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  • शिनजियांग डायरी 2: उइघर मुस्लिम कितने मुक्त
    कादम्बिनी शर्मा
    इससे उन्हें डीरैडिकलाज़ करने में आसानी होती है और वो कोई ना कोई काम सीख कर सरकार की दी आर्थिक मदद के ज़रिए एक सामान्य चीनी नागरिक के तौर पर जीवनयापन कर सकते हैं. सुनने में बुरा नहीं लगता, जब तक कि आप जाकर खुद इन सेंटरों में रह रहे लोगों से बात नहीं करते. बात करने के बाद अधिकारियों की बात सिर्फ दलील लगने लगती है. कम से कम मुझे यही लगा.
  • कश्मीर का टॉनिक पीकर फार्म भरने में मदहोश हिन्दी प्रदेश का युवा
    रवीश कुमार
    कश्मीर में 20 दिन से संचार व्यवस्था ठप होने को सही ठहराने के नशे में भूल गया है कि वही राज्य उसके साथ भी कश्मीर की तरह बर्ताव कर रहा है. परीक्षा की मामूली त्रुटियों की सुनवाई नहीं है. सब जगह जा रहा है, मगर कोई सुन नहीं रहा है. संचार व्यवस्था से खुद वंचित है. पहले इन्हें हिन्दू-मुस्लिम नेशनल सिलेबस का कोर्स कराया गया और अब ये खुद भी उसी ज़ुबान में अपने हालात बयान करने लगे हैं.
  • क्या सरकार के दबाव में है भारतीय रिज़र्व बैंक?
    रवीश कुमार
    भारतीय रिजर्व बैंक 1 लाख 76 हजार 51 करोड़ रुपये भारत सरकार को देगा. यह पैसा रिजर्व बैंक की आकस्मिक निधि और सरप्लस का है जिसे अंग्रेज़ी में कंटीजेंसी फंड कहते हैं. 1949 में भारतीय रिज़र्व बैंक अपने मौजूदा स्वरूप में आता है, और तब से लेकर आज तक उसके इतिहास में इतना पैसा कभी रिजर्व बैंक से भारत सरकार को नहीं गया है.
  • शिनजियांग डायरी 1 : उइघर मुस्लिम कितने मुक्त
    कादम्बिनी शर्मा
    मैं 16 अगस्त की शाम चीन के उइघर मुस्लिमों के सबसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश उइघर ऑटोनोमस प्रोवंस की राजधानी उरमुची शहर पहुंची. यह खुद चीन की सरकार के आमंत्रण पर था. मकसद था पश्चिमी मीडिया में उइघरों के बारे में चीन की दमनकारी नीतियों की 'सच्चाई' दिखाना. मैं भी लगातार इस तरह की खबरें देख-सुन और पढ़ रही थी. मन में कई सवाल थे और खुद पड़ताल करने की इच्छा.
  • ट्रंप के हाथ पर हाथ मारकर बहुत बड़ा कूटनीतिक मैदान मार लिया नरेंद्र मोदी ने
    उमाशंकर सिंह
    इसमें कोई दो राय नहीं कि जब एक कूटनीतिक संवाद होता है, तो उसमें आपसी व्यवहार और भाव-भंगिमा का अपना महत्व होता है. राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की अंग्रेज़ी को शानदार बताया, तो उस मौके का अपनी तरह से इस्तेमाल करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने उनके हाथ को ताकत लगाकर अपनी ओर खींचा और फिर उस पर एक ज़ोरदार थपकी रख दी. इसके ज़रिये उन्होंने दिखा दिया कि वह किस तरह की पर्सनल कैमिस्ट्री लेकर चलते हैं, और किस तरह हर मौके को अपने हिसाब से ढालकर अपना दबदबा दिखाते हैं.
  • सवालों में अर्थव्यवस्था और स्वदेशी पर विचार
    राकेश कुमार मालवीय
    सौ साल के विकास के बाद आज जब हर दिन बाजार में मंदी की खबरें हमें डराती हैं, हर दिन नौकरी जाने की खबरें अखबार के पन्नों पर अंदर डर-डरकर, छिपा-छिपाकर छापी जाती हों, शेयर बाजार के उठती-गिरती रेखाओं से धड़कनें सामान्य गति से नहीं चल रही हों, उन परिस्थितियों में क्या केवल सरकार के राहत पैकेज भर को एक उचित इलाज माना जाना चाहिए, जैसा वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने दो दिन पहले प्रस्तुत किया और गिरते बाजार को राहत देने की कोशिश की. निश्चित ही आज की परिस्थितियों में सौ साल पहले की गांधी की बातें आपको अप्रासंगिक लग सकती हैं, लेकिन पूंजीवाद को अपनाकर भी यदि आप आज अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत होने के बारे में आश्वस्त नहीं हैं, तो एक बार यह भी जरूर सोचिएगा कि गांधी सौ साल पहले क्या कुछ कह रहे थे.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग: फेसबुक पोस्ट के बाद बिहार सरकार ने दारोगा परीक्षा की पात्रता में किया बदलाव
    रवीश कुमार
    बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने दारोगा परीक्षा फ़ॉर्म भरने की पात्रता में बदलाव कर दिया है. अब जिनके पास बीए की डिग्री 1 अगस्त 2019 तक आई होगी, वे भी भर सकेंगे. इससे लाखों छात्रों को लाभ हुआ है.
  • पत्रकार परिसर के मुन्ना टेलर को नया जीवन दे गए जेटली
    अखिलेश शर्मा
    दोनों में न कोई रिश्ता, न कोई बातचीत. फर्क यह कि आज जेटली नहीं रहे और मोहम्मद मुन्ना टेलर हंसी-खुशी अपने बच्चों के साथ जीवन काट रहा है. लेकिन जेटली नहीं होते तो शायद मोहम्मद मुन्ना आज का दिन नहीं देख पाता.
  • अरुण जेटली और सुषमा स्वराज के साथ 'दिल और दिमाग' से काम करने वाले नेताओं का दौर भी गया...
    प्रभात उपाध्याय
    . नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली पिछली सरकार में जब जेटली (Arun Jaitley) मंत्री थे, तो वे अक्सर सरकार के संकटमोचक की भूमिका में नजर आते. मसला कोई भी हो, जेटली के पास जवाब जरूर होता. राफेल जैसे पेचीदा मामले पर जब विपक्ष ने मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा किया, तो रक्षामंत्री से पहले अरुण जेटली (Arun Jaitley) इन हमलों का जवाब देने के लिए मैदान में खड़े दिखाई दिये.
  • मेडिकल शिक्षा के सत्यानाश की कोशिश की पड़ताल करता 'डाउन टू अर्थ'
    रवीश कुमार
    कई लोग मिलते हैं जो दस-दस साल से एक किताब नहीं पढ़ें. अच्छे आर्टिकल को ढूंढ कर पढ़ेंगे नहीं. लंबाई देखकर छोड़ देंगे. यही वो लोग हैं जो अंध राष्ट्रवाद और सांप्रदायिकता की आंधी में आसानी से हांक लिए जाते हैं.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग: अलविदा जेटली जी...
    रवीश कुमार
    सुरक्षित जीवन को छोड़ असुरक्षित का चुनाव आसान नहीं होता है. 1974 में शुरू हुए जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में जेटली शामिल हुए थे. आपातकाल की घोषणा के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया क्योंकि रामलीला मैदान में जेपी के साथ वे भी मौजूद थे. बग़ावत से सियासी सफ़र शुरू करने वाले जेटली आख़िर तक पार्टी के वफ़ादार बने रहे. एक ही चुनाव लड़े मगर हार गए. राज्य सभा के सांसद रहे. मगर अपनी काबिलियत के बल पर जनता में हमेशा ही जन प्रतिनिधि बने रहे. उन्हें कभी इस तरह नहीं देखा गया कि किसी की कृपा मात्र से राज्य सभी की कुर्सी मिली है. जननेता नहीं तो क्या हुआ, राजनेता तो थे ही.
  • अलविदा खय्याम : संगीत जो सुना जाता रहेगा जी भर के...
    सूर्यकांत पाठक
    प्रख्यात संगीतकार मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी यानी कि खय्याम हिन्दी सिनेमा को कभी न भुलाए जाने वाले संगीत का तोहफा देकर दुनिया से रुखसत हो गए. उनका संगीत सुकून देने वाला, तरंगित करने वाला और शांति का अलौकिक अहसास कराने वाला है. यह वह संगीत है जो आपके सिरहाने बैठकर आपको मधुरता की थपकियां देकर दूर कहीं ऐसी जगह ले जाता है जहां तनाव लुप्त हो जाता है. ऐसा संगीत जो नीरवता के अंतरालों के साथ अपने अलग अर्थ प्रकट करता, अलग आस्वाद देता है. खय्याम फिल्म अभिनेता बनना चाहते थे. अच्छा हुआ बाद में उन्होंने यह इरादा छोड़ दिया अन्यथा भारतीय सिनेमा जगत और संगीत प्रेमी उनकी बेजोड़ रचनाओं से महरूम रहते.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : उद्योग जगत को मिल गई इनकम टैक्स से मुक्ति!
    रवीश कुमार
    2014 के बाद शायद यह पहला बड़ा मौक़ा है जब उद्योगपतियों की सुगबुगाहट, खुली नाराज़गी और अर्थव्यवस्था के संकट के दबाव में वित्त मंत्री निमर्ला सीतारमण ने प्रेस कांफ्रेस में कई बड़े एलान किए. ये वो एलान थे जिनके बारे में सरकार के पीछे हटने की उम्मीद कम नज़र आ रही थी
  • ये हैं वे ख़बरें, जो जनता देखना चाहती है...
    रवीश कुमार
    जनता ने अपनी न्यूज़ लिस्ट भेजी है. जम्मू एवं कश्मीर, गुजरात, पंजाब, बंगाल, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार से. आपको यह बोरिंग लगेगा, लेकिन देखिए, इतनी तकलीफों के बाद भी नेशनल सिलेबस का ज़ोर है. उसका कारण भी समझिए. कहीं कोई सुना नहीं जा रहा है. इन समस्याओं से प्रभावित लोगों की संख्या लाखों में होगी. फिर भी कहूंगा कि आप हर मैसेज को पढ़ें.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : आखिर रैगिंग को क्यों छिपा रहे हैं कुलपति?
    रवीश कुमार
    इस देश में आप जिसे चाहें लाइन में खड़ा कर सकते हैं, उसे हांक सकते हैं. इसी की नुमाइश है यह वीडियो और कतार में चले आ रहे मेडिकल के छात्र. यूपी के सैफई आयुर्विज्ञान महाविद्यालय में मेडिकल कालेज के छात्र हैं, जिनकी रैगिंग हुई है और सिर मुड़वा दिया गया है.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग: प्रिय बिहार सरकार 'यदि है'...
    रवीश कुमार
    मैसेज भेजने वाले छात्रों का कहना है कि 2015-18 का परिणाम 2019 में आया. वो भी पूरा परिणाम नहीं आया. 92,000 छात्रों का परिणाम कुछ दिन पहले आया है. जिसकी वजह से दारोगा भर्ती परीक्षा के फार्म नहीं भर पा रहे हैं, क्योंकि नियम यह बनाया गया है कि 1 जनवरी 2019 तक ग्रेजुएशन करने वाले छात्र ही भर सकते हैं.
  • शेयर बाज़ार को भी मार डाला 'फील गुड' ने
    सुधीर जैन
    अर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों के बाद अब निवेश बाज़ार भी बोल गया है. गुरुवार को बाज़ार इतनी जोर से बोला है कि मीडिया तक इसकी आवाज ज़रूर पहुंचनी चाहिए. आवास निर्माण, ऑटो, सूत, चाय जैसे उद्योगों के संगठन भारी बैचेनी में हैं. उनकी सुध लेने के लिए ज़्यादातर अख़बार और टीवी चैनल बिल्कुल तैयार नहीं. ख़बरों के गायब होने से वे बेचारे अपनी बात विज्ञापनों के ज़रिये कहने को मजबूर हो गए हैं...
  • पचास लाख नौकरियां गईं हैं टेक्सटाइल में?
    रवीश कुमार
    क्या पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम गिरफ्तार किए जा सकते हैं? दिल्ली हाई कोर्ट के जज सुनील गौड़ ने INX Media केस में अग्रिम ज़मानत देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों ने जो सामग्री प्रस्तुत की है, उसकी भयावहता और विशालता को देखते हुए अग्रिम ज़मानत नहीं दी जा सकती है. चिदंबरम को हाई कोर्ट से पिछले साल राहत मिली थी, तब कोर्ट ने कुछ सवालों के जवाब एजेंसियों से मांगे थे. जिस तरह से प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई दिल्ली के जंगपुरा में उनके घर पर दबिश दिए बैठी है उससे गिरफ्तारी की आशंका बेमानी नहीं लगती है.
  • ठहरे हुए पानी में पत्थर मारकर हुड्डा कर रहे इंतजार
    उमाशंकर सिंह
    हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा को इंतजार है 10 जनपथ से किसी फैसले का. उन्होंने रोहतक की कल की अपनी रैली में धारा 370 के मुद्दे पर अपनी ही पार्टी कांग्रेस के खिलाफ जमकर हमला बोला. माना यह जा रहा है कि हुड्डा अपनी अलग पार्टी बनाने के लिए नींव रख चुके हैं, लेकिन जाते-जाते कांग्रेस से एक सौदा कर लेना चाहते हैं. यही वजह है कि कल के अपने वक्तव्य के बाद हुड्डा अभी प्रेस से बात करने से बच रहे हैं.
  • भारत की अर्थव्यवस्था में मंदी जैसे हालात क्यों?
    रवीश कुमार
    न्यूज़ चैनल देखने से लगता है कि सारा देश कश्मीर, आबादी और आरक्षण को लेकर व्यस्त है. हो सकता है कि सारा देश व्यस्त हो भी, लेकिन डेढ़ लाख बैंकर इन विषयों को लेकर व्यस्त नहीं हैं. बल्कि इस शनिवार और रविवार तो उन्हें टीवी देखने का भी मौका नहीं मिला होगा कि कश्मीर पर नया बयान क्या आया है. उन्हें यह भी पता नहीं होगा कि चर्चा में दूसरे एंगल से प्रवेश पाने के लिए शिवराज सिंह चौहान और साध्वी प्रज्ञा ने जवाहर लाल नेहरू को अपराधी कहा है. नेहरू को कुछ भी बोलकर आप चैनलों के स्क्रीन पर टिकर से लेकर टिक टैक तक जगह पा सकते हैं. चूंकि नेता लोग नेहरू को अपराधी बताने में व्यस्त हैं, इसलिए डेढ़ लाख बैंकरों से कहा गया होगा कि कम से कम आप लोग अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ व्यस्त रहें और आइडिया दें कि भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन का कैसे बनाया जा सकता है.
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