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विचार
  • हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तानी बच्चे, और हिन्दी की हालत...
    विवेक रस्तोगी
    जो बच्चा आज उनतालीस, उनचास, उनसठ, उनत्तर और उनासी के बीच फर्क नहीं समझेगा, उसके लिए आने वाले दिनों में आम देशवासियों से बात करना, और देश के गौरव को समझना क्योंकर मुमकिन होगा... सो, आइए, भाषागत राजनीति में उलझे बिना ऐसे काम करें, जिससे हिन्दी और समृद्ध, और सशक्त हो...
  • कंगना रनौत को लेकर ठाकरे-पवार की मुलाकात में क्या-क्या हुआ...?
    स्वाति चतुर्वेदी
    अभिनेत्री कंगना रनौत काफी तेज़ गति से आगे बढ़ी हैं और (Y+ सिक्योरिटी के साथ) मुंबई में शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच छिड़ी राजनैतिक जंग के बीचोंबीच उतर आई हैं.
  • मैं पोस्टमैन हूं...
    संकेत उपाध्याय
    रोज़ कितनी मेहनत से एडिटरान स्तर गिरा रहे हैं. किसके लिए...? ताकि वेबसाइट चल सके, ताकि बेरोज़गार बैठा युवा TV पर 'सीधे' और 'कड़े' सवाल होते देखे. ताकि हर बेख़बर JCB ड्राइवर और पोस्टमैन से वे तीखे सवाल पूछे जाएं, जो जनता सुनना चाहती है.
  • सिर्फ़ रेलवे परीक्षाओं की तारीख़ का एलान कर नौजवानों में फूट न डाले सरकार
    रवीश कुमार
    पिछले रविवार से ही छात्र ट्वीटर की टाइम लाइन पर ट्रेंड आंदोलन चला रहे हैं. 35 से 70 लाख ट्वीट करने के बाद भी पीयूष गोयल चुप रहे तब छात्रों ने 5 सितंबर को शाम 5 बजे थाली बजाने का आंदोलन शुरू किया.
  • क्या कड़े निर्णय के चक्कर में देश को गर्त में पहुंचा दिया PM मोदी ने?
    रवीश कुमार
    नोटबंदी और तालाबंदी ये दो ऐसे निर्णय हैं जिन्हें कड़े निर्णय की श्रेणी में रखा गया. दोनों निर्णयों ने अर्थव्यवस्था को लंबे समय के लिए बर्बाद कर दिया. आर्थिक तबाही से त्रस्त लोग क्या यह सवाल पूछ पाएँगे कि जब आप तालाबंदी जैसे कड़े निर्णय लेने जा रहे थे तब आपकी मेज़ पर किस तरह के विकल्प और जानकारियाँ रखी गईं थीं.
  • LAC पर चीन की धोखेबाजी और झूठ पर झूठ...
    कादम्बिनी शर्मा
    जब पूरी दुनिया कोविड से निबट रही है तब चीन भारत की ज़मीन हड़पने की कोशिश में है. मई के बाद एक बार फिर 29-30 अगस्त की रात चीनी सेना ने भारत के इलाके में घुसपैठ कर कब्जा़ करने की कोशिश की लेकिन सतर्क भारतीय सेना ने इसे बेकार कर दिया. अपनी पोज़िशन मज़बूत कर ली.
  • पहली तिमाही की GDP -23.9%, मोदी जी आपका कोई विकल्प नहीं
    रवीश कुमार
    सावधान हो जाएं. आर्थिक निर्णय सोच समझ कर लें. बल्कि अब यही ठीक रहेगा कि सुशांत सिंह राजपूत का ही कवरेज देखते रहिए. यह बर्बादी की ऐसी सतह है जहां से आप अब बेरोज़गारी के प्रश्नों पर विचार कर कुछ नहीं हासिल कर सकते.
  • नीतीश को फिर CM बनाने की 'साजिश', PM मोदी से लेकर तेजस्वी, चिराग पासवान तक शामिल
    मनीष कुमार
    बिहार में दो से तीन महीने के दौरान विधानसभा चुनाव होंगे. इस बार मुक़ाबला निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए बनाम विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल में सुप्रीमो लालू यादव के राजनीतिक उतराधिकारी तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन के बीच होगा. अभी तक के जो भी रुझान हैं उससे नीतीश कुमार अपने साथ चुनावी अंकगणित और सामाजिक समीकरण दोनो में तेजस्वी यादव पर भारी पड़ रहे हैं. लेकिन अगर नीतीश कुमार की पंद्रह वर्षों के बाद सत्ता में वापसी तय है तो इसके पीछे आपको प्रधानमंत्री , नरेंद्र मोदी , विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और कुछ हद तक लोजपा नेता चिराग़ पासवान की साज़िश को समझना होगा कि कैसे इन्होंने अपने अलग-अलग निर्णय से नीतीश कुमार की वापसी तय कर दी है. 
  • हिटलर के सम्मान को ठुकराने वाले 'दद्दा' को देश ने क्या दिया?
    संजय किशोर
    हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को देश वो सम्मान आज भी नहीं दे पाया है जो दुनिया के सबसे बड़े तानाशाह एडॉल्फ़ हिटलर तक के प्रस्ताव को ठुकरा आया था.
  • पिक्चर अभी बाकी है, कांग्रेस में जंग जारी है...
    मनोरंजन भारती
    कांग्रेस का लेटर बम मामला अभी तक खत्म नहीं हुआ है. हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में कहा था अब इस मामले पर कोई बात नहीं करेगा और पार्टी को इससे निकल कर आगे बढना चाहिए. मगर कांग्रेस में अभी भी सब ठीक-ठाक नहीं है. यह तो उसी दिन पता चल गया था जब कांग्रेस कार्य समिति की औपचारिक बैठक के बाद गुलाम नबी आजाद के घर पर उन नेताओं की बैठक हुई जिन्होने चिट्ठी पर दस्तखत किए थे और अब गुलाम नबी ये कह रहे हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव होना चाहिए और साथ में कांग्रेस कार्य समिति का भी चुनाव हो. यही नहीं ब्लॉक लेवल से उपर तक नियुक्ति चुनाव के बाद ही हो. आजाद ने यह भी कहा कि हमारी मंशा कांग्रेस को मजबूत करने और उसको सक्रिय करने की है.
  • अंबानी और अडानी, आओ मिलकर पढ़ते हैं साल भर यही कहानी, हम हिन्दुस्तानी
    रवीश कुमार
    भारत संचार निगम लिमिटेड वाले जानते होंगे कि एक समय कई हज़ार करोड़ का मुनाफ़ा कमाने वाली कंपनी कैसे ख़त्म की गई. उससे कहा गया कि आप 2G से 4G का मुक़ाबला करो. इस फ़ैसले से किसे लाभ हुआ BSNL के लोग जानते थे मगर हिन्दू मुसलमान की राजनीति ने कइयों के विवेक पर गोबर लीप दिया था.
  • आसमान छूने शहर आते हैं, लेकिन शहर के लोग आसमान नहीं देखते...
    रवीश कुमार
    दिल्ली की छतों का एक ही मतलब रहा है. जहां काले रंग की पानी की टंकी होती थी. जिसमें पानी मोटर से चढ़ता था.फिर उतरता था. लोग छत पर टंकी देखने जाते हैं. जब टंकी लीक करती है. क्या कभी पहले भी इस रात का आसमान इस तरह देखना होता था? हाउसिंग सोसायटी के लोग अपनी बालकनी से आती-जाती कारें देखा करते हैं. छत की सीलिंग देखते हैं. जहां छत है वहाँ डिश एंटेना लगा है. लोग घरों में बंद है. 
  • प्रातःकालीन डायरी : कहीं होता हूं, जागता कहीं और हूं...
    रवीश कुमार
    एकदम से सुबह की रौशनी बिखर जाने से ठीक पहले का सफ़ेद अंधेरा. जाती हुई रात अपने आख़िरी वक्त में सफ़ेद लगती है. रात गहराने से पहले भौंक कर सोने वाले कुत्ते भी सुबह होने से पहले भौंकने लगते हैं, कौआ पहले बोलता है या गौरैया पहले बोलती है. ची ची ची ची। ची च। ची ची ची ची. पेड़ पर कुछ कोलाहल तो है. हवा ठंडी है. ऐसे वक्त की खुली दुकानों की अपनी ख़ुश्बू होती है. भीतर बल्ब जल रहा है. बाहर सड़क पर थोड़ी सफ़ाई हो चुकी है. दुकान की बेंच बाहर रखी जा रही है. भजन बज रहा है.
  • मठों-मंदिरों के संगीत का दुनिया को मुरीद बनाने वाले पंडित जसराज
    सूर्यकांत पाठक
    आम तौर पर शास्त्रीय संगीत सभाओं में इस परंपरा में रुचि रखने वाले या फिर वे रसिक, जो इसके अलौकिक आनंद में गोता लगाना जानते हैं, ही पहुंचते हैं. लेकिन पंडित जसराज की सभाओं में श्रोताओं का समूह इससे कुछ जुदा होता था. उनकी सभाओं में शुद्ध शास्त्रीय संगीतों के रसिकों के अलावा वे आम श्रोता भी होते थे जो भारतीय भक्ति परंपरा में विश्वास रखते थे. इसका कारण था मेवाती घराने की वह सुर धारा जिसका कहीं अधिक उन्नत स्वरूप पंडित जसराज के गायन में देखने को मिलता है. पंडित जी ने अपने गायन में उस वैष्णव भक्ति परंपरा को चुना जो भारतीय संस्कृति का मजबूत आधार रही है. दैवीय आख्यान मेवाती घराने की विशेषता रही है. यह वह परंपरा है जिसका विकास मंदिरों में गायन से हुआ है. यह 'टेंपल म्युजिक' है. यह संगीत का वही स्वरूप है जो निराकार को साकर करता है, जो निराकार को सुरों में संजोकर आकार देता है. जो मानव को चिरंतन में लीन होने की दिशा में ले जाता है. पंडित जसराज की बंदिशें देवों को समर्पित हैं. वे देव जो भारतीय संस्कृति का अमिट हिस्सा हैं. पंडित जी के सुरों के साथ शब्द ब्रह्म आम लोगों के मन की थाह तक पहुंचते रहे.
  • बिहार चुनाव: सीट बंटवारे को लेकर पिता जैसे पैंतरे दिखा रहे चिराग पासवान
    अखिलेश शर्मा
    बिहार चुनाव में एक प्रमुख खिलाड़ी लोक जनशक्ति पार्टी है. उसके नेता चिराग पासवान पहली बार आगे आकर कमान संभाल रहे हैं. अभी तक रामविलास पासवान ही पार्टी का चेहरा होते थे, लेकिन चिराग पासवान अपने पिता के नक्शेकदम पर ही चल रहे हैं. हर चुनाव से पहले रामविलास पासवान सीटों के बंटवारे को लेकर जिस तरह पैंतरे दिखाते हैं वैसे ही चिराग भी दिखा रहे हैं. लेकिन इस बार हालात थोड़े अलग हैं.
  • आदित्य ठाकरे हैं, BJP के 'पप्पू 2' अभियान का निशाना... जानिए, क्यों...?
    स्वाति चतुर्वेदी
    ऐसा लगता है, महाराष्ट्र की राजनीति ने तय कर लिया है कि वह मुंबई फिल्म इंडस्ट्री से ही प्रेरणा लेती रहेगी, क्योंकि यहां अब दो खानदानों के बीच पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा सत्ता संघर्ष जारी है. इसके साथ ही यहां एक अभिनेता की मौत होती है, एक के बाद एक आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला शुरू हो जाता है, और भारतीय जनता पार्टी (BJP) का सारा ध्यान बिहार चुनाव की तरफ है, तो कुछ ही महीनों में होने वाले हैं.
  • यूपी CM योगी आदित्यनाथ के नाम रवीश कुमार का खुला खत
    रवीश कुमार
    अभ्यर्थियों के इस पत्र को सत्यापित करने का कोई ज़रिया नहीं है. आप पत्र में लिखी बातों की जांच करा सकते हैं. यह निश्चित रूप से दुखद है कि आपके राज में 2018 में शुरू हुई OCT 49568 की प्रक्रिया अगस्त 2020 तक पूरी नहीं हुई है. पत्र से यह भी नहीं लगता कि कोई क़ानूनी अड़चन है.अत: ये भर्ती तो समय से पूरी हो सकती थी.
  • इस दौर का नारा है: कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, नौकरी जाती है जाने दो
    रवीश कुमार
    क्या उन ख़बरों को ऐसे लिखे- छोटे, लघु व मध्यम श्रेणी के उद्योगों की अपनी रिपोर्ट है कि अगस्त तक चार करोड़ लोगों की नौकरियाँ जा सकती हैं. कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. CMIE का कहना है कि पचास लाख वेतनभोगी लोगों की नौकरी चली गई होगी. कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. ट्रैवल एंड टूरिज़्म सेक्टर से चार करोड़ों लोगों की नौकरियाँ जा सकती हैं.कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. एयर इंडिया के पचास पायलट निकाले गए. कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. बिक जाएगा एयर इंडिया, सरकार करेगी फ़ैसला.  कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.
  • नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी बड़ा ऐलान नहीं है, पुरानी भर्तियों को पूरा करने का ऐलान बड़ा होता
    रवीश कुमार
    बुधवार को ऐलान हुआ है कि नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी बनेगी, जो केंद्र सरकार की भर्तियों की आरंभिक परीक्षा लेगी. इस आरंभिक परीक्षा से छंटकर जो छात्र चुने जाएंगे. उन्हें फिर अलग-अलग विभागों की ज़रूरत के हिसाब से परीक्षा देनी होगी. इसके लिए ज़िलों में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे.
  • हे बिहार सरकार, इन नौजवानों की व्यथा सुन लीजिए
    रवीश कुमार
    बिहार की जवानी प्रतिभा से भरी है और बेड़ियों से जकड़ी है. अत: युवाओं के बड़े तबके से कोई उम्मीद रखना पानी पर आग तापने जैसा होगा. इनकी सीमित आंकाक्षाओं से किसी भी राजनीतिक दल को ख़ुश होना चाहिए. बस लगन के टाईम में इन्हें कोई परेशान न करे. दहेज के सामानों का निर्बाध आवागमन रहे. आज जनमानस में सांप्रदायिकता सहज वृत्ति है. इसे बदलने का कोई भी प्रयास न करे. जातिवाद तो नैसर्गिक है. ऐसे हालात में अगर बिहार सरकार युवाओं की बात न भी मानें तो उसे कोई ख़तरा नहीं है. मेरा तर्क है कि इसी आधार पर इनकी बात सुनी जाए। बिना शर्त निष्ठा का इतना लाभ तो मिले. 
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