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विचार
  • बिहार सरकार का एक साल पूरा होने पर सत्ता पक्ष सुस्त और विपक्ष सोया क्यों रह गया
    मनीष कुमार
    शनिवार को बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार के एक साल पूरे हो गए. अपनी सरकार का सालाना लेखा जोखा देने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोई आयोजन नहीं किया और न विपक्ष ने उनके इस कार्यकाल के बारे में कोई आरोप पत्र जारी किया या संवाददाता सम्मेलन ही किया. इसके बाद एक से एक राजनीतिक क़यास लगाए जा रहे हैं.
  • रेलमंत्री जी, ये कैसी ऑनलाइन परीक्षा है कि आरा से हैदराबाद जाना पड़े...?
    रवीश कुमार
    9 अगस्त से रेलवे की परीक्षा शुरू हो रही है. अस्सिटेंट लोको पायलट और टेक्निशियन के 26,502 पदों के लिए परीक्षा हो रही है. इसमें 47 लाख से अधिक छात्र भाग लेंगे. रेल मंत्रालय की तरफ से दावा किया गया है कि रेलवे दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन परीक्षा कराने जा रहा है, क्योंकि इस परीक्षा में करीब एक लाख पदों के लिए दो करोड़ से अधिक छात्र हिस्सा लेंगे. यही हेडलाइन भी अख़बारों में छपता है ताकि फुल प्रोपेगैंडा हो सके.
  • मजबूत सरकार बनाम मजबूर सरकार- नकली बहस की कोशिश
    प्रियदर्शन
    बीजेपी बार-बार यह कह रही है कि विपक्ष मजबूत सरकार नहीं दे सकता. गठबंधन की मजबूरी में बनी सरकारें मज़बूत नहीं हो सकतीं. आज भी यह बात बीजेपी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कही. एक हद तक यह बात सच है. बीजेपी के अकेले बहुमत और एनडीए के समर्थन के साथ नरेंद्र मोदी बेहद मज़बूत प्रधानमंत्री हैं. यह मज़बूती उनकी अपनी छवि का भी नतीजा है.
  • नेता भड़काऊ बयान देने से बाज क्यों नहीं आ रहे?
    अखिलेश शर्मा
    एक तरफ मॉब लिचिंग और विचारधारा के आधार पर हत्याओं की घटनाएं बढ़ रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ नफरत फैलाने वाले बयान भी लगातार बढ़ रहे हैं. ये बयान सांसदों-विधायकों और प्रवक्ताओं की ओर से दिए जाते हैं. राजनीतिक पार्टियां इनसे किनारा कर लेती हैं मगर समाज को बांटने वाले और हिंसा के लिए उकसाने वाले ये बयान अपना असर छोड़ जाते हैं.
  • महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की सच्चाई
    मनोरंजन भारती
    महाराष्ट्र में मराठा सड़कों पर हैं, वजह है आरक्षण... उनकी मांग है कि जो 72 हजार नौकरियों की भर्ती निकली है उसमें उनको आरक्षण दिया जाए..हाई कोर्ट ने फिलहाल नए प्रावधानों पर रोक लगा रखी है. मौजूदा प्रावधानों के अलावा किसी भी रिजर्वेशन पर रोक लगी हुई है इसलिए राज्य सरकार के पास काफी कम विकल्प बचे हैं.
  • क्या पाकिस्तान में बदलाव ला पाएंगे इमरान?
    रवीश कुमार
    पाकिस्तान के आम चुनावों में चरमपंथी और धार्मिक संगठनों की हार हुई है. मुंबई हमलों के मुख्य आरोपी हाफिज़ सईद की अल्लाह ओ अकबर तहरीक को एक भी सीट नहीं मिली है. हाफिज़ सईद ने ख़ुद भी प्रचार किया था. उसकी पार्टी को पाकिस्तान चुनाव आयोग ने मान्यता नहीं दी थी. वहां से आ रही ख़बरों में बताया गया है कि बड़ी संख्या में ऐसे उम्मीदवारों की प्रांतीय और राष्ट्रीय असेंबली में हार हुई है. नतीजों का एलान नहीं हुआ है मगर इनकी हार पक्की बताई जा रही है. चंद उम्मीदवारों को छोड़कर किसी के जीतने के आसार नहीं है. चुनाव से पहले कट्टरपंथी ताकतों के उभरने की आशंका जताई जा रही थी मगर कई चरणों की गिनती के बाद ऐसा लग रहा है कि जनता ने ऐसे तत्वों को ठुकरा दिया है. पर चुनाव में हारने से कट्टरपंथी ताकतें कम हो गई हैं इस नतीजे पर पहुंचने में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए. उनकी हरकतें चुनावी राजनीति पर निर्भर नहीं हैं.
  • इमरान खान: क्या
    मनीष शर्मा
    आखिरकार कोई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर पहली बार इतिहास में प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए तैयार है. इमरान खान के नेतृत्व वाली तहरीक-ए-इंसाफ 110 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई है. सबकुछ योजनाबद्ध रहा है!! और इमरान की पार्टी को आसानी से किसी दूसरी पार्टी या निर्दलीय विजेता उम्मीदवारों से समर्थन मिल जाएगा.
  • पासवान के तीखे तेवर बीजेपी के लिए परेशानी का सबब
    अखिलेश शर्मा
    पहले टीडीपी अलग हुई, फिर शिवसेना ने अविश्वास प्रस्ताव पर साथ छोड़ा, जेडीयू ने सीटों के बंटवारे पर आंखें दिखाईं और अब बीजेपी का एक और सहयोगी दल सरकार के फैसले के खिलाफ खुलकर सामने आ गया है.
  • 2019 : विपक्ष में पीएम के पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार कौन?
    मनोरंजन भारती
    साल 2019 के चुनाव से पहले ही प्रधानमंत्री कौन हो, इसको लेकर बहस तेज होती जा रही है. एनडीए की तरफ से तो साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही अगले प्रधानमंत्री होंगे मगर विपक्ष में इसको लेकर कई आवाजें हैं..
  • जो भूख से मरीं, सिर्फ दिल्ली की नहीं, देश की नागरिक थीं
    राकेश कुमार मालवीय
    जिस दिन देश की राजधानी दिल्ली में तीन बच्चियों की भूख से मौत की ख़बर पढ़ी, ठीक उसी दिन अख़बार में एक और ख़बर थी कि अकेले मध्य प्रदेश में 55 लाख टन गेहूं सरप्लस है.
  • भुखमरी से मौत - अब कौन है दिल्ली का 'बॉस', जवाब दे...
    विराग गुप्ता
    दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के चुनाव क्षेत्र मंडावली में भूख से तीन बच्चियों की मौत के बाद AAP, BJP और कांग्रेसी नेताओं के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है. बच्चियों की मौत से गरीबी, अवसाद, बेरोज़गारी, क़र्ज़, अशिक्षा, जनसंख्या, नशा, अस्वच्छता जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर सभी सरकारों की गवर्नेन्स पर विफलता उजागर होती है.
  • डोनाल्ड ट्रंप की बदौलत बेनकाब होता अमेरिकी चेहरा
    डॉ विजय अग्रवाल
    डोनाल्ड ट्रंप के बचे हुए ढाई साल दुनिया के सामने अमेरिका के चेहरे को बेनकाब कर देंगे. इससे विश्व का नेतृत्व करने का उसका अब तक का दावा ध्वस्त होगा, और एक नई विश्व-व्यवस्था का आकार उभरेगा, जिसे डोनाल्ड ट्रंप की विश्व को देन के रूप में लिया जाना चाहिए.
  • 21वीं सदी के भारत में भुखमरी क्या शर्म की बात नहीं?
    रवीश कुमार
    अगर आपको यह बताया जाए कि राजधानी दिल्ली में भूख से 3 बच्चे मर गए हैं तब क्या आप थोड़ी देर के लिए भी ठिठक कर जानना चाहेंगे कि दिल्ली में कोई भूख से कैसे मर सकता है. जब भी हम ऐसा भरम पाल लेते हैं तभी कोई ऐसी घटना हमारा भरम तोड़ देती है.
  • लटका कांग्रेस का मिशन राहुल
    अखिलेश शर्मा
    कांग्रेस का मिशन राहुल शुरू होने से पहले ही लटक गया. राहुल को पीएम उम्मीदवार बनाने के कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले की स्याही सूखी भी नहीं थी कि उनके करीबी नेताओं ने फैसले की इबारत ही पलट दी. उनका कहना है कि कांग्रेस पीएम के लिए किसी का भी समर्थन कर सकती है बशर्ते वह बीजेपी और आरएसएस का न हो.
  • ...कहीं 'नवरुणा कांड' न बन जाए मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड
    बिहार का मुजफ्फरपुर विरले ही राष्ट्रीय मीडिया में अपनी जगह बना पाता है, मगर 29 बच्चियों से बलात्कार की खबरों से यह राष्ट्रीय फलक पर इस तरह के निगेटिव हेडलाइन्स से शहर का छीछालेदर करवाएगा, इसकी उम्मीद तो हमें कतई नहीं थी. लीचियों के लिए फेमस बिहार का मुजफ्फरपुर इस बार बालिका गृह में बच्चियों के साथ घिनौने कृत्य का गवाह बना हुआ है. असहाय, मजबूर बच्चियों से बलात्कार का गवाह बना मुजफ्फरपुर काफी समय से चीख-चीख कर अपनी दास्तां सुना रहा था, मगर इसकी गूंज को, तंत्र और अपराधियों के षड्यंत्र ने ऐसे दबाए रखा कि महीनों-महीनों तक मीडिया को इसकी भनक तक न लगी. मगर अफसोस, मुजफ्फरपुर की जुर्म की दीवारें इतनी ऊंची हो चुकी हैं कि लाख पुलिसिया मुस्तैदी के बाद भी उसमें दरार पड़ने का नाम नहीं ले रही. बहरहाल, इस बार का मामला नवरुणा कांड से भी ज्यादा सिहरन पैदा करने वाला है.
  • एक कैंपस के भीतर 29 बच्चियों के साथ बलात्कार होता रहा, बिहार सोता रहा
    रवीश कुमार
    बिहार के मुज़फ्फरपुर में एक बालिका गृह है. इसे चलाते हैं एनजीओ और सरकार पैसे देती है. इस बालिका गृह में भागी भटकी हुई लड़कियों को ला कर रखा जाता है, जिनका कोई ठिकाना नहीं होता है, मां बाप नहीं होते हैं. इस बालिका गृह में रहने वाली लड़कियों की उम्र 7 से 15 साल के बीच बताई जाती है. टाटा इस्टिट्यूट ऑफ साइंस जैसी संस्था ने इस बालिका गृह का सोशल ऑडिट किया था जिसमें कुछ लड़कियों ने यौन शोषण की शिकायत की थी. उसके बाद से 28 मई को एफ आई आर दर्ज हुआ और कशिश न्यूज़ चैनल ने इस ख़बर को विस्तार से कवर किया. यहां रहने वाली 42 बच्चियों में से 29 के साथ बलात्कार और लगातार यौन शोषण के मामले की पुष्टि हो चुकी है. एक कैंपस में 29 बच्चियों के साथ बलात्कार का नेटवर्क एक्सपोज़ हुआ हो और अभी तक मुख्य आरोपी का चेहरा किसी ने नहीं देखा है. पुलिस की कार्रवाई चल रही है मगर उसी तरह चल रही है जैसे चलती है. मई से जुलाई आ गया और पुलिस मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर को रिमांड पर नहीं ले सकी.
  • ढूंढने निकले मॉब लिंचिंग का कानूनी उपाय...
    सुधीर जैन
    हालांकि इस बात में शक नहीं कि लिंचिंग ने देश और दुनिया में अपनी केंद्र सरकार और संबधित राज्य सरकारों की छवि मटियामेट कर दी है. लिहाज़ा, मौजूदा सरकार यह ज़रूर चाहेगी कि लिंचिंग की वारदात हाल-फिलहाल रुक जाएं, और फिर सरकार आखिर सरकार होती है, वह जो चाहेगी, वैसा होगा कैसे नहीं.
  • चौकीदार की यह कैसी 'चौकसी' कि चौकी लेकर भागा चौकसी
    रवीश कुमार
    आने दीजिए रवांडा से मोदी जी को, 200 गायों की इंटरनेशनल डिलिवरी में ज़्यादा वक्त नहीं लगता है. ये काम तो अमेजन कर सकता था मगर गाय का मामला है तो मोदी जी ख़ुद लेकर गए हैं. वहां से लौटते ही वे ख़ुद ही वहां के राष्ट्रपति को फोन करेंगे और कहेंगे कि मैं अपने नागरिक को भारत नहीं ला सका, कम से कम तुम अपने नागरिक को भारत भेज दो. तब तक सुषमा जी एंटीगुआ के राजदूत को बुलाकर उन्हें इसलामाबाद भेज दें. एंटीगुआ ने मेहुल चौकसी को पासपोर्ट देकर भारत को चुनौती दी है. उसकी हिम्मत देखिए, इंटरपोल के ज़रिए भारत को नहीं बताया, बल्कि सीधे बताया है. ऐसा इंडियन एक्सप्रेस में सूत्रों के हवाले से छपा है.
  • कानून हाथ में क्यों लेती जा रही है भीड़?
    रवीश कुमार
    भीड़ अपने आप में पुलिस हो गई है और अदालत भी जो किसी को पकड़ती है और मार देने का फैसला कर लेती है. कोई सवाल न करे इसलिए सबसे अच्छा है गौ तस्करी का आरोप लगा दो ताकि धर्म का कवच मिल जाए जबकि संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि धर्म और आस्था की रक्षा के नाम पर किसी की हत्या की जा सकती है.
  • यह जिद नीतीश कुमार को क्यों पड़ सकती है भारी?
    मनीष कुमार
    पिछले दो दिनों से संसद से बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में एक ही मुद्दे पर हंगामा हो रहा है, वह है राज्य के मुजफ्फरपुर में एक बालिका गृह से सम्बंधित स्कैंडल का. खुद पुलिस और समाज कल्याण विभाग द्वारा अब तक 42 बालिकाओं की मेडिकल रिपोर्ट में 29 बालिकाओं के साथ यौन शोषण की जब से पुष्टि हुई है तब से पूरे देश में इस घटना की चर्चा तेज़ हुई है.
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