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  • रघुनाथ झा नहीं होते तो लालू मुख्यमंत्री नहीं बनते...
    रविवार देर रात दिल्ली में बिहार से पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व सांसद और कई बार विधायक रहे रघुनाथ झा का निधन हो गया. लेकिन बहुत कम लोगों को याद होगा कि 1990 में जब लालू यादव पहली बार मुख्यमंत्री चुने गए थे, अगर रघुनाथ झा की उम्मीदवारी नहीं होती तो शायद लालू की जगह रामसुंदर दास मुख्यमंत्री होते.
  • सुप्रीम कोर्ट में लगी है अंतरात्मा की अदालत
    मेडिकल कॉलेज और जज लोया की सुनवाई के मामले में गठित बेंच ने जजों को अपना फ़र्ज़ निभाने के लिए प्रेरित किया है या कोई और वजह है, यह उन चार जजों के जवाब पर निर्भर करेगा.
  • FDI के नए ऐलानों का मतलब...?
    हमारी मौजूदा सरकार अर्थशास्त्रियों और पत्रकारों के लिए एक से बढ़कर एक चुनौतियां पेश कर देती है, और अब उसने यह चुनौती पेश की है कि अर्थशास्त्री और पत्रकार विश्लेषण करें कि FDI (यानी Foreign Direct Investment यानी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) के नए सरकारी ऐलानों का क्या असर पड़ेगा...?
  • विश्व पुस्तक मेला 2018: युवाओं में बढ़ रहा है जौन एलिया का क्रेज, जानिए क्या है वजह?
    महफिलों व संगीत सभाओं में गजलों की लोकप्रियता जानी पहचानी है. गजल गायकी ने भी इसमें चार चांद लगाया है.
  • हल्द्वानी के ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे की मौत पर मीडिया ने चुकाई जीएसटी
    हल्द्वानी के प्रकाश पांडे के सल्फास खाने के बाद मुख्यमंत्री 12 लाख रुपये मुआवज़ा देने का एलान कर रहे हैं. परिवार वाले स्थाई नौकरी और अधिक मुआवज़े की मांग कर रहे हैं. हल्द्वानी में व्यापारियों और ट्रांसपोर्टर ने बुधवार को बंद भी रखा. हिन्दुस्तान टाइम्स से ट्रांसपोर्टर संघ के अध्यक्ष प्रीतम सब्बरवाल ने कहा है कि बिजनेस ख़त्म हो गया है.
  • काला धन का सबसे बड़ा डॉन - इलेक्टोरल बॉन्ड
    आप पाठकों में से कुछ तो 10वीं पास होंगे ही, इतना तो समझ ही गए होंगे कि यह पारदर्शिता नहीं, उसके नाम पर काला धन पर पर्दा है.
  • चारा घोटाले का बिहार की राजनीति में किसी को नफा या नुकसान क्यों नहीं होता?
    चारा घोटाले के एक मामले में जब से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू यादव को साढ़े तीन साल जेल की सजा हुई है, उसके बाद बिहार की राजनीति में ये कायास लगाये जा रहे हैं कि आखिर इस पूरे मामले से किसे नफा होगा और किसे नुकसान. अगर आप इस बात को समझना चाहते हैं तो इसके लिए आपको बिहार की वर्तमान राजनीति से इतर उसके पीछे की राजनीति को थोड़ा याद करना होगा. एक तरफ जहां वर्तमान में लालू यादव चारा घोटाले में एक बार फिर सजा काट रहे हैं, वहीं उनके कभी राजनीतिक सहयोगी और अब विरोधी नीतीश कुमार को ‘प्रोबिटी इन पॉलिटिक्स एंड पब्लिक लाइफ' के मुफ्ती मोहम्मद अवार्ड से नवाजा जा रहा है.
  • ब्रिटेन के लिए शहीद भारतीय सैनिकों को सलामी दी जा सकती है, तो भीमा-कोरेगांव के महार सैनिकों को क्यों नहीं?
    अप्रैल 2015, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के लिल (LILLE) स्थित NEUVE-CHAPELLE युद्ध स्मारक गए थे. वहां उन्होंने ब्रिटिश सेना की तरफ से फ्रांस की जमीन पर मारे गए 10,000 भारतीय सैनिकों की शहादत को सलामी दी थी. ऐसा करने वाले वह पहले प्रधानमंत्री बने थे. उन्होंने कहा था कि "हमारे जवानों ने विश्वयुद्ध में विदेशी जमीन पर लड़ाई लड़ी... अपनी निष्ठा, बहादुरी और त्याग के लिए दुनिया की प्रशंसा हासिल की... मैं उन्हें सलाम करता हूं..."
  • आ गया आर्थिक समाचारों का झटकामार बुलेटिन
    शेयर मार्केट में निवेश करने वालों के लिए अच्छी खबर है. अभी एक साल से कम समय पर बेचने से टैक्स देना होता है. उसके बाद टैक्स फ्री माल हो जाता है. सरकार विचार कर रही है कि अब शेयर खरीदने के तीन साल के भीतर बेचने पर टैक्स लिया जाए ताकि आपको ज्यादा से ज्यादा टैक्स देने का मौका मिले. अभी तक सरकार एक साल के भीतर बेचने पर ही टैक्स लेकर आपको टैक्स देने के गौरव से वंचित कर रही थी.
  • IND VS SA: कारवां क्यों लुटा केपटाउन टेस्ट में?
    केपटाउन में भारत की हार का विश्लेषण करने में दिक्कत आ रही है. यह पहला टैस्ट मैच था. अभी दो और खेलने हैं. इतना ही नहीं टी20 और वन डे भी खेलने हैं. इसलिए इस हार का विश्लेषण दक्षिण अफ्रीका दौरे में आगे की रणनीति बनाने के लिहाज से भी है.  देखने की बात यह होगी कि विराट कोहली एंड कंपनी केपटाउन के हाल से कितना सबक लेकर आगे बढ़ती है.
  • समलैंगिकता पर फैसले से संसद की सर्वोच्चता दांव पर
    समलैंगिकता को कानूनी मान्यता दिये जाने के लिए दायर दो साल पुरानी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने प्राइवेसी पर फैसले में जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस नरीमन और जस्टिस कौल ने संविधान के अनुच्छेद 21 में दिये गये जीवन के अधिकार के तहत समलैंगिकता समेत अनेक अधिकारों की चर्चा की थी. प्राइवेसी के कानूनी हक के बाद सुप्रीम कोर्ट को आधार पर फैसला देना है और संसद को डेटा सुरक्षा पर कानून बनाना बाकी है और अब समलैंगिकता का मामला भी नए तरीके से सुनवाई के लिए आ गया है.
  • आईआईटी, कानपुर : अपनों पर रहम और छात्रों पर सितम
    देश के सबसे बेहतरीन तकनीकी संस्थानों में से एक आईआईटी कानपुर अपने 22 मेधावी छात्रों को रैगिंग में शामिल होने के आरोप में एक से तीन साल तक के लिए निष्कासित कर देता है. हैरानी की बात तो ये है कि इन मेधावी छात्रों पर रैगिंग का आरोप लगाकर इनको सजा सुना दी गई, लेकिन आईआईटी प्रशासन अपने भीतर की लापरवाहियों को नहीं देखना चाहता है.
  • बीजेपी को 2019 के चुनाव में पूर्वोत्तर राज्यों से उम्मीद
    बीजेपी को पता है कि अगर लोकसभा में बीजेपी को 2014 का प्रदर्शन दोहराना है तो पूर्वोत्तर राज्यों में उसे बेहतरीन प्रदर्शन करना होगा. यही कारण है कि बीजेपी पूर्वोत्तर में पहली बार असम जीत से खुले द्वार से सभी राज्यों में अपनी मज़बूत पकड़ बनाना चाहती है.
  • पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ट्रंप ज़िंदाबाद तो भारत के ख़िलाफ़...?
    दो दिन बीते नहीं कि अब ख़बर ऐसी आ रही है जो भारतीयों के लिए अच्छी नहीं है. उम्मीद है भारत के चैनल अब ट्रंप और मोदी को साथ साथ यानी अगल बगल में नहीं दिखाएंगे. दोनों को आमने सामने दिखाएंगे.
  • अरविंद केजरीवाल और कुमार विश्वास के बीच 'जंग' ले सकती है 'घमासान' का रूप
    इस वक्त भले ही अरविंद केजरीवाल का पलड़ा भारी हो, लेकिन अब दोनों ही पक्ष अपना-अपना खेल खेलेंगे. इस माहौल में 'जानी-मानी हस्तियों' ने तो इंकार करना ही था...
  • 'ट्रेन में ठंड से कंपकपी छूट रही थी... एक अनजाने हाथ ने आकर चादर डाल दी...'
    एक रात जब आप रेल के सफर में हों और चादर छूट जाए तो. स्लीपर कोच में सर्द हवाओं और अंदर से उठती हल्की सी कंपकंपी से बचने का सिवाए एक ही रास्ता कि आप अपने शरीर को सिकोड़ लें, घुटनों को उपर तक लें आएं या बैग में पड़े कुछ कपड़ों का जुगाड़ करने का सोचें. इस स्थिति में ऐसा भी हो सकता है कि अनजाना सा हाथ आपके शरीर पर बिना कोई जान-पहचान के आपके सिकुड़े हुए शरीर पर चादर फैला दे और उसके बाद आप सुकून से आपकी रात गुजर जाए.
  • स्टेट बैंक ने आपकी गरीबी पर जुर्माना वसूला 1,771 करोड़
    जब आप पैसे बैंक में रखते हैं, तो कहा जाता है कि कम रखा है, अब जुर्माना भरो. ज़्यादा रखेंगे तो ब्याज़ कम दिया जाएगा. आप देखिए कि आप अपनी आर्थिक स्वतंत्रता गंवा रहे हैं या पा रहे हैं...? क्या ग़रीब होने का जुर्माना लगेगा अब इस देश में...?
  • 18 साल के मतदाताओं के नाम रवीश कुमार का एक खुला खत
    मतदाता बनना प्रतिशत में गिना जाना नहीं होता है. अच्छा मतदाता वह होता है जो वोट देने से पहले काफी मेहनत करता है. तर्कों का इस्तेमाल करता है, तरह-तरह की पहचान के नाम पर भड़काई गई भावुकता में नहीं बहता है.
  • कैलेंडर का भी है अपना भरा पूरा इतिहास
    दुनिया में इस समय सैकड़ों कैलेंडर अस्तित्व में हैं, जिनमें हमारे अपने यानी भारतीय पंचांग भी हैं. लेकिन फिलहाल मौका अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से साल बदलने का है. सो मौके के लिहाल से इस पर नजर डालना प्रासंगिक है...
  • मौत की कीमत आप क्या जानो कमिश्नर साहब!
    मुंबई के कमला मिल से जो लाशें उठी हैं, उन्हें देख आप सिहर जाएंगे.  हो सकता है मुंबई के बीएमसी कमिश्नर भी सिहर पड़े हों या ये भी हो सकता है कि उनके लिये सिर्फ नंबर मायने रखते हों या फिर ये कि कौन मरा है. अदना हो या आला, नौजवान की अर्थी उठाना शायद दुनिया में दर्द का पहाड़ उठाने जैसा है. मौत कमला मिल में हुई हो या कुर्ला में, दर्द उतना ही था कमिश्नर साब. हमें दोनों हादसों के दर्द का अहसास है, लेकिन शायद आप मीडिया में बड़ी होती हेडलाइन के हिसाब से ड्यूटी बजाते हैं. वरना क्या वजह हुई कि इसी महीने किसी एक फरसाण की दुकान खाक होने पर आपने मुस्तैदी नहीं दिखाई. वहां भी लोग झुलस कर मरे थे. 
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