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विचार
  • क्या शराबबंदी की विफलता के कारण नीतीश कुमार बिहार की विधि व्यवस्था सुधार नहीं सकते?
    मनीष कुमार
    ये बात किसी से छुपी नहीं है कि बिहार की विधि व्यवस्था दिनोंदिन खराब हो रही है. अपराध चाहे हत्या हो या डकैती, अपराधी शहर के बीचोंबीच दिन में ही वारदात को अंजाम दे देते हैं. दिक्कत यह नहीं है कि घटनाओं में वृद्धि हो रही है बल्कि समस्या यह है कि हाई प्रोफ़ाइल मामले भी महीनों अनसुलझे रह जाते हैं. और इसका सीधा असर नीतीश कुमार सरकार और उनकी अपनी व्यक्तिगत छवि पर पड़ता है. अब तो नीतीश कुमार के कट्टर समर्थक भी मानने लगे हैं कि करीब चार साल आठ महीने पूर्व जो राज्य में शराबबंदी उन्होंने की उसके कारण विधि व्यवस्था चौपट होती जा रही है. राज्य में अपराधियों और पुलिस के गठज़ोड ने जो एक समानांतर शासन कायम किया है उसने नीतीश कुमार के सुशासन की हवा निकाल दी है.
  • सरदार ने किसानों से कहा पोल्सन को भगाओ, मोदी ने कहा पोल्सन से लिपट जाओ
    रवीश कुमार
    प्रधानमंत्री कहते हैं कि भारत में कृषि और सहायक सेक्टर का कारोबार 28 लाख करोड़ का है और इसमें से 8 लाख करोड़ अकेले दूध उत्पादन का है. बिना समर्थन मूल्य और मंडी ख़रीद के खुले बाज़ार के कारण ऐसा हुआ है.
  • लगातार बड़ा हो रहा है किसानों के आंदोलन का दायरा
    रवीश कुमार
    हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को मंगलवार को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा. मुख्यमंत्री अंबाला में नगरपालिका के चुनाव प्रचार के लिए गए थे लेकिन उनके काफिले के बीचे नारे लगाते किसानों का काफिला चलने लगा.
  • बिहार में मंडी ख़त्म हुई तो बिहार के किसान बर्बाद हो गए
    रवीश कुमार
    बिहार के किसानों को गेहूं और धान का दाम नहीं मिलता है. मक्का और दाल का भी नहीं मिलता है. अगर वहां मंडी होती तो कुछ प्रतिशत ही सही किसानों को MSP तो मिलती.
  • आतंकवादी से अब किसान दलाल हो गया
    रवीश कुमार
    आवश्यकता है आंदोलन पर बैठे किसानों को एक परिभाषा की. 26 दिन से आंदोलन चल रहा है कि अभी तक सरकार के मंत्री और बीजेपी के विधायक, सांसद आंदोलन पर बैठे किसानों की एक ऐसी परिभाषा नहीं खोज पाए हैं जो सभी को मंज़ूर हो. बीजेपी के वरिष्ठ विधायक और बिहार के कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने आंदोलन पर बैठे किसानों को दलाल कहा है. यही नहीं कृषि मंत्री के अनुसार किसान आंदोलन तभी किसानों का कहलाएगा जब देश के 5 लाख गांवों में भी आंदोलन होगा और उन्हें दिखाई देगा.
  • MSP की पाठशाला- किसानों की मांग और सरकार के प्रस्ताव का अंतर समझिए!
    शरद शर्मा
    किसान कह रहे हैं कि मोदी जी हमको MSP की गारंटी दो, केंद्र की मोदी सरकार ने भी कह दिया है कि हम लिखित में MSP पर आश्वासन देने को तैयार हैं. अब अगर केंद्र सरकार कह रही है कि हम MSP पर लिखित आश्वासन देने को तैयार हैं तो फिर समस्या क्या है?
  • सोनिया गांधी की असंतुष्ट नेताओं से मुलाकात में कमलनाथ की अहम भूमिका
    स्वाति चतुर्वेदी
    कल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उन 23 नेताओं के प्रतिनिधियों के बीच आमने-सामने की बैठक होगी, जिन्होंने अगस्त में उन्हें पत्र लिखा था. नेताओं ने इस पत्र में पार्टी में आमूलचूल बदलाव के साथ संगठन के हर स्तर पर चुनाव की मांग की थी. इन नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया था कि गांधी परिवार के नेतृत्व की मौजूदा शैली पार्टी के लिए बड़ी समस्या का हिस्सा रही है.
  • जनता अपने जन-मृत्यु के महाभोज की तैयारी करे, ख़ुश रहे
    रवीश कुमार
    किसानों की लड़ाई शाहीन बाग़ की तरह हो गई है. धरना तो है लेकिन उसके बाद कुछ नहीं. सरकार को फ़र्क़ नहीं पड़ता है. इसके पहले बेरोजगार लड़ कर हिन्दू मुसलमान में बंट चुके हैं.
  • किसान आंदोलन में सुप्रीम कोर्ट का दखल नहीं
    रवीश कुमार
    सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन को मौजूदा जगह से हटाने को लेकर याचिकाकर्ता के वकील हरीश साल्वे और सरकार के वकील अटार्नी जनरल तुषार मेहता ने जो दलीलें रखीं हैं उनमें आंदोलनों के भविष्य की झलक देखी जा सकती है. ये वही दलीलें हैं जो शाहीन बाग़ के समय से पब्लिक स्पेस में औपचारिक रूप लेती जा रही हैं.
  • UP से पंजाब तक, फिर दिखी अरविंद केजरीवाल की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा
    आशुतोष
    केजरीवाल हाल में एक वीडियो में गोवा में जिला परिषद का चुनाव जीतने वाले अपनी पार्टी के एक सदस्य को बधाई देते हुए भी दिखे. इस तटवर्ती राज्य में AAP की यह पहली कामयाबी है. 2017 में हुए गोवा विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को छह फीसदी वोट हासिल हुए थे.
  • अफवाहों, गलत खबरों का अब किसान देंगे जवाब
    रवीश कुमार
    संसद का शीतकालीन सत्र नहीं होगा मगर सर्दी पड़ेगी. शीतकालीन सत्र नहीं होगा यह सुन कर आप यह न सोचें कि सर्दी की छुट्टी हो गई. सिंतबर के महीने में संसद का सत्र होने में कोई दिक्कत नहीं आई जिसमें कृषि विधेयक पास हुए थे, लेकिन दिसंबर के महीने में कोरोना के कारण शीतकालीन सत्र नहीं होगा जब किसान आंदोलन कर रहे हैं.
  • अफवाहों, गलत खबरों का अब किसान देंगे जवाब
    रवीश कुमार
    संसद का शीतकालीन सत्र नहीं होगा मगर सर्दी पड़ेगी. शीतकालीन सत्र नहीं होगा यह सुन कर आप यह न सोचें कि सर्दी की छुट्टी हो गई. सिंतबर के महीने में संसद का सत्र होने में कोई दिक्कत नहीं आई जिसमें कृषि विधेयक पास हुए थे, लेकिन दिसंबर के महीने में कोरोना के कारण शीतकालीन सत्र नहीं होगा जब किसान आंदोलन कर रहे हैं.
  • अफवाहों, गलत खबरों का अब किसान देंगे जवाब
    रवीश कुमार
    संसद का शीतकालीन सत्र नहीं होगा मगर सर्दी पड़ेगी. शीतकालीन सत्र नहीं होगा यह सुन कर आप यह न सोचें कि सर्दी की छुट्टी हो गई. सिंतबर के महीने में संसद का सत्र होने में कोई दिक्कत नहीं आई जिसमें कृषि विधेयक पास हुए थे, लेकिन दिसंबर के महीने में कोरोना के कारण शीतकालीन सत्र नहीं होगा जब किसान आंदोलन कर रहे हैं.
  • अफवाहों, गलत खबरों का अब किसान देंगे जवाब
    रवीश कुमार
    संसद का शीतकालीन सत्र नहीं होगा मगर सर्दी पड़ेगी. शीतकालीन सत्र नहीं होगा यह सुन कर आप यह न सोचें कि सर्दी की छुट्टी हो गई. सिंतबर के महीने में संसद का सत्र होने में कोई दिक्कत नहीं आई जिसमें कृषि विधेयक पास हुए थे, लेकिन दिसंबर के महीने में कोरोना के कारण शीतकालीन सत्र नहीं होगा जब किसान आंदोलन कर रहे हैं.
  • प्रणब दा के संस्मरण में मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी से जुड़े हैं कई खुलासे
    वीर सांघवी
    मुखर्जी विनम्रता से लिखते हैं, ''कांग्रेस के कुछ सदस्यों का यह मानना रहा है कि अगर 2004 में मैं प्रधानमंत्री बन गया होता तो संभवत: 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी  की भारी पराजय नहीं होती.''
  • किसान आंदोलन के 19 दिनों बाद भी कोई नतीजा नहीं
    रवीश कुमार
    किसान आंदोलन में सोमवार का दिन उपवास का रहा. 19 दिन गुज़र गए. आंदोलन किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा है. सोमवार सुबह गृहमंत्री अमित शाह के घर बैठक हुई जिसमें कृषि मंत्री तोमर, कैबिनेट सचिव राजीव गाबा और गृह सचिव अजय भल्ला भी थे. शनिवार और रविवार को टोल नाका और हाइवे बंद करने के बाद किसानों ने उपवास का कार्यक्रम रखा था.
  • स्मृतिशेष मंगलेश डबराल: ‘इसी रात में अपना घर है’
    प्रियदर्शन
    भाषा या कविता के इस व्यर्थता-बोध के बावजूद यह एहसास जाता नहीं कि अंततः रास्ता कोई और नहीं है. मंगलेश डबराल कविता न लिखते तो क्या करते? विकट और विराट ईश्वरों और दरिंदों के मुक़ाबले वे अपनी मनुष्यता का संधान न करते तो क्या करते. अन्याय को पहचानने का सयानापन कई जगह से मिल सकता है, लेकिन अन्याय से आंख मिलाने का साहस और अन्याय न करने का मनुष्योचित विवेक अगर सबसे ज़्यादा कहीं से मिल सकता है तो वह कविता है.
  • किसान प्रतिज्ञा : यहीं डटे रहेंगे, यहीं बोएंगे, यहीं का खाएंगे...
    रवीश कुमार
    एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा है कि केंद्र सरकार को कृषि कानून वापस ले लेना चाहिए. झारखंड के मुख्य मंत्री हेमंत सोरेने ने कहा है कि वे भी किसान आंदोलन का समर्थन करते है. हेमंत सोरेन का कहना है कि कानून के बहाने किसी उद्योगपति के छिपे हुए फायदे की बात सामने आने पर किसानों का आक्रोश स्वाभाविक है.  भारतीय कबड्डी टीम के खिलाड़ी भी किसान आंदोलन में सेवा कर रहे हैं. कबड्डी टीम के कप्तान किसानों के कपड़े धोते नज़र आए. 
  • आंदोलनकारी किसानों को गद्दार, खालिस्तानी बताने वाले कौन?
    रवीश कुमार
    इसी साल जनवरी में ठीक यही हो रहा था जब लाखों लोग नागरिकता कानून के विरोध में दिल्ली और देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे थे. बीजेपी के नेता, मंत्री, प्रवक्ता, कार्यकर्ता गोली मारने के नारे लगाने लगे और पाकिस्तानी और गद्दार बताने लगे. गोदी मीडिया के स्टूडियो में घंटों चलने वाले डिबेट के दम पर इन नारों के सहारे मिडिल क्लास इंडिया के बीच एक सहमति बनाई गई और उसकी आड़ में आंदोलन को कुचल दिया गया.
  • सरकार के प्रस्ताव को ठुकराने वाले किसान क्या अंबानी-अडानी से लड़ पाएँगे ?
    रवीश कुमार
    किसानों ने रिलायंस और अडानी के विरोध का एलान कर बता दिया है कि गाँवों में इन दो कंपनियों की क्या छवि है. किसान इन दोनों को सरकार के ही पार्टनर के रूप में देखते हैं.
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