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  • स्टेट बैंक ने आपकी गरीबी पर जुर्माना वसूला 1,771 करोड़
    जब आप पैसे बैंक में रखते हैं, तो कहा जाता है कि कम रखा है, अब जुर्माना भरो. ज़्यादा रखेंगे तो ब्याज़ कम दिया जाएगा. आप देखिए कि आप अपनी आर्थिक स्वतंत्रता गंवा रहे हैं या पा रहे हैं...? क्या ग़रीब होने का जुर्माना लगेगा अब इस देश में...?
  • 18 साल के मतदाताओं के नाम रवीश कुमार का एक खुला खत
    मतदाता बनना प्रतिशत में गिना जाना नहीं होता है. अच्छा मतदाता वह होता है जो वोट देने से पहले काफी मेहनत करता है. तर्कों का इस्तेमाल करता है, तरह-तरह की पहचान के नाम पर भड़काई गई भावुकता में नहीं बहता है.
  • कैलेंडर का भी है अपना भरा पूरा इतिहास
    दुनिया में इस समय सैकड़ों कैलेंडर अस्तित्व में हैं, जिनमें हमारे अपने यानी भारतीय पंचांग भी हैं. लेकिन फिलहाल मौका अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से साल बदलने का है. सो मौके के लिहाल से इस पर नजर डालना प्रासंगिक है...
  • मौत की कीमत आप क्या जानो कमिश्नर साहब!
    मुंबई के कमला मिल से जो लाशें उठी हैं, उन्हें देख आप सिहर जाएंगे.  हो सकता है मुंबई के बीएमसी कमिश्नर भी सिहर पड़े हों या ये भी हो सकता है कि उनके लिये सिर्फ नंबर मायने रखते हों या फिर ये कि कौन मरा है. अदना हो या आला, नौजवान की अर्थी उठाना शायद दुनिया में दर्द का पहाड़ उठाने जैसा है. मौत कमला मिल में हुई हो या कुर्ला में, दर्द उतना ही था कमिश्नर साब. हमें दोनों हादसों के दर्द का अहसास है, लेकिन शायद आप मीडिया में बड़ी होती हेडलाइन के हिसाब से ड्यूटी बजाते हैं. वरना क्या वजह हुई कि इसी महीने किसी एक फरसाण की दुकान खाक होने पर आपने मुस्तैदी नहीं दिखाई. वहां भी लोग झुलस कर मरे थे. 
  • इतिहास के पंजों में फंसी कलाओं की गर्दन
    'पद्मावती' फिल्म के बारे में अब केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने एक नया फैसला लिया है. बोर्ड ने इतिहासकारों की एक छः सदस्यीय समिति गठित की है, जो इस फिल्म के ऐतिहासिक तथ्यों की सत्यता का परीक्षण करेगी. समिति का गठन इसलिए किया गया है, क्योंकि फिल्मकार ने इसमें अंशतः ऐतिहासिक तथ्यों के होने की बात कही है.
  • वहशी बाबा का घिनौना आश्रम
    गंदी हो गई... बेआबरू हो गई...शीलभंग हो गया...समाज में तो मेरा चरित्र ही खराब हो गया....कौन अपनायेगा मुझे....तो घुट-घुट कर सलाखों के पीछे जानवरों के से हालात में जी लेते हैं...सोच है उन लड़कियों की जो वहशी वीरेंद्र देव दीक्षित के अनेकों अध्यात्मिक विश्वविद्यालय में अब भी कैद हैं...इससे बाहर निकली प्रेरणा ने बताया तो दहल गया मन...मां-पिता ही तो छोड़ जाते हैं... ऐसे आश्रमों में अपनी छोटी-बड़ी बच्चियों को... आध्यात्मिक ज्ञान मिलेगा बच्चियों को तो इससे बड़ा पुण्य क्या हो सकता है...समाज में परिवार का नाम भी होगा.....अच्छा ही तो है लड़कियो का बोझ कुछ कम भी हो जायेगा....न पढ़ाना पड़ेगा, न खिलाना ...
  • टावर ले लो, स्पेक्ट्रम ले लो, कैंपस ले लो, अनिल अंबानी बेच रहे हैं, तुम भी ले लो
    2010 तक टेलिकॉम की दुनिया में नंबर दो के स्थान पर बादशाहत रखने वाली अनिल अंबानी की कंपनी RCOM तीन महीने के भीतर अपना बहुत कुछ नीलाम करने वाली है. अगर आपके पास पैसा है तो आप ख़रीद सकते हैं मगर देखना दिलचस्प होगा कि किस कंपनी के पास इतना पैसा होगा जो तीन महीने के भीतर 39000 करोड़ की ख़रीद करेगी. ज़ाहिर है एक कंपनी तो नहीं होगी, कई कंपनियां भी हो सकती हैं.
  • नौजवानों के साथ धोखा, कहां हैं मोदी और राहुल
    आप दोनों युवाओं के लिए वक्त निकालिए. प्रधानमंत्री जी आप सरकार में रहते हुए सोचिए कि क्या होना चाहिए और राहुल गांधी जी आप विपक्ष में रहते हुए आप इस मुद्दे को इतना उठाइये कि सरकार जल्दी सोचे और जल्दी कुछ करे. भारत के नौजवानों के धीरज का इम्तहान मत लीजिए.
  • पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का वह भाषण- आसमान बादलों से भरा हुआ है..धरती आपके जनज्वार से उमड़ी पड़ रही है
    एक चुनाव रैली में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का इंतजार हो रहा था...भीड़ के बीच से बार-बार नारों की आवाज आ रही थी...लेकिन भयंकर गर्मी से हालत खराब हो रही थी...तभी आसमान में एक हेलीकॉप्टर के गड़ग़ड़ाने की आवाज सुनाई दी....और भीड़ के बीच से फिर नारों की आवाज गूंजने लगती है.....राजतिलक की करो तैयारी...अबकी बारी अटल बिहारी....
  • क्‍या मीडिया और विपक्ष का घालमेल रहा 2जी?
    2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में 1 लाख 76 हज़ार घोटाले को साबित करने के लिए कोई पक्के सबूत नहीं मिले हैं. स्पेशल सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद यह बात हज़म नहीं हो पा रही है कि जिस घोटाले को भारत के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बताया गया, उसे साबित करने के लिए आखिर सीबीआई सात साल में सबूत क्यों नहीं पेश कर पाई.
  • 2जी फैसले के खिलाफ अपील, सरकार क्‍यों न ले विनोद राय की मदद?
    2जी मामले में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 122 कंपनियों के लाइसेंस रद्द करते हुए उन पर भारी जुर्माना भी लगाया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्पैक्ट्रम जैसी बहुमूल्य संपत्ति की नीलामी से देश को अधिकतम राजस्व मिलना चाहिए. इसके बाद हुई नीलामी से सरकार ने 65000 करोड़ की आमदनी का दावा किया था तो फिर अब राजस्व के नुकसान नहीं होने की बात क्यों की जा रही है?
  • एक ऐसा घोटाला, जो कभी हुआ ही नहीं!
    2जी घोटाले में किसी के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं मिला है. सीबीआई सात सालों में किसी भी आरोपी के ख़िलाफ़ ऐसा सबूत पेश नहीं कर पाई जिससे आरोप साबित हों. सात साल तक चले इस मामले में साढ़े तीन साल मोदी सरकार के हैं. सुप्रीम कोर्ट इस केस की निगरानी कर रहा था. इसके बाद भी 2जी मामले में सीबीआई किसी के ख़िलाफ़ सबूत पेश नहीं कर पाई है.
  • 2जी का झूठ घोटाला कितना बड़ा...
    पांच साल तक 2जी घोटाले का प्रचार करके राजनीति होती रही. तो क्या उस झूठ के उजागर होने के बाद टूजी के झूठ घोटाले पर ही हमें वैसा ही असर देखने को मिलेगा? यह सवाल भी खड़ा होगा कि झूठे आरोप लगाने वालों ने इस झूठे आरोप से क्या क्या कमाया.
  • रूस की क्रांति : एक छोटी-सी ज़िन्दगी की लंबी कहानी
    आजकल तो लोग ही आराम से 82-83 साल तक जी लेते हैं, सो, ऐसे में यदि किसी दर्शन से जन्मी राजनैतिक व्यवस्था की उम्र भी लगभग इतनी ही हो, तो अफसोस की बात तो है ही... और सोचने की बात भी... 100 साल पहले 7 नवंबर को लेनिन के नेतृत्व में जो ऐतिहासिक और चामत्कारिक घटना रूस में घटी, उसने पूरी दुनिया को जोश से भर दिया था.
  • बागों में बहार तो नहीं है मगर फिर भी....
    हमने पत्रकारिता को टीआरपी मीटर का गुलाम बना दिया है. टीआरपी मीटर ने एक साज़िश की है. उसने अपने दायरे के लाखों-करोड़ों लोगों को दर्शक होने की पहचान से ही बाहर कर दिया है. कई बार सोचता हूं कि जिनके घर टीआरपी मीटर नहीं लगे हैं, वो टीवी देखने का पैसा क्यों देते हैं? क्या वे टीवी का दर्शक होने की गिनती से बेदखल होने के लिए तीन से चार सौ रुपये महीने का देते हैं. करोड़ों लोग टीवी देखते हैं मगर सभी टीआरपी तय नहीं करते हैं.
  • उन्माद फैलाने वाले को न्यायपालिका का भी डर नहीं ? रवीश कुमार के साथ प्राइम टाइम
    राजस्थान के उदयपुर की अदालत के गेट की छत पर चढ़कर भगवा ध्वज लहराने की यह तस्वीर संविधान की बनाई तमाम मर्यादा से खिलवाड़ करती है.
  • 2019 के लिहाज़ से गुजरात के जनादेश का संदेश
    इस मुख्य फैसले को कोई नहीं नकार सकता कि गुजरात का जनादेश BJP के पक्ष में आया है, लेकिन उसके साथ जुड़े दूसरे कई और जनादेशों को देखना हो, तो जनता की दी कई और व्यवस्थाओं को पढ़ा जाना भी ज़रूरी है. यह कवायद इसलिए भी ज़रूरी है, क्योंकि गुजरात का विधानसभा चुनाव वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव को नज़र में रखकर लड़ा जा रहा था.
  • गुजरात चुनाव : हिले-हिले से मेरे सरकार नजर आते हैं!
    पिछले 24 घंटों में गुजरात में बहुत कुछ बदला है. जो जहां था अब वह वहां नहीं है. यह नए गणित और समीकरणों की शुरुआत भी है. बीजेपी अब तीन बड़े शहरों अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा की कर्जदार है, जिसने उसे मुसीबत से उबार लिया. सूरत ने तो मानो 180 डिग्री की पलटी खाई. जहां कैमरे व्यापारियों को नारे लगाते और लाठी खाते मजदूरों को दिखाते थे वहां जश्न बीजेपी का है.
  • गुजरात का जनादेश : बीजेपी को सरकार दी, ख़ुद को एक विपक्ष दिया
    गुजरात ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जो सुंदर संतुलन बनाया है वह बहुत कमाल का है. यह एक ऐसा नतीजा है जिससे किसी का दिल नहीं जला होगा. भले किसी के सारे सपने पूरे न हुए हों.
  • विधानसभा चुनाव परिणाम 2017 : उस एक घंटे का रोमांच याद रहेगा...
    नतीजों के दिन कभी इतने रोमांचक नहीं रहे. एक मानी हुई जीत अचानक उतार चढ़ाव में बदल गई. सुबह नौ से दस के बीच बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए होश उड़ा देने वाला रहा होगा. एक पल में बीजेपी आगे निकलती थी तो दूसरे पल में कांग्रेस. कभी बराबर तो कभी आगे पीछे.
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