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विचार
  • सुप्रीम कोर्ट है 'सुप्रीम'
    मनोरंजन भारती
    सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसलों ने इतिहास रच दिया खासकर आम आदमी की निजी स्वतंत्रता को लेकर.
  • एशिया कप की कहानी श्रीलंका और बांग्लादेश की जुबानी
    मनोरंजन भारती
    एशिया कप में सबसे बड़ा अपसेट बांग्लादेश ने किया जब एक तरह से सेमीफाइनल मैच में पाकिस्तान को शिकस्त दे दी. एशिया में ऐसा लग रहा है कि दो टीमों का उदय हो रहा है वे हैं बांग्लादेश और अफगानिस्तान. दो टीमें नीचे फिसलती जा रही हैं जैसे श्रीलंका और पाकिस्तान.
  • क्योंकि संपत्ति नहीं है स्त्री
    प्रियदर्शन
    व्यभिचार कानून को रद्द करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला बस इतना नहीं है कि स्त्री और पुरुष के विवाहेतर संबंधों को अब जुर्म नहीं माना जाएगा. दुर्भाग्य से हमारे लगातार सतही-सपाट होते समय में ज़्यादातर लोग इस फैसले की इतनी भर व्याख्या करेंगे. लगातार चुटकुलेबाज होते जा रहे हमारे समाज को यह फैसला अपने लिए स्त्री-पुरुष संबंधों के खुलेपन पर कुछ छींटाकशी का अवसर भर लग सकता है, लेकिन यह एक ऐतिहासिक फैसला है.
  • रक्षा मंत्रालय की फाइल से खुले राज़, रफाल के कम दाम से किसे था एतराज़
    रवीश कुमार
    राफेल विमान या किसी भी रक्षा ख़रीद के लिए कांट्रेक्ट नेगोशिएशन कमेटी (CNC) के प्रमुख वायुसेना प्रमुख थे. फ्रांस की टीम से दर्जनों बार बातचीत के बाद अंतिम कीमत के नतीजे पर पहुंचा गया था.
  • लोकतंत्र पर मंडराती नौकरशाही तंत्र की छाया
    डॉ विजय अग्रवाल
    हमें यह सोचना होगा कि लोकतंत्र की आत्मा मूलतः लोक में बसती है या ब्यूरोक्रेसी में...? इतने उच्च स्तर पर प्रवेश करने से पहले ब्यूरोक्रेसी के ये सदस्य आए भले ही लोक-जीवन से क्यों न हों, लेकिन मसूरी की प्रशासनिक अकादमी में प्रवेश करते ही उनकी चेतना का जो रूपान्तरण होता है, वह उन्हें लोकतंत्र पर शासन करने वाले एक विशिष्ट तंत्र में तब्दील कर देता है,
  • आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जोरों पर, क्या है राफेल सौदे का सच?
    अखिलेश शर्मा
    राफेल का सच क्या है? क्या यह सच इस बात से तय होगा कि आप राजनीतिक विचारधारा को बांटने वाली रेखा के किस ओर खड़े हैं? ऐसा क्यों होता है कि राजनीतिक पार्टियां सत्ता में रहते हुए कुछ कहती हैं और विपक्ष में आने के बाद कुछ और? राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर लग रहे तमाम आरोपों में कुछ बड़े आरोपों की पड़ताल के बाद एक अलग ही तस्वीर सामने आई है. सबसे बड़ा आरोप कीमतों को लेकर है.
  • एससी/एसटी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, बीजेपी के लिए राहत या नया सिरदर्द?
    अखिलेश शर्मा
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकारी नौकरियां कर रहे अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के लिए प्रमोशन में आरक्षण मिलेगा. इसका फैसला केंद्र और राज्य सरकारों पर छोड़ दिया गया है. इसके लिए सरकारों को काडर के हिसाब से ये आंकड़े जमा करने होंगे कि इस समुदाय को नौकरी में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है या नहीं. महत्वपूर्ण चुनावों से पहले आया यह फैसला बीजेपी के लिए बड़ी राहत है.
  • 90,000 करोड़ की डिफॉल्टर IL&FS कंपनी डूबी तो आप भी डूबेंगे...
    रवीश कुमार
    IL&FS (INFRASTRUCTURE LEASING AND FINANCIAL SERVICES) का नाम बहुत लोगों ने नहीं सुना होगा. यह एक सरकारी क्षेत्र की कंपनी है जिसकी 40 सहायक कंपनियां हैं. इसे नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी की श्रेणी में रखा जाता है जो बैंकों से लोन लेती हैं. जिसमें कंपनियां निवेश करती हैं और आम जनता जिसके शेयर ख़रीदती है.
  • अफगानिस्तान की जय हो
    मनोरंजन भारती
    एशिया कप 2018 में अफगानिस्तान ने भारत के साथ वनडे मैच को टाई कर दिया. यानि दोनों देशों के स्कोर बराबर हो गए. अफगानिस्तान ने 49.5 ओवर में 8 विकेट खोकर 252 रन बनाए जबकि भारत ने भी 50 ओवर में आलआउट होकर 252 रन बनाए. यानि मैच ड्रॉ हो गया. मगर आप खुद अंदाजा लगा लीजिए कि कौन जीता क्रिकेट प्रेमियों की नजर में..
  • मुद्दों की तलाश में सरकार और विपक्ष
    मनोरंजन भारती
    राफेल को यदि छोड़ भी दें तो कई ऐसे मुद्दें हैं जो इस सरकार के लिए काफी अहम हैं इसमें कुछ मुद्दे तो आम जनता से जुड़े हैं तो कुछ खास लोगों से..लेकिन बीजेपी के तमाम नेताओं को यह शायद दिख नहीं रहा है या वे देखना नहीं चाहते.
  • देश के मसले, पाकिस्तान का नाम!
    रवीश कुमार
    पाकिस्तान का नाम जब भारत की राजनीति में आ जाए तो तय करना मुश्किल हो जाता है कि यह फुलटॉस है या बाउंसर. बिहार का चुनाव हो तब पाकिस्तान. राफेल डील तब पाकिस्तान पाकिस्तान. पाकिस्तान वाले भी इतना पाकिस्तान पाकिस्तान नहीं करते होंगे जितना भाजपा प्रवक्ता पाकिस्तान पाकिस्तान करते हैं.
  • 2019 के चुनावी साल में मीडिया की लाश आपके घर आने वाली है, आपकी क्या तैयारी है?
    रवीश कुमार
    2019 के चुनाव में अब 9 महीने रह गए हैं. अभी से लेकर आखिरी मतदान तक मीडिया के श्राद्ध का भोज चलेगा. पांच साल में आपकी आंखों के सामने इस मीडिया को लाश में बदल दिया गया. मीडिया की लाश पर सत्ता के गिद्ध मंडराने लगे हैं, बल्कि गिद्धों की संख्या इतनी अधिक हो चुकी है कि लाश दिखेगी भी नहीं. अब से रोज इस सड़ी हुई लाश के दुर्गंध आपके नथुनों में घुसेंगे. आपके दिमाग में पहले से मौजूद सड़न को खाद देंगे और फिर सनक के स्तर पर ले जाने का प्रयास करेंगे जहां एक नेता का स्लोगन आपका स्लोगन हो जाएगा. मरा हुआ मीडिया मरा हुआ नागरिक पैदा करता है. इस चुनावी साल में आप रोज इस मीडिया का श्राद्ध भोज करेंगे. श्राद्ध का महाजश्न टीवी पर मनेगा और अखबारों में छपेगा.
  • फिर भी कुछ छूट जाता है मंटो...
    प्रियदर्शन
    मंटो एक जलते हुए शोले का नाम है. उसको छूना दुस्साहस का काम है. छूते ही हाथ जल जाते हैं. मगर इस बदनाम लेखन के भीतर कोई ऐसी कशिश है कि उसको छूने की इच्छा होती है, कोई ऐसी तपिश है जो अपनी ओर खींचती है.
  • राफेल : पीएम को चोर कहने की परंपरा है हमारे यहां
    मनोरंजन भारती
    राफेल मामले पर बयानबाजी एकदम निचले स्तर पर पहुंचती जा रही है. राफेल मामले पर राहुल गांधी ने फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद के बयान के बाद कहा कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने हमारे पीएम को चोर कहा है..फिर क्या था सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री का मजाक बनाया जाने लगा..सोशल मीडिया पर मेरा पीएम चोर है जैसे जुमलों की बाढ़ आ गई ..वहां पर जैसे मानो कि चोर-चोर का शोर होने लगा...
  • 15 दिन में राफेल डील से HAL का नाम कैसे कटा?
    रवीश कुमार
    राफेल विमान पर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान का अभी तक किसी ने खंडन नहीं किया है. फ्रांस सरकार ने उनके बयान पर नाख़ुशी ज़रूर ज़ाहिर की है मगर यह नहीं बताया है कि अनिल अंबानी का नाम किसकी तरफ से रखा गया था. फ्रांस्वा ओलांद ने भी अभी तक अपने बयान का खंडन नहीं किया है.
  • राफेल सौदे पर और तेज हुई सियासी लड़ाई
    अखिलेश शर्मा
    सरकार ने राफेल सौदे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति जेपीसी के गठन की मांग ठुकरा दी है. सरकार का कहना है कि सीवीसी और सीएजी पहले से ही इस मामले को देख रहे हैं. इस बीच राफेल सौदे पर अब सियासी लड़ाई तेज़ हो गई है.
  • राफेल पर बवाल : कांग्रेस हमलावर, सरकार हड़बड़ी में
    मनोरंजन भारती
    राफेल का मामला खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. रोज कुछ न कुछ ऐसे बयान आ जाते हैं जो मामले को दबने ही नहीं देते..सबसे ताजा बयान फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलंद का है..जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत सरकार ने अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप को पार्टनर के तौर पर नाम सुझाया था जिसके बाद फ्रांस की कंपनी डेसाल्ट के पास कोई विकल्प नहीं बचा था..यह एक ऐसा बयान है जो भारत में कांग्रेस के लिए एक संजीवनी से कम नहीं है.
  • गोवा संकट टला है खतरा अभी भी बना हुआ है
    मनोरंजन भारती
    गोवा में बीजेपी के लिए अजीब हालात पैदा हो गए हैं. मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर खुद बीमार हैं और दिल्ली में एम्स में भर्ती हैं जहां उनके पेनक्रियाज का इलाज किया जा रहा है. पर्रिकर के अलावा बीजेपी के दो और मंत्री काफी बीमार हैं. पाडुरंग मडगईकर और फ्रांसिस डिसूजा की हालत भी ठीक नहीं है.
  • भारत को लूटो, भारत से भागो, नई योजना आई है क्या प्रधानमंत्री जी
    रवीश कुमार
    ऐसा लग रहा है कि भारत से भागने के लिए एयरपोर्ट पर अलग से काउंटर बना हुआ है, जहां से बैंक लूटने वालों को भागने में मदद की जा रही है. टाइम्स आफ इंडिया के नीरज चौहान की एक ख़बर गोदी मीडिया से ग़ायब है. भागने वाले नए खिलाड़ी का नाम है कि नितिन संदेसरा. इन पर 5300 करोड़ रुपये के बैंक फ्राड का आरोप है.
  • मोदी सरकार को एक नया मंत्रालय बनाना चाहिए, कुतर्क मंत्रालय
    रवीश कुमार
    अनिल अंबानी ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर टाइम्स ऑफ़ इंडिया में लिखा है 17 सितंबर 2016 को. इस लेख से पहली बार पता चला कि प्र म जी सिर्फ गुफ़ाओं में तपस्या नहीं कर रहे थे. कामिक्स बुक बाल नरेंद्र की कथा के अनुसार मगरमच्छ को क़ाबू नहीं कर रहे थे बल्कि धीरू भाई अंबानी के यहां डिनर भी कर रहे थे. वैसे किस किस ने उनके यहां डिनर या लंच नहीं किया होगा. इस मामले में कांग्रेसी नेताओं की भी लिस्ट निकलेंगे. डिनर करना ग़लत बात नहीं है. मिलना जुलना चाहिए.
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