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विचार
  • मोदी का अकबर तो 'महान' निकला, सिलेबस में रहेगा या बाहर होगा...
    रवीश कुमार
    पिछले चार साल से BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के लोग उस महान अकबर की महानता को कतरने में लगे रहे, कामयाब भी हुए, जो इतिहास का एक बड़ा किरदार था. सिलेबस में वह अकबर अब महान नहीं रहा. मगर अब वे क्या करेंगे, जब मोदी मंत्रिमंडल का अकबर 'महान' निकल गया है. मोदी मंत्रिमंडल के अकबर की 'महानता' का संदर्भ यह नहीं है कि उसने किले बनवाए, बल्कि अपने आस-पास जटिल अंग्रेज़ी का आभामंडल तैयार किया और फिर उसके किले में भरोसे का क़त्ल किया.
  • गुजरात में यूपी, बिहार के प्रवासी मज़दूर दहशत में
    रवीश कुमार
    किसी भी घटना में शामिल आरोपी के समाज के लोगों को क्या सामूहिक सज़ा दी सकती है? नहीं दी जा सकती है लेकिन हमने एक फार्मूला बना लिया है. बलात्कार का आरोपी किसी खास मज़हब का है तो उस मज़हब के खिलाफ तरह तरह के व्हाट्सऐप मटीरियल बन जाते हैं. बच्चा चोरी की अफवाह फैल जाती है तो भीड़ बन जाती है.
  • गुजरात का घटनाक्रम बीजेपी के लिए कड़ी परीक्षा, कांग्रेस पर सवाल
    अखिलेश शर्मा
    गुजरात में उत्तर भारतीयों के खिलाफ हिंसा के बाद कांग्रेस के विधायक अल्पेश ठाकोर पर हिंसा के लिए उकसाने और उत्तर भारतीयों के खिलाफ नफरत भरी बातें कहने का आरोप लग रहा है. बिहार में सत्तारूढ़ जेडीयू ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर ठाकोर के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. ठाकोर के संगठन गुजरात क्षत्रिय ठाकोर सेना पर उत्तर भारतीयों के खिलाफ माहौल बनाने और उनके खिलाफ हिंसा भड़काने का आरोप लग रहा है.
  • गुजरात की भीड़ से भागते यूपी-बिहार के लोग, यूपी-बिहार की भीड़ से कहां कहां भागें लोग
    रवीश कुमार
    गुजरात में चौदह महीने की एक बच्ची के साथ बलात्कार की घटना ने एक नई परिस्थिति पैदा कर दी है. बच्ची जिस समाज की है उसके कुछ लोगों ने इसे अपने समाज की शान भर देखा है. वे सामूहिक रूप से उग्र हो गए हैं. कह सकते हैं कि इस समाज के भीतर भीड़ बनने के तैयार लोगों को मौक़ा मिल गया है.
  • गिरते रुपये का कहीं कोई अंदरूनी कारण तो नहीं...?
    सुधीर जैन
    सरकार गिरते रुपये (Indian rupee) के संकट को बिल्कुल भी तवज्जो नहीं देना चाहती. उसका तर्क है कि दुनिया की दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों की मुद्रा भी नीचे गिर रही हैं. इसका एक आशय यह भी निकलता है कि हम अब तक उभरी हुई अर्थव्यवस्था नहीं बन पाए, बल्कि दशकों से उभरती हुई अर्थव्यवस्था ही बने हुए हैं.
  • क्या चुनाव आयोग भाजपा का चुनाव प्रभारी बन गया है?
    रवीश कुमार
    इस चुनाव आयोग पर कोई कैसे भरोसा करे. ख़ुद ही बताता है कि साढ़े बारह बजे प्रेस कांफ्रेंस है. फिर इसे तीन बजे कर देता है. एक बजे प्रधानमंत्री की सभा है. क्या इस वजह से ऐसा किया गया कि रैली की कवरेज या उसमें की जाने वाली घोषणा प्रभावित न हो?
  • बच्चे कैसे जानेंगे बापू को?
    रवीश कुमार
    गांधी जयंती का यह डेढ़ सौंवा साल शुरू हो गया है. पिछले ही साल चंपारण सत्याग्रह का सौंवा साल था जब 1917 में गांधी चंपारण गए थे. इस 2 अक्तूबर से अगले 2 अक्तूबर की तक गांधी को याद करने के लिए बहुत से सरकारी कार्यकर्म होंगे.
  • आर्थिक हालात से घिरी सरकार
    मनोरंजन भारती
    पिछले कुछ दिनों से रुपया लगातार लुढ़कता जा रहा है जो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है. दूसरी तरफ शेयर बाजार है जहां सेंसेक्स भी नीचे ही गिरता जा रहा है और तीसरी चीज है तेल की कीमतें. हालांकि केन्द्र और राज्य सरकारों ने जनता को राहत देने की कोशिश की है मगर वो भी नाकाफी है.
  • क्यों गर्माया राम मंदिर मुद्दा?
    अखिलेश शर्मा
    राम मंदिर को लेकर बीजेपी की नीयत पर अब सवाल उठाया जा रहा है. बीजेपी को कठघरे में खड़ा कर दिया गया है. ऐसा करने वाले संघ परिवार से जुड़े साधु संत हैं. पिछले साढ़े चार साल से राम मंदिर का इंतजार कर रहे इन साधु संतों के सब्र का बांध अब टूट रहा है.
  • हाथ में नहीं हाथी...
    मनोरंजन भारती
    मध्य प्रदेश में मायावती ने 22 सीटों पर अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी साथ ही छत्तीसगढ़ में मायावती ने अजित जोगी से हाथ मिलाया है. इस पर कई लोगों को काफी आश्चर्य हुआ कि ऐसा कैसे हो गया और लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि विपक्ष का महागठबंधन टूट गया, यह गठबंधन नहीं लठबंधन है.
  • पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों से निपटने की सरकार की कोशिश
    रवीश कुमार
    आख़िर कब तक सरकार भी देखती और कब तक लोग भी देखते. पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस के दाम बढ़ते-बढ़ते कहां तक जाएंगे किसी को नहीं पता. कई महीनों से जनता पेट्रोल डीज़ल और रसोई गैस के दाम दिए जा रही थी और यह मान लिया गया था कि जनता इस बार उफ्फ तक नहीं कर रही है क्योंकि वह सरकार के ख़िलाफ़ नारे नहीं लगा रही है.
  • किसानों की समस्या पर सरकार कितनी गंभीर?
    रवीश कुमार
    कायदे से 2 अक्तूबर को ऐसा नहीं होना चाहिए था मगर दिल्ली यूपी बॉर्डर पर किसानों को रोकने गई पुलिस के कारण हम सबको ये देखने को मिला. किसान किसी भी हाल पर राजघाट जाना चाहते थे. 2 अक्तूबर के पूरे दिन दिल्ली की इस सीमा पर टकराव और तनाव में बीता.
  • मायावती को क्यों आया गुस्सा?
    अखिलेश शर्मा
    बीएसपी प्रमुख मायावती ने कांग्रेस को करारा झटका दिया है. मायावती ने छत्तीसगढ़ के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी कांग्रेस से गठबंधन करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस की रस्सी जल गई पर बल नहीं गए.
  • किसानों के सामने कौन सा मुंह लेकर जाएंगे?
    प्रभात उपाध्याय
    नाबार्ड के सर्वे में जो सबसे चौंकाने वाली बात है वह यह कि 87 फीसद किसानों की आय 2436 रुपये के आसपास है. हम मान लें कि एक परिवार में न्यूनतम 5 लोग होंगे तो एक सदस्य के हिस्से 500 रुपये से भी कम आएगा. किसान दिल्ली आए थे, अब दिल्ली के 'चश्मे' से इस आंकड़े को देखें. 500 रुपये में आप क्या-क्या कर लेंगे? दो वक्त लंच और डिनर, या सिर्फ लंच या डिनर या एक चाय/कॉफी या शायद इतना टिप ही दे दें.
  • लखनऊ पुलिस की गोली से मरे विवेक तिवारी की बीवी को क्यों बना रहे 'विलेन' ?
    नवनीत मिश्र
    पुलिस के हाथों पति विवेक तिवारी की मौत पर पत्नी कल्पना का क्या मुआवजा और नौकरी मांगना गुनाह है, जो कुछ लोग गलत टिप्पणियां करने में जुटे हैं. सरकार पर भरोसा होने की बात कह देने पर ही महिला को निशाना बनाने वाले लोग कौन हैं...
  • किसानों से ही दिल्ली है, फिर दिल्ली किसानों के लिए क्यों बंद है...?
    रवीश कुमार
    आज के दिन तमाम सरकारी और रूटीन कार्यक्रमों के बाद राजघाट के रास्ते उन लोगों के लिए खोल देने चाहिए थे, जो अपनी मांगों को लेकर वहां जाना चाहते थे. राजघाट सिर्फ राजनयिकों और राष्ट्रप्रमुखों के माल्यार्पण के लिए नहीं है. किसानों के भाषण के लिए भी है. दिल्ली किसानों से दूर जाएगी, तो किसान दिल्ली आएंगे ही. रास्ता नहीं रोका जाता, तो आराम से आते और किसान चले जाते.
  • एक डॉलर 73.37 रुपया, बेरोज़गारी आसमान पर, प्रधानमंत्री ईवेंट-ईवेंट
    रवीश कुमार
    आज एक डॉलर की कीमत 73 रुपये 37 पैसे को छू गई. रुपये की गिरावट का यह नया इतिहास है. भारत के रुपये का भाव इस साल 12 प्रतिशत गिर गया है. एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन भारतीय मुद्रा का है. 2013 में कभी एक डॉलर 72 के पार नहीं गया, लेकिन उस वक्त अक्टूबर से दिसंबर के बीच 13 प्रतिशत गिरा था. यहां तो 12 प्रतिशत में ही 72 के पार चला गया.
  • बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ कहते हैं महात्मा गांधी
    सूर्यकांत पाठक
    महात्मा गांधी का देहावसान होने पर अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जनरल सी मार्शल ने कहा था - 'महात्मा गांधी आज सारी मानवता के प्रतिनिधि बन गए हैं. यह वह व्यक्तित्व है जिसने सत्य और विनम्रता को साम्राज्यों से भी ज्यादा शक्तिशाली बनाया.'
  • यूपी में पुलिस को किसकी शह? 
    अखिलेश शर्मा
    क्या उत्तर प्रदेश में पुलिस राज कायम हो गया है? क्या राज्य में सड़कों पर अब लोगों को पुलिस से डर लगने लगा है? राज्य सरकार ने पुलिसवालों को 'ऑपरेशन क्लीन' के नाम पर जो हथियार थमाए हैं क्या उनके निशाने पर अब निर्दोष नागरिक आ गए हैं? ये सारे सवाल लखनऊ में विवेक तिवारी की दो पुलिसवालों के हाथों हत्या के बाद उठ खड़े हुए हैं. सवाल यह भी है कि क्या योगी आदित्यनाथ सरकार ने गुंडो-बदमाशों और आतंकवादियों को मार गिराने के लिए पुलिस वालों को जो शूट टू किल का अधिकार दे दिया है वो अब निर्दोष आम नागरिकों पर भारी पड़ रहा है. क्या गेहूं के साथ घुन भी पिस रहा है? ये सवाल कोई पहली बार नहीं उठे हैं.
  • शिक्षा के मकसद पर प्रधानमंत्री का भाषण
    सुधीर जैन
    शनिवार को विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में शिक्षा के पारंपरिक लक्ष्य को दोहराया गया. एक ऐसे लक्ष्य को दोहराया गया, जिसे हासिल करने का तरीका सदियों से तलाशा जा रहा है. लक्ष्य यह कि शिक्षा ऐसी हो जो हमें मनुष्य बना सके, जिससे जीवन का निर्माण हो, मानवता का प्रसार हो और चरित्र का गठन हो. प्रधानमंत्री ने ये लक्ष्य विवेकानंद के हवाले से कहे. इस दोहराव में बस वह बात फिर रह गई कि ये लक्ष्य हासिल करने का तरीका क्या हो? प्रधानमंत्री के इस भाषण से उस तरीके के बारे में कोई विशिष्ट सुझाव तो नहीं दिखा, फिर भी उन्होंने निरंतर नवोन्मेष की जरूरत बताई. हालांकि अपनी तरफ से उन्होंने नवोन्मेष को देश दुनिया में संतुलित विकास से जोड़ा. खैर, कुछ भी हो, शिक्षा और ज्ञान की मौजूदा शक्लोसूरत की आलोचना के बहाने से ही सही, कम से कम शिक्षा और ज्ञान के बारे में कुछ सुनने को तो मिला.
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