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विचार
  • राज्यपाल ने संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन किया?
    रवीश कुमार
    लोकतंत्र में जब संविधान की धज्जियां उड़ने लगें तो वह भी नरक ही होता है अगर नरक होता है तो. यह तो सुप्रीम कोर्ट को तय करना है कि महाराष्ट्र में संविधान की धज्जियां उड़ी की नहीं हैं. 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाते हैं. इसी दिन भारत का संविधान तैयार रूप में स्वीकृत हुआ था. इसी दिन सुप्रीम कोर्ट का महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट के मामले में फैसला आएगा. 26 जनवरी 2016 को जब भारत संविधान के लागू होने के जश्न में डूबा था तब शाम सात बजकर 59 मिनट पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने के कैबिनेट की सिफारिश पर दस्तखत कर रहे थे
  • कांग्रेस बनाम सिंधिया? सिंधिया ने नकारा लेकिन चौड़ी होती दिख रही है खाई
    स्वाति चतुर्वेदी
    हम फिलहाल दो चीजों के बारे में जानते हैं. कांग्रेस नेता और शाही परिवार से संबंधित ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने ट्विटर हैंडल से अपनी पार्टी से संबंधित सारी जानकारी हटा ली है. अब उनके ट्विटर हैंडल पर लिखा है कि वो केवल एक लोक सेवक और क्रिकेट समर्थक हैं. इससे पहले सिंधिया के ट्विटर हैंडल पर लिखा था कि वह गुना से पूर्व सांसद हैं. इसके अलावा उनके मंत्री पद से जुड़ी जानकारी भी उनके ट्विटर हैंडल पर थी.
  • मजबूत विपक्ष के सामने रघुवर दास के विकास कार्य - किसे मिलेगी सफलता?
    अश्विन कुमार सिंह
    लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके विकास कार्यो पर देश की जनता ने भरोसा जताया, जिसके कारण बीजेपी ने पहली बार 300 सीटों के आंकड़े को पार किया. लोकसभा के बाद हुए महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनावों में बीजेपी को आसानी से अपनी जीत का भरोसा था, क्योंकि 4 महीने पहले ही हुए चुनावों में बीजेपी ने प्रचड जीत हासिल की थी, लेकिन विधानसभा चुनावों के आएं परिणामों ने भाजपा नेतृत्व को सोचने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि इन चुनावों में ना तो विकास की बात पर जनता ने वोट दिया और ना ही धारा 370  के नाम पर वोट मिला.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग:  95,000 करोड़ के आरोपी को मोदी ने बना दिया महाराष्ट्र का उप मुख्यमंत्री
    रवीश कुमार
    95,000 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोपी अजित पवार को रातों रात एक खेमे से उठाकर राज्यपाल के सामने लाया जाता है. उन्हें देवेंद्र फडणवीस के साथ शपथ दिलाई जाती है. 
  • रवीश कुमार का ब्‍लॉग : आपके लिए भी दरवाज़े खुल सकते हैं, कोशिश तो कीजिए
    रवीश कुमार
    स्वाति जिस मशीन पर काम करती है उसका नाम है AOSLO Adaptive optics scanning laser ophthalmoscope. दुनिया भर में बहुत कम जगहों पर रिसर्च के लिए यह मशीन है. अधिक से अधिक दस जगहों पर होगी. आम तौर पर डॉक्टर आंखों के आले से यानी ophthalmoscope से कुछ हिस्से को नहीं देख पाते हैं.
  • शंबूक पैदा होते रहेंगे, संस्कृत का क्या होगा?
    प्रियदर्शन
    पूर्व वैदिक काल के वे ऋषि निश्चय ही तेजस्वी रहे होंगे जिन्होंने संस्कृत जैसी समृद्ध भाषा रची. अपनी बहुत सारी विसगंतियों के बावजूद वैदिक साहित्य का एक हिस्सा विश्व की ज्ञान और दर्शन की परंपरा का अनमोल हिस्सा है. पाणिनी जैसे उद्भट वैयाकरण ने 1500 साल पहले 4000 सूत्रों जैसी 'अष्टाध्यायी' रच डाली थी और व्याकरण के नियम निर्धारित किए थे, यह सोच कर भी विस्मय होता है. उनके पहले संस्कृत ने कालिदास जैसे महाकवि पैदा किए और शूद्रक जैसे अद्भुत नाटककार. रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ इस भाषा में लिखे गए जो दुनिया में अपनी तरह के अद्वितीय ग्रंथ हैं. लेकिन ऐसा क्या हुआ कि ऐसी अद्भुत अद्वितीय भाषा कालक्रम में लगभग विलोप के कगार पर पहुंच गई?
  • बिहार के नौजवानों के सत्यानाश का सर्टिफिकेट देखिए
    रवीश कुमार
    बिहार में कई यूनिवर्सिटी में आज भी तीन साल का ही बीए पांच साल में हो रहा है. समय पर रिज़ल्ट नहीं आता.
  • क्या आपको शर्म आ रही है कि आप एक लाश बन चुके हैं?
    रवीश कुमार
    क्या आपको शर्म आ रही है कि चैनलों के ज़रिए एक यूनिवर्सिटी के ख़िलाफ़ अभियान चलाया जा रहा है?
  • कश्मीर पर चुप रहिए, अयोध्या पर चुप रहिए, जेएनयू की निंदा कीजिए
    प्रियदर्शन
    पंजाबी कवि अवतार सिंह पाश की कविता 'सबसे ख़तरनाक होता है' अब इतनी बार पढ़ी और दुहराई जा चुकी है कि यह अंदेशा होता है कि वह कहीं अपना अर्थ न खो बैठी हो. लेकिन हर बार हालात कुछ ऐसे होते हैं कि इस कविता को उद्धृत करने की इच्छा होती है. इन दिनों देश में 'शांति' बने रहने पर बहुत सुकून जताया जा रहा है. सब याद दिला रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने के बाद भी हिंसा नहीं हुई और अयोध्या का फ़ैसला आने के बाद भी देश में अमन बना रहा.
  • हिन्दी प्रदेश के अभिशप्त नौजवानों JNU से कुछ सीखो, क्या चुप ही रहोगे?
    रवीश कुमार
    यह इस वक्त का कमाल है. राष्ट्रवाद के नाम पर युवाओं को देशद्रोही बताने के अभियान के बाद भी जे एन यू के छात्र अपने वक्त में होने का फ़र्ज़ निभा रहे हैं. इतनी ताकतवर सरकार के सामने पुलिस की लाठियां खा रहे हैं. उन्हें घेर कर मारा गया. सस्ती शिक्षा मांग किसके लिए है? इस सवाल का जवाब भी देना होगा तो हिन्दी प्रदेशों के सत्यानाश का एलान कर देना चाहिए. क़ायदे से हर युवा और मां-बाप को इसका समर्थन करना चाहिए मगर वो चुप हैं. पहले भी चुप थे जब राज्यों के कालेज ख़त्म किए जा रहे थे. आज भी चुप हैं जब जे एन यू को ख़त्म किया जा रहा है. टीवी चैनलों को गुंडों की तरह तैनात कर एक शिक्षा संस्थान को ख़त्म किया जा रहा है.
  • मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी परीक्षा शुल्क वृद्धि वापस ली और इसी के साथ मैंने नौकरी सीरीज़ बंद कर दी
    रवीश कुमार
    माननीय मुख्यमंत्री कमलनाथ जी, आपका बहुत शुक्रिया. आपने एक फ़ेसबुक पोस्ट के आधार पर फार्म की फ़ीस वृद्धि का फ़ैसला वापस लिया. छात्र जिस तरह से राहत महसूस कर रहे हैं उससे पता चलता है कि उनके लिए 1000-2000 की फ़ीस बड़ी बात थी. उन्हीं ने बताया है कि आपने बढ़ी हुई फ़ीस वापस ले ली है. अब 250 और 500 में फार्म भरे जा सकेंगे. 2000 नहीं देने पड़ेंगे.
  • बिकेगा बिकेगा भारत पेट्रोलियम, विचित्र मंत्री का एलान
    रवीश कुमार
    मुझे तभी लगा था जब वित्त मंत्री के रूप में अपना पहला बजट लेकर आईं थीं. ब्रीफ़केस की दासता से भारत को आज़ादी दिलाने वाली वित्त मंत्री बजट के मामले में जल्दी ही विचित्र साबित हुईं. गोदी मीडिया ने उन्हें लक्ष्मी बनाकर पेश किया जबकि काम कुबेर का था. तभी लगा था कि कुबेर छवियों के संसार में अपने विस्थापन को सहन नहीं करेंगे.
  • मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के नाम रवीश कुमार का पत्र
    रवीश कुमार
    मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने ऑनलाइन परीक्षाओं की फीस दोगुनी से ज्यादा कर दी है. वन सेवा की परीक्षा में सामान्य वर्ग के लिए 1200 की जगह 2500 रुपए, वहीं आरक्षित वर्ग के लिए 600 की जगह 1250 रुपए.
  • आखिर कौन हैं दिल्ली के कातिलाना प्रदूषण के गुनहगार?
    रवीश रंजन शुक्ला
    प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की डांट फटकार, लोगों की लानत- मलानत, ऑड-इवेन स्कूलों को बंद करने और हमारे-आपके जैसे पत्रकारों की प्रदूषण पर थोक खबरों के बावजूद प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा है. 
  • पूर्वी दिल्ली के सांसद गौतम गंभीर के नाम रवीश कुमार का पत्र...
    रवीश कुमार
    माननीय गौतम गंभीर जी, मैं आपके समर्थन में खड़ा हूं. वो भी गंभीरता से. मैं पहला शख़्स हूं जिसने किसी हल्के काम का इतनी गंभीरता से समर्थन किया है. 
  • रवीश कुमार का ब्लॉग: रंग लाया छात्रों का संघर्ष, SSC ने ढाई साल की देरी के बाद CGL-2017 का रिजल्ट जारी किया
    रवीश कुमार
    स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (SSC) की CGL 2017 की परीक्षा का परिणाम आ गया. यह रिजल्ट ढाई साल की देरी से आया है. छात्रों ने बहुत संघर्ष किया. परीक्षा पर सवाल उठा और जांच भी हुई. सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद परिणाम का रास्ता साफ़ हुआ तो एसएससी चुप हो गई. परिणाम निकालने में देरी होने लगी तो छात्र बेचैन होने लगे. छात्रों ने आवाज़ उठाई और प्राइम टाइम के ज़रिए आवाज़ और मुखर हुई.
  • बच्चों को बाल दिवस मनाने सिर्फ 100 रु. दिये जब्बार भाई, लेकिन ख़बर के बाद आपका फोन नहीं आया!
    अनुराग द्वारी
    मैंने तो सुना कि कैसे 1992 के दौर में आप भोपाल की सड़कों पर रात भर पहरा देते थे, हाल ही मैं जब दिग्विजय सिंह से प्रज्ञा तक को घोषणापत्र में गैस पीड़ितों को अनाथ छोड़ दिया गया था तो आपने निराशा जताई थी. अपने पुराने साथी और उनके बेटे जयवर्धन को पार्क की फिक्र बताते हुए मुझसे कहा था कि इसपर काम करना है.
  • ऐसी लाइब्रेरी और अध्ययन कक्ष आपने किसी हिन्दी प्रदेश में देखी है?
    रवीश कुमार
    हिन्दी प्रदेशों के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है बस उनमें निखार न आए इसका इंतज़ाम सिस्टम और समाज ने कर रखा है. सैंकड़ों किलोमीटर तक लाइब्रेरी नज़र नहीं आएगी. इसे बीते ज़माने का बताया जाता है. मैं अमरीका के सैन फ़्रांसिस्को में हूं. यहां यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, बर्कले की लाइब्रेरी की रीडिंग रूम की तस्वीर दिखाना चाहता हूं. 
  • उत्तराखंड के 16 आर्युवेदिक कॉलेजों में फीस बढ़ाने का अजीब खेल
    रवीश कुमार
    उत्तराखंड के सोलह आर्युवेदिक कॉलेज के हज़ारों छात्र-छात्राएं 45 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं. धरना दे रहे हैं. मार्च निकाल रहे हैं. पुलिस की मार खा रहे हैं फिर भी अपने इरादे पर क़ायम हैं. हुआ यह है कि बिना नियमों का पालन किए मेडिकल फ़ीस 80,000 सालाना से बढ़ाकर 2 लाख 15 हज़ार कर दी गई. 
  • 60 के दशक में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह नहीं रहे...
    रवीश कुमार
    संतोष कुमार सिंह की पोस्ट से पता चला कि वशिष्ठ नारायण सिंह नहीं रहे. उनका पार्थिव शरीर काफ़ी देर तक अस्पताल के गलियारे में पड़ा रहा. एंबुलेंस नहीं मिली. 1960 के दशक में जिस यूनिवर्सिटी से वशिष्ठ नारायण सिंह ने पीएचडी की थी, वहां पहुंचा हूं.
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