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विचार
  • एक सोशल मीडिया योद्धा की ट्रैवल डायरी
    क्रांति संभव
    छुट्टियों पर जाकर तस्वीरें खींचना जीवन की अद्भुत व्यथा है, जिसे भरपूर एन्जॉय किया जाता है. जब नौकरी और प्रोडक्टिविटी के मकड़जाल में यह समय के सदुपयोग के हिसाब से परम धर्म लगता रहता था. अब इस व्याधि की गहराई और ज़्यादा अंडरग्राउंड चली गई है.
  • फीफा वर्ल्ड कप : जर्मनी की हार और साउथ कोरिया की जीत के मायने...
    मनोरंजन भारती
    फीफा वर्ल्ड कप मैच में साउथ कोरिया ने जर्मनी को 2-0 से हराकर इस वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा अपसेट किया है. वैसे भी इस वर्ल्ड कप में जर्मनी की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी. जर्मनी को अपने पहले ही मैच में कोलम्बिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.
  • शिक्षा व्यवस्था को लेकर कितने गंभीर हैं हम?  
    रवीश कुमार
    कई बार हमें लगता है कि किसी विश्वविद्यालय की समस्या इसलिए है क्योंकि वहां स्वायत्तता नहीं है इसलिए उसे स्वायत्तता दे दी जाए. जब भी उच्च शिक्षा की समस्याओं पर बात होती है, ऑटोनमी यानी स्वायत्तता को एंटी बायेटिक टैबलेट के रूप में पेश किया जाता है. लेकिन आप किसी भी विश्वविद्यालय को देखिए, चाहे वो प्राइवेट हो या पब्लिक यानी सरकारी क्या वहां सरकार या राजनीतिक प्रभाव से स्वायत्त होने की स्वतंत्रता है. सरकार ही क्यों हस्तक्षेप करती है, वो हस्तक्षेप करना बंद कर दे. कभी आपने सुना है कि वाइस चांसलर की नियुक्ति की प्रक्रिया बेहतर की जाएगी, उनका चयन राजनीतिक तौर पर नहीं होगा.
  • कांटेदार होगा राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव
    मनोरंजन भारती
    राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन इसी 1 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं और इसी के साथ नए उपसभापति को लेकर सियासत तेज हो गई है. सरकार की तरफ से ये संकेत मिल रहे हैं कि वह भी इस पद के लिए उम्मीदवार उतारने वाली है, जबकि कांग्रेस की तरफ से ये संकेत मिल रहे हैं कि वो अपना उम्मीदवार तो नहीं उतारेगी मगर विपक्ष की तरफ से अगर कोई दल उम्मीदवार देता है तो उसे अपना सर्मथन दे सकती है.
  • चल गया लियोनेल मेसी का जादू...
    मनोरंजन भारती
    खेल के 16वें मिनट में जैसे ही मेसी को गेंद मिली उसने पहले उसे अपने जांघों पर लिया और फिर डिफेंडर को मात देते हुए बायें पांव से ऐसा गोल दागा कि सबके मुंह से निकला होगा वाह क्या गोल है मेसी द मैजेसियन .मेसी का इस फीफा वर्ल्डकप में यह पहला गोल था. वैसे भी फीफा वर्ल्डकप के शुरू होने से पहले ही इस बात की चर्चा होने लगी थी कि रोनाल्डो के अधिक गोल होंगे कि मेसी के.जाहिर सी बात है कि मेसी से रोनाल्डो काफी निकल गए हैं.
  • क्या नीतीश कुमार एक बार फिर मारेंगे पलटी?
    अखिलेश शर्मा
    क्या नीतीश कुमार एक बार फिर पलटी मारेंगे? यह सवाल इसलिए क्योंकि बीजेपी के साथ उनकी खटपट शुरू हो गई है. सीटों के बंटवारे को लेकर ज़ोर-आज़माइश हो रही है. एक-दूसरे पर बयानों के तीखे तीर चलाने का सिलसिला शुरू हो गया है. इसी बीच नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद को फोन कर दिया. बताया गया कि बातचीत का मुद्दा लालू की सेहत थी. लेकिन इससे बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की सेहत पर सवाल उठ गए. 
  • रेलवे में दस लाख नौकरियों का दावा कब पूरा होगा ?
    रवीश कुमार
    भारत का नौजवान जिन सवालों पर नेताओं को बोलते सुनना चाहता है, नेता पूरी कोशिश में लगे हैं कि उन सवालों पर न बोला जाए. टीवी के ज़रिए सवालों से देश को बहकाकर वहां ले जाया जा रहा है जहां उस बहस का कोई मतलब नहीं मगर उस बहस में चंद मिनटों का रोमांच ज़रूर है. लम्हों को धोखा देकर पीढ़ियों को बर्बाद किया जा रहा है. अच्छी बात यही है कि भारत के नौजवानों ने भी कसम खा ली है कि राजनीति के इस खेल को नहीं समझना है वरना इंदौर की डॉक्टर स्मृति लहरपुरे ने फीस के जिस दबाव में आत्महत्या की है, उस सवाल पर नेताओं को फर्क भले न पड़े, नौजवानों का सर शर्म से झुक जाना चाहिए था. अच्छी बात है कि कुछ मेडिकल संस्थानों के छात्रों ने स्मृति लहरपुरे के समर्थन में प्रदर्शन किया है. देश के ढाई करोड़ नौजवान 31 मार्च से इंतज़ार कर रहे हैं कि रेलवे के ग्रुप-डी और ग्रुप-सी की जो परीक्षा का फॉर्म भरा था वो परीक्षा कब होगी.
  • क्या राम मंदिर को लेकर BJP-RSS में कोई खिचड़ी पक रही है?
    अखिलेश शर्मा
    क्या अयोध्या में राम मंदिर को लेकर बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष स्तर पर कोई खिचड़ी पक रही है? या फिर सिर्फ चुनाव नजदीक देख कर एक बार फिर बयानों की गर्मी दिख रही है? वैसे तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है और बीजेपी कहती आई है कि वो राम मंदिर बनाने के पक्ष में है, लेकिन ऐसा या तो सभी पक्षों की आपसी सहमति से या फिर अदालत के आदेश के बाद ही होगा. लेकिन सोमवार को अयोध्या में हुए संत सम्मेलन में भगवा वस्त्रधारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संत समाज से राम मंदिर के निर्माण में हो रही देरी को लेकर कड़वी बातें सुननी पड़ी है.
  • बिहार में JDU-BJP गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं ?
    मनोरंजन भारती
    बिहार में जेडीयू और बीजेपी गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. 2019 चुनाव से पहले अपनी-अपनी ताकत का बखान करने के लिए बयानबाजी तेज है. सबसे ताजा बयान जेडीयू के महासचिव संजय सिंह का है, जिसमें उन्होंने यह दावा किया है कि बीजेपी बिना नीतीश कुमार के 2019 का चुनाव नहीं जीत सकती और यह बात बीजेपी भी जानती है. उन्होंने यह भी कहा कि 2014 और 2019 में हालात में काफी अंतर है. संजय सिंह यहीं नहीं रुकते हैं. उन्होंने आगे कहा है कि बीजेपी सभी 40 सीटों पर लड़ने के लिए स्वतंत्र है.
  • इमरजेंसी: क्या भूलें, क्या याद करें, किन-किन ने मांगी माफ़ी?
    प्रियदर्शन
    फिल्म 'आंधी' 1975 में बनी थी इमरजेंसी से पहले. फिल्म में सुचित्रा सेन ने एक ऐसी नेता की भूमिका अदा की थी जो अपने पति से अलग रह रही है. बरसों बाद वे मिलते हैं और उनके बीच पुरानी स्मृतियों का रेला बहता रहता है. सुचित्रा सेन का मेकअप काफी कुछ इंदिरा गांधी जैसा था. इमरजेंसी के दौरान यह फिल्म रोक दी गई. लेकिन 1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद फिल्म फिर से रिलीज हुई और बेहद कामयाब रही. राहुल देव बर्मन ने फिल्म का जो संगीत दिया था, वह आज भी हिंदी फिल्मों के बेहतरीन संगीत की विरासत है. गुलजार के लेखन और निर्देशन की जानी-पहचानी भावुकता को छूती संवेदनशीलता यहां भी मौजूद है.
  • धन्यवाद, डॉ. प्रणब दा...
    डॉ मनमोहन वैद्य
    अपने ही लोगों के तीव्र विरोध के बाद भी पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर प्रणब मुखर्जी संघ के कार्यक्रम में नागपुर आए और पूर्ण सहभागी हुए, इसलिए उनका विशेष अभिनंदन एवं धन्यवाद. वह डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार के घर भी गए और वहां अपना भाव एकदम स्पष्ट शब्दों में लिखकर व्यक्त किया. स्मृति मंदिर में जाकर डॉक्टर हेडगेवार और श्री गुरुजी का स्मरण और अभिवादन किया और कार्यक्रम में अपने मन की बात खुलकर की.
  • सरकार की नमामि गंगे मुहिम कितनी कारगर?
    रवीश कुमार
    गंगा उन सभी को बुला रही है जिन्हें वो साल में कई बार बुलाती रहती है. वो चाहती है कि वे सारे लोग उसका हाल देखें और बताएं कि उसका पानी साफ क्यों नहीं हुआ ? पानी कम क्यों होता जा रहा है और गाद से भरी गंगा कब साफ होगी. अगर आपको मां गंगा ने कभी बुलाया है तो प्लीज इस वक्त बनारस जाइये, क्योंकि वहां गंगा से जुड़ी दो योजनाएं आपसे कुछ पूछना चाहती हैं. नमामि गंगे के तहत साफ पानी नहीं दिख रहा है बल्कि पानी ही नहीं दिख रहा है और जलमार्ग बनाने के बड़े एलान का हाल ये है कि गंगा की गोदी में जब बालू और मिट्टी की गाद देखेंगे तो आपको सिर्फ गिल्ली डंडा खेलने का ख्याल आएगा, जहाज़ चलाने का नहीं. तीसरा सवाल है कि बनारस में जो पानी का अलर्ट जारी हुआ है उसकी नौबत क्यों आई. इन तीन सवालों के लिए गंगा सबको खोज रही है, बल्कि फिर से बुला रही है.
  • इंदिरा की हिटलर से तुलना के पीछे क्या है सियासत ?
    अखिलेश शर्मा
    तैंतालीस साल पहले रात का स्याह अंधेरा लोकतंत्र के मुंह पर कालिख पोत गया था. अपने भविष्य को लेकर आशंकित इंदिरा गांधी ने 1947 की आजादी के बाद पहली बार नागरिकों की आजादी छीनने का काम किया. सभी देशवासियों के मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए. विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया. प्रेस पर अकुंश लगा दिया गया. दिल्ली की फ्लीट स्ट्रीट कहे जाने वाले बहादुरशाह जफर मार्ग पर अखबारों के दफ्तरों की बिजली काट दी गई, ताकि अगले दिन अखबार न निकल सके. अगले दिन हर अखबार के दफ्तर में एक सेंसर अफसर बैठा दिया गया जिसका काम हर खबर की पड़ताल करना था कि उसमें इंदिरा गांधी या सरकार के खिलाफ कुछ न लिखा हो. इंदिरा गांधी ने यह कदम खुद को मजबूत करने के लिए उठाया.
  • इमरजेंसी : इंदिरा गांधी, हिटलर और जेटली - असली वारिस कौन?
    प्रियदर्शन
    यह सच है कि इमरजेंसी भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय है. इस दौर में नागरिक अधिकार छीन लिए गए. नेताओं, लेखकों, पत्रकारों को जेल में डाला गया. उन्हें यंत्रणाएं दी गईं. लोगों की जबरन नसबंदी कराई गई. 20 सूत्री कार्यक्रम थोपा गया. अनुशासन पर्व के नाम पर तानाशाही का चाबुक चलाया गया. यह भी सच है कि इंदिरा गांधी को इतिहास उनके इस कृत्य के लिए कभी माफ़ नहीं करेगा. भारतीय जनता ने तो उन्होंने 1977 में ही दंडित कर दिया था.
  • 750 करोड़ रुपये और बैंक कैशियरों की नोट गिनने की क्षमता का सवाल
    रवीश कुमार
    अहमदाबाद ज़िला सहकारिता बैंक में नोटबंदी के दौरान 8 से 14 नवंबर के बीच 745 करोड़ रुपये जमा हुआ. देश भर में सबसे ज्यादा पैसा इसी बैंक में जमा हुआ. अहमदाबाद ज़िला सहकारिता बैंक की वेबसाइट पर लिखा है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ही इसके अध्यक्ष हैं.
  • क्या अहमदाबाद सहकारी बैंक में 5 दिनों में 750 करोड़ की गिनती हो सकती है?
    रवीश कुमार
    मुंबई के आरटीआई कार्यकर्ता मनोरंजन रॉय को आरटीआई से जानकारी मिली है कि नोटबंदी के दौरान देश में सबसे अधिक पुराने नोट गुजरात के दो सहकारी बैंकों में बदले गए. एक का नाम है अहमदाबाद ज़िला सहकारी बैंक जिसके अध्यक्ष बीजेपी के अमित शाह हैं. यहां पर 5 दिनों में 750 करोड़ जमा हुए. दूसरा बैंक है राजकोट का ज़िला सहकारी बैंक जहां 693 करोड़ रुपये जमा हुए.
  • कश्मीर पर अपने नेताओं के बयानों से घिर गई कांग्रेस
    अखिलेश शर्मा
    कांग्रेसी नेताओं के आत्मघाती बयानों का सिलसिला जारी है. हिंदू आतंकवाद के बाद अब बारी है जम्मू-कश्मीर की जिसे लेकर कांग्रेस के दो बड़े नेताओं ने बयान दे डाले. राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज़ के बयानों से कांग्रेस घिर गई है. अब पार्टी को सफाई देने पर मजबूर होना पड़ रहा है.
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत क्यों नहीं सुधरती ? 
    रवीश कुमार
    अगर आपको भारत में नेता बनना है तो दो चीजों की परवाह आपको नहीं करनी है. क्योंकि हमारी जनता उन दो चीजों के बारे में कभी आपसे सवाल नहीं करेगी. ये दो चीज़े हैं स्वास्थ्य और शिक्षा. दोनों के घटिया स्तर के कारण हमारी और आपकी ज़िंदगी किस हद तक बर्बाद है, हम इसका हिसाब तो रखते हैं, मगर नेताओं से इसका हिसाब नहीं मांगते. इसलिए भारत में आपको नेता बनने के लिए बस एक चीज़ आनी चाहिए, वो है झूठ बोलने की बेशर्मी. अगर आप इस रास्ते चलेंगे तो यकीन मानिए आप नेता बन जाएंगे.
  • इतिहास को बनाते और बनते हुए देखने का सुख
    डॉ विजय अग्रवाल
    और इसी कारण 12 जून, 2018 का दिन दुनिया के इतिहास में तब तक के लिए दर्ज हो गया, जब तक दुनिया मौजूद रहेगी. इसी के साथ समय की पीठ पर इन दो नेताओं के नाम के अक्षर भी हमेशा-हमेशा के लिए अंकित हो गए.
  • कथित राष्‍ट्रवादियों के मुंह पर करारा तमाचा है शहीद औरंगज़ेब के पिता का बयान...
    आनंद नायक
    भारतीय सेना के शहीद जवान औरंगज़ेब के पिता को सलाम... जवान बेटे को आतंकियों के हाथों गंवाने के बाद देशप्रेम की भावना से पगी ऐसी बात वतन से बेइंतहा मोहब्‍बत करने वाला कोई शख्‍स ही कर सकता था. सेना में तैनात औरंगज़ेब परिवार के साथ ईद मनाने के लिए जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा जिला स्थित अपने घर जा रहा था, तभी आतंकियों ने उसका अपहरण कर लिया था. औरंगज़ेब को बर्बरतापूर्वक मौत के घाट उतारने से पहले आतंकियों ने उससे पूछताछ का वीडियो भी बनाया था. इस वीडियो में औरंगज़ेब आतंकियों की आंख से आंख मिलाकर सवालों का जवाब दे रहा था. ऐसा लगा, मानो, मौत का उसे कोई खौफ ही नहीं है. सेना के इस जवान की शहादत को सैल्‍यूट करने सेनाप्रमुख जनरल बिपिन रावत और रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन उसके पिता मोहम्‍मद हनीफ से मिलने पहुंचे थे. हनीफ का पूरा परिवार ही भारतीय सेना से जुड़ा है. बेटे के 'बलिदान' पर हनीफ ने जो कुछ कहा, वह देश के उन कथित राष्‍ट्रवादियों के मुंह पर करारा तमाचा था, जो देशप्रेम को किसी धर्म-संप्रदाय विशेष की बपौती मानते हैं.
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