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विचार
  • फ़ीस वृद्धि का दौर शुरू हो गया, चुनाव ख़त्म हो गया है...
    रवीश कुमार
    नेशनल लॉ स्कूल की फ़ीस बढ़ा दी गई है. हर साल की फ़ीस 50 हज़ार महंगी हो गई है. डिजिटल इंडिया के छात्रों को इंटरनेट फ़ीस साढ़े बारह हज़ार देने होते हैं और लाइब्रेरी फ़ीस के लिए दस हज़ार. 27 फ़ीसदी वृद्धी हुई है. पांच साल की पढ़ाई ढाई लाख और महंगी हो गई है. छात्रों ने मुझे मैसेज किया है.
  • अपने समय से पीछे रह गए लोगों के लिए समय से आगे की ख़बरें
    रवीश कुमार
    उस छोटी सी जगह में रोज़ 9 से 10,000 गाड़ियां आती हैं. 1500 बसें आती हैं. 80,000 लोग आते हैं. 14 से 24 घंटे तक कतार में इंतज़ार करते हैं. तब जाकर दर्शन करते हैं. व्यस्तता से भरी इस दुनिया के इसी समय में दर्शन के लिए 24 घंटे कतार में होने का धीरज कहीं बचा हुआ है. वैसा ही जैसा हज़ारों वर्ष पूर्व रहा होगा.
  • सीतारमण का नया भजन, ट्रिलियन ट्रिलियन ठन ठन
    रवीश कुमार
    5 से तुकंबदी बिठानी थी. इसलिए वाक्य से 70 हटा दिया गया. 2014-19 के बीच चला कि 70 साल में कुछ नहीं हुआ. 2019 में बजट में कहा गया कि 55 साल में जो नहीं हुआ वो 5 साल में हो गया. 2 साल बाद जब मोदी सरकार के सात साल हो जाएंगे तो 70 साल बनाम 7 साल का जुमला फिट बैठेगा.
  • राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के पास कोई 'प्लान बी' नहीं...
    स्वाति चतुर्वेदी
    एक ओर राहुल गांधी ने जहां अपने फैसलों पर अडिग रहकर राजनीति में अपनी विश्‍वसनीयता को बनाए रखा, तो वहीं दूसरी ओर उनके इस दृढ़ निश्‍चय ने उनकी ही पार्टी की 'दयनीय' हालत की तरफ सबका ध्‍यान खींचा है.
  • मोदी सरकार का ये आर्थिक सर्वे क्या इशारा कर रहा है?
    रवीश कुमार
    अर्थव्यवस्था की हालत क्या है. जो ख़बरें बिजनेस अखबारों में छप रही हैं उन्हें देखकर लगता है कि चुनौतियां गंभीर होती जा रही हैं. लगातार 9 महीने से ऑटोमोबिल कंपनियों में उत्पादन ठप्प है. लघु एवं मझोले उद्योग का विकास रुक गया है. इनके लिए लोन की कमी हो गई है. जिन संस्थाओं से लोन मिलता है, उनकी हालत खराब है. एकर आरटीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2019 में दूसरी तरफ मुदा लोन का एनपीए 126 प्रतिशत बढ़ा है. बैंकों की अपनी पूंजी लड़खड़ा रही है. वो सरकार की मदद पर निर्भर है.
  • ...और इस तरह जलवायु परिवर्तन के प्रश्नों पर बनता गया मेरा ज्ञान तंत्र
    रवीश कुमार
    नदियों और जल के बारे में अनुपम मिश्र से कितना कुछ जाना. उनके संपर्क के कारण इस विषय से जुड़े कई बेहतरीन लोगों से मिला. चंडी प्रसाद भट्ट जी के संपर्क में आया, उनके काम को जाना. अनुपम जी के कारण ही ऐसे कई लोगों को जाना जो इस समस्या की आहट को पहले पहचान चुके थे और बचाने की पहल कर रहे थे. 'आज भी खरे हैं तालाब' का मुक़ाबला नहीं.
  • CTN यानि CLEAN THE NATION, ठीक जैसे ऑरवेल के 1984 की THOUGHT POLICE
    रवीश कुमार
    नाज़ी दौर के इतिहास को पलटिए आपको एक शब्द मिलेगा Cleansing जिसे यहूदियों की सफाई के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता था. उनकी बस्तियों की Cleansing से लेकर नस्ल की Cleansing तक का संदर्भ आपको जगह-जगह मिलेगा. आबादी के एक हिस्से को मिटा देने को Cleansing कहते हैं. जार्ज ऑरवेल की एक किताब है 1984. उसका कोई भी पन्ना आप पढ़ लें. एक Thought Police का ज़िक्र आता है, विचार पुलिस कह सकते हैं.
  • क्या गांधी परिवार से बाहर कोई कांग्रेस का नेतृत्व कर सकता है?
    रवीश कुमार
    कितनी आसानी से कई नेता कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में चले गए. आना जाना लगा रहता है मगर एक दूसरे दल में जाने की बेचैनी बता रही है कि कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता के भीतर कांग्रेस नहीं है. उसकी विचारधारा बहुत कमज़ोर पड़ चुकी है. पार्टी में बचे हुए नेता पार्टी के लिए कम बीजेपी में जाने के लिए ज़्यादा बचे हुए हैं. उनके भीतर अगर कांग्रेस होती तो वे रूकते.
  • धोनी को रिटायर होने की जो सलाह दी जा रही है, वह कितनी जायज़ है?
    प्रियदर्शन
    विश्व कप के कुछ मैचों में दूसरों की उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने की वजह से जो लोग महेंद्र सिंह धोनी को रिटायर होने की सलाह दे रहे हैं, उन्हें कुछ बातें याद दिलाना ज़रूरी है. 2005 के बाद से लगातार सचिन तेंदुलकर को सलाह दी जाती रही कि वे रिटायर हो जाएं. 2007 के विश्व कप के बाद सचिन ने लगभग तय कर लिया था कि अब वे नहीं खेलेंगे. उन तीन मैचों में वे बस 60-70 रन बना पाए थे. लेकिन तब विवियन रिचर्ड्स ने उन्हें कहा कि वे खेलते रहें, किसी की सुनने की जरूरत नहीं है. सचिन ने यह बात मानी- वनडे और टेस्ट क्रिकेट को मिलाकर सौ शतक पूरे किए, 2011 का वर्ल्ड कप टीम के साथ उठाया और अंततः एक अविश्वसनीय क्रिकेट करिअर पूरा कर बल्ला रखा.
  • मोदी जी को महामानव बनाने के लिए ब्रह्मास्त्र के रूप में निकलते हैं सूत्र...!
    अनुराग द्वारी
    मौजूदा नेतृत्व गांधी नहीं है, हो भी नहीं सकता... उसमें आज़ादी के जश्न में डूबे देश के बीच, नोआखली में आग बुझाने के सामर्थ्य, ताक़त, जज़्बे की कल्पना भी मुश्किल है... वह गांधी जी की इस बात को शायद सुनना भी पसंद न करें - 'सत्ता से सावधान होने की ज़रूरत है, यह भ्रष्ट बनाती है...' भले ही आज के दौर में सूत्र पत्रकार खान मार्केट और लुटियन पत्रकारों की बात करें, लेकिन यह भी सच है कि जो सत्ता के नज़दीक रहा, अभिजात्य हुआ...
  • भारी बारिश से क्‍यों नहीं निपट पाती मुंबई?
    रवीश कुमार
    अगले 48 घंटे में मुंबई और महाराष्ट्र में भारी से अति वृष्टि होने वाली है. मंगलवार को मुंबई, पुणे सहित महाराष्ट्र भर में दीवार गिरने से 31 लोगों की मौत हो गई. पुणे में पिछले हफ्ते दीवार गिरने से 17 लोगों की मौत हो गई थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बारिश के कारण महाराष्ट्र भर में दीवार गिरने से 46 लोगों की मौत हुई है. मुंबई में ही बारिश के कारण अलग-अलग दुर्घटनाओं में 25 से अधिक लोगों की मौत हो गई है. ये सभी मज़दूर हैं इसलिए मात्र संख्या हैं. मुंबई में 30 जून और 1 जुलाई को जो बारिश हुई है वो दस साल में सबसे अधिक है. जुलाई भर में जितनी बारिश होती है उतनी बारिश मुंबई में सिर्फ दो दिनों के भीतर हो गई है. 2 जुलाई को भी खूब बारिश हुई जिसके कारण कई इलाकों में पानी भर गया. महानगर में सार्वजिनक छुट्टी की घोषणा कर दी गई है.
  • पेशेवर नौकरशाहों का भी समुचित उपयोग ज़रूरी
    डॉ विजय अग्रवाल
    सन् 1991 में देश की आर्थिक नीति में हुए 360 डिग्री बदलाव का एक अत्यंत अव्यावहारिक पहलू यह रहा कि उसके अनुकूल प्रशासनिक व्यवस्था में परिवर्तन करने की कोई बड़ी कोशिश नहीं की गई. ऐसा इसके बावजूद रहा कि प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1969) तथा द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2010) ने ऐसा करने के लिए कहा था. इन आयोगों का संकेत सरकारी सेवा को प्रोफेशनल बनाए जाने की ओर था.
  • पर्दे पर निर्देशक की वापसी की फिल्म है 'आर्टिकल-15'
    रवीश कुमार
    'आर्टिकल-15' में अनुभव ने उसी उत्तर प्रदेश के सींग को सामने से पकड़ा है, जहां से देश की राजनीति अपना खाद-पानी हासिल करती है. फ़िल्म का एक किरदार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शैली में बोलता है. फ़िल्म अपनी शूटिंग के लिए योगी आदित्यनाथ का शुक्रिया भी अदा करती है. फ़िल्म बॉब डेलन को समर्पित है. एक आदमी को आदमी बनने के लिए आख़िर कितने सफ़र पूरे करने होंगे. उत्तर प्रदेश के आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे से फ़िल्म शुरू होती है.
  • ऐसे माहौल में कैसे काम करेगा अफसर?
    रवीश कुमार
    इंदौर नगर निगम के कर्मचारियों पर बल्ला चलाने के आरोप में जेल बंद आकाश विजयवर्गीय जब बाहर आए तो कहा कि उन्हें पछतावा नहीं है लेकिन अब वे गांधी के रास्ते पर चलेंगे. वैसे गांधी के रास्ते में प्रायश्चित करना भी था. यही क्या कम है कि आज भी लोग गांधी के रास्ते पर चलना चाहते हैं. बस उस रास्ते पर अब गांधी नहीं मिलते हैं. प्रधानमंत्री मोदी पर कांग्रेस ने चौकीदार चौर है का आरोप लगाया तो उन्होंने मैं भी चौकीदार हूं का नारा दिया. इसी से प्रेरित होकर एक गायक ने विधायक आकाश विजयवर्गीय के समर्थन में म्यूज़िक वीडियो लांच किया है. मेरी गुजारिश है कि आकाश को सुपर हीरो बनाने वाले इस वीडियो को आप जब देखें तो गाना समाप्त होने तक चुप रहें और गाना जब समाप्त हो जाए तो उसके बाद भी चुप रहें.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग : मुझे यकीन है, भारत-इंग्लैंड मैच फिक्स नहीं था...
    रवीश कुमार
    मैंने मैच नहीं देखा. मुझे यक़ीन है कि मैच फ़िक्स नहीं था. भारतीय टीम कभी ऐसा नहीं करेगी. जर्सी पर जिस कंपनी का नाम होता है, वह भले कुछ भी कर सकती है. लोगों के पैसे लेकर भाग सकती है. घटिया प्रोडक्ट बेच सकती है, मगर टीम ऐसा नहीं करेगी. टीम की निस्वार्थता असंदिग्ध है.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग : भारतीय न्यूज़ चैनलों को रास्ता दिखाया है अमेरिकी कंपनी ने...
    रवीश कुमार
    अमेरिका की एक बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है WAYFAIR (वे-फेयर). इस कंपनी के कर्मचारियों को पता चला कि इसे डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से दो लाख डॉलर का बिज़नेस आर्डर मिला है. ट्रंप प्रशासन उन शिविरों के लिए बिस्तर वगैरह ख़रीद रहा था, जिन्हें क़ैद कर रखा गया है. अमेरिकी मीडिया में ख़बरें आ रही हैं कि बच्चों के साथ अमानवीय बर्ताव हो रहा है. जगह की साफ-सफाई नहीं है और उन्हें बासी खाना दिया जाता है. कंपनी के कर्मचारियों को जब इस बिज़नेस करार की ख़बर लगी, तो 500 कर्मचारियों ने अपने बॉस को पत्र लिखा कि यह अनैतिक है और कंपनी इस बिज़नेस से होने वाले मुनाफे को दान करे. कर्मचारियों ने काम करने की जगह छोड़ दी और बाहर आ गए.
  • प्रकृति की गोद में 'जन्नत' की सैर जैसा है चंद्र नाहान ट्रेक
    समरजीत सिंह
    करीब 15 किलोमीटर के इस ट्रेक में आप कई बार थकेंगे, सोचेंगे आखिर इतनी चढ़ाई क्यों ही करनी, इससे बेहतर तो दिल्ली का एयर कंडीशनर वाला रूम ही सही था,लेकिन यकीन मानिये इन सभी अनुभवों के बीच जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे आपके दिलोदिमाग से दिल्ली और वह एयर कंडीशन वाला रूम निकलता जाएगा. आप पहाड़ के हर अगले मोड़ पर खुदको रोमांचित महसूस करेंगे. 
  • क्या दुनिया पहले से ज्यादा बंटी हुई है?
    रवीश कुमार
    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक इंटरव्यू आया है. यह इंटरव्यू उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स को दिया है. जापान के ओसाका में होने वाली जी-20 की बैठक में जाने से पहले पुतिन का यह इंटरव्यू कई मायनों में अहम लगता है. पुतिन ने साफ-साफ कहा है कि उदारवाद का दौर समाप्त हो चुका है. अब इसमें कोई ताकत नहीं बची है. उदारवाद को बचे रहने का हक है मगर आज के समय में उसकी भूमिका क्या है. पुतिन तो यह भी कह रहे हैं कि बहुसंस्कृतिवाद के भी दिन लद गए हैं, जनता इसके खिलाफ है.
  • राज्यसभा की कार्यवाही से हटाएं शेर, वरना ग़ालिब के नहीं उड़ेंगे पुर्जे, प्रधानमंत्री पर उठेंगे सवाल
    प्रियदर्शन
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए राज्यसभा में जो भाषण दिया, वह अब राज्यसभा के रिकॉर्ड का हिस्सा हो चुका है. इस रिकॉर्ड में प्रधानमंत्री के सौजन्य से ग़ालिब के नाम एक ऐसा शेर दर्ज है जो ग़ालिब का नहीं है. दरअसल यह क़ायदे से शेर भी नहीं है. शेर का अपना एक अनुशासन होता है जिससे शायरी की दुनिया से सामान्य परिचय रखने वाले लोग भी मोटे तौर पर परिचित होते हैं.
  • कश्मीर की कश्मकश...
    ऋचा जैन कालरा
    हाल में ही जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक नया शिगूफा छेड़ा कि हुर्रियत कांफ्रेस सरकार से बातचीत के लिए तैयार है. उन्होंने ये भी दावा किया कि घाटी में पिछले एक साल में हालात संभले हैं. इसके बाद हुर्रियत कांफ्रेस के चैयरमेन मीरवाइज़ उमर फारूख़ ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि वो बातचीत का स्वागत का करते हैं और हुर्रियत हमेशा कश्मीर समस्या सुलझाने के लिए इसका समर्थन करती है. लेकिन इस पर केंद्र सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं हुई है.
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