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विचार
  • हे राजनीतिक पत्रकार, तनिक फाइव स्टार मुख्यालय की कथा भी कहो...
    रवीश कुमार
    राजनीतिक पत्रकारों को कभी ठीक से समझ नहीं पाया. गोरखपुर में योगी की हार बड़ी घटना तो है लेकिन इस घटना में क्या इतना कुछ है कि चार-चार दिनों तक सैकड़ों पत्रकार लोग लिखने में लगे हैं. राजनीतिक पत्रकारों को ही सिस्टम को करीब से देखने का मौका मिलता है. मगर भीतर की बातों को कम ही पत्रकार लिख पाते हैं या लिखते हैं.
  • गोरखपुर-फूलपुर के आईने में बीजेपी-कांग्रेस और तीसरा मोर्चा
    प्रियदर्शन
    आंधियों में जितनी ताकत होती है, उतना स्थायित्व नहीं होता. वे ख़त्म हो जाती हैं, लौट जाती हैं, मिट जाती हैं. इसलिए राजनीतिक आंधियों पर बहुत भरोसा नहीं करना चाहिए. इसलिए फूलपुर और गोरखपुर के नतीजे जो हवा पैदा कर रहे हैं, उन्हें आंधी की तरह पेश करने में लगे तीसरे मोर्चे को पहले अपने पांव ज़मीन पर मज़बूती से जमाने होंगे. क्योंकि तीसरे मोर्चे में जितनी संभावनाएं हैं, उससे ज़्यादा संकट हैं.
  • सरकारी भर्तियों पर वक़्त की पाबंदी क्यों नहीं?
    रवीश कुमार
    नौकरी सीरीज़ का 28वां अंक आ गया है. जहां परीक्षाएं हो रही है वहां धांधली और लीक की ख़बरें गुलज़ार हैं और जहां परीक्षा हो चुकी है वहां जांच की मांग और ज्वाइनिंग की तारीख की मांग हो रही है. अगर आप सरकारी नौकरी की भर्ती की परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे हैं तो साथ-साथ धरना प्रदर्शन की भी तैयारी कर लीजिए. जिस कॉपी में प्रैक्टिस करते हैं उसी के हाशिये पर पहले से ही मुर्दाबाद के नारे लिखना शुरू कर दीजिए.
  • रेलवे में सभी खाली पद नहीं भरे जाएंगे, नौजवान उल्लू बनाए जाते रहेंगे
    रवीश कुमार
    रेलवे पर संसद की स्थाई समिति को रेल मंत्रालय ने कहा है कि उसका इरादा सभी ख़ाली पदों को भरने का नहीं है. वह अपने मुख्य कार्य के लिए पदों को भरेगी मगर बाकी काम के लिए आउटसोर्सिंग जैसा विकल्प देख रही है. यानी बहुत सारे पद ठेके पर दिए जाने हैं जिनका कुछ अता पता नहीं होता है. आप भी स्थाई समिति की रिपोर्ट के पेज नंबर 15 पर यह जवाब पढ़ सकते हैं.
  • सपा-बसपा की ताक़त बीजेपी पर भारी
    रवीश कुमार
    बबुआ तो बुआ को लेकर सीरीयस है. तभी तो जीत के बाद बबुआ बुआ के घर पहुंच गया. राजनीति में नारे और प्रतीक कितनी जल्दी बदलते हैं. पिछले साल राहुल और अखिलेश की जोड़ी यूपी के लड़के कहलाए, नहीं चले तो अब बुआ बबुआ नारा चल निकला है. अखिलेश यादव गुलदस्ता लेकर बसपा नेता मायावती के घर मिलने पहुंच गए.
  • उपचुनावों के नतीजे : सांप-छछूंदर बन गए गले की हड्डी
    प्रियदर्शन
    जिसे योगी आदित्यनाथ ने पहले केले और बेल का साझा कहा और फिर सांप-छछूंदर की दोस्ती, वह अब बीजेपी के लिए गले की हड्डी बन गई है. 2014 की लोकसभा में 71 सीटें और 2017 के विधानसभा चुनाव में 312 सीटें जीतने वाली बीजेपी देख रही है कि सपा और बसपा के बहुत आखिरी समय में हुए मेल ने उसका खेल बिगाड़ दिया.
  • देश का पेट भरने वालों की हमें कितनी चिंता?
    रवीश कुमार
    शायद सुप्रीम कोर्ट की जानकारी में न हो मगर अब अस्पताल भी आधार नंबर मांगने लगे हैं. अस्पताल का आधार से क्या लेना देना मगर मांगने का चलन ऐसे बढ़ गया है कि हम और आप बिना जाने समझे आधार नंबर दिए जा रहे हैं. यहां तक कि बैंक वाले दिन रात आधार मांग रहे हैं.
  • सुषमा स्वराज, नरेश अग्रवाल और शील का सवाल
    प्रियदर्शन
    सुषमा स्वराज को नरेश अग्रवाल की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है, होनी भी नहीं चाहिए। वह एक अशालीन टिप्पणी थी जिस पर किसी भी संवेदनशील आदमी को एतराज़ होना चाहिए.
  • नरेश अग्रवाल बीजेपी को सिखाने आए हैं या सीखने?
    14 नवंबर 2013 को उत्तर प्रदेश के हरदोई में नरेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा था एक चाय बेचने वाला कभी भी देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता है.
  • हमारे बैंकिंग सिस्टम की बदहाली कब होगी ख़त्म?
    रवीश कुमार
    सैलरी तो कम है ही, बैंकरों के तनाव का कारण है कि कम स्टाफ में तरह तरह के लक्ष्यों का थोप दिया जाना. कई जगह तो इंटरनेट की स्पीड इतनी कम है कि उससे भी वे काम नहीं कर पाते हैं. कुछ बैंकों की हमने टूटी हुई कुर्सियों की तस्वीरें देखीं.
  • कहीं ये वादा किसान आंदोलन थामने के लिए तो नहीं?
    रवीश कुमार
    देश में भले चाहे जितनी परेशानी हो, हमारे नेताओं को कोई परेशानी नहीं है. वे आराम से अच्छे कपड़े पहन रहे हैं, उनके सूटकेस नए-नए से लगते हैं. चश्मा भी महंगा ही होता है, इस दल से टिकट नहीं मिलता है तो उस दल से ले आते हैं. आप लोकतंत्र पर बहस करते रहिए, आपके सारे संघर्षों का फायदा वो लोग उठा ले जाते हैं जो किसी संघर्ष में नहीं होते हैं, किसी सड़क पर नहीं दिखते हैं और आराम से टिकट लेकर पार्टी तक ख़रीद लेते हैं.
  • जीवन की अनिच्छा और मृत्यु की इच्छा के बीच
    प्रियदर्शन
    सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों के संविधान पीठ ने जब इच्छा मृत्यु पर कुछ शर्तों के साथ मुहर लगाई तो दरअसल वे जीवन और मृत्यु के दार्शनिक संबंध या मृत्यु की अपरिहार्यता पर ही नहीं, उस सामाजिक संकट पर भी ध्यान दे रहे थे जो हमारे समाज में वृद्धों के अकेलेपन और बीमारी से पैदा हुआ है.
  • कैसे हैं हमारे बैंकों में कामकाज के हालात?
    रवीश कुमार
    एक सवाल आप ख़ुद से कीजिए. 24 साल की उम्र में भगत सिंह नाम का नौजवान फांसी पर चढ़ गया. क्या इसलिए कि 2018 के साल में उसके हिन्दुस्तान में लाखों की संख्या में बैंकर और उनमें भी महिला बैंकर ख़ुद को कहें कि वे ग़ुलाम हैं. वे झूठ की बुनियाद पर खड़े आंकड़ों का संसार कब तक बचाए रखेंगे, कभी न कभी यह आंकड़ों की छत उन्हीं के सर पर गिरने वाली है. गिर रही है.
  • बैंकों के भीतर ग़ुलामी... किसी जेपी दत्ता को बुलाओ, इनकी दास्तां पर फिल्म बनवाओ
    रवीश कुमार
    "यदि कोई कार्मिक बीमार होते हैं और चिकित्सा अवकाश में प्रस्थान करते हैं तो वे मुख्यालय में ही रहकर अपना इलाज करवाएं और संबंधित कॉपी क्षेत्रीय कार्यालय को प्रेषित करेंगे अन्यथा आपके चिकित्सा अवकाश को स्वीकृति नहीं दी जाएगी औऱ आपको अवैतनिक किया जाएगा."
  • बैंक सीरीज का 9वां भाग : महिला दिवस पर महिला बैंकरों की दास्तान
    रवीश कुमार
    बैंक सीरीज़ का यह 9 वां अक है. यह सीरीज सैलरी से शुरू हुई थी, लेकिन जब धीरे-धीरे महिला बैंकर खुलने लगीं और अपनी बात बताने लगीं तो हर दिन उनकी कोई दास्तां मुझे गुस्से और हैरानी से भर देता है कि आज के समय में क्या इतनी महिलाओं को गुलाम बनाया जा सकता है. सैंकड़ों की संख्या में महिला बैंकरों ने अपना जो हाल बनाया है वो किसी भी प्रोफेसर किसी भी फेमिनिस्ट के लिए एक ऐसा दस्तावेज़ है, जिस तक पहुंचने में उन्हें वर्षों लग जाएंगे. 
  • श्री श्री रविशंकर क्या चाहते हैं?
    प्रियदर्शन
    आर्ट ऑफ़ लिविंग के गुरु श्रीश्री रविशंकर कह रहे हैं कि इस देश को सीरिया होने से बचाया जाए, इसलिए अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण पर आम राय बनाई जाए. वे कहते हैं, सभी समुदायों के लोगों से बात करके इसका रास्ता निकाला जाए. वे कहते हैं कि अदालत का फ़ैसला मंदिर के पक्ष में आए या इसके ख़िलाफ़- लेकिन इससे माहौल बिगड़ेगा. मुसलमान दुखी होंगे या फिर हिंदू क्रोधित. देश गृह युद्ध के कगार पर चला जाएगा.
  • BCCI के द्वारा जारी की गई कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट पर क्यों उठाया जा सकता है सवाल?
    बीसीसीआई के तरफ बुधवार को खिलाड़ियों के साथ नये कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम का ऐलान कर दि गया. इस बार एक नया वर्ग A प्लस के नाम से लागू कर दिया गया है. जो भी खिलाड़ी इस वर्ग में होंगे उन्हें सात करोड़ मिलेगा.
  • दिल्ली, तूने सबको 'अपना घर' दिया, लेकिन हमने तुझे 'अनाथ' कर दिया
    अनिता शर्मा
    बचपन से दिल्ली में रहती हूं. पर लोग जब पूछते हैं कि कहां से बिलॉन्ग करती हो, तो जवाब होता है हरियाणा. दादा-परदादा, खेल-खलिहाल और सबसे अहम दो महीने की छुट्ट‍ियां सब वहीं पर हैं, वैसे के वैसे, जैसे पापा कभी छोड़ आए थे. उनते ही सादे और अपने...
  • बैंकों की कमर टूटी है, अब आपका गुल्लक भी टूटेगा, तमाशा देखते रहिए
    रवीश कुमार
    लाखों करोड़ का लोन लेकर बैंकों को दरका देने वालों का नाम न बताने में ही सरकार ने चार साल ख़र्च कर दिए, अब ख़बरें आ रही हैं कि बैंकों ने 17,000 बकायेदारों पर मुकदमा कर दिया है. इन पर 2 लाख 65 हज़ार करोड़ का बक़ाया है.
  • अगर पेरियार को छुओगे, तो जल जाओगे...
    प्रियदर्शन
    लेनिन की मूर्ति आपने गिरा दी, लेकिन कृपया पेरियार को छूने की कोशिश न करें.... यह वैधानिक नहीं, शुद्ध राजनीतिक चेतावनी है. आज की तारीख़ में अम्बेडकर, ज्योतिबा फुले और पेरियार महज़ मूर्तियां नहीं, ऐसे खंभे हैं, जिनमें बिजली दौड़ रही है.
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