग है. बार-बार बताते हैं. आप याद करें प्राइम टाइम के पुराने एपिसोड, जिसमें मैं आपकी ही गालियाँ सुनता हुआ कहा करता था कि लोकतंत्र में संख्या ही सब कुछ है मगर अब संख्या का महत्व शून्य हो गया. जनता, जनता ही नहीं रही.
  • जोकर का इक्का है कीटनाशक से इंजेक्शन देने का बयान, ट्रंप की बादशाही अमर रहे
    रवीश कुमार
    “मान लीजिए बहुत सारी अल्ट्रावॉयलेट किरणें या शक्तिशाली किरणें शरीर पर डाली जाती हैं, और मुझे लगता है कि इसे चेक नहीं किया गया है. लेकिन मैं कहता हूं कि अगर आप शरीर के भीतर रोशनी ले जाते हैं, या तो आप अपनी त्वचा के ज़रिए कर लें या किसी और तरीके से और मुझे लगता है इसका जल्दी ही परीक्षण किया जाएगा.“
  • अमेरिका में विमान कंपनियों को मदद की शर्त, न सैलरी कम करें और न निकालें किसी को
    रवीश कुमार
    अमेरिकी ट्रेज़री विभाग ने शनिवार को विमान कंपनियों की मदद के लिए 9.5 अरब डॉलर जारी किए हैं. यह पैसा पे-रोल सपोर्ट प्रोग्राम के तहत जारी हआ है. अभी तक अमेरिकी विमान कंपनियों के लिए 12.4 अरब डॉलर जारी हो चुका है ताकि कोविड-19 के आघात से घायल इन कंपनियों को सहारा मिल सके. इसके तहत 10 बड़ी विमान कंपनियों और 83 छोटी विमान कंपनियों को सहायता राशि दी गई है.
  • कोरोना वायरस :  गुजरात दूसरे नंबर पर फिर भी टेस्ट की संख्या में कमी क्यों?
    रवीश कुमार
    कोविड-19 मामले में गुजरात दूसरे नंबर पर पहुंच गया है. गुजरात में कोविड-19 के मरीज़ों की संख्या 2815 हो गई है. दिल्ली तीसरे नंबर पर है 2514 केस हैं. गुजरात में मरने वालों की संख्या 127 हो गई है. गुजरात में इस बात को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है कि क्या राज्य सरकार ने टेस्ट की संख्या कम कर दी है. कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने कहा है कि रोज़ 3000 टेस्ट हो रहे थे, उसे घटा कर 2000 करने की क्या वजह है?
  • विश्‍व पुस्‍तक दिवस पर विशेष: जब कभी मुझसे म‍िलना हो, मेरी क‍िताबों को पढ़ लेना..
    अनिता शर्मा
    मुझे याद रहता है कि किताब में कब और क‍िस लाइन को मैंने दो बार, तीन बार या चार बार पढ़ा था... कब क‍िसी आसान-सी बात को समझने के लि‍ए उसे (किताब को) बार-बार टोक-टोककर परेशान क‍िया था, कब मैंने दांतों तले अंगुली दबाई, कब मैं उसके साथ रोई और कब मुस्कुराई थी... और हां, कब मैंने उसे गुस्से में खुद से दूर झटका था और कब सीने से लगाकर रात का सबसे चमकीला तारा उसमें बुकमार्क बनाकर रखा था...
  • कोरोना संकट में भारतीय कंपनियों का संकटमोचक चेहरा
    राजीव रंजन
    पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट्स (PPE) किट को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं. चीन से आए लगभग 63,000 किट खराब गुणवत्ता के हैं. असम ने चीन से मंगाए 50,000 PPE किट का इस्तेमाल तब तक नहीं करने का फैसला किया है, जब तक इनकी गुणवत्ता प्रमाणित नहीं हो जाती. PPE किट के महत्व का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि बिना इसे पहने अगर कोई डॉक्टर या नर्स कोरोना मरीज़ का इलाज करता है तो उसके संक्रमित होने का खतरा ज़्यादा होता है. ऐसे में यह जानना ज़रूरी हो जाता है कि आखिर यह परीक्षण कैसे होता है और कौन करता है.
  • जिनके लिए लोगों ने बजाई थी थाली, अब लोग उन्हीं को दे रहे हैं गाली
    अजय सिंह
    कोरोना का कहर अब धीरे-धीरे बड़ा होता जा रहा है और  लोगों की अवेयरनेस पैनिक में बदल रहा है. तभी तो जिसे कोरोना हो रहा है उसे और उसके घर वालों को लोग दुश्मन की तरह देखने लगे हैं.  उनके साथ उपेक्षित व्यवहार हो रहा है, जैसे उन्होंने कोई बड़ा अपराध किया हो. इस नासमझी का आलम ये है कि लोग अपने ही पड़ोसी और परिचितों को दुश्मन की नज़र से देख रहे हैं.
  • लॉकडाउन में बनारस की मस्ती का अपना बिंदासपन
    अजय सिंह
    दुनिया जब तक उस वायरस के खतरनाक मनसूबों और उसकी ताक़त को समझती तब तक वो चीन के वुहान शहर से चुपके से इटली पहुंच गया और फिर वहां से पूरे यूरोप को अपनी गिरफ्त में लेने लगा. देखते-देखते उसने इंसानो को न सिर्फ अपनी गिरफ्त में लिया बल्कि उनकी जान भी लेने लगा. हर तरफ उसकी ताक़त और पांव पसारने की क्षमता ने लोगों को असहाय कर दिया. ऐसे  कहर और नज़र न आने वाले वायरस की कल्पना इक्कीसवीं सदी में चांद और मंगल गृह पर अपना झण्डा बुलंद करने वाले अत्याधुनिक वैज्ञानिकता से युक्त मानव की कल्पना में भी नहीं रहा होगा. और ये कल्पना भारत के उस प्राचीन नगर को भी नहीं थी, जहां  गतिशीलता कभी रूकती नहीं जो अनादिकाल से अपने रस से शिव की त्रिशूल पर विराजमान हो कर सभी को सराबोर करती रही.
  • पालघर के बारे में मैं चुप नहीं था, सांप्रदायिकों का गिरोह कुछ ज़्यादा सक्रिय था
    रवीश कुमार
    महाराष्ट्र पुलिस ने हत्या के आरोप में 110 लोगों को गिरफ्तार किया है. अभी कुछ और लोगों के भागकर पास के जंगल में छिपने की ख़बर है, जिनकी तलाश जारी है. पुलिस को पता चला है कि व्हॉट्सऐप के ज़रिये अफवाह फैली थी कि बच्चा चोरों का गिरोह सक्रिय है, जो मानव अंगों की तस्करी करता है. पुलिस पता कर रही है कि अफवाह कैसे फैली और हत्या के दूसरे कारण क्या हो सकते हैं. पुलिस को बताना चाहिए कि जब यह अफवाह कई दिन से फैल रही थी, तो उन्होंने तब क्या किया...?
  • कोरोना काल:  जापान, ब्रिटेन और अमेरिका में क्या हो रहा है
    रवीश कुमार
    ब्रिटेन में कोरोना से मरने वालों की संख्या 15000 हो गई है. 17 अप्रैल की शाम को 6 बजे तक ब्रिटेन में 888 लोगों की मौत हो चुकी थी. इस कारण मरने वालों की संख्या 15, 464 हो गई है. मरने वाले सिर्फ संख्या हैं. किन परिवारों के लोग हैं, मृतक के बाद परिवार का क्या होगा, वो किस मन:स्थिति से गुज़र रहे हैं इसकी कहीं कोई सूचना नहीं है.
  • क्या आप जानते हैं, केंद्र और राज्य सरकारों ने कितने करोड़ की आबादी के खाते में पैसे दिए...?
    रवीश कुमार
    कोरोना संकट के साथ ही केंद्र सहित कई राज्य सरकारों ने अपने-अपने यहां के किसानों, मज़दूरों, पेंशनधारियों के खाते में पैसे दिए हैं. अनाज दिया है और फ्री गैस सिलेंडर भी. बेशक, एक बड़ा तबका इसके बाद भी छूट रहा है और उसकी परेशानियों को उजागर करते रहना चाहिए.
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