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विचार
  • केरल के लिए सात सौ करोड़ के जुमले का सच
    अखिलेश शर्मा
    फ़र्जी खबरों पर खूब बहस होती है. ये ख़बरें कहां से आती हैं, कौन लाता है, कौन फैलाता है, इस पर खूब बात होती है. लेकिन इस तरह की गलत खबरें जब सरकारों को लेकर हों और उनका पर्दाफाश होने में कई-कई दिन लग जाएंतो मंसूबों पर शक होना तो लाजिमी है. मैं बात कर रहा हूं केरल बाढ़ पर विदेशी मदद को लेकर आई ख़बर की.
  • मैंने एक देश एक चुनाव पर एक भी बहस क्यों नहीं की?
    रवीश कुमार
    मैंने एक भी प्राइम टाइम एक देश एक चुनाव थीम पर नहीं किया. एक भी लेख नहीं लिखा. जहां तक मेरी याद्दाश्त सही है, मैंने इस मसले पर न तो कोई शो किया न ही छपा हुआ किसी का लेख पढ़ा.
  • देश में रोज़गार के दावों पर गंभीर सवाल
    रवीश कुमार
    सरकार ईपीएफओ यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के आंकड़ों को इस तरह पेश करती है कि रोज़गार बढ़ा है. 20 जुलाई को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने रोज़गार के कई आंकड़े दिए जिसमें ईपीएफओ का भी आंकड़ा था. अब प्रधानमंत्री ने लोकसभा में तो बोल दिया कि संगठित क्षेत्र में 45 लाख नौकरियां बनी हैं, लेकिन जब ईपीएफओ ने समीक्षा की तो इसमें 6 लाख नौकरियां कम हो गईं.
  • IAS के 'लौह-द्वार' पर प्रथम प्रहार
    डॉ विजय अग्रवाल
    केंद्र सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों के संयुक्त सचिव के 10 पदों के लिए निजी क्षेत्र के लोगों से जो आवेदन मंगवाए थे, उसके जवाब में कुल 6,077 आवेदन प्राप्त हुए हैं. यानी प्रति पद के लिए औसतन 600 व्यक्ति. यह एक अद्भुत संयोग है कि जिस सिविल सेवा परीक्षा के तहत IAS अधिकारियों की भर्ती होती है, उसमें बैठने वाले और सेलेक्ट होने वाले परीक्षार्थियों का अनुपात भी लगभग यही होता है
  • यादों में कुलदीप नैयरः शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक...
    रवीश कुमार
    मिर्ज़ा ग़ालिब की शमा की तरह कुलदीप नैयर हर लौ में तपे हैं, हर रंग में जले हैं. शमा के जलने में उनका यक़ीन इतना गहरा था कि 15 अगस्त से पहले की शाम वाघा बॉर्डर पर मोमबत्तियां जलाने पहुंच जाते थे.
  • तेल कंपनियों ने पेट्रोल डीलरों से मांगी जाति, धर्म, से जुड़ी जानकारियां
    रवीश कुमार
    एक ऐसे दौर में जब हमारी निजता, हमारे निजी आंकड़ों की प्राइवेसी को लेकर ख़तरा बढ़ रहा है एक नया विवाद खड़ा हो गया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपने डीलरों से कहा है कि वे अपना यहां काम करने वाले करीब दस लाख कर्मचारियों का डेटा दें. कुल 24 प्रकार की जानकारी मांगी गई है.
  • परसाई होते तो क्या मॉब लिंचिंग से, आवारा भीड़ के खतरों से बच पाते?
    प्रियदर्शन
    हरिशंकर परसाई खुशकिस्मत थे कि 1995 में ही चले गए. अगर आज होते तो या तो मॉब लिंचिंग के शिकार हो गए होते या फिर जेल में सड़ रहे होते या फिर देशद्रोह के आरोप में मुक़दमा झेल रहे होते. आवारा भीड़ के ख़तरों को उन्होंने काफ़ी पहले पहचाना था. यह भी पहचाना था कि इस भीड़ का इस्तेमाल कौन करता है.
  • सतपाल मलिक को जम्मू-कश्मीर की कमान सौंपने के क्या हैं मायने...
    अखिलेश शर्मा
    जम्मू-कश्मीर में पहली बार किसी राजनीतिक व्यक्ति को राज्यपाल बनाकर केंद्र सरकार ने राज्य की जनता से सीधा रिश्ता बनाने का ठोस और महत्वपूर्ण संकेत दिया है. सतपाल मलिक को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल ऐसे वक्त बनाया गया है जब राज्य में राज्यपाल शासन लगा है.
  • रेहड़ी के लिए लाइसेंस ज़रूरी पर, व्हॉट्सऐप के आगे सिस्टम फेल
    विराग गुप्ता
    'डिजिटल इंडिया' में व्हॉट्सऐप कंपनी के 20 करोड़ यूज़र हैं, जो विश्व में सर्वाधिक हैं. जब डाटा को तेल सरीखा बहुमूल्य माना जाता हो, उस दौर में फ्री सर्विस देकर भी व्हॉट्सऐप 5.76 लाख करोड़ से ज़्यादा वैल्यू की कंपनी है. फ़ेक न्यूज़ को लेकर समाज, सरकार और सुप्रीम कोर्ट सभी चिन्तित हैं, लेकिन व्हॉट्सऐप के भारतीय कारोबार में फर्क क्यों नहीं आया.
  • भीड़ आख़िर इतनी अराजक क्यों हो रही है?
    रवीश कुमार
    आज एक ऐसी कहानी पर बात करेंगे जिसके लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं है. ऐसी बहुत ही कम कहानियां होती हैं जिनके लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं होता. ऐसी कहानियों को हर खेमे के लोग बिना अपराध बोध के देख सकते हैं. देखते हुए कोई ज़िम्मेदार दिख जाए तो यह उनका दोष होगा. उनकी नज़र का कसूर होगा.
  • क्या बीजेपी वाकई ढलान पर है?
    अखिलेश शर्मा
    लोकसभा चुनाव अगर समय पर होते हैं तो सिर्फ आठ महीने ही बचे हैं. जहां जाइए अब लोग पूछते हुए मिल जाएंगे कि 2019 में क्या होगा? पान की दुकानों पर, चाय के ठेलों पर, भीड़ में, बाज़ार में, राजनीतिक चर्चाओं का दौर है. क्या मोदी वापसी करेंगे? या राहुल की किस्मत बुलंद होगी?
  • करते रहें हिन्दू मुस्लिम डिबेट, SAIL, IOC, BSNL में 55000 नौकरियां घटीं
    रवीश कुमार
    आज की राजनीति नौजवानों आपको चुपके से एक नारा थमा रही है. तुम हमें वोट दो, हम तुम्हें हिन्दू मुस्लिम डिबेट देंगे. इस डिबेट में तुम्हारे जीवन के दस-बीस साल टीवी के सामने और चाय की दुकानों पर आराम से कट जाएंगे.
  • फिर इसके बाद ये पूछें कि कौन दुश्मन है...
    प्रियदर्शन
    जोश मलीहाबादी का एक किस्सा मशहूर है. वह पाकिस्तान चले गए थे और लौटकर भारत आ गए. लोगों ने पूछा कि पाकिस्तान कैसा है. जोश साहब ने जवाब दिया, बाक़ी सब तो ठीक है, लेकिन वहां मुसलमान कुछ ज़्यादा हैं.
  • केरल में बाढ़ से तबाही के लिए ज़िम्मेदार कौन?
    रवीश कुमार
    कब तक सेना के बहादुर जवान हम सबको बाढ़ और तूफान से निकालते रहेंगे. कब तक हम उनकी बहादुरी के किस्सों के पीछे अपनी नाकामी को छिपाते रहेंगे. सेना, नौसेना, वायुसेना, कोस्टगार्ड और एनडीआरएफ की दर्जनों टीमें न हों तो जान माल का नुकसान कितना होगा, हम अब अंदाज़ा लगा सकते हैं.
  • क्‍या नए दौर में सुधरेंगे भारत-पाक रिश्‍ते?
    अखिलेश शर्मा
    इमरान खान के पाकिस्तान की कमान संभालने के बाद भारत पाकिस्तान रिश्तों को लेकर पहल ही ग़लत अंदाज़ में शुरू हुई. दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरान खान को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देने का एक पत्र लिखा. लेकिन इसे लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया.
  • कौन बना रहा था महाराष्ट्र के पांच शहरों में धमाके की योजना...
    रवीश कुमार
    महाराष्ट्र के पांच शहरों में कम तीव्रता वाले धमाके की योजना का पर्दाफाश हुआ है. मुंबई, पुणे, सोलापुर, सतारा और नालासोपारा में धमाके की योजना थी. महाराष्ट्र एटीएस ने इस मामले में 20 देसी बम और 21 देसी पिस्तौल बरामद किया है. तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई थी जो अब चार हो गई है.
  • केरल तबाह हो रहा है, लाखों लोग मदद मांग रहे हैं...
    रवीश कुमार
    केरल के चेंगानुर से विधायक ने एशियानेट से कहा है कि अगर अभी रात में हेलिकाप्टर नहीं भेजे गए तो सुबह तक हज़ारों लोग मारे जा चुके होंगे. इडुक्की ज़िला से पूरा संपर्क टूट गया है. केरल ने 100 साल बाद ऐसी बाढ़ देखी है.
  • मेरे लिए अटल जी के मायने...
    अनुराग द्वारी
    वो कवि थे, नेता थे, खाने के शौक़ीन थे... प्रेम भी बखूबी किया... ताउम्र किया. दिल्ली में बैठकर जो छवि अटलजी के लिये गढ़ी गई वो तो एक शब्द में 94 साल के उनके बचपने के दोस्त, पुराने नवाब इक़बाल अहमद तोड़ देते हैं. बशर्ते लुटियन की सीमा छोड़ आप शिंदे की छावनी आएं, गली के आख़िरी छोर पर बने उनके घर तक जाएं.
  • प्रेस की आज़ादी पर 300 अमरीकी अख़बारों के संपादकीय
    रवीश कुमार
    अमरीकी प्रेस के इतिहास में एक शानदार घटना हुई है. 146 पुराने अख़बार बोस्टन ग्लोब के नेतृत्व में 300 से अखबारों ने एक ही दिन अपने अखबार में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर संपादकीय छापे हैं. आप बोस्टल ग्लोब की साइट पर जाकर प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर लिखे गए 300 संपादकीय का अध्ययन कर सकते हैं.
  • अंतिम यात्रा नहीं सियासी दस्तावेज थी अटल जी की विदाई...
    प्रभात उपाध्याय
    मेरी निगाह बरबस सड़क के उस पार एक मस्जिद के किनारे खड़े तमाम मुस्लिम नौजवानों और बच्चों पर पड़ी. सिर पर झक सफेद टोपी लगाए वे 'अटल जिंदाबाद' के नारे लगा रहे थे. मोबाइल से अंतिम यात्रा की तस्वीरें लेने का प्रयास कर रहे थे. फूल बरसा रहे थे. ये महज दो दृश्य नहीं थे. इसे भाजपा की सियासी यात्रा का दस्तावेज भी कह सकते हैं.
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