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विचार
  • क्या प्रधानमंत्री मोदी के लिए चुनाव आयोग में कोई शाखा खुली है?
    रवीश कुमार
    आप सभी 18 अप्रैल के चुनाव आयोग की प्रेस कांफ्रेंस का वीडियो देखिए. यह वीडियो आयोग के पतन का दस्तावेज़ (document of decline) है. जिस वक्त आयोग का सूरज डूबता नज़र आ रहा था उसी वक्त एक आयुक्त के हाथ की उंगलियों में पन्ना और माणिक की अंगूठियां चमक रही थीं.
  • लोकसभा चुनाव 2019 का प्रचार अभियान : हैरानी है, अब तक सिर्फ उर्मिला मातोंडकर रहीं 'सुपरहिट'
    कृष्ण प्रताप सिंह
    वह नेता कहां है, जो समूचे भारत की बात करे, उन लाखों भारतीयों को आश्वस्त करे, जो मौजूदा निज़ाम में डरा हुआ महसूस करते हैं, कोई सकारात्मक संदेश देकर युवाओं को प्रेरित करे, शासन को सुशासन बनाए, और नई पीढ़ी के लिए सबको साथ लेकर चलने वाले भारत का झंडा बुलंद किए रहे...? नेहरू के उत्तराधिकारी का इंतज़ार जारी है...
  • क्या पीएम के हेलीकॉप्टर की जांच नहीं की जा सकती?
    रवीश कुमार
    क्या ऐसा कोई कानून है कि चुनाव की ड्यूटी पर तैनात अधिकारी प्रधानमंत्री के काफिले की गाड़ी चेक नहीं कर सकता है? अगर ऐसा कोई कानून है तो चुनाव आयोग को पब्लिक को इसके बारे में बताना चाहिए. और अगर किसी अधिकारी ने हेलिकाप्टर की जांच कर दी तो क्या यह इस हद तक का अपराध है कि उस अधिकारी को निलंबित कर दिया जाए.
  • बीजेपी की नई रणनीति, हिंदुत्व का नया स्वरूप
    अखिलेश शर्मा
    लोकसभा चुनाव के लिए दूसरे चरण का मतदान खत्म होते ही बीजेपी ने भी अपनी चुनावी रणनीति का दूसरा चरण शुरू कर दिया है. यह वह चरण है जिसमें बीजेपी अपने तरकश में मौजूद हर तीर का इस्तेमाल कर रही है. इसे हिंदुत्व 2.0 का नाम दिया गया है. यानी मोदी-शाह का वह हिंदुत्व जो वाजपेयी-आडवाणी के हिंदुत्व से बिल्कुल अलग है. तब मंदिर मंडल का दौर था तो इस दौर में मंदिर और मंडल को मिलाकर हिंदुत्व का नया रूप तैयार किया गया है. यह आक्रामक हिंदुत्व है जो खुलकर ध्रुवीकरण करता है.
  • टिकटॉक पर बैन : संघीय व्यवस्था में केंद्र सरकार की नाकामी
    विराग गुप्ता
    मद्रास हाईकोर्ट के दो जजों ने केंद्र सरकार को टिकटॉक ऐप पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्टे करने से इंकार कर दिया. इसके बावजूद टिकटॉक की वेबसाइट और ऐप पूरे भारत में अब भी उपलब्ध है. सवाल यह है कि हाईकोर्ट की सख्ती के बावजूद केंद्र सरकार आदेश पर अमल क्यों नहीं कर रही है.
  • प्रज्ञा ठाकुर को चुनकर मोदी-शाह ने दिखा दिया, जीत के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं...
    स्वाति चतुर्वेदी
    भोपाल में दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए BJP की पसंद हैं, 48-वर्षीय साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, जो हत्या, षड्यंत्र रचने और इससे भी ज़्यादा वर्ष 2008 में हुए मालेगांव बम ब्लास्ट केस की आरोपी हैं.
  • प्रधानमंत्री का इंटरव्यू पढ़ते समय गूगल भी करते रहें, मज़ा आएगा
    रवीश कुमार
    प्रधानमंत्री अपने इंटरव्यू में साफ़ साफ़ की जगह तथ्यों को यहां-वहां से मिला जुलाकर बोलते हैं. उनके हर बयान की जांच करेंगे तो महीना गुज़र जाएगा.
  • क्यों चुनावों में मशीन का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए?
    रवीश कुमार
    बताया कि ये पर्ची पांच साल तक नहीं मिटेगी. बेहतर है इसे गिना जाना चाहिए. वीवीपैट के अपने खर्चे भी हैं. इसका इस्तेमाल करने पर मतगणना की रफ्तार भी धीमी होती है. फिर बैलेट पेपर ही क्यों नहीं?
  • कॉरपोरेट सेक्टर में घटी नौकरियां और सैलरी, देश छोड़ कर भागे 36 बिजनेसमैन
    रवीश कुमार
    अगर मीडिया रिपोर्ट सही है, उनसे नौजवानों ने यही कहा है तो फिर नरेंद्र मोदी का यह कमाल ही माना जाएगा कि उन्होंने बेरोज़गारों के बीच ही बेरोज़गारी का मुद्दा ख़त्म कर दिया.
  • क्यों ग़ायब हैं किसानों के मुद्दे किसानों के ही देश से...?
    कन्हैया कुमार
    सरकार को यह समझना होगा कि जब ज़रूरत ओपन-हार्ट सर्जरी की हो, तो बैंड-एड देकर इलाज नहीं किया जा सकता. असली मसला तो खेती को बचाने का है, ऐसा हुआ, तो किसान ख़ुद-ब-ख़ुद बच जाएंगे.
  • 2019 का चुनाव सपनों का नहीं, एक दूसरे से आंखें चुराने का चुनाव है
    रवीश कुमार
    दिल्ली से जाने वाले पत्रकार लोगों के बीच मोदी-मोदी की गूंज को खोज रहे हैं. 2014 में माइक निकालते ही आवाज़ आने लगती थी मोदी-मोदी. 2019 में पब्लिक के बीच माइक निकालने पर आवाज़ ही नहीं आती है.
  • आरक्षण पर एक नई मुहिम का मौका
    डॉ विजय अग्रवाल
    हर काम के पूरा होने के बाद प्राप्त परिणाम हमें उस कार्य के बारे में तर्कपूर्ण ढंग से विचार करके भविष्य के लिए व्यावहारिक कदम उठाने का एक अनोखा अवसर उपलब्ध कराते हैं. सिविल सेवा परीक्षा के पिछले चार साल के परिणामों को इस एक महत्वपूर्ण तथ्ययुक्त अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए. सिविल सेवा के अभी-अभी घोषित परिणामों के अनुसार देश की इस सबसे कठिन एवं सर्वाधिक प्रतिष्ठित अखिल भारतीय परीक्षा में टॉप करने वाले कनिष्क कटारिया अनुसूचित जाति से हैं.
  • मायावती के रंग समझना आसान नहीं, विपक्ष के लिए बढ़ गया है सिरदर्द...
    स्वाति चतुर्वेदी
    लग रहा है कि जिस तरह की 'लेन-देन की राजनीति' आज तक 'बहन जी' करती रही हैं, वह किसी भी राष्ट्रीय पार्टी के साथ जा सकती हैं, जो 23 मई को आने वाले चुनाव परिणाम पर निर्भर करेगा.
  • ज्यादा ही बड़ा धमाका हो गया राफेल पर
    सुधीर जैन
    राफेल कांड छुपा जा रहा था। कम से कम चुनाव के दौरान इस कांड को लेकर मोदी सरकार निश्चिंत लग लग रही थी। सरकार ने अपने प्रचार तंत्र के जरिए बड़ी जुगत से जनता के बीच यह धारणा बनवा दी थी कि राफेल कांड पर सुप्रीमकोर्ट से सरकार को क्लीन चिट मिल चुकी है। हालांकि यह भी एक हकीकत है कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को लेकर तरह तरह की व्याख्याएं चालू थीं।
  • बिहार के 'लेनिनग्राद' बेगूसराय से कन्हैया ने ठोकी ताल
    रवीश कुमार
    बिहार का बेगूसराय इन दिनों तरह-तरह के सराय में बदल गया है. सराय का मतलब होता तो लंबे सफर का छोटा सा ठिकाना, जहां यात्रि अंधेरे होने पर सुस्साते हैं और अगली सुबह अपनी यात्रा पर निकल पड़ते हैं. दिल्ली में एक है जुलैना सराय. यूसुफ सराय. बिहार में सबसे अधिक राजस्व देने वाला ज़िला बेगूसराय के एक गांव का लड़का जेएनयू गया था रिसर्च करने. आज उसने बेगूसराय से सीपीआई के उम्मीदवार के नाते पर्चा भर दिया.
  • बीजेपी के संकल्प पत्र से बाकी बड़े नेता ग़ायब क्यों?
    रवीश कुमार
    11 अप्रैल को पहला मतदान है. मतदान से ठीक तीन दिन पहले भाजपा का घोषणापत्र आया है. 2014 और 2019 के घोषणापत्र के कवर को ही देखें तो बीजेपी या तो बदल गई है या फिर बीजेपी में सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी रह गए हैं. 2014 में कवर पर 11 नेता थे. इनमें से अटल बिहारी वाजपेयी और मनोहर पर्रिकर अब दुनिया में नहीं हैं. आडवाणी और मुरली मनोहन जोशी को टिकट नहीं मिला है.
  • जनता को छलने वाले चुनावी वादे - लोकपाल से समझें
    विराग गुप्ता
    लोकसभा चुनाव जीतने के लिए सभी पार्टियों ने लुभावने वायदों की बारिश कर दी है. नेताओं के चुनावी वायदों के पीछे बदलाव की विस्तृत रूपरेखा नहीं होती है इसीलिए सरकार बदलने के बावजूद सिस्टम नहीं बदलता है. चुनावों के बाद इन वायदों का क्या हश्र होता है, इसे लोकपाल मामले से समझा जा सकता है.
  • फ्रांस के लोग प्रदूषण के कारण कंपनी को भगा रहे हैं, भारत में कंपनी को घर में घुसा रहे हैं
    रवीश कुमार
    स्थानीय लोगों ने इस अमरीकी कंपनी के खिलाफ मुकदमा कर दिया है. उनका कहना है कि इस तरह के प्रोजेक्ट आउटडेटेड हो गए हैं. हमें सोचना होगा कि कम प्रदूषण के साथ समाज को कैसे जीने के लिए बेहतर बनाया जा सके. अमेजन कंपनी के खिलाफ खूब प्रदर्शन हो रहे हैं. एक मांग यह भी है कि इन कंपनियों को टैक्स में बहुत छूट मिलती है जबकि इन्हीं के भीतर काम करने वाले कर्मचारियों को सारे टैक्स देने पड़ते हैं. दिन भर मज़दूरी करने वाला, कम कमाने वाला ज़्यादा टैक्स देता है, कंपनी को कम से कम देना पड़ता है. ऐसा कैसे हो सकता है.
  • गुजरात इंफ़ैंट्री बनाम अहीर बख़्तरबंद के बीच है मुक़ाबला यूपी में!
    रवीश कुमार
    गुजरात इंफ़ैंट्री रेजीमेंट. प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह दोनों समाजवादी पार्टी का घोषणापत्र पढ़कर चौंक गए होंगे. दोनों भाजपाई सोच रहे होंगे कि ये सपाई क्यों उनके राज्य के नाम पर रेजीमेंट बना रहा है? बनाना था तो गुजरात बख़्तरबंद रेजीमेंट बनाते और अहीर इंफ़ैंट्री रेजीमेंट!
  • बीजेपी में वरिष्‍ठ नेता दरकिनार किए जा रहे हैं?
    ख़बर न्यूज़ डेस्क
    1989 से सुमित्रा महाजन लोकसभा पहुंच रही हैं. 16वीं लोकसभा की अध्यक्ष बनाईं गईं. आज उन्होंने एक पत्र जारी किया जो न तो प्रधानमंत्री को संबोधित था और न ही पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को. यह पत्र सीधा प्रेस को जारी किया गया है जिसमें पार्टी अध्यक्ष की जगह सादर प्रकाशनार्थ लिखा है.
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