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विचार
  • आक्रोश जायज़ है पागलपन नहीं
    रवीश कुमार
    केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल ने शहीदों की सूची जारी की है. एक तरफ शहीदों के नाम हैं. बगल में गांव, कस्बे और ज़िले का पता है. सबसे किनारे उन पत्नियों के नाम हैं जिनके फोन नंबर हैं. इन्हीं नंबरों पर पतियों के होने का फोन आता रहा होगा, इन्हीं नंबरों पर अंतिम बार सूचना आई होगी.
  • अर्ध सैनिक बलों को पूर्ण सैनिक का सम्मान मिले इसके लिए भी लड़ें हम
    रवीश कुमार
    सीआरपीएफ हमेशा युद्धरत रहती है. माओवाद से तो कभी आतंकवाद से. साधारण घरों से आए इसके जाबांज़ जवानों ने कभी पीछे कदम नहीं खींचा. ये बेहद शानदार बल है. इनका काम पूरा सैनिक का है. फिर भी हम अर्ध सैनिक बल कहते हैं. सरकारी श्रेणियों की अपनी व्यवस्था होती है. पर हम कभी सोचते नहीं कि अर्ध सैनिक क्या होता है. सैनिक होता है या सैनिक नहीं होता है. अर्ध सैनिक?
  • दौरा, दौरा, दौरा, दौड़ते ही रह गए प्रधानमंत्री, कार्यकाल का एक तिहाई इसी में कटा
    रवीश कुमार
    प्रधानमंत्री ने अपने कार्यकाल का कितना हिस्सा यात्राओं में बिताया इसे लेकर स्क्रोल और दि प्रिंट ने दो रिपोर्ट की है. स्क्रोल की रिपोर्ट आप ज़रूर देखें. इसलिए भी कि किस तरह डेटा जर्नलिज़्म किया जा सकता है.
  • Blog: इस कुएं को देखें और सोचें कि हम मनुष्य हुए या नहीं?
    राकेश कुमार मालवीय
    महात्मा गांधी ने कहा था ‘जब तक हम अछूतों को गले नहीं लगाएंगे हम मनुष्य नहीं कहला सकते. मगर बुंदेलखंड के इस गांव की दशा दयनीय है.
  • Valentine's Day: मौसम का जादू...बादलों से आलिंगन में बंधी धरती
    सूर्यकांत पाठक
    वेलेंटाइन डे पर भोर आंखें खोल ही रही थी कि रिमझिम फुहारों ने दिल्ली पर प्यार बरसाना शुरू कर दिया, वंसत ऋतु में प्यार के मौसम की दस्तक.
  • सीएजी की रिपोर्ट से सरकार को क्या क्लीन चिट?
    रवीश कुमार
    आज गजब हो गया. राफेल पर सीएजी की रिपोर्ट तो आई, मगर सार्वजनिक होकर भी गोपनीय नज़र आई. अभी तक दि वायर और हिन्दी में गोपनीय रिपोर्ट सार्वजनिक हो रही थी मगर आज सार्वजनिक होकर भी रिपोर्ट के कई अंश गोपनीय नज़र आए. सीएजी ने यूरो और रुपये के आगे संख्या की जगह अंग्रेज़ी वर्णमाला के वर्म लिखे हैं. इस तरह रिपोर्ट पढ़ते हुए आपको ये तो दिखेगा कि मिलियन और बिलियन यूरो लिखा है मगर मिलियन के आगे जो कोड इस्तेमाल किए हैं उसे पढ़ने के लिए जग्गा जासूस को हायर करना पड़ेगा. आप पेज 120 और 121 पर जाकर देखिए. राफेल विमान कितने में खरीदा गया, कितने का प्रस्ताव था इनकी जगह जो संकेत चिन्ह लिखे गए हैं, उन्हें पढ़ने के लिए आईआईटी में एडमिशन लेकर फेल होना ज़रूरी है.
  • कार्टून कैरेक्टर की भाषा बोल रफाल विवाद पर लीपापोती कर गई CAG
    रवीश कुमार
    सोचिए 6 फरवरी तक रक्षा मंत्रालय बता रहा है कि डील को लेकर कीमतों के बारे में नहीं बताना है. 13 फरवरी को रिपोर्ट संसद में रखी जाती है. आप चाहें तो अनुमान लगा सकते हैं कि यह सब मैनेज किए जाने की निशानी है या सीएजी आखिरी वक्त तक काम करती है. वैसे मंत्री लोग ही अलग अलग चरणों में दाम बता चुके थे.
  • 'पापा' को पीएम पसंद हैं...
    अखिलेश शर्मा
    मुलायम सिंह यादव ने वह कह दिया जो कोई सोच भी नहीं सकता था. उन्होंने कह दिया कि वे चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनें. मुलायम ने यह बात सोलहवीं लोकसभा के विदाई भाषण में कही. एक ऐसी बात जो बीजेपी नेताओं के कानों में मधुर सुर की तरह गूंजी तो, वहीं विपक्ष के कानों में कर्कश राग की तरह. यह ऐसी बात है जो सपा-बसपा गठबंधन से तगड़ी चुनौती झेल रही बीजेपी उत्तर प्रदेश में एक ब्रहास्त्र की तरह इस्तेमाल कर सकती है. खासतौर से उन यादव मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए जिन पर शिवपाल सिंह यादव पहले से ही डोरे डालने को तैयार बैठे हैं. मुलायम के बयान के राजनीतिक निहितार्थ के बारे में आगे बात करेंगे, लेकिन पहले आइए सुन लेते हैं उन्होंने क्या क्या कहा.
  • राफेल पर सीएजी रिपोर्ट-  सौदा फ़्रांस सरकार से, लेकिन मुक़दमा रफ़ाल से
    प्रियदर्शन
    इस गारंटी का बैंक चार्ज कई मिलियन यूरो का होता. दसॉ के मुताबिक बैंक दर 1.25 फ़ीसदी सालाना होती जबकि भारतीय बातचीत टीम के मुताबिक यह .38% पड़ती. यही नहीं, 2007 में परफॉर्मेंस गारंटी और वारंटी का भी प्रावधान था जिसके मुताबिक कंपनी को कुल करार की क़ीमत की  10 फ़ीसदी गारंटी देनी पड़ती. यह गारंटी सारी आपूर्ति होने तक चलती जिसका कुल समय करीब 5.5 साल होता. जब ये गारंटियां नहीं रहीं तो इस बचत का फायदा किसको मिला? सीएजी की रिपोर्ट नोट करती है कि इसका फायदा दसॉ ने उठा लिया, मंत्रालय को नहीं दिया.
  • बेरोज़गारी के आंकड़े क्यों छुपा रही है सरकार?
    रवीश कुमार
    बेरोज़गारी से ही कहना होगा कि अगर वह कहीं है तो सरकार को दिख जाए. क्योंकि सरकार के पास नौकरियों के जो आंकड़े हैं उससे लगता है कि बेरोज़गार नौकरी लेकर मुझसे व्हाट्सऐप मैसेज से मज़ाक करते रहते हैं कि हमारी ख़बर दिखा दीजिए.
  • रफ़ाल विमान सौदे में नियम ताक़ पर रखे गए?
    रवीश कुमार
    रफाल मामले की कहानी 360 डिग्री घूम कर फिर से वहीं पहुंच गई है. क्या ऐसा सुना था आपने कि पहले प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में रक्षा मामले की मंत्रिमंडल समिति जिन शर्तों के साथ डील को पास करे, उसके कुछ दिनों बाद रक्षा मंत्रालय की समिति उन शर्तों को हटा दे.
  • किसके लिए रफाल डील में डीलर और कमीशनखोर पर मेहरबानी की गई?
    रवीश कुमार
    सरकार बार-बार कहती है कि रफाल डील में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है. वही सरकार एक बार यह भी बता दे कि रफाल डील की शर्तों में भ्रष्टाचार होने पर कार्रवाई के प्रावधान को क्यों हटाया गया? वह भी प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली रक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में इसे हटाया गया.
  • राहुल की सबसे बड़ी चुनौती तो कांग्रेस के अंदर ही है!
    प्रियदर्शन
    इस बात को बहुत साफ़ ढंग से कहा जाना चाहिए कि राजनीति में शालीनता का न्यूनतम निर्वाह ज़रूरी है. सिर्फ़ शराफ़त के तक़ाज़े से नहीं- हालांकि यह तक़ाज़ा भी ज़रूरी है- रणनीति के लिहाज से भी. क्योंकि जब आप किसी के लिए अवज्ञा भरे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं तो उससे पहले आपके बारे में राय ख़राब होती है.
  • रफाल का एक और सच हुआ बाहर
    रवीश कुमार
    इस नोटिंग में रक्षा सचिव इस बात पर एतराज़ ज़ाहिर करते हैं कि अगर प्रधानमंत्री कार्यालय को भरोसा नहीं है तो वह डील के लिए अपनी कोई नई व्यवस्था बना ले. जाहिर है जो कमेटी कई साल से काम कर रही है, अचानक उसे बताए बगैर या भंग किए बगैर प्रधानमंत्री कार्यालय सक्रिय हो जाए तो किसी को भी बुरा लगेगा.
  • वे कविता पढ़ रहे थे और उनकी पुलिस कवि को अगवा कर रही थी
    प्रियदर्शन
    जिस समय लोकसभा में राष्ट्रपति के भाषण पर चर्चा का जवाब देते समय अपनी पीठ ठोकते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिना नाम लिए सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता पंक्तियां दुहरा रहे थे- कि मैं सूरज को डूबने नहीं दूंगा, लगभग उसी समय झूंसी में यूपी सरकार की पुलिस एक कवि अंशु मालवीय को अपहर्ताओं की तरह एक कार्यक्रम के बीच से उठा कर गाड़ी में डाल कर कहीं ले जा रही थी.
  • प्रधानमंत्री मोदी ने भी 356 लगाकर विरोधी दल की सरकारें गिराई हैं
    रवीश कुमार
    प्रधानमंत्री मोदी इस आधार पर भाषण की शुरूआत करते हैं कि जनता को सिर्फ वही याद रहेगा जो वह उनसे सुनेगी. उनका यकीन इस बात पर लगता है और शायद सही भी हो कि पब्लिक तो तथ्यों की जांच करेगी नहीं, बस उनके भाषण के प्रवाह में बहती जाएगी. इसलिए वे अपने भाषण से ऐसी समां बांधते हैं जैसे अब इसके आर-पार कोई दूसरा सत्य नहीं है. लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के जवाब में उनका लंबा भाषण टीवी के ज़रिए प्रभाव डाल रहा था मगर इस बात से बेख़बर कि जनता जब तथ्यों की जांच करेगी तब क्या होगा.
  • बंगाल में मर्यादाएं लांघकर सीबीआई और पुलिस को किया जा रहा बर्बाद
    मनीष कुमार
    पश्चिम बंगाल में पिछले रविवार से लेकर अभी तक जो कुछ चल रहा है वह चिंताजनक है. बंगाल में सत्ता पर काबिज तृणमूल को भाजपा धूल चटाना चाहती है और सारी लड़ाई की जड़ में यही है. भाजपा का आकलन है जब तक तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी को सारदा घोटाले में फंसाया नहीं जाता तब तक बंगाल पर विजय का परचम फहराने का उनका कई दशक का सपना पूरा नहीं हो पाएगा.
  • चिट फंड घोटाला पीड़ितों को राहत के लिए कोई क़ानून क्यों नहीं बना?
    रवीश कुमार
    गुजरात की आबादी 6 करोड़ से कुछ अधिक है. कल्पना कीजिए पूरे राज्य के लोगों को एक कंपनी ठग ले और राज्य की तमाम संस्थाएं कुछ न कर सकें. पीएसीएल कंपनी ने 5 करोड़ 85 लाख लोगों के लाखों करोड़ लूट लिए. तीन साल हो गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मगर वही आदेश पूरी तरह लागू नहीं हो सका और लोगों के पैसे नहीं मिल सके.
  • सबकी लापरवाही ने मिलकर ली थी अमृतसर में 58 लोगों की जान
    रवीश कुमार
    रिपोर्ट की ईमानदारी बताती है कि किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले वह उन प्रक्रियाओं को खोजती है जिससे छेडछाड़ करने के नतीजे में 58 लोग कटकर मर जाते हैं. क्या पता इन लापरवाहियों के कारण आज भी इसी तरह की ट्रेन दुर्घटनाएं हो रही हों. अगर आप इस रिपोर्ट में किसी एक को नाप देने की हेडलाइन खोज रहे हैं तो निराशा होगी लेकिन यह रिपोर्ट किसी एक को भी नहीं छोड़ती है.
  • गरीब सवर्णों को आरक्षण का नहीं, लागू करने के तरीके का विरोध कर रहे हैं...
    तेजस्वी यादव
    अगर आपका सांसद पिछड़ा और दलित है तो उसे अपने क्षेत्र में मत घुसने दो, क्योंकि उन्होंने आपके और बहुजनों का आरक्षण बढ़ाने की मांग नहीं की. ऐसे कायर और डरपोक लोग आपके सांसद बनने के लायक नहीं हैं.
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