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  • BLOG: जलवायु परिवर्तन के प्रति कार्यवाही ना करने पर अमेरिका और स्वीडन पर मुकदमा क्यों नहीं?
    सुरन्या अय्यर
    स्वीडन की सोलह वर्षीय ग्रेटा थूनबर्ग और उसकी उम्र के कुछ और युवाओं ने तुर्की, अर्जेंटीना, ब्राजील, जर्मनी और फ़्रांस के ख़िलाफ़ तो जलवायु परिवर्तन के प्रति कार्यवाही न करने के विषय में मुक़दमा दर्ज किया है, लेकिन अमेरिका के ख़िलाफ़ नहीं, जिसका प्रति व्यक्ति हानिकारक गैस उत्सर्जन दुनिया में अधिकतम है. ये किशोर उस स्वीडन पर भी मुक़दमा नहीं कर रहे हैं जिसका प्रति व्यक्ति गैस उत्सर्जन ब्राज़ील के प्रति व्यक्ति गैस उत्सर्जन का दो-गुना है.
  • जलवायु परिवर्तन को लेकर कितनी गंभीर है सरकार?
    सुशील कुमार महापात्र
    शुक्रवार को कम से कम 28 देशों के 20 लाख लोग और स्कूल छात्र अपना काम और पढ़ाई छोड़कर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सड़क पर उतरे. स्पेन, न्यूज़ीलैंड, नीदरलैंड्स के कुल जनसंख्या के 3.5 प्रतिशत लोग इस प्रदर्शन में हिस्सा लिए. प्रदर्शन से पहले न्यूज़ीलैंड के लोगों ने वहां के संसद के नाम एक चिट्ठी भी लिखी. इस चिट्ठी में उन्होंने मांग की कि दश में क्लाइमेट इमरजेंसी घोषित की जाए. साथ ही जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए अलग-अलग कॉउंसिल भी बनाई जाए. उधर, कनाडा के 85 शहर में जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्रदर्शन किया गया.
  • संयुक्त राष्ट्र की 74वीं आम सभा, दुनिया में बढ़ते टकराव पर कितना ध्यान?
    रवीश कुमार
    पांच दिनों तक चलने वाले इस भाषण में दुनिया भर के मुल्कों के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के भाषण से किस तरह की चिन्ताएं उभर रही हैं, उन भाषणों में समाधान का संकल्प कितना है या भाषण देने की औपचारिकता कितनी है, ईमानदारी कितनी है, इस लिहाज़ से भाषणों को देखा जाना चाहिए तभी हम समझ पाएंगे कि संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में भाषण का क्या मतलब है.
  • चीन में पत्रकारों को देना होगा चाटुकारिता का टेस्ट
    रवीश कुमार
    पत्रकारिता में चाटुकारिता करने वालों के लिए बुरी ख़बर है. अब तक चाटुकारिता को सबसे आसान बीट माना जाता था, लेकिन हर माल को सस्ता बनाकर बेचने वाले चीन ने चाटुकारिता को महंगा यानी मुश्किल बना दिया है. चीन में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा होने जा रही है, जिसमें राष्ट्रपित शी जिनपिंग के राजनीतिक विचारों और मार्क्सवाद से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे. जो इस परीक्षा में पास होगा उसी को प्रेस कार्ड मिलेगा.
  • चार्टर्ड एकाउंटेंसी के छात्र प्रदर्शन के लिए मजबूर क्यों?
    रवीश कुमार
    तीन दिनों से प्रदर्शन करने के बाद भी चार्टर्ड अकाउंटेंसी के छात्रों को कोई आश्वासन नहीं मिला है. ट्विट पर ट्रेंड कराने के बाद भी ICAI की तरफ से कोई बात करने नहीं आया है. ट्विटर पर ट्रेंड कराने के साथ-साथ छात्र दिल्ली के आईटीओ स्थित ICAI के मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं. द इंस्टीट्यूट चार्टर्ड अकाउंटेंट आफ इंडिया का मुख्यालय है यहां. तीन दिनों से प्रदर्शन करने के बाद भी इनसे कोई बात करने नहीं आया है. एक बयान आया है जिसमें कहा है कि छात्रों को री-चेकिंग का अधिकार नहीं दिया जाएगा. छात्रों का कहना है कि आगे की सभी परीक्षाओं में भी री-चेकिंग की सुविधा होनी चाहिए.
  • सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को चेतावनी
    रवीश कुमार
    सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने, चरित्र हनन करने, ट्रोल करने, धमकी देने इत्यादि को लेकर सरकार से तीन हफ्ते के भीतर गाइडलाइन बनाने को कहा है.
  • शिनजियांग डायरी 3 : चीन के इस इलाके के हालात की सच्चाई के कई पक्ष
    कादम्बिनी शर्मा
    शिनजियांग डायरी का ये आखिरी हिस्सा चीन से लौटने के करीब महीने भर बाद लिख रही हूं. इसलिए नहीं कि वक्त नहीं मिला या इच्छा नहीं हुई, बल्कि इसलिए कि इस बीच इस पर मेरी बनाई डॉक्युमेंट्री 'चीन का चाबुक' ऑन एयर हो गई और मैं देखना चाहती थी कि इस पर प्रतिक्रिया क्या होती है. क्योंकि सीधे तौर पर भारत से जुड़ा मुद्दा नहीं है तो यह भी लगा कि पता नहीं लोग देखें ना देखें. लेकिन यूट्यूब पर सवा लाख से भी ज्यादा लोगों ने देखा और अधिकतर ने सराहा. कुछ ने कुछ सवाल भी पूछे.
  • बंगलुरू के ब्रिगेड रोड मार्केट संघ के सुहैल यूसुफ साहब...
    रवीश कुमार
    मार्केट में पार्किंग की वजह से तंगी हो रही थी. सौ से कुछ अधिक दुकानें हैं. पार्किंग की समस्या का समाधान निकल नहीं पा रहा था. यूसुफ़ साहब ने बाजार संघ के पैसे से पार्किंग वेंडिंग मशीन लगाने का फ़ैसला किया. ऐसी मशीनें हमें पेरिस और न्यूयार्क में देखी है. आप कार पार्क करते हैं. मशीन में नंबर पंच करते हैं और तय समय के लिए पार्क कर चले जाते हैं.
  • सिस्‍टम से हारते छात्र, विस्‍थापित और कमजोर, ये बेस्ट बात है
    रवीश कुमार
    हरियाणा में चुनाव करीब है इसलिए 24 जून को फार्म निकलता है, 8 जुलाई तक फार्म भरे जाते हैं. 14 सितंबर को एडमिट कार्ड मिल जाता है. 21, 22 और 23 सितंबर को परीक्षा होती है, सुपर फास्ट. इस रफ्तार से बाकी परीक्षाएं होने लगें तो क्या ही कहने. मगर होती नहीं हैं. उम्मीद है रिज़ल्ट भी निकलेगा और यह भर्ती चुनावी साबित नहीं होगी.
  • ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री अमेरिका की महानता की भी तारीफ करें और सीखें
    रवीश कुमार
    आज़ादी के बाद भारत के किस शहर में दूसरे शहर में आकर लोग बसे? जिनकी तुलना आप न्यूयार्क के न्यू जर्सी या ब्रिटेन के साउथ हॉल से कर सकते हैं. अमरीका के कितने ही मोहल्ले हैं जो भारतीयों के गढ़ के रूप में पहचाने जाते हैं बल्कि वहाँ भारतीय आराम से अमरीकी लोगों के बीच में रहते हैं. दुकानें हैं. उनकी कंपनियां हैं. बिल्कुल सुरक्षित जीवन जी रहे हैं. वहां जाते ही सब सिस्टम की बड़ाई करने लगते हैं. उनकी बातों से आपको एक बार नहीं लगेगा कि अमरीका की पुलिस मदद नहीं करती या आती है तो रिश्वत लेकर चली जाती है या उन्हें फ़र्ज़ी केस में फंसा देने का डर है. बल्कि मैंने देखा है कि भारत से ज़्यादा वहां जाकर लोग सिस्टम और समाज को लेकर सुरक्षित महसूस करते हैं. इसलिए तरक़्क़ी भी ख़ूब करते हैं.
  • सरकार ने दी कॉरपोरेट टैक्‍स में राहत, क्‍या आम आदमी को होगा फायदा?
    रवीश कुमार
    अगले शुक्रवार का इंतज़ार कीजिए क्या पता आम लोगों का भी टैक्स से राहत मिल जाए, या क्या पता पुरानी पेंशन व्यवस्था ही बहाल हो जाए. वित्त मंत्री जिस तरह शुक्रवार को अपना नया बजट पेश कर रही हैं, राहतों का एलान कर रही हैं, उसमें कुछ भी उम्मीद की जा सकती है. आखिर कारपोरेट ने कब सोचा होगा कि सरकार उसे एक दिन 1 लाख 45 हज़ार का घाटा उठाकर करों में छूट देगी. इस फैसले को ऐतिहासिक और साहसिक बताया गया है.
  • स्कूल में पढ़ने वाली ग्रैता तुन्बैर जलवायु संकट पर कैसे बन गईं ग्लोबल नेता
    रवीश कुमार
    16 साल की एक लड़की ग्रैता तुनबैर हुक्मरानों के लिए चुनौती बन गई है. ग्रैता ने अपने नैतिक बल और कठोर निश्चय से सबको घेर लिया है. वह अकेली है लेकिन दुनिया भर के लिए आंदोलन बन चुकी है. एक ऐसे नए रास्ते की बुनियाद रख रही है जिसे अब बच्चे तय करेंगे. अगर बड़ों से सिर्फ बातें होती हैं तो अब उन बातों का इंतज़ार नहीं किया जा सकता. बच्चे भी सड़क पर आ सकते हैं, दुनिया भर में यात्राएं कर सकते हैं और जलवायु के सवाल को बड़ा कर सकते हैं और समाधान की मांग कर सकते हैं. ग्रेटा की कहानी को भारत के हर स्कूल में बताया जाना चाहिए और हर घर में बताया जाना चाहिए.
  • अर्थव्यवस्था ढलान पर है, लेकिन क्या ऐसी ख़बरें हिन्दी अख़बारों में छप रही हैं...?
    रवीश कुमार
    2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही विदेशी निवेशकों ने भरोसा दिखाना शुरू कर दिया था, जिसके कारण भारत में 45 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया. अब वह भरोसा डगमगाता नज़र आ रहा है. जून महीने के बाद से निवेशकों ने 4.5 अरब डॉलर भारतीय बाज़ार से निकाल लिए हैं. 
  • झारखंड में पेड न्यूज का नया चेहरा
    रवीश कुमार
    पेड न्यूज़ का नया रूप आया है. आया है, तो क्या कमाल आया है. क्या आपने या किसी नॉन रेज़िडेंट इंडियन ने यह सुना है कि सरकार अपनी योजनाओं की तारीफ छपवाने के लिए टेंडर निकाले और पत्रकारों से कहे कि वे अर्जी दें कि कैसे तारीफ करेंगे? विदेशों में ऐसा होता है या नहीं, ये तो नान रेज़िडेंट इंडियन ही बता सकते हैं कि क्या वाशिंगटन पोस्ट, गार्डियन, न्यूयार्क टाइम्स अपने पत्रकारों से कहे कि वे सरकार का टेंडर लें, उसकी योजना की जमकर तारीफ करते हुए लेख लिखें और फिर उसे दफ्तर ले आएं ताकि फ्रंट पेज पर छाप सकें? इसलिए कहा कि ऐसा कमाल बहुत कम होता है. युगों-युगों में एक बार होता है जब चाटुकारिता आफिशियल हो जाती है. वैसे भी होती है लेकिन जब विज्ञापन निकले, तारीफ के पैसे मिलें, यह बताया जाए तो चाटुकारिता पारदर्शी हो जाती है.
  • ट्विटर पर ट्रेंड हुई तो क्या समस्या हल होगी?
    रवीश कुमार
    ट्विटर पर ट्रेंड के बारे में आपने सुना होगा. किसी मसले को लेकर जब कुछ समय के भीतर ट्वीट की संख्या बढ़ने लगती है तो वह ट्रेंड करने लगता है. कई बार मार्केंटिंग कंपनियां पैसे लेकर भी ट्रेंड कराती हैं, राजनीतिक दलों का आईटी सेल भी संगठित रूप से ट्रेंड कराता है. कई बार लोग अपनी तरफ से किसी मसले को लेकर ट्वीट करने लगते है और वह ट्रेंड में बदल जाता है.
  • अमित शाह का बयान और भाषाओं की सांप्रदायिकता
    प्रियदर्शन
    बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने हिंदी को लेकर अचानक जो विवाद पैदा किया, क्या उसकी कोई ज़रूरत थी? क्या बीजेपी के पास वाकई कोई भाषा नीति है जिसके तहत वह हिंदी को बढ़ावा देना चाहती है? या वह हिंदू-हिंदी हिंदुस्तान के पुराने जनसंघी नारे को अपनी वैचारिक विरासत की तरह फिर से आगे बढ़ा रही है?
  • सऊदी अरब के तेल ठिकाने पर हमला, भारत की अर्थव्यवस्था को कितना बड़ा झटका?
    रवीश कुमार
    सऊदी अरब के तेल के खदानों पर ड्रोन से हमला हुआ है. शनिवार की सुबह दो धमाके हुए जिसके कारण सऊदी अरब में तेल का उत्पादन घट गया है. दुनिया में हर दिन तेल का जितना उत्पादन होता है उसका पांच प्रतिशत उत्पादन घट गया है. अबक़ैक में दुनिया का सबसे बड़ा तेल संशोधन कारखाना है. ख़ुरैस तेल के खदान पर भी हमला हुआ है.
  • रैमॉन मैगसेसे अवार्ड मिलने के बाद रवीश कुमार ने यूं किया दर्शकों का शुक्रिया अदा
    रवीश कुमार
    मुझे 25 साल के इस पेशे में यह बात आपके बीच रहकर समझ आई है कि दर्शक या पाठक होना पत्रकार के होने से भी बड़ी ज़िम्मेदारी का काम है. जीवन भर लोगों को सुबह उठकर आदतन आधे अधूरे मन से अख़बार पलटते देखा करता था. कइयों को अख़बार लपेट कर शौच के लिए जाते देखा करता था. कुछ लोगों के लिए अखबार यहां से वहां उठाकर रख देने के बीच कुछ पलट कर देख लेने का माध्यम हो सकता है, रिमोट से एक न्यूज़ चैनल से दूसरे न्यूज़ चैनल बदल कर अपनी बोरियत दूर करने का ज़रिया हो सकता है मगर निश्चित रूप से यह दर्शक या पाठक होना नहीं है.
  • 69000 शिक्षक परीक्षा के परीक्षार्थियों को बधाई, कामयाबी मिलेगी
    रवीश कुमार
    इस आंदोलन की अच्छी बात है कि सभी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग ज़िलों से आए हैं और हाथ में तख़्ती बैनर लेकर आए हैं. इस वक्त में जब मीडिया की प्राथमिकता बदल गई है ये छात्र- छात्राएं अलग-अलग ज़िलों से आकर प्रदर्शन कर रहे हैं. सुखद बात यह भी है कि इस आंदोलन में लड़कियां भी अच्छी संख्या में आई हैं. शायद सभी पहली बार मिल रहे होंगे. लड़कियां भी आपस में धरना स्थल पर मिल रही होंगी. इनका कहना है कि सरकार ने जो पात्रता तय की है उसी के अनुरूप परीक्षा पास कर चुके हैं. जब सरकार ने फार्म निकाला तो परीक्षा की तारीख में मात्र में एक महीने का वक्त दिया. अब रिज़ल्ट आने में आठ महीने की देरी क्यों हो रही है.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग : क्या अब भी इंजीनियर होना श्रेष्ठ है?
    रवीश कुमार
    पूर्णियां की सड़कों पर गुज़रते हुए विश्वेश्वरैया की छोटी सी प्रतिमा देखी थी. वहा के अभियंता समाज ने दिखाया था. आज उनकी जयंती पर इंजीनियरों के बारे में अच्छी अच्छी बातें कही जा रही हैं. उन शुभकामना संदेशों में ऐसी कोई तस्वीर नहीं है जो बताती है कि इंजीनियरों ने उनकी विरासत को कैसे आगे बढ़ाया है.
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