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विचार
  • क्या गांधी परिवार से बाहर कोई कांग्रेस का नेतृत्व कर सकता है?
    रवीश कुमार
    कितनी आसानी से कई नेता कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में चले गए. आना जाना लगा रहता है मगर एक दूसरे दल में जाने की बेचैनी बता रही है कि कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता के भीतर कांग्रेस नहीं है. उसकी विचारधारा बहुत कमज़ोर पड़ चुकी है. पार्टी में बचे हुए नेता पार्टी के लिए कम बीजेपी में जाने के लिए ज़्यादा बचे हुए हैं. उनके भीतर अगर कांग्रेस होती तो वे रूकते.
  • धोनी को रिटायर होने की जो सलाह दी जा रही है, वह कितनी जायज़ है?
    प्रियदर्शन
    विश्व कप के कुछ मैचों में दूसरों की उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने की वजह से जो लोग महेंद्र सिंह धोनी को रिटायर होने की सलाह दे रहे हैं, उन्हें कुछ बातें याद दिलाना ज़रूरी है. 2005 के बाद से लगातार सचिन तेंदुलकर को सलाह दी जाती रही कि वे रिटायर हो जाएं. 2007 के विश्व कप के बाद सचिन ने लगभग तय कर लिया था कि अब वे नहीं खेलेंगे. उन तीन मैचों में वे बस 60-70 रन बना पाए थे. लेकिन तब विवियन रिचर्ड्स ने उन्हें कहा कि वे खेलते रहें, किसी की सुनने की जरूरत नहीं है. सचिन ने यह बात मानी- वनडे और टेस्ट क्रिकेट को मिलाकर सौ शतक पूरे किए, 2011 का वर्ल्ड कप टीम के साथ उठाया और अंततः एक अविश्वसनीय क्रिकेट करिअर पूरा कर बल्ला रखा.
  • मोदी जी को महामानव बनाने के लिए ब्रह्मास्त्र के रूप में निकलते हैं सूत्र...!
    अनुराग द्वारी
    मौजूदा नेतृत्व गांधी नहीं है, हो भी नहीं सकता... उसमें आज़ादी के जश्न में डूबे देश के बीच, नोआखली में आग बुझाने के सामर्थ्य, ताक़त, जज़्बे की कल्पना भी मुश्किल है... वह गांधी जी की इस बात को शायद सुनना भी पसंद न करें - 'सत्ता से सावधान होने की ज़रूरत है, यह भ्रष्ट बनाती है...' भले ही आज के दौर में सूत्र पत्रकार खान मार्केट और लुटियन पत्रकारों की बात करें, लेकिन यह भी सच है कि जो सत्ता के नज़दीक रहा, अभिजात्य हुआ...
  • भारी बारिश से क्‍यों नहीं निपट पाती मुंबई?
    रवीश कुमार
    अगले 48 घंटे में मुंबई और महाराष्ट्र में भारी से अति वृष्टि होने वाली है. मंगलवार को मुंबई, पुणे सहित महाराष्ट्र भर में दीवार गिरने से 31 लोगों की मौत हो गई. पुणे में पिछले हफ्ते दीवार गिरने से 17 लोगों की मौत हो गई थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बारिश के कारण महाराष्ट्र भर में दीवार गिरने से 46 लोगों की मौत हुई है. मुंबई में ही बारिश के कारण अलग-अलग दुर्घटनाओं में 25 से अधिक लोगों की मौत हो गई है. ये सभी मज़दूर हैं इसलिए मात्र संख्या हैं. मुंबई में 30 जून और 1 जुलाई को जो बारिश हुई है वो दस साल में सबसे अधिक है. जुलाई भर में जितनी बारिश होती है उतनी बारिश मुंबई में सिर्फ दो दिनों के भीतर हो गई है. 2 जुलाई को भी खूब बारिश हुई जिसके कारण कई इलाकों में पानी भर गया. महानगर में सार्वजिनक छुट्टी की घोषणा कर दी गई है.
  • पेशेवर नौकरशाहों का भी समुचित उपयोग ज़रूरी
    डॉ विजय अग्रवाल
    सन् 1991 में देश की आर्थिक नीति में हुए 360 डिग्री बदलाव का एक अत्यंत अव्यावहारिक पहलू यह रहा कि उसके अनुकूल प्रशासनिक व्यवस्था में परिवर्तन करने की कोई बड़ी कोशिश नहीं की गई. ऐसा इसके बावजूद रहा कि प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1969) तथा द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2010) ने ऐसा करने के लिए कहा था. इन आयोगों का संकेत सरकारी सेवा को प्रोफेशनल बनाए जाने की ओर था.
  • पर्दे पर निर्देशक की वापसी की फिल्म है 'आर्टिकल-15'
    रवीश कुमार
    'आर्टिकल-15' में अनुभव ने उसी उत्तर प्रदेश के सींग को सामने से पकड़ा है, जहां से देश की राजनीति अपना खाद-पानी हासिल करती है. फ़िल्म का एक किरदार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शैली में बोलता है. फ़िल्म अपनी शूटिंग के लिए योगी आदित्यनाथ का शुक्रिया भी अदा करती है. फ़िल्म बॉब डेलन को समर्पित है. एक आदमी को आदमी बनने के लिए आख़िर कितने सफ़र पूरे करने होंगे. उत्तर प्रदेश के आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे से फ़िल्म शुरू होती है.
  • ऐसे माहौल में कैसे काम करेगा अफसर?
    रवीश कुमार
    इंदौर नगर निगम के कर्मचारियों पर बल्ला चलाने के आरोप में जेल बंद आकाश विजयवर्गीय जब बाहर आए तो कहा कि उन्हें पछतावा नहीं है लेकिन अब वे गांधी के रास्ते पर चलेंगे. वैसे गांधी के रास्ते में प्रायश्चित करना भी था. यही क्या कम है कि आज भी लोग गांधी के रास्ते पर चलना चाहते हैं. बस उस रास्ते पर अब गांधी नहीं मिलते हैं. प्रधानमंत्री मोदी पर कांग्रेस ने चौकीदार चौर है का आरोप लगाया तो उन्होंने मैं भी चौकीदार हूं का नारा दिया. इसी से प्रेरित होकर एक गायक ने विधायक आकाश विजयवर्गीय के समर्थन में म्यूज़िक वीडियो लांच किया है. मेरी गुजारिश है कि आकाश को सुपर हीरो बनाने वाले इस वीडियो को आप जब देखें तो गाना समाप्त होने तक चुप रहें और गाना जब समाप्त हो जाए तो उसके बाद भी चुप रहें.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग : मुझे यकीन है, भारत-इंग्लैंड मैच फिक्स नहीं था...
    रवीश कुमार
    मैंने मैच नहीं देखा. मुझे यक़ीन है कि मैच फ़िक्स नहीं था. भारतीय टीम कभी ऐसा नहीं करेगी. जर्सी पर जिस कंपनी का नाम होता है, वह भले कुछ भी कर सकती है. लोगों के पैसे लेकर भाग सकती है. घटिया प्रोडक्ट बेच सकती है, मगर टीम ऐसा नहीं करेगी. टीम की निस्वार्थता असंदिग्ध है.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग : भारतीय न्यूज़ चैनलों को रास्ता दिखाया है अमेरिकी कंपनी ने...
    रवीश कुमार
    अमेरिका की एक बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है WAYFAIR (वे-फेयर). इस कंपनी के कर्मचारियों को पता चला कि इसे डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से दो लाख डॉलर का बिज़नेस आर्डर मिला है. ट्रंप प्रशासन उन शिविरों के लिए बिस्तर वगैरह ख़रीद रहा था, जिन्हें क़ैद कर रखा गया है. अमेरिकी मीडिया में ख़बरें आ रही हैं कि बच्चों के साथ अमानवीय बर्ताव हो रहा है. जगह की साफ-सफाई नहीं है और उन्हें बासी खाना दिया जाता है. कंपनी के कर्मचारियों को जब इस बिज़नेस करार की ख़बर लगी, तो 500 कर्मचारियों ने अपने बॉस को पत्र लिखा कि यह अनैतिक है और कंपनी इस बिज़नेस से होने वाले मुनाफे को दान करे. कर्मचारियों ने काम करने की जगह छोड़ दी और बाहर आ गए.
  • प्रकृति की गोद में 'जन्नत' की सैर जैसा है चंद्र नाहान ट्रेक
    समरजीत सिंह
    करीब 15 किलोमीटर के इस ट्रेक में आप कई बार थकेंगे, सोचेंगे आखिर इतनी चढ़ाई क्यों ही करनी, इससे बेहतर तो दिल्ली का एयर कंडीशनर वाला रूम ही सही था,लेकिन यकीन मानिये इन सभी अनुभवों के बीच जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे आपके दिलोदिमाग से दिल्ली और वह एयर कंडीशन वाला रूम निकलता जाएगा. आप पहाड़ के हर अगले मोड़ पर खुदको रोमांचित महसूस करेंगे. 
  • क्या दुनिया पहले से ज्यादा बंटी हुई है?
    रवीश कुमार
    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक इंटरव्यू आया है. यह इंटरव्यू उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स को दिया है. जापान के ओसाका में होने वाली जी-20 की बैठक में जाने से पहले पुतिन का यह इंटरव्यू कई मायनों में अहम लगता है. पुतिन ने साफ-साफ कहा है कि उदारवाद का दौर समाप्त हो चुका है. अब इसमें कोई ताकत नहीं बची है. उदारवाद को बचे रहने का हक है मगर आज के समय में उसकी भूमिका क्या है. पुतिन तो यह भी कह रहे हैं कि बहुसंस्कृतिवाद के भी दिन लद गए हैं, जनता इसके खिलाफ है.
  • राज्यसभा की कार्यवाही से हटाएं शेर, वरना ग़ालिब के नहीं उड़ेंगे पुर्जे, प्रधानमंत्री पर उठेंगे सवाल
    प्रियदर्शन
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए राज्यसभा में जो भाषण दिया, वह अब राज्यसभा के रिकॉर्ड का हिस्सा हो चुका है. इस रिकॉर्ड में प्रधानमंत्री के सौजन्य से ग़ालिब के नाम एक ऐसा शेर दर्ज है जो ग़ालिब का नहीं है. दरअसल यह क़ायदे से शेर भी नहीं है. शेर का अपना एक अनुशासन होता है जिससे शायरी की दुनिया से सामान्य परिचय रखने वाले लोग भी मोटे तौर पर परिचित होते हैं.
  • कश्मीर की कश्मकश...
    ऋचा जैन कालरा
    हाल में ही जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक नया शिगूफा छेड़ा कि हुर्रियत कांफ्रेस सरकार से बातचीत के लिए तैयार है. उन्होंने ये भी दावा किया कि घाटी में पिछले एक साल में हालात संभले हैं. इसके बाद हुर्रियत कांफ्रेस के चैयरमेन मीरवाइज़ उमर फारूख़ ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि वो बातचीत का स्वागत का करते हैं और हुर्रियत हमेशा कश्मीर समस्या सुलझाने के लिए इसका समर्थन करती है. लेकिन इस पर केंद्र सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं हुई है.
  • जब सिर्फ दो दिन जंगल जाने से हो जाता था शादी का इंतज़ाम...
    अब यह सुनने में थोड़ा अटपटा लगेगा, लेकिन जंगल से सटे एक गांव के उस बुजुर्ग के मुंह से निकली यह सच्चाई हमें बताती है कि परतंत्र होने का मतलब ऐसा भी होता है. गर्मी के चलते तकरीबन सूख चुके एक कुएं के ठीक बाजू में एक पेड़ की छांव तले जब बातचीत के लिए गांव के कुछ लोग जमा हुए, तो एक व्यक्ति की नई सफेद बंडी, लंबा सफेद गमछा, जि‍से लुंगी की तरह लपेटा गया था, में हल्दी से पुते शरीर और उनींदी आंखों को देखकर ही समझ में आ रहा था कि पिछली रात ही उनके घर में विवाह समारोह हुआ है.
  • इस बजट से पता चलेगी देश की माली हालत, लेकिन पत्रकारों को लेनी पड़ेगी ट्यूशन
    सुधीर जैन
    अगले हफ़्ते बजट पेश होगा. फौरन ही उसके विश्लेषण भी होने लगेंगे, लेकिन देश की माली हालत के मद्देनज़र इस साल सरकार के सामने बड़ी-बड़ी चुनौतियां हैं, इसीलिए आसार हैं कि बजट जटिल होगा. विश्लेषकों को इसे समझने में बहुत माथापच्ची करनी पड़ सकती है. बहरहाल, पेश होने से पहले बजट के कुछ नुक्तों की चर्चा.
  • हमारी व्‍यवस्‍था इस गटर से बाहर कब निकलेगी?
    रवीश कुमार
    न्यूज़ देखना अब टिक टॉक देखने जैसा हो गया है. पूरा समाज और सिस्टम अपना केरिकेचर बन गए हैं. यानी ख़ुद का मज़ाक बन गए हैं. उन्नाव में जेल में पार्टी हो रही है तो लुधियाना की जेल में गोली चल रही है. सीआरपीएफ बुलानी पड़ती है. एक बंदा आता है जो रिवाल्वर ताने दिखता है, लेकिन उसे शायरी भी आती है. वो शायरी भी सुनाता है. व्हाट्सएप शायरी जिसके झांसे में बड़े बड़े लोग आ जाते हैं. सब कुछ का वीडियो मिल जाता है. तुरंत का नहीं मिलता है तो एक महीने बाद मिल जाता है. जैसे ही ये सब गुज़रता है योग की खूबियों पर प्रधानमंत्री का भाषण आ जाता है. जैसे लगता है कि अब सब ठीक हो जाएगा.
  • वर्ल्‍ड कप के सेमीफाइनल में पहुंच सकता है पाकिस्तान...
    मनोरंजन भारती
    क्रिकेट वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल के लिए टीमों में अभी भी जोर आजमाईश चल रही है. केवल ऑस्ट्रेलिया और भारत के सेमीफाइनल तक पहुंचने की राह आसान लग रही है मगर बाकी दो स्‍थानों के लिए बाकी टीमों में कांटें की टक्कर है, खासकर चौथे स्थान के लिए.
  • क्या गन्ने का जूस बेचेंगे उत्तर प्रदेश के युवा?
    रवीश कुमार
    पकौड़ा तलना भी रोज़गार है. प्रधानमंत्री के इस कथन को राजनीतिक और सामाजिक तौर से बहुतों ने मज़ाक उड़ाया था. मगर 2019 के रिजल्ट ने मज़ाक उड़ाने वालों को नकार दिया. जो लोग अब भी इसका राजनीतिक और सामाजिक मज़ाक उड़ाते हैं उन्हें अपनी राय में संशोधन कर लेना चाहिए. शायद इसी जनसमर्थन से उत्साहित होकर उत्तर प्रदेश सरकार ने 23 जून को एक ट्वीट किया. इस ट्वीट में कहा गया है कि युवाओं को बड़ी संख्या में रोज़गार उपलब्ध कराने की दिशा में अग्रसर यूपी सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के ज़रिए ऋण मुहैया करवाकर नौजवानों को गन्ने के जूस के कारोबार से जोड़ने का फैसला लिया है.
  • काश, नारा होता - मोदी है, तो 'नामुमकिन है...'
    प्रियदर्शन
    इस तरह देखें, तो तबरेज़ की हत्या एक राजनीतिक विचारधारा के तहत की गई हत्या है. यह राजनीतिक विचारधारा भीड़ को एक तरह की वैधता और मान्यता देती है. इस राजनीतिक विचारधारा को एक शक्तिशाली भारत का ख़याल बहुत लुभाता है. 'मोदी है, तो मुमकिन है' जैसा नारा ताक़त के इसी ख़याल से पैदा होता है
  • कैंसर से मरना भी मंत्री बनना है
    रवीश कुमार
    लुधियाना का नाला बंद नहीं होता है. बुढ़ा दरिया कहलाता था. पहले नाले ने बुढ़ा दरिया को नाला किया. अब वह बुढ़ा नाला कहलाता है. एक दिन सतलुज को नाले में बदल देगा. नदियों को लेकर योजनाएँ बन रही हैं. योजनाओं के नाम बदल रहे हैं. मंत्रालय बन रहे हैं. मंत्रालय के नाम बदल रहे हैं. नदी नहीं बदल रही है. मरने वाले लोग भी नहीं बदल रहे हैं. जैसे कोई मंत्री बन रहा है, वैसे कोई कैंसर से मर रहा है. कैंसर से मरना भी मंत्री बनना है.
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