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  • चुनाव आयोग को स्थानीय चुनावों में इस्तेमाल होने वाली EVM मशीनों की ज़िम्मेदारी भी लेनी चाहिये
    यूपी में हाल में हुये मेयर और वार्ड के चुनावों के बाद एक बार फिर से ईवीएम को लेकर विवाद उठ रहा है। विपक्षी पार्टियां कह रही हैं कि ईवीएम में गड़बड़ी की वजह से बीजेपी जीती.
  • बीजेपी के 'जनेऊ जाल' में फंस गई कांग्रेस!
    निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की निर्णायक जीत का मतलब 45 साल के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अपने घरेलू राज्य में और निखरकर सामने आना है. योगी ने पूरे उत्तर प्रदेश मे तूफानी प्रचार अभियान चलाया और चुनाव के परिणाम यह साबित करते हैं कि उनका यह बड़ा दांव पूरी तरह से सही था.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्या जीडीपी में सुधार का दौर शुरू हो गया?
    सेंट्रल स्टैटिस्टिकल ऑफिस ने इस वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही का जीडीपी आंकड़ा जारी कर दिया है. पहली तिमाही की तुलना में जीडीपी की दर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. इसके पहले 31 अगस्त को पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून की जीडीपी आई थी, इस बार जुलाई से सितंबर की जीडीपी आई है.
  • मोदी हार सकते हैं लेकिन क्‍या राहुल गांधी की सही में जीत होगी?
    क्या मोदी अपने गृह प्रदेश में हार रहे हैं? इसे आप इस प्रकार पढ़ें, 'क्या गुजरात में मोदी को हराया जा सकता है?' कश्मीर से कन्याकुमारी तक लोग इस सवाल में रुचि रखते हैं. कुछ परेशान हैं, कुछ उत्साहित हैं और कुछ उदास हैं. यहां तक कि जो लोग मानते हैं कि मोदी को कोई नहीं हरा सकता, वे घबराए हुए लग रहे हैं.
  • राहुल गांधी की कांग्रेस अध्‍यक्ष पद पर होने वाली ताजपोशी के मायने!
    राहुल गांधी के कांग्रेस अध्‍यक्ष बनने का दिन आ गया. लंबे इंतज़ार के बाद आया. इसके पहले जब-जब उनके अध्यक्ष बनने की राह बनी, कोई न कोई अड़चन आती रही. कभी विपक्ष की तरफ से उनकी छवि पर हमले और कभी राहुल और प्रियंका के बीच बेहतरी की बातें उठवाई जाती रहीं. बहरहाल हमेशा ही उनके कांग्रेस प्रमुख बनने का काम टलता रहा. जिस तरह हर देरी के नफे नुकसान होते हैं उस तरह इस देरी के भी नफे नुकसान की बातें जरूर होनी चाहिए.
  • प्राइम टाइम : अवैध होर्डिंग-पोस्टरों पर कार्रवाई कब होगी?
    हमारी सारी बहसें अंत में व्यवस्था की उस मेज़ पर आकर ख़त्म होती है जहां किसी आम आदमी को उसका हक मिलना है. यह हक सूचना के अधिकार से लेकर जीने के अधिकार तक और कानून के पालन तक का होता है. हम अक्सर व्यवस्थाओं को बहुत रियायत दे देते हैं. जब उनकी लापरवाही से किसी की जान चली जाती है तो समझ नहीं पाते कि इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है. आप अपने शहरों में देखते ही होंगे, कोई त्योहार आया नहीं कि नेताओं की तस्वीरें बिजली से लेकर ट्रैफिक लाइट के खंभे पर टंग जाती है. हर दल के लोग यही करते हैं. बिना मतलब एक ही पोस्टर में चार-चार त्योहारों की बधाई और उसमें तीस-चालीस चेहरे ठूंस कर आपको घूर रहे होते हैं. इनकी वजह से किनती दुर्घटनाएं होते होते बचती होंगी या फिर आस पास का नज़ारा भद्दा लगने लगता होगा, यह आप समझ सकते हैं. कई बार ये जानलेवा भी हो जाते हैं. 
  • प्राइम टाइम : पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय का हाल
    अमरीका की ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी, कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी, इलिनोइस यूनिवर्सिटी, पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी और मिसौरी यूनिवर्सिटी ने अपना सहयोग दिया था. इसके लिए 1959 में इलिनोइस यूनिवर्सिटी ने ब्लू प्रिंट तैयार किया था. तब जाकर भारत में पहला कृषि विश्व विद्यालय कायम हुआ था. जिसका बाद में नाम पड़ा गोविंदबल्लभ पंत कृषि और प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय.
  • सुप्रीम कोर्ट में हादिया : कानून की बजाए प्रोग्रामिंग से फैसला क्यों?
    धर्म-परिवर्तन करके निकाह करने वाली केरल की अखिला अशोकन उर्फ हदिया को मां-बाप की निगरानी से मुक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने की अनुमति दे दी. ढाई घंटे तक चली सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने स्वीकार किया कि ऐसा मामला उन्होंने पहले नहीं देखा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में लम्बी सुनवाई और अंतरिम आदेश से कई सवाल खड़े हो गये हैं.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्या जज बीएच लोया की मौत से पर्दा उठ पाएगा?
    सीबीआई के स्पेशल जज बृजगोपाल हरिमोहन लोया की मौत के बाद की प्रक्रियाओं को लेकर कैरवां पत्रिका में जो सवाल उठे हैं, उसके समानांतर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट आ गई है. कुछ जगहों पर एक्सप्रेस की रिपोर्ट कैरवां की रिपोर्ट को काटती है तो कुछ जगहों पर एक्सप्रेस की रिपोर्ट को लेकर ही नए संदेह खड़े हो जाते हैं.
  • क्या रेप रोक पाने में कारगर होगा एमपी का फांसी फार्मूला?
    पिछले कई सालों से मध्यप्रदेश में बच्‍चों और महिलाओं पर अपराध के मामलों में अव्‍वल है. अब मप्र ही पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है जहां बलात्कारियों को मृत्युदंड की सजा दी जाएगी. मध्यप्रदेश में अगले साल चुनाव हैं, स्‍वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है.
  • जन्‍मदिन विशेष: शायरी कलंदरी का नाम है, मुनव्‍वर राणा से एक मुलाकात
    मुनव्‍वर राणा से एक अरसे बाद मिलना हुआ तो उनकी बीमारी व तबीयत के बारे में पूछा जिसका कुछ अंदाजा भी था. वे गए तीन चार सालों में अस्‍पताल की आवाजाही से थक चुके हैं और तबीयत ठीक होने का नाम नहीं लेती.
  • क्या लालू यादव तेजस्वी को नीतीश कुमार का विकल्प बना पाएंगे?
    राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने जब अपनी पार्टी में चुनाव समय से पहले कराने को घोषणा की तब इस संबंध में कई क़यास लगाए गए कि आख़िर इसके पीछे लालू यादव की असल मंशा क्या हैं? कुछ लोगों को लग रहा था शायद जेल जाने के डर से लालू अपनी पार्टी की कमान अपने ही परिवार में किसी और को दे सकते हैं. लेकिन जैसे-जैसे चुनाव की औपचारिकता पूरी की गई उससे लगा कि लालू खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष दसवीं बार बनने के लिए चुनाव का तमाशा कर रहे हैं.
  • गुजरात चुनाव : CD छोड़िए, इन मुद्दों का तो पोस्टर भी नहीं बनता
    जब गुजरात सरीखे राज्य में चुनावी बयार शुरू होकर धीरे-धीरे पूरे मुल्क में इसलिए बिखरेगी, क्योंकि यह तो सीधे तौर पर प्रधानमंत्री की साख का मामला है. विपक्ष इसलिए पूरा ज़ोर लगाएगा, क्योंकि गुजरात जीत लिया तो उनका आधा रास्ता तय हो जाएगा. इसलिए दोनों ही स्तरों पर यह प्रतिष्ठा का विषय तो है ही.
  • सीबीआई जज की मौत के सवालों पर चुप्पी जारी - पार्ट 2
    बुधवार के प्रेस कांफ्रेंस में कैमरों को देखकर आपको अंदाज़ा हो जाएगा कि आए थे तो थे इतने चैनल फिर भी वो ख़बर कहां गई. एक जज की मौत को लेकर सवाल हों, क्या उसकी भी ख़बर लिखने की हिम्मत नहीं बची है तो एक सवाल आप खुद से पूछिए कि हर महीने केबल और अखबार का बिल क्यों देते हैं. किसी मंदिर में दान क्यों नहीं कर देते हैं इतना पैसा. किसी ग़रीब का भला ही हो जाएगा.
  • क्या नया है इस बार गुजरात में...
    गुजरात चुनाव में इस बार नई बात यह है कि हरचंद कोशिश के बाद भी हिंदू मुसलमान का माहौल नहीं बन पाया. दूसरी खास बात ये कि वहां के पूर्व मुख्यमंत्री इस समय देश के प्रधानमंत्री हैं. लेकिन वहां सत्तारूढ़ भाजपा इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसे है.
  • कब तक दिया जाता रहेगा आरक्षण का झांसा
    सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, आरक्षण को चुनावी हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल करने में बीजेपी या अन्य राजनीतिक दल भी पीछे नहीं हैं. इससे बड़ी विडंबना नहीं हो सकती कि बीजेपी हार्दिक पटेल के दावों की पोल खोलने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जिस ताजा आदेश का हवाला दे रही है वो उसके अपने ही शासन वाले राज्य राजस्थान का है.
  • क्या हम शिक्षकों को पढ़ाने देंगे?
    बहुत पहले से शिक्षकों के जनगणना में डयूटी लगाए जाने सहित कई तरह के गैर शैक्षणिक कार्यों के कार्टून अखबारों में बनते-छपते रहे हैं. इसमें नया यह है कि इस बात को भी अब नापा-तौला जाएगा कि एक समाज में शिक्षक की हैसियत क्या है और उसकी छवि को समाज में किस तरह से गढ़ा जा रहा है. इसमें सबसे बड़ी विडंबना यही है कि नीतिगत रूप से उसकी भूमिका शिक्षक से ज्यादा प्रबंधन की मानी जाने लगी है, ठीक अखबारों के संपादकों जैसी.
  • नेताओं के बिगड़े बोल, आखिर सारी मर्यादाएं क्यों लांघी जा रही हैं?
    समस्या यह है कि हमारे नेता बहुत बोल रहे हैं. कोई अपने क्षेत्र में जनता की समस्या को सुन नहीं रहा है.
  • सीबीआई जज की मौत को लेकर उठे सवाल
    पहाड़ों में जितनी बर्फ नहीं गिरी है उससे कहीं ज़्यादा दिल्ली में सत्ता के गलियारों में बर्फ गिर रही है. दो दिनों से दिल्ली में बर्फ की सिल्ली गिर रही है मगर कोई इसके बारे में बात नहीं करना चाहता. एक ऐसी रिपोर्ट आई है जिसे लेकर पढ़ने वालों की सांसें जम जाती हैं, जो भी पढ़ता है अपना फोन बंद कर देता है कि कहीं कोई इस पर प्रतिक्रिया न मांग ले.
  • पद्मावती विवाद : कल्पना के घोड़े पर सवार शख्स की उसी घोड़े के खिलाफ जंग
    'पद्मावती' फिल्म को लेकर फिलहाल जिस तरह का शोर-शराबा और चीख-चिल्लाहट मची हुई है, उस दौर में इस तरह की बातें करना अनर्गल प्रलाप से अधिक कुछ नहीं है, फिर भी मन है कि मानता नहीं. साफ-साफ दिखाई दे रहा है कि जान-बूझकर इतिहास और तर्क की अनदेखी की जा रही है.
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