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विचार
  • फ़सल बीमा से निजी कंपनियां बम-बम, सरकारी कंपनियों को घाटा
    रवीश कुमार
    सरकार का काम है कि वह ऐसी नीति बनाए कि सरकारी बीमा कंपनियों को प्रोत्साहन मिले. मगर जनता के पैसे से चलने वाले सरकारी बैंक के अधिकारियों को निजी बीमा कंपनी की पॉलिसी बेचने के लिए मजबूर किया गया.
  • सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम के फैसले पर सवाल
    रवीश कुमार
    जजों को नियुक्त करने वाली सुप्रीम कोर्ट की संस्था कॉलेजियम के फैसले को लेकर विवाद हो गया है. कॉलेजियम में सुप्रीम कोर्ट के पांच जज होते हैं. इस कॉलेजियम ने 12 दिसंबर की बैठक में तय किया कि दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेंद मेनन और राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस प्रदीप नंदराजोग का प्रमोशन सुप्रीम कोर्ट में होगा. मगर उस बैठक के बाद सरकार को बैठक का फैसला ही नहीं भेजा गया.
  • कर्नाटक में सियासी नाटक, फायदा किसको?
    अखिलेश शर्मा
    ऐसा लगता है कि बीजेपी का मिशन कर्नाटक सिरे नहीं चढ़ सका है. ऑपरेशन लोटस पार्ट-टू में बीजेपी को फिलहाल कामयाबी मिलती नहीं दिख रही है. बीजेपी की कोशिश थी कि कांग्रेस के कम से कम 13 विधायक इस्तीफा दें, ताकि बहुमत का आंकड़ा कम हो और बीजेपी दो निर्दलीयों की मदद से बहुमत साबित कर सके. कहा जा रहा था कि मुंबई में एक पांच सितारा होटल में रुके कांग्रेस के नाराज तीन विधायक इस्तीफा दे सकते हैं, लेकिन देर रात तक ऐसा नहीं हुआ. उधर कांग्रेस के गायब पांच विधायकों में से दो वापस आ गए हैं.
  • CBI और सुप्रीम कोर्ट के दंगल से संवैधानिक संकट...
    विराग गुप्ता
    भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना आंदोलन में लोकपाल को हर मर्ज़ की दवा बताया गया. 'सुशासन' और 'अच्छे दिन' के नाम पर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली की सत्ता हासिल कर ली, पर लोकपाल का कोई अता-पता नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसके बाद CBI में आधी रात को तख्तापलट की घटना के बाद संस्थाओं में आंतरिक संघर्ष बढ़ता जा रहा है. इन घटनाओं से भारत के लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था पर अनेक सवाल खड़े हो गए हैं.
  • उच्च शिक्षा की विडम्बनाएं और आरक्षण का ख़याल
    प्रियदर्शन
    यह देखना दिलचस्प है कि जो लोग अब तक सामाजिक आधार पर आरक्षण को प्रतिभा के विलोम की तरह देखते रहे और इसे भारतीय व्यवस्था का नासूर मानते रहे, वे अपील कर रहे हैं कि गरीबों के हक की ख़ातिर यह आर्थिक आरक्षण मान लिया जाए - बिना यह बताए कि हर महीने 65,000 रुपये कमाने वाले लोग किस कसौटी से गरीब कहलाएंगे.
  • राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बेटे का विदेशों में काले धन का कारखाना : 'कैरवां' की रिपोर्ट
    रवीश कुमार
    कौशल श्रॉफ नाम के एक खोजी पत्रकार ने अमेरिका, इंग्लैंड, सिंगापुर और केमैन आइलैंड से दस्तावेज़ जुटाकर डोभाल के बेटों की कंपनी का खुलासा किया है. 'कैरवां' पत्रिका के अनुसार ये कंपनियां हेज फंड और ऑफशोर के दायरे में आती हैं. टैक्स हेवन वाली जगहों में कंपनी खोलने का मतलब ही है कि संदिग्धता का प्रश्न आ जाता है और नैतिकता का भी. यह कंपनी 13 दिन बाद 21 नवंबर 2016 को टैक्स केमन आइलैंड में विवेक डोभाल अपनी कंपनी का पंजीकरण कराते हैं.
  • सीएजी रिपोर्ट : रेलवे में ठेके पर काम कर रहे मज़दूरों को लूट रहे हैं ठेकेदार
    रवीश कुमार
    मीडिया में गढ़ी गई छवि के बरक्स अगर आप ठेके पर काम करने वाले मज़दूरों पर आई सीएजी की रिपोर्ट को देखेंगे कि तो पता चलेगा कि रेलवे बग़ैर किसी मंत्री के चल रहा है. राम भरोसे कहना ठीक नहीं होगा क्योंकि राम भरोसे तो सारा देश चलता है.
  • शिक्षा हमारी सरकारों की प्राथमिकता में क्यों नहीं?
    रवीश कुमार
    सरकारी स्कूलों और कालेजों में शिक्षा की हालत ऐसी है कि जरा सा सुधार होने पर भी हम उसे बदलाव के रूप में देखने लगते हैं. सरकारी स्कूलों में लाखों की संख्या में शिक्षक नहीं हैं. जो हैं उनमें से भी बहुत पढ़ाने के योग्य नहीं हैं या प्रशिक्षित नहीं हैं.
  • क्या लोकसभा चुनाव में डिजिटल प्रचार से मिलेगी जीत?
    अखिलेश शर्मा
    वैसे तो कहा जा रहा है कि 2019 का चुनाव नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी होने जा रहा है. इन दोनों शख्सियतों की एक लड़ाई डिजिटल दुनिया में चल रही है जिसने बीजेपी और कांग्रेस दोनों के नेताओं और सांसदों की नींद उड़ा दी है. दरअसल, पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर जनता से नमो ऐप के जरिए बीजेपी सांसदों के कामकाज के बारे में राय मांगी है. खबर है कि बीजेपी बड़ी संख्या में मौजूदा सांसदों के टिकट काटेगी. ऐसे में माना जा रहा है कि मौजूदा सांसदों को दोबारा टिकट मिलेगा या नहीं, इसमें इस फीडबैक की एक बड़ी भूमिका होगी.
  • क्या IIT-JEE सचमुच दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा है?
    अनुराग मेहरा
    वास्तव में बड़ा सवाल यह है कि क्यों IIT प्रवेश परीक्षा या JEE के लिए अब तक बहुविकल्पी प्रश्नों वाले फॉरमैट का इस्तेमाल करते हैं. यह फॉरमैट मशीन द्वारा ग्रेडिंग को संभव बनाने के लिए अपनाया गया था, और फिर लगातार बढ़ती आवेदकों की संख्या की वजह से ज़रूरत बन गया. उन पेपरों का मूल्यांकन, जिनमें हर 'लम्बे' जवाब को पढ़ा जाना होता था, असंभव होता जा रहा था, क्योंकि IIT के पास मानवीय रूप से पेपर जांचे जाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे. इस समस्या का एक संभव हल यह था कि इस काम को आउटसोर्स कर दिया जाए, लेकिन IIT अपनी परीक्षा की निष्पक्षता की जी-जान से हिफाज़त करती रही हैं, और कभी किसी बाहरी एजेंसी को शामिल नहीं किया. यह भी हो सकता है कि लगभग 12 साल पहले जिस वक्त MCQ फॉरमैट को अपनाया गया था, उस वक्त किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह इतनी गंभीर समस्याएं पैदा कर देगा.
  • बहुत आसानी से मोदी सरकार को वॉकओवर दे रहा है विपक्ष
    यशवंत सिन्हा
    अतीत में भी राष्ट्रपति इन्हीं हालात में एक ही साल मे दो-दो संयुक्त सत्रों को संबोधित कर चुके हैं. लेकिन विश्लेषक इस बात से हैरान है कि लेखानुदान पारित करने के लिए सामान्य से काम के लिए दो सप्ताह का सत्र क्यों आहूत किया गया है, जबकि उसे दोनों ही सदनों में दो-दो दिन में निपटाया जा सकता था.
  • जेएनयू मामले में आम चुनाव से तीन महीने पहले ही चार्जशीट क्‍यों?
    रवीश कुमार
    जवाहर लाल यूनिवर्सिटी का मसला फिर से लौट आया है. 9 फरवरी 2016 को कथित रूप से देशदोह की घटना पर जांच एजेंसियों की इससे अधिक गंभीरता क्या हो सकती है कि तीन साल में उन्होंने चार्जशीट फाइल कर दी. वरना लगा था कि हफ्तों तक इस मुद्दे के ज़रिए चैनलों को राशन पानी उपलब्ध कराने के बाद इससे गोदी मीडिया की दिलचस्पी चली गई है. उस दौरान टीवी ने क्या क्या गुल खिलाए थे, अब आपको याद भी नहीं होंगे.
  • लोकसभा चुनाव 2019 : नरेंद्र मोदी बनाम महागठबंधन
    मनोरंजन भारती
    उत्तरप्रदेश की राजनीति में सपा और बसपा ने साथ आकर कुछ ऐसा किया है जो करीब 25 साल पहले भी हुआ था, मगर इस बार इनका साथ आना काफी मायने रखता है. यह गठबंधन भारतीय राजनीति की तस्वीर बदलने वाला है. मायावती और अखिलेश दोनों ने अपने अहं को दरकिनार करते हुए साथ आने का फैसला लिया.
  • अब केवल रोम नहीं, पूरा यूरोप जल रहा है...
    डॉ विजय अग्रवाल
    आज इसी महाद्वीप का सीना सुलग रहा है. इसके एक तिहाई से ज़्यादा देश अनेक तरह के आंदोलनों, विरोध प्रदर्शनों, परस्पर संघर्षों तथा अन्य संकटों से जूझ रहे हैं. यदि इन सभी देशों के आंदोलनों का एक कोलाज बना दिया जाए, तो उसमें उन देशों की संघर्ष गाथा सुनाई दे जाएगी, जिन पर इन्होंने निर्मम शासन किया था, और जिनके स्वायत्तता संबंधी विरोधों को ये राष्ट्रद्रोह कहकर सूलियों पर चढ़ा दिया करते थे.
  • सूरत की गठरियों में लागा चोर, मुसाफिर जाग ज़रा, 200 करोड़ की चोरी के विरोध में कपड़ा मार्केट बंद
    रवीश कुमार
    सूरत के राधा कृष्ण कपड़ा बाज़ार में चोरी को लेकर हंगामा मचा हुआ है. राधा कृष्ण कपड़ा मार्केट भारत का सबसे बड़ा कपड़ा बाज़ार माना जाता है. यहां पर कपड़े की पांच-छह हज़ार दुकानें हैं. जब से यहां पिछले कई रविवार को डुप्लीकेट चाबी की मदद से माल चोरी की घटना सामने आई है, व्यापारियों के होश उड़े हुए हैं. सब अपने माल का स्टॉक चेक कर रहे हैं और सीसीटीवी की रिकार्डिंग देख रहे हैं. सारी दुकानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं और जिनके यहां हैं, बहुतों के पास नाइट विज़न नहीं हैं.
  • आलोक वर्मा के घर किसकी सिफ़ारिश करने गए थे केंद्रीय सतर्कता आयुक्त चौधरी?
    रवीश कुमार
    हिन्दी अख़बारों के संपादकों ने अपने पाठकों की हत्या का प्लान बना लिया है. अख़बार कूड़े के ढेर में बदलते जा रहे हैं. हिन्दी के अख़बार अब ज़्यादातर प्रोपेगैंडा का ही सामान ढोते नज़र आते हैं. पिछले साढ़े चार साल में हिन्दी अख़बारों या चैनलों से कोई बड़ी ख़बर सामने नहीं आई. साहित्य की किताबों से चुराई गई बिडंबनाओं की भाषा और रूपकों के सहारे हिन्दी के पत्रकार पाठकों की निगाह से बच कर निकल जाते हैं. ख़बर नहीं है. केवल भाषा का खेल है.
  • क्या आपका बैंक भी आपको 'चूना' लगा रहा है?
    प्रभात उपाध्याय
    कुछ दिनों पहले ही खबर आई कि सार्वजनिक क्षेत्र के 21 बैंकों और निजी क्षेत्र के तीन प्रमुख बैकों ने वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान खाते में सिर्फ न्यूनतम राशि न रख पाने की वजह से ग्राहकों से 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा वसूल लिये. आप जानकर चौंक जाएंगे कि इसमें से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने अकेले 2,433.87 करोड़ रुपये वसूले.
  • आलोक वर्मा निपट गए फिर शाह को ग़ुलामी का डर क्यों सता रहा है?
    रवीश कुमार
    रिटायर जस्टिस ए के पटनायक का बयान आया है कि उन्हें वर्मा के ख़िलाफ़ केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के कोई प्रमाण नहीं मिले थे. सुप्रीम कोर्ट ने ही जस्टिस पटनायक से कहा था कि वे सीवीसी की रिपोर्ट की जांच करें. पटनायक ने चौदह दिनों के भीतर जांच कर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम  कोर्ट को सौंप दी थी.
  • असम, त्रिपुरा, मणिपुर, मेघालय में क्यों हो रहा है नागरिकता संशोधन बिल का विरोध
    रवीश कुमार
    मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन बिल को लोक सभा में पास करा लिया है. इसके प्रावधान के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में सताए गए वैसे हिन्दू, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई को भारत में छह साल रहने के बाद नागरिकता दी जा सकती है जो 31 दिसंबर 2014 के पहले भारत आ गए थे.
  • आईपीएस आलोक वर्मा : विवादों से घिरा नाम
    मुकेश सिंह सेंगर
    आलोक वर्मा को डीजी तिहाड़ बनने के पहले बहुत कम ही लोग जानते थे. उनका किसी विवाद में कोई नाम नहीं आया था. लेकिन 5 अगस्त 2014 को जब वे डीजी तिहाड़ बने तो विवादों ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया. यहां पुलिस मुख्यालय में बैठे कुछ आईपीएस उनके लिए एक स्क्रिप्ट लिख रहे थे.
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