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विचार
  • हमारे जंगल का समाज
    जंगलों को जब बहुत क़रीब से देखो तो वो जंगल नहीं लगते, एक समाज सा लगते हैं इंसानी समाज से ज़्यादा व्यवस्थित, ज़्यादा उदार, ज़्यादा सभ्य. हमारे समाज में अपनी ज़रूरत से ज़्यादा खाने की भूख होती है लेकिन जंगल का समाज उतना ही उपभोग करता है जितनी पेट इजाज़त देता है. इस जंगली समाज का क़रीब से अध्ययन करते हुए हमें कई दिलचस्प बातें पता चलती हैं. ऐसी ही एक जानकारी संक्षेप में आपसे बांटना चाहती हूं. 
  • फीफा विश्वकप में इस बार अप्रवासियों का है बोलबाला
    मनोरंजन भारती
    फुटबॉल के लिहाज से ये अप्रवासी यूरोप के लिए वरदान से काम नहीं हैं. जहां तक देशों की बात करें, तो फ्रांस और स्विट्रजलैंड की आधी टीम अप्रवासियों से ही बनी है. 
  • दिल्ली में अधिकारों को लेकर खींचतान अब ख़त्म होगी?
    रवीश कुमार
    दिल्ली को राज्य तो नहीं मिला मगर कौन राज करेगा उसका हिसाब आज साफ हो गया. लेफ्टिनेंट गवर्नर के सहारे दिल्ली सरकार न चलने देने का जो खेल दो साल से चला है, उस खेल को सही ठहराने के तमाम तर्कों के कंकाल आपको टीवी चैनलों के आर्काइव में मिल जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले से भले कुछ न बदले ऐसा कहने वाले वही कह सकते हैं, जिन्हें अब भी भरोसा है कि कभी विधायकों की सदस्यता खत्म करने की चाल से तो कभी गवर्नर के बहाने दिल्ली में खेल अब भी खेला जाएगा. फिर भी लंबे समय के लिए दिल्ली के संवैधानिक आसमान पर छाई धुंध छंट गई है. अब दिल्ली का वक्त इस सवाल को लेकर बर्बाद नहीं होगा कि मुख्यमंत्री सरकार चलाएंगे या लेफ्टिनेंट गवर्नर.
  • क्या साफ हो गया कि दिल्ली का 'बॉस' कौन?
    मनोरंजन भारती
    कोर्ट ने कहा है कि एलजी दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख हैं, मगर यह भी कोर्ट ने साफ कर दिया कि अराजकता और तानाशाही के लिए भी कोई जगह नहीं है और जमीन और कानून व्यवस्था एलजी के पास ही रहेगा. लेकिन क्या यह साफ हो गया है कि दिल्ली का बॉस कौन है..?
  • फीफा वर्ल्ड कप : अंतिम 16 की जंग
    मनोरंजन भारती
    फीफा वर्ल्ड कप अब क्वार्टर फाइनल के दौर में है. आठ सबसे अच्छी टीमें यहां तक पहुंची हैं जिसमें उरूग्वे का मुकाबला फ्रांस से, ब्राजील भिड़ेगी बेल्जियम से तो रूस खेलेगी क्रोसिया से और इंग्लैंड बनाम स्वीडन होगा. कई बड़े खिलाड़ियों की टीम इस वर्ल्ड कप से बाहर हो गई हैं.
  • शिक्षामित्रों की समस्या का समाधान कैसे निकले?
    रवीश कुमार
    यह कहानी सिर्फ उत्तर प्रदेश की नहीं है, हर प्रदेश में ऐसी कहानी होगी जहां कर्मचारी कई साल तक सरकार के अलग-अलग विभागों में काम करने के बाद बाहर फेंक दिए जाते हैं. 10 साल, 20 साल सरकार के यहां नौकरी करने के बाद बाहर फेंक दिए गए ये लोग सचिवालयों और ज़िलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरना देते हुए नज़र आते हैं. ऐसा नहीं है कि ये अदालतों से नहीं जीतते, जीतने के बाद भी इनकी नियुक्ति नहीं होती है और अगर हार गए तो कोर्ट के फैसले का बहाना बनाकर हमेशा के लिए इनकी सुनवाई बंद कर दी जाती है.
  • 2019 का मुद्दा- मोदी हटाओ बनाम सुशासन और विकास
    अखिलेश शर्मा
    पीएम मोदी कहते हैं कि महागठबंधन की तुलना 1977 और 1989 से करना ठीक नहीं है क्योंकि 77 में विपक्ष आपातकाल के खिलाफ एक हुआ था तो वहीं 89 में बोफोर्स के भ्रष्टाचार के खिलाफ.
  • 'संजू' क्यों राजू हिरानी की सबसे कमज़ोर फ़िल्म है...
    प्रियदर्शन
    'संजू' फिल्म का खलनायक कौन है...? राजू हिरानी के मुताबिक वह प्रेस, जो सूत्रों के मुताबिक या प्रश्नवाचक चिह्न लगाकर अफ़वाहों को ख़बरों की तरह पेश करता है. मीडिया से इस शिकायत को फिल्म में इतनी अहमियत दी गई है कि फिल्म का अंत बाकायदा एक गाने से होता है, जिसमें मीडिया का मज़ाक बनाया गया है. यह सच है कि मीडिया कई बार गैरज़िम्मेदार ढंग से पेश आता रहा है. वह कई बार अपनी ताक़त के नकली गुमान में रहता है. कई बार दूसरे ताकतवर लोग भी उसका यह भरम बनाए रखने में मददगार होते हैं. कई बार यह लगता है कि इन ताकतवर लोगों को ईमानदार नहीं, एक बेईमान मीडिया ही चाहिए, समझदार नहीं, सनसनी वाला मीडिया ही चाहिए.
  • कौन और क्यों उकसा रहा है इस भीड़ को?
    रवीश कुमार
    जिस भीड़ के ख़तरे के बारे में चार साल से लगातार आगाह कर रहा हूं, वो भीड़ अपनी सनक के चरम पर है या क्या पता अभी इस भीड़ का चरम और दिखना बाकी ही हो. कभी गौ रक्षा के नाम पर तो कभी बच्चा चोरी की अफवाह के नाम पर किसी को घेर लेना, मार देना, आसान होता जा रहा है.
  • पीएम पद- विपक्ष में एक अनार, दो बीमार
    अखिलेश शर्मा
    विपक्षी पार्टियों के नेताओं में प्रधानमंत्री पद के लिए होड़ और दौड़ शुरू हो गई है. कम से कम बयानबाजी के दौर से तो ऐसा ही लगता है. कहते हैं एक अनार सौ बीमार, लेकिन प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर फिलहाल तो एक अनार दो बीमार की बात ही लगती है.
  • दिल्ली में पेड़ों की कटाई : आसमान में दावे, ज़मीन पर सच्चाई
    शरद शर्मा
    दिल्ली में बीते हफ़्ते पेड़ों की कटाई पर खूब चर्चा रही. हज़ारों पेड़ काटे जाने की ख़बर सुर्खियों में आई तो सरकार पर तोहमत आई. लिहाज़ा सरकार ने भी लंबे लंबे दावे करके ये बताने की कोशिश कि सब ठीक है, हल्ला मचाना गलत है. लेकिन सरकार के दावों और ज़मीनी हक़ीक़त में कितना अंतर होता है ये मैंने भी तब जाना जब सरकार के हवाई दावों की तह में गया.
  • मंदसौर की घटना के बहाने चुप्पी पूछने का खेल खेलने वालों का इरादा क्या है?
    रवीश कुमार
    बलात्कार की हर घटना हम सबको पिछली घटना को लेकर हुई बहस पर ला छोड़ती है. सारे सवाल उसी तरह घूर रहे होते हैं. निर्भया कांड के बाद इतना सख़्त कानून बना इसके बाद भी हमारे सामने हर दूसरे दिन निर्भया जैसी दर्दनाक घटना सामने आ खड़ी होती है.
  • सरकार को नौकरों की कितनी चिंता?
    रवीश कुमार
    देहरादून का एक वीडियो वायरल हो रहा है. 28 जून के इस वीडियो में दिख रहा है उसमें देखने के लिए कई बातें हैं. एक अध्यापिका हैं जो सिस्टम से झुंझलाई हुई हैं, उनकी कोई नहीं सुन रहा है, सामने एक मुख्यमंत्री हैं जो बैठे तो हैं सुनने के लिए मगर सुनते ही झुंझला जा रहे हैं, एक मीडिया है जो कभी आम लोगों की समस्या से वास्ता नहीं रखता मगर एक मुख्यमंत्री ने बेअदबी की है तो उसमें चटखारे ले रहा है.
  • प्रधानमंत्री जी, आप भारत को विश्व गुरु बना रहे हैं या बेवकूफ बना रहे हैं?
    रवीश कुमार
    स्वि‍स नेशनल बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया है कि 2017 में उसके यहां जमा भारतीयों का पैसा 50 प्रतिशत बढ़ गया है. नोटबंदी के एक साल बाद यह कमाल हुआ है. ज़रूरी नहीं कि स्विस बैंक में रखा हर पैसा काला ही हो लेकिन काला धन नहीं होगा, यह क्लीन चिट तो मोदी सरकार ही दे सकती है.
  • FIFA विश्वकप का सबक : अच्छा खेल ही नहीं, अच्छी खेलभावना भी ज़रूरी है...
    मनोरंजन भारती
    खेल की दुनिया में फेयरप्ले प्वाइंट का कितना महत्व हो सकता है, क्या आपने कभी सोचा है... लोगों को लगता है कि यह केवल टीम का मनोबल बढ़ाने के लिए होते हैं, मगर यह पूरी तरह सच नहीं है... यह खेल का अहम हिस्सा हैं, और खासकर किसी भी टीम ईवेंट में...
  • उत्तराखंड के 'जनता दरबार' में कुदृश्य कांड
    सुधीर जैन
    सरकार और जनता के बीच संवाद का एक कुदृश्य इस समय पूरे देश में सनसनी फैला रहा है. कोशिश पूरी हुई कि यह नज़ारा किसी तरह जनता के बीच पहुंच न पाए, लेकिन ज़माना सोशल मीडिया का है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के उस 'जनता दरबार' में सरकार से एक नागरिक की फरियाद करने के दौरान हुई 'तू-तू मैं-मैं' का नज़ारा कैमरों में कैद हो चुका था. वह 'जनता मिलन' उर्फ 'जनता दरबार' था.
  • आखिर दिल्ली सरकार की समस्या है क्या...?
    डॉ विजय अग्रवाल
    दिल्ली सरकार के साथ पिछले दिनों जो कुछ हुआ, या इसे यूं भी कह लें कि उसने जो कुछ किया, उससे कई महत्वपूर्ण सवाल मन में उठते हैं. पहला सवाल तो यही कि देश की राजधानी की सरकार लगभग 10 दिन तक हड़ताल पर रही. सरकार के खिलाफ हड़तालों की बात तो आम थी, लेकिन यह एकदम से खास हो गई. और वह हड़ताल भी किसके विरूद्ध - अपने ही उपराज्यपाल के विरुद्ध, और वह भी उन्हीं के दफ्तर में घुसकर.
  • क्या 2019 के आम चुनाव में मायावती हो सकती हैं 'तुरुप का इक्का'...?
    मनोरंजन भारती
    बहुजन समाज पार्टी, यानी BSP ने पिछले महीने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसके तहत अब मौजूदा BSP अध्यक्ष या उनके बाद जो भी BSP अध्यक्ष बनेगा, उसके जीते-जी या न रहने के बाद भी उसके परिवार के किसी नज़दीकी सदस्य को पार्टी संगठन में किसी पद पर नहीं रखा जाएगा.
  • भारत की अर्थव्यवस्था की हालत कितनी सुधरी?
    रवीश कुमार
    भारत की राजनीति और उसके मुद्दे व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के गुडमॉर्निंग मैसेज की तरह हो गए हैं. जिस तरह से अब सबको पता है कि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटि में गुडमॉर्निंग मैसेज आएगा ही और मैसेज में धार्मिक तस्वीरें होंगी, नैतिक संदेश होंगे, माता-पिता का आदर करना है टाइप के, गुलाब का फूल तो होता ही है और पहाड़ों से निकलते सूरज की तस्वीर के बिना गुडमॉर्निग मैसेज कभी पूरा नहीं होता है. आप लाख मना करें कि प्लीज़ मेरे इनबॉक्स में गुडमॉर्निग मैसेज न भेजें, फिर भी अगली सुबह गुडमॉर्निंग मैसेज आ ही जाता है. ये एक किस्म की बीमारी है, इससे गुडमॉर्निंग कम, ऊब ज्यादा होती है. ठीक इसी तरह भारत की राजनीति में अब तय सा हो गया है कि आज क्या प्रोपेगैंडा चलेगा.
  • सर्जिकल स्ट्राइक का फुटेज आखिर अब क्यों जारी किया गया ?
    अखिलेश शर्मा
    सितंबर 2016 में पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में घुसकर आतंकवादी कैंपों को ध्वस्त करने और दर्जनों आतंकवादियों और पाकिस्तानी सैनिकों को मारने की कार्रवाई सर्जिकल स्ट्राइक का फुटेज आखिरकार सामने आ गया है. उड़ी आतंकवादी हमले में 18 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद यह सैनिक कार्रवाई की गई थी. स्पेशल फोर्सेज ने पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी कैंपों पर कार्रवाई की थी. इस कार्रवाई में दर्जनों पाकिस्तानी सैनिक और आतंकवादी मारे गए थे.
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