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विचार
  • प्रधानमंत्री जी, बैंकों के लाखों करोड़ न चुकाने वाली कंपनियां कौन हैं, मालिक कौन हैं?
    रवीश कुमार
    क्या प्रधानमंत्री उन कंपनियों के नाम ले सकते हैं जिन्होंने भारत की जनता के जमा पैसे से सस्ती दरों पर लोन लिया और उस लोन का दस लाख करोड़ बैंकों को वापस नहीं किया? क्या वित्त मंत्री उन कंपनियों के नाम ले सकते हैं? क्या अमित शाह नाम ले सकते हैं? क्या कांग्रेस से राहुल गांधी, चिदंबरम नाम ले सकते हैं? जब ये दोनों नेता लोन लेकर भागने वालों के नाम नहीं ले सकते हैं तो फिर ये बहस हो किस चीज़ की रही है?
  • हे राजन! तब तुम्हीं थे न जो राजन का मज़ाक उड़ा रहे थे, राजन को ज़िम्मेदार बता रहे थे?
    रवीश कुमार
    अप्रैल 2015 में हिन्दुस्तान टाइम्स ने लिखा था कि रघुराम राजन ने नॉन परफॉर्मिंग असेट के कुछ हाई-प्रोफाइल फ्रॉड की सूची प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपी थी. मांग की थी कि जांच हो और कुछ को जेल भेजा जाए. अखबार के अनुसार राजन ने 17,500 करोड़ के फ्रॉड के बारे में सूचना दी थी. इसमें विनसम डायमंड एंड ज्वेलरी, ज़ूम डेवलपर्स, तिवारी ग्रुप, सूर्य विनायक इंडस्ट्री, डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग, फर्स्ट लीजिंग कंपनी ऑफ इंडिया, सूर्या फार्मा. इन कंपनियों के नाम हिन्दुस्तान टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा था. दो साल बाद विनसम डायमंड के खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज किया था.
  • आरोप-प्रत्यारोप के दौर में बैकफुट पर सरकार
    मनोरंजन भारती
    मौजूदा हफ्ता राजनैतिक पत्रकारों के लिए लॉटरी से कम नहीं रहा... पहले लगातार पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें सुर्खियों में रहीं. तेल की कीमत आसमान छू रही है ..जनता परेशान है, सरकार से उम्मीद बांधे है कि शायद सरकार ही कुछ रहम कर दे. मगर केन्द्र सरकार ने जरा भी राहत देने से मना कर दिया.
  • बैंकों का एनपीए बढ़ने के लिए कौन है ज़िम्मेदार?
    रवीश कुमार
    बैंकों ने जितना लोन दिया, उस लोन का जितना हिस्सा बहुत देर तक नहीं लौटता है तो वह नॉन परफार्मिंग असेट हो जाता है. जिसे एनपीए कहते हैं. एनपीए को लेकर यूपीए बनाम एनडीए हो रहा है. लेकिन जिसने इन दोनों सरकारों में लोन लिया या नहीं चुकाया, उसका तो नाम ही कहीं नहीं आ रहा है. 2015 में जब आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल ने भारतीय रिज़र्व बैंक से पूछा था कि लोन नहीं देने वालों के नाम बता दीजिए तो रिजर्व बैंक ने इंकार कर दिया था. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने नाम बताने के लिए कहा था. क्या यह अजीब नहीं है कि जिन लोगों ने लोन नहीं चुकाया उनका नाम राजनीतिक दल के नेता नहीं लेते हैं. न प्रधानमंत्री लेते हैं न राहुल गांधी लेते हैं न अमित शाह नाम लेते हैं. क्या यह मैच फिक्सिंग नहीं है. असली खिलाड़ी बहस से गायब है और दोनों तरफ के कोच भिड़े हुए हैं.
  • ...तो हर इंग्लैंड दौरे में कुछ ऐसा ही हाल होगा!
    मनीष शर्मा
    इंग्लैंड के खिलाफ हालिया संपन्न पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के आखिरी टेस्ट की दूसरी पारी में केएल राहुल और ऋषभ पंत ने अपनी शतकीय पारियों से सीरीज की स्कोर लाइन 3-2 करने की भरपूर कोशिश की, लेकिन आखिर में भारत को 4-1 से हार का कलंक वहन करने पर मजबूर होना पड़ा.
  • बीजेपी और कांग्रेस के बीच अब राष्ट्रवाद को लेकर नई जंग
    अखिलेश शर्मा
    हिंदुत्व के बाद अब बीजेपी और कांग्रेस में राष्ट्रवाद को लेकर नई जंग छिड़ गई है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह लगातार तथाकथित शहरी नक्सलियों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं तो वहीं कांग्रेस सेना में डेढ़ लाख पदों की कटौती को लेकर बीजेपी के राष्ट्रवाद पर सवाल उठा रही है.
  • राफेल डील: क्या पीएम को खुद सौदा तय करने का अधिकार?
    रवीश कुमार
    फ्रांस की कंपनी दास्सो से खरीदे जाने वाले रफाल लड़ाकू विमान को लेकर फिर से अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा और प्रशांत भूषण ने प्रेस कांफ्रेंस की है. तीनों की यह दूसरी प्रेस कांफ्रेंस है. पहले सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए सौदे का डिटेल नहीं दिया जा सकता है, लेकिन बाद में याद दिलाया गया कि रक्षा राज्य मंत्री तो नवंबर 2016 में ही संसद में रफाल विमान का दाम बता चुके थे. हाल ही में अरुण जेटली ने ब्लॉग लिखकर कांग्रेस को घेरा है. उसके बाद विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने भी लेख लिखा है. हम उन लेख में उठाए गए प्रश्नों और दावों के बारे में संक्षेप में बात करेंगे, लेकिन पहले सुनते हैं कि प्रशांत भूषण ने आज प्रेस कांफ्रेंस क्यों की.
  • 10 साल में UPA से ज़्यादा 4 साल में NDA ने उत्पाद शुल्क चूस लिया...
    रवीश कुमार
    तेल की बढ़ी क़ीमतों पर तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तर्क है कि यूपीए सरकार ने 1.44 लाख करोड़ रुपये तेल बॉन्ड के ज़रिए जुटाए थे,जिस पर ब्याज की देनदारी 70,000 करोड़ बनती है. मोदी सरकार ने इसे भरा है. 90 रुपये तेल के दाम हो जाने पर यह सफ़ाई है तो इसमें भी झोल है. सरकार ने तेल के ज़रिए 'आपका तेल' निकाल दिया है. ऑनिद्यो चक्रवर्ती ने हिसाब लगाया है कि यूपीए ने 2005-6 से 2013-14 के बीच जितना पेट्रोल डीज़ल की एक्साइज़ ड्यूटी से नहीं वसूला उससे करीब तीन लाख करोड़ ज़्यादा उत्पाद शुल्क एनडीए ने चार साल में वसूला है. उस वसूली में से दो लाख करोड़ चुका देना कोई बहुत बड़ी रक़म नहीं है.
  • डॉलर के मुक़ाबले रुपया क्यों गिरता जा रहा है?
    रवीश कुमार
    रुपया, पेट्रोल और डीज़ल ने भारत बंद का विरोध किया है. विपक्ष का भारत बंद होने के बाद भी रुपए का गिरना बंद नहीं हुआ और पेट्रोल डीज़ल के दाम का चढ़ना बंद नहीं हुआ. भारत का रुपया इस साल के 9 महीने में 12 प्रतिशत गिर चुका है और गिरता ही जा रहा है.
  • डॉलर अंडरवियर नहीं अमरीकी डॉलर महंगा हुआ है, 72.55 रु का हो गया है
    रवीश कुमार
    सोमवार को 12 बज कर 03 मिनट पर डॉलर ने भारतीय रुपये को फिर धक्का दिया है. इस समय पर रुपये का भाव ऐतिहासिक रूप से नीचे चला गया. एक डॉलर 72 रुपये 55 पैसे का हो गया. वाकई अब श्री श्री रविशंकर से कहना होगा कि वे आएं और कुछ भभूत-वभूत छिड़कें ताकि डॉलर का नशा उतर जाए.
  • सोने की दोगुनी खरीद का माजरा क्या है...?
    सुधीर जैन
    इस हफ्ते सूचना मिली कि देश में सोना खूब खरीदा जा रहा है, और बिक्री इतनी बढ़ गई है कि पिछले महीने दोगुने से भी ज़्यादा सोना विदेश से भारत में आया. यह सामान्य घटना नहीं है, लेकिन मीडिया में इस ख़बर का विश्लेषण ज्य़ादा नहीं दिखा. क्या इस घटना का आगा-पीछा नहीं देखा जाना चाहिए...?
  • एक पत्र आया है, चर्चा इस पर कीजिए
    रवीश कुमार
    यह व्यवस्था किसी साहूकार या निजी कंपनियों द्वारा नहीं चलाई जा रही है बल्कि यह व्यवस्था स्वयं शासन के द्वारा चलाई जा रही है. जी हां, मैं बात कर रहा हूं मध्य प्रदेश पॉलिटेक्निक अतिथि व्याख्याताओं के लिए बनाए गए नियमों के बारे में इन नियमों के तहत अतिथि अध्यापकों को प्रति कालखंड सिर्फ 275 का भुगतान किया जाता है. अगर किसी दिन किसी भी कारण से कक्षा नहीं लगती है तो उस दिन अतिथि व्याख्याताओं को कोई भी भुगतान नहीं किया जाता है.
  • आईटी सेल के नौजवानों तुम ये काम मत करो, छोड़ दो
    रवीश कुमार
    आईटी सेल आईटी सेल होता है. पिछले साल मेरे बयान का आधा हिस्सा काट कर ग़लत संदर्भ में पेश किया गया और उसे शेयर कर दिया था आईटी सेल के सरदार ने. ग़नीमत है कि प्रतीक सिन्हा ऑल्ट न्यूज़ वाले ने पकड़ लिया. आप भी देखिए ये काम कैसे होता है.
  • आखिर अगड़ी जातियों में इतना उबाल क्यों हैं?
    मनीष कुमार
    आज भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक दिल्ली में हो रही है. सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि आखिर पार्टी एससी-एसटी एक्ट के मुद्दे पर देशभर में अगड़ी जातियों में असंतोष के माहौल का क्या निदान ढूंढती है. किसी भी भाजपा नेता को इस बात में कोई गलतफहमी नहीं है कि 90 के दशक से अब तक हिंदी पट्टी के राज्यों में मंडल की शक्तियों और दलों से मुक़ाबला करने में भाजपा का अगर किसी वर्ग ने जमकर साथ दिया है तो वे हैं अगड़ी जातियां और इनके समूह.
  • कहां खो गए वो धरना प्रदर्शन
    रवीश कुमार
    राम नाम सत्य है... राम का नाम तब भी सत्य था अब भी सत्य है मगर जो साल था तब भी झूठ था अब भी झूठ है. वो 2013 का साल था. अजीब साल था वह. किसी भूत की तरह श्मशान से निकल आता है. सिलेंडर की अरथी निकली थी. दाम 600 के आस पास था. अब उसी सिलेंडर का दाम 833 रुपया हो चुका है, मगर शवयात्रा निकालने वाले गायब हैं. दरअसल वो अरथी का अर्थ समझ चुके हैं. वो जानते हैं कि राजनीति झूठी है, राम का नाम सत्य है.
  • 'हिंदू' राहुल से बीजेपी क्यों बेचैन?
    अखिलेश शर्मा
    क्या बीजेपी को राहुल गांधी के हिंदू दिखने से परेशानी है? यह सवाल इसलिए क्योंकि जब से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंदिरों के दर्शन शुरू किए और अब कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हैं, बीजेपी उनकी हर छोटी-बड़ी बात पर नुक्ताचीनी कर रही है.
  • समलैंगिकता के फैसले पर अनेक सवाल
    विराग गुप्ता
    सुप्रीम कोर्ट के प्रांगण में मीडिया द्वारा फोटोग्राफी निषेध है. इसके बावजूद समलैंगिकता पर फैसले के बाद पूरा परिसर इन्द्रधनुषीय रंग से सराबोर हो गया. दो वयस्‍क लोगों का निजी सम्बन्ध मानते हुए समलैंगिकता को सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया परन्तु इस फैसले के लिए अपनाई गयी कानूनी प्रक्रिया पर अनेक सवाल खड़े हो गये हैं.
  • निजता में घुसपैठ सरकार का काम नहीं
    रवीश कुमार
    कई बार सर्वोच्च अदालत के कुछ फैसलों को इसलिए नहीं पढ़ा जाना चाहिए कि वो आपके हिसाब से आया है, बल्कि इसलिए भी पढ़ा जाना चाहिए कि फैसले तक पहुंचने से पहले तर्कों की प्रक्रिया क्या है. उसकी भाषा क्या है, भाषा की भावना क्या है.
  • समलैंगिकता पर सियासत...
    अखिलेश शर्मा
    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसले में समलैंगिक संबंधों को अपराध ठहराने वाली आईपीसी की धारा 377 को समाप्त कर दिया. इस फैसले का जमकर स्वागत हो रहा है. लेकिन इस पर सियासत भी शुरू हो गई है.
  • रेलवे की परीक्षा देने से चूक गए 11 लाख नौजवान, यूपी में बीटीसी बनाम बीएड का विवाद
    रवीश कुमार
    11 लाख परीक्षार्थी रेलवे की परीक्षा नहीं दे सके. 11 लाख क्या छोटी संख्या है? 47 लाख परीक्षार्थियों में से 11 लाख परीक्षा में शामिल नहीं हो सके, यह बात हर दर्ज़े से शर्मनाक़ है. आप जानते हैं कि रेलवे ने अगस्त में 64,037 पदों के लिए परीक्षा ली है.
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