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विचार
  • कश्मीर की दीवार में कोई खिड़की नहीं रहती
    प्रियदर्शन
    अगर कश्मीर में ज़मीन खरीदने और कश्मीरी लड़कियों से शादी करने का बाक़ी भारतीयों का उत्साह कुछ कम हुआ हो तो उन्हें अब इस पर भी सोचना चाहिए कि अनुच्छेद 370 को बेमानी बनाए जाने के क़रीब तीन महीने बाद कश्मीर के हालात क्या हैं?
  • तो इंटरनेशनल ब्रोकर की मदद से कश्मीर लाए गए हैं यूरोपियन संघ के सांसद
    रवीश कुमार
    यह ईमेल कभी बाहर नहीं आता, अगर सांसद क्रिस डेवीज़ ने अपनी तरफ से शर्त न रखी होती. डेवीज़ ने मादी शर्मा को सहमति देते हुए लिखा कि वे कश्मीर में बग़ैर सुरक्षा घेरे के लोगों से बात करना चाहेंगे. बस दस अक्तूबर को मादी शर्मा ने डेविस को लिखा कि बग़ैर सुरक्षा के संभव नहीं होगा क्योंकि वहाँ हथियारबंद दस्ता घूमता रहता है. यही नहीं अब और सांसदों को ले जाना मुमकिन नहीं. इस तरह डेविस का पत्ता कट जाता है. क्रिस डेवीज़ नार्थ वेस्ट ब्रिटेन से यूरोपियन संघ में सांसद हैं. उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में कश्मीर के लोग रहते हैं जो अपने परिजनों से बात नहीं कर पा रहे. डेवीज़ ने मीडिया से कहा है कि वे मोदी सरकार के जनसंपर्क का हिस्सा नहीं होना चाहते कि कश्मीर में सब ठीक है.
  • आंतरिक मामले में विदेशी सांसदों का दख़ल क्यों?
    रवीश कुमार
    भारत का अभिन्न अंग है. भारत का आंतरिक मामला है. तो फिर भारत के अभिन्न और आंतरिक कश्मीर में बाहरी देशों के सांसदों के दौरे को सुविधाएं क्यों उपलब्ध कराई जा रही हैं. यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि जब भारत की लाइन अभिन्न और आतंरिकता की रही है तो इन सांसदों के निजी दौरे की सरकारी व्यवस्था क्यों कराई गई.
  • कश्मीर अंदरूनी मामला तो यूरोपीय सांसद क्यों करेंगे दौरा
    रवीश कुमार
    जिस कश्मीर का दौरा करने के लिए विदेशी पत्रकारों को अनुमति नहीं दी गई, दिल्ली स्थित राजनयिकों ने कश्मीर जाने की अनुमति मांगी तो सरकार ने मना कर दिया, अमरीका के कांग्रेसमैन क्रिस वॉन होलेन को श्रीनगर जाने का अनुरोध भारत ने ठुकरा दिया. अब ऐसा क्या हुआ कि भारत ने यूरोपीयन संघ के 27 सांसदों को कश्मीर जाने की अनुमति दे दी है.
  • प्राइम टाइम इंट्रो: गोपाल कांडा और भारतीय राजनीति की बेशर्मी
    रवीश कुमार
    हरियाणा के सिरसा से विधायक गोपाल कांडा की बात क्या सिर्फ इसलिए हो रही है कि कांडा ने बीजेपी को सपोर्ट देने की बात कही है? क्या हम इस सवाल का जवाब ठोस रूप से जानते हैं कि अगर कांग्रेस को ज़रूरत होती तो गोपाल कांडा का सपोर्ट लेने से इंकार कर देती?
  • फेल हो गई अमित शाह की रणनीति, शरद पवार ने साबित किया दम
    स्वाति चतुर्वेदी
    महाराष्ट्र में, और बाहरी समर्थन से हरियाणा में भी, भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार बना लेगी, लेकिन इन दोनों विधानसभाओं के लिए हुए चुनाव की असलियत यह है कि मतदाताओं ने दर्प और कर्णभेदी अति-राष्ट्रवाद पर समय रहते अंकुश लगा दिया है, और यह भी कि जनता को आर्थिक अंतःस्फोट की परवाह है. कुछ ही महीने पहले लोकसभा चुनाव में BJP ने शानदार बहुमत हासिल किया था.
  • हरियाणा चुनाव परिणाम : बीजेपी को झटका, जेजेपी का उदय; यह है सत्ता का गणित
    सूर्यकांत पाठक
    हरियाणा में विधानसभा चुनाव के सभी परिणाम घोषित हो चुके हैं. यहां 90 में से 40 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है. हालांकि इसके बावजूद बहुमत के आंकड़े (46) से पीछे है. दूसरी तरफ बीजेपी के मुख्य प्रतिद्वंदी दल कांग्रेस ने 31 सीटें जीतकर राज्य में अपनी स्थिति को सुधारा है. इन दोनों मजबूत दलों से हटकर दुष्यंत चौटाला की नई पार्टी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) ने दस सीटें हासिल करके आश्चर्यचकित कर दिया है.
  • प्राइम टाइम इंट्रो: महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव परिणाम का विश्लेषण
    रवीश कुमार
    महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी की सरकार बन रही है. देवेंद्र फडणवीस और मनोहर लाल खट्टर ही मुख्यमंत्री होंगे. प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दोनों के पिछले कार्यकाल की तारीफ की है और आगे के लिए बधाई दे दी है. इस चुनाव में जनता ने अपनी तरफ से विपक्ष को भी मज़बूत किया है.
  • विकलांग परीक्षार्थी क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?
    रवीश कुमार
    देश भर में चल रहे धरना प्रदर्शनों को आप देखेंगे तो लोकतंत्र की अलग तस्वीर दिखेगी. कई बार हम प्रदर्शनों को विपक्षी दलों के हिसाब से देखते हैं. जो लोग विपक्ष को खोज रहे हैं उन्हें इन प्रदर्शनों में जाना चाहिए ताकि पता चले कि विपक्ष के नेताओं के बगैर भी प्रदर्शन होते हैं. लोगों ने विपक्ष का रास्ता देखना भी बंद कर दिया है. इसे इस तरह से भी देखिए कि एक ज़माना था जब कोई नेता बनने के लिए इन प्रदर्शनों से जुड़ता था, इस्तेमाल करता था, मगर अब वो भी बंद हो गया है. लेकिन प्रदर्शन बंद नहीं हुए हैं. ज़्यादातर प्रदर्शनों का नतीजा भले ज़ीरो हो लेकिन सब अगले प्रदर्शन के लिए अपनी तरफ से एक नंबर छोड़ जाते हैं और यह सिलसिला चलता रहता है.
  • कलयुग के कथित भगवान पर आयकर विभाग का छापा
    रवीश कुमार
    कल्कि भगवान बनकर लॉन्‍च हुए तमिलनाडू के एक बाबा के यहां 600 करोड़ की संपत्ति मिली है. लेकिन इससे बड़ी ख़बर यह है कि कल्कि भगवान देश छोड़ कर नहीं जाएंगे और आयकर विभाग का सामना करेंगे क्योंकि देश के कानून का सम्मान करते हैं. सही बात है, जिस देश के लोगों ने इतना पैसा दिया, उस देश के कानून पर विश्वास जता कर कल्कि भगवान ने देश का बड़ा सम्मान किया है. सीखना चाहिए विजय माल्या या नीरव मोदी को.
  • खूब लड़ा ऑस्ट्रेलिया का मीडिया, खूब झुका भारत का मीडिया
    रवीश कुमार
    आप जो अख़बार ख़रीदते हैं, या जो चैनल देखते हैं, क्या वह आज़ाद है? उसके आज़ाद होने का क्या मतलब है? सिर्फ छपना और बोलना आज़ादी नहीं होती. प्रेस की आज़ादी का मतलब है कि संपादक और रिपोर्टर ने किसी सूचना को हासिल करने के लिए मेहनत की हो, उन्हें छापने से पहले सब चेक किया हो और फिर बेखौफ होकर छापा और टीवी पर दिखाया हो. इस आज़ादी को ख़तरा सिर्फ डर से नहीं होता है. जब सरकारें सूचना के तमाम सोर्स पर पहरा बढ़ा देती हैं तब आपके पास सूचनाएं कम पहुंचने लगती हैं. सूचनाओं का कम पहुंचना सिर्फ प्रेस की आज़ादी पर हमला नहीं है, वो आपकी आज़ादी पर हमला है. क्या आप अपनी आज़ादी गंवाने के लिए तैयार हैं?
  • साल 1947 में बना कोलकाता का वो सिनेमा हॉल जहां उस्ताद अल्ला रक्खा और पंडित रविशंकर भी पेश कर चुके हैं कार्यक्रम
    रवीश कुमार
    यह हॉल शुरू से मल्टी परपस रहा है. फिल्म रोक कर शास्त्रीय संगीत समारोह हुए हैं. भाषण हुआ है. यहां पर उस्ताद अल्ला रक्खा, भीमसेन जोशी, पंडित रविशंकर, लता मंगेशकर का कार्यक्रम भी हुआ है.आप जो बड़ा सा प्रोजेक्टर देखेंगे उसी से पाथेर पाँचाली दिखाई गई थी. 1955 में फिल्म का प्रीमियर इसी हॉल में हुआ था. जो प्रोजेक्टर है वो आज भी चालू हालत में है.
  • दिल्ली विधानसभा चुनाव: आम आदमी पार्टी ने की दोतरफ़ा किलाबंदी
    शरद शर्मा
    पांच महीने ऐसे कि मई के महीने में लोकसभा चुनाव में करारी हार झेलने के एकदम अगले ही दिन आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी में जुट गई थी और उसने  'दिल्ली में तो केजरीवाल' कैंपेन शुरू कर दिया था. खास बात यह है कि पार्टी चुनावों के लिए दो तरफा किलाबंदी की है. एक है पार्टी स्तर की तो दूसरी सरकार स्तर की.
  • मेक्सिको ने 311 भारतीयों को वापस भेजा, मानव तस्‍करी रैकेट को कड़ा संदेश
    रवीश कुमार
    बहुत दिनों से मेक्सिको का झगड़ा अमरीका से चल रहा था, ट्रंप साहब मेक्सिको की सीमा पर दीवार चिनवा रहे थे कि वहां से कोई माइग्रेंट नहीं आ जाए. हम समझ रहे थे कि ये दोनों मुल्क आपस में समझ रहे हैं, हमारा क्या है. मगर मेक्सिको ने तो 311 भारतीयों को जहाज़ में बिठाकर दिल्ली भेज दिया.
  • गुप्त काल पर इतिहास लिखने के लिए संदर्भ सूची, आप भी पढ़ें और इतिहासकार बनें
    रवीश कुमार
    कभी ख़ुद से पूछिएगा. छात्र जीवन में खपे नौजवानों का कितना प्रतिशत इतिहास पढ़ता होगा. इतिहास में प्राचीन इतिहास कितने पढ़ते होंगे. पूरा जीवन लगा देंगे तो भी आप प्राचीन इतिहास के सारे पहलुओं के बारे में जान नहीं सकेंगे.
  • NEET परीक्षा में धांधली की सज़ा छात्र क्यों भुगतें?
    रवीश कुमार
    अगर आप छात्र हैं और किसी परीक्षा सिस्टम से गुज़र रहे हैं तो आपको मालूम है कि यहां सिर्फ परीक्षा ही नहीं देनी होती है. दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश हो, और आप किसी भी नॉन रेज़िडेंट इंडियन से पूछ सकते हैं, जहां परीक्षाओं को लेकर धांधली की इतनी ख़बरें आती हैं. मैं करीब दो साल से इस तरह के विषयों पर प्राइम टाइम कर रहा हूं. हर दिन सैकड़ों मैसेज और तस्वीरों से गुज़रता हूं. घंटों इन्हें पढ़ता रहता हूं. मैं चाहता हूं कि आप ये बात ध्यान से सुनें और इस शोध पर नोबेल देने की ज़रूरत नहीं है. इसका निष्कर्ष यह है कि आप इन परीक्षा सिस्टम के ज़रिए भारत के करोड़ों नौजवानों की ज़िंदगी पांच से दस साल तक बर्बाद कर सकते हैं.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग: 'सर सैय्यद डे' पर AMU के एक छात्र डॉ. शोएब अहमद से मुलाकात
    रवीश कुमार
    अलीगढ़ के छात्रों को पता भी है या नहीं कि उनके लिए कोई हसन कमाल साहब इतना सोचते हैं. उनके कारण कुछ ऐसे ही जुनूनी लोगों से मुलाक़ात हुई जो अपने छात्रों की हर संभव मदद के लिए बेताब थे. पैसे और हुनर दोनों से मदद करने के लिए. हसन कमाल वैसे तो बेहद ख़ूबसूरत भी हैं और इंसान भी बड़े अच्छे. अपने काम करने के शहर के चप्पे चप्पे से जानते हैं जैसे कोई अलीगढ़ का छात्र अपने शहर की गलियों को जानता होगा. उनकी मुस्तैदी का क़ायल हो गया. हाथ में एक घड़ी पहन रखी है. आई-फोन वाली. कदमों का हिसाब रखते हैं. शायद इसीलिए फिट भी हैं.
  • अमित शाह का मास्टरस्ट्रोक है सौरव गांगुली का BCCI चीफ बन जाना...
    स्वाति चतुर्वेदी
    चूंकि क्रिकेट समूचे देश में जुनून की तरह छाया रहता है, सो, सौरव गांगुली और उनकी टीम पर बेहद बारीक नज़र रखी जाएगी, और अगर सौरव BCCI में प्रभावी और साफ-सुथरा प्रशासन दे पाते हैं, तो उनकी साख बहुत बढ़ेगी. BCCI ने हमेशा से पारदर्शिता को रोकने की कोशिश की है, सो, गांगुली का आकलन इसी आधार पर होगा कि वह स्थिति बदल पाती है या नहीं.
  • कोर्ट में मामला भूमि विवाद का, लेकिन मीडिया के लिए आस्था
    रवीश कुमार
    भारत के इतिहास में यह सबसे लंबा, सबसे हिंसक, सबसे विवादास्पद और सबसे राजनीतिक भूमि विवाद है. इस विवाद को राजनीति के मैदान में लड़ा गया. दावों और प्रतिदावों के बीच इससे संबंधित हिंसा में न जाने कहां-कहां लोग मारे गए. हिन्दू भी मारे गए, मुस्लिम भी मारे गए. अंत में लड़ते-झगड़ते सब इस बिन्दु पर पहुंचे कि जो भी अदालत का फैसला होगा, सब मानेंगे. अदालतों का फैसला भी रेगिस्तान की गर्मी और ऊंचे पहाड़ों की थकान से गुज़रते हुए अब अंजाम पर पहुंचता दिख रहा है. 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहा दी गई. उस मामले में कौन-कौन शामिल थे, इस पर पता लगाने के लिए 17 साल तक लिबरहान आयोग की सुनवाई चली. यूपी के ट्रायल कोर्ट में जारी है, मगर अपराधी सजा से दूर हैं. इस सवाल को मौजूदा बहस से गायब कर दिया गया है. मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम पर जो मर्यादाएं तोड़ी गईं उन पर न प्रायश्चित है और न अदालत का फैसला.
  • आंदोलन की राह पर मध्‍यप्रदेश पुलिस के परिवार वाले, यूपी के सिपाही भी परेशान हैं
    रवीश कुमार
    अगर देश भर के सिपाही एक हो जाएं तो वे काम करने के बेहतर हालात और सैलरी हासिल कर लेंगे. यूपी के सिपाही भी परेशान हैं. दूर पोस्टिंग होती है. सैलरी कम होती है तो दो जगह ख़र्चा चलाना मुश्किल होता है. छुट्टी नहीं मिलती तो पत्नी से मिलने नहीं जा सकते. उनके जीवन में प्यार ही नहीं है. शादी के बाद हनीमून पर भी नहीं जा पाते. दहेज लेकर शादी करते हैं और उसी दहेज की अटैची में कपड़ा रखकर पत्नी से जुदा हो जाते हैं. सिपाही चौबीस घंटे काम करते हैं. उनकी हालत दयनीय है.
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