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विचार
  • दूसरों को छोटे होने का एहसास नहीं होने देते थे वाजपेयी...
    कमाल खान
    आज वाजपेयी बहुत याद आते हैं. और बहुत सी यादें ऐसी हैं जिन्‍हें याद कर के यकीन नहीं होता कि क्‍या वाकई ये सब हुआ था? 2004 में लोकसभा चुनाव हो रहे थे. वाजपेयी लखनऊ से चुनाव जीत कर तीसरी बार पीएम थे. वो फिर यहां से लोकसभा उम्‍मीदवार थे. लखनऊ के राजभवन में उनकी प्रेस कॉन्‍फ्रेंस थी. इस बार उनकी प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के लिए सिक्‍योरिटी काफी सख्‍त थी.
  • अटल की शक्ति अटल की सीमा...
    प्रियदर्शन
    कुछ लोगों के व्यक्तित्व में अपनी तरह की एक ऊष्मा होती है. अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व कुछ ऐसा ही था. एक बड़प्पन उनकी शख्सियत में था. वे जवाहरलल नेहरू की तारीफ़ कर सकते थे, इंदिरा गांधी को बांग्लादेश युद्ध के बाद दुर्गा बता सकते थे और विपक्ष के बहुत सारे नेताओं से ऐसे दोस्ताना संबंध रख सकते थे जो दलगत राजनीति से ऊपर हों.
  • नीतीश कुमार का Blog: मैंने जो अटल जी से सीखा...
    नीतीश कुमार
    बिहार के लोग कभी अटल जी को नहीं भूल पाएंगे क्‍योंकि उन्‍होंने हमें स्‍वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग और कोशी नदी समेत तीन बड़े पुल दिए
  • अटल बिहारी वाजेपयी : अवसान एक युग का...
    विवेक रस्तोगी
    जिन्हें नहीं देखा, नहीं देखा, परन्तु राजनीति की मुझे समझ आने के बाद राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यही एकमात्र नाम है, जिसे आदर्श राजनेता मान पाया हूं... जिसे विजय पर घमंड नहीं, पराजय से खीझ नहीं... विपक्ष में रहो, तो सत्ता से लड़ते हुए भी उसे सम्मान दो... सत्ता में रहो, तो विपक्ष को पूरा मान दो...
  • मुश्किल दौर में कांग्रेस के प्रभुत्व को खत्म करने वाले इकलौते गैर कांग्रेसी पीएम थे वाजपेयी...
    आशुतोष
    अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद सबसे ज्यादा मन को मोह लेने वाले, कवि और एक करिश्माई वक्ता थे. इसमें कोई दो राय नहीं कि वाजपेयी भारत के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ वक्ताओं में से एक थे.
  • शाहनवाज हुसैन की कलम से : मेरे नेता अटल...
    अटल जी से मेरी पहली और निजी मुलाकात 1987 में हुई थी. तब से तकरीबन 30 सालों में उनसे जुड़ी मेरी तमाम यादें इस वक्त मेरी आंखों के सामने तैर रही हैं. अटल जी का जाना न सिर्फ देश के लिए बल्कि मेरी निजी जिंदगी के लिए भी बहुत बड़ी क्षति है. निकट भविष्य में उनके जैसा महान नेता, उनके जैसा बेहतरीन कवि, लेखक और वक्ता मिलना बेहद मुश्किल है. वो अच्छे नेता थे, अच्छे इंसान थे और मेरे लिए सबसे अच्छे अभिभावक.
  • विपक्ष आपको हमेशा याद रखेगा अटल जी...
    रवीश कुमार
    अटल बिहारी वाजपेयी की असली विरासत विपक्ष की राजनीति में है. विपक्ष की राजनीति विरोध की राजनीति होती है. 1957 से 1996 तक विरोध और विपक्ष की राजनीति में उनका जीवन गुज़रा है. उनके राजनीतिक जीवन का 90 फीसदी हिस्सा विपक्ष की राजनीति का है.
  • दो बार चुनाव होने से किसे नफा, किसे नुकसान...
    सुधीर जैन
    देश में विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ करवाने की बात फिर उठवाई जा रही है. फिलहाल सारी नहीं, तो कुछ विधानसभाओं और लोकसभा चुनाव साथ-साथ करवाने की सुगबुगाहट तो है ही. इस काम में कई किंतु-परंतु लगे हैं. इस समय कानूनन एक साथ चुनाव संभव नहीं है, कुछ ही घंटे पहले चुनाव आयोग यह बता चुका है.
  • गिरते रुपया का आम आदमी पर क्या होगा असर?
    रवीश कुमार
    डॉलर के मुक़ाबले रुपये की राजनीति घूम फिर कर 2013-14 आ जाती है जब यूपीए के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को नकारा साबित करने के लिए रुपये की कीमत का ज़िक्र होता था. आप मौजूदा प्रधानमंत्री मोदी के उस समय के ट्वीट को देखें या भाषण सुने तो रुपये के गिरते दाम को भारत के गिरते स्वाभिमान से जोड़ा करते थे. विपक्ष के नेताओं से लेकर रविशंकर और रामदेव भी कहा करते थे कि मोदी जी प्रधानमंत्री बनेंगे तो डॉलर के मुकाबले रुपया मज़बूत हो जाएगा. जब भी रुपया कमज़ोर होता है ट्‌विटर पर रविशंकर का ट्वीट चलने लगता है कि मोदी जी के प्रधानमंत्री बनते ही एक डॉलर की कीमत 40 रुपये हो जाएगी यानी रुपया मज़बूत हो जाएगा. वे किस आधार पर कह रहे थे, वही बता सकते हैं अगर वे इस पर कुछ कहें. आज भारत का रुपया डॉलर के मुकाबले इतना कमज़ोर हो गया जितना कभी नहीं हुआ था. पहली बार एक डॉलर की कीमत 70 रुपये हो गई है.
  • दिलचस्प मुकाम पर पहुंची एक देश एक चुनाव की बहस
    अखिलेश शर्मा
    एक देश एक चुनाव की बहस एक दिलचस्प मुकाम पर पहुंच गई है. बीजेपी की ओर से यह संकेत मिलते ही कि अगले साल लोक सभा चुनावों के साथ ग्यारह राज्यों के चुनाव भी कराए जा सकते हैं, राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इस बात पर भी बहस हो रही है कि आखिर यह मुमकिन कैसे होगा?
  • अगर पीएम मोदी ओडिशा के पुरी से चुनाव लड़े तो...
    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 में ओडिशा की पुरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले हैं. वाराणसी के बाद पुरी. इसके पीछे एक ही वजह हो सकती है, हिंदुत्व का एजेंडा. ओडिशा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने वाले हैं. ऐसे में भगवान जगन्नाथ के नाम पर बीजेपी वोट मांगेगी.
  • कब मिलेगी ख़ौफ़ से आज़ादी?
    रवीश कुमार
    15 अगस्त के आस-पास दिल्ली अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क हो ही जाती है, इसके बाद भी संसद के बिल्कुल करीब कंस्टीट्यूशन क्लब के बाहर उमर ख़ालिद पर गोली चलाने की कोशिश होती है. सुरक्षा के लिहाज़ से इस हाई अलर्ट ज़ोन में कोई पिस्टल लेकर आने की हिम्मत कैसे कर गया और फरार भी हो गया. उमर ख़ालिद कंस्टीट्यूशन क्लब के बाहर चाय की दुकान से पेप्सी पीकर लौट रहे थे कि पीछे से हमला होता है. उन्हें मुक्का मार कर गिरा दिया, लेकिन उमर ने उसका हाथ पकड़ लिया जिसके हाथ में पिस्तौल थी. ढाई बजे से वहां 'ख़ौफ़ से आज़ादी' नाम का कार्यक्रम होने वाला था, उसी के लिए उमर ख़ालिद समय से पहले पहुंच कर चाय पी रहे थे. तभी वहां कोई शख्स आया जो सफेद शर्ट में था और उमर ख़ालिद को धक्का देने लगा.
  • खौफ से आज़ादी और आज़ादी से खौफ
    प्रियदर्शन
    जेएनयू से पीएचडी कर रहे छात्र उमर ख़ालिद को तीन साल पहले तक कोई नहीं जानता था. वह एक छात्र भर थे- शायद कुछ अतिरिक्त उत्साही और जेएनयू के भीतर भी धार्मिक नहीं, राजनीतिक तौर पर बेहद अल्पसंख्यक- क्योंकि जेएनयू में भी उनके संगठन की कोई स्वीकार्यता नहीं थी.
  • एनआरसी, बात निकली तो बहुत आगे जाती दिखने लगी...
    अखिलेश शर्मा
    असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर से शुरू हुई बात अब बहुत आगे निकलती दिख रही है. बीजेपी के नेताओं के बयानों से साफ़ है कि पार्टी इसे सिर्फ असम तक ही सीमित रखना नहीं चाहती.
  • गंगा तो साफ नहीं हुई, सरस्वती मिल गई है, फिर भी सन्नाटा क्यों है भाई...
    रवीश कुमार
    हरियाणा में मनोहरलाल खट्टर सरकार ने सरस्वती नदी की खोज में जाने कितने करोड़ बहा दिए. एक नदी की खोज का दावा कर लिया गया है. मुग़लावाली गांव के आस-पास सरस्वती नदी को लेकर जो नई संस्कृति गढ़ी जा रही है. कैसे भोले लोगों में यह विश्वास गढ़ा जा रहा है कि सरस्वती नदी मिल गई है.
  • क्या हमारे किसानों को ग्लायफोसेट के असर का अंदाज़ा है?
    रवीश कुमार
    ग्लायफोसेट (GLYPHOSATE), इसके बारे में जान लीजिए. दुनिया के हर मुल्क की तरह भारत में भी इसका इस्तेमाल ख़ूब हो रहा है. यह एक प्रकार का रसायन है जिसका इस्तेमाल खर-पतवार नाशक के तौर पर होता है. इसे बनाने वाली कंपनी का नाम है मोंसांटो. अमरीका में इस कंपनी के ख़िलाफ़ 4000 से अधिक मामले दर्ज़ हो चुके हैं. कई तरह की जांच से साबित हो गया है कि यह कैंसर फैलाता है मगर किसान इसके इस्तेमाल के लोभ से नहीं बच पाते हैं.
  • महाराष्ट्र एटीएस को मीडिया से क्यों डर लगता है?
    सुनील कुमार सिंह
    शुक्रवार 10 अगस्त को मुंबई में जो हुआ वो मुंबई में बहुत कम होता है. अपनी व्यवसायिक प्रतिद्वंदिता के चलते पत्रकारों में एक राय कम ही बन पाती है जिसका फायदा नेता और पुलिस अक्सर उठाते हैं. लेकिन महाराष्ट्र एटीएस के बेरुखी भरे रवैये ने शुक्रवार को एटीएस प्रमुख अतुल चंद्र कुलकर्णी की प्रेस ब्रीफिंग का बहिष्कार करने को मजबूर कर दिया.
  • न्याय के लिए भटकते लोगों की दास्तां...
    रवीश कुमार
    सारी बड़ी बातों और बड़ी ख़बरों के बीच कभी ख़ुद को रख कर देखिएगा कि सिस्टम के जब चक्कर लगते हैं तब आपका क्या अनुभव रहता है. सैकड़ों की संख्या में लोग हमारे पास अपनी ऐसी कहानियां भेजते रहते हैं. पढ़ कर या सुनकर बहुत दुख भी होता है. काश सारा मीडिया इन्हीं की बातों को सरकार तक ले जाता तो सबको मना करने का अफसोस मुझ पर भारी न पड़ता.
  • कहीं भारत न पहुंच जाए तुर्क हवा...
    डॉ विजय अग्रवाल
    पिछले महिने एशिया और यूरोप महाद्वीपों के बिल्कुल बीच में बसे हुए आठ करोड़ की आबादी वाले तुर्की नामक इस्लामिक देश में एक छोटी-सी ऐसी राजनीतिक घटना घटी है, जिसकी ओर फिलहाल दुनिया का ध्यान उतना नहीं गया, जितना जाना चाहिए था, जबकि यह घटना भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है.
  • फीस बढ़ोतरी में मेडिकल कॉलेजों की मनमानी
    रवीश कुमार
    इंदौर में एक मेडिकल कॉलेज है. इंडेक्स मेडिकल कॉलेज. 10 जून 2018 को स्मृति लहरपुरे ने आत्महत्या कर ली. 8 अगस्त को उसी मेडिकल कॉलेज की एक और छात्रा शिवानी उइके ने आत्महत्या कर ली. दोनों के कारण एक से है. फीस. मनमानी फीस.
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