NDTV Khabar
होम | ब्लॉग

ब्लॉग

विचार
  • 21वीं सदी के भारत में भुखमरी क्या शर्म की बात नहीं?
    रवीश कुमार
    अगर आपको यह बताया जाए कि राजधानी दिल्ली में भूख से 3 बच्चे मर गए हैं तब क्या आप थोड़ी देर के लिए भी ठिठक कर जानना चाहेंगे कि दिल्ली में कोई भूख से कैसे मर सकता है. जब भी हम ऐसा भरम पाल लेते हैं तभी कोई ऐसी घटना हमारा भरम तोड़ देती है.
  • लटका कांग्रेस का मिशन राहुल
    अखिलेश शर्मा
    कांग्रेस का मिशन राहुल शुरू होने से पहले ही लटक गया. राहुल को पीएम उम्मीदवार बनाने के कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले की स्याही सूखी भी नहीं थी कि उनके करीबी नेताओं ने फैसले की इबारत ही पलट दी. उनका कहना है कि कांग्रेस पीएम के लिए किसी का भी समर्थन कर सकती है बशर्ते वह बीजेपी और आरएसएस का न हो.
  • ...कहीं 'नवरुणा कांड' न बन जाए मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड
    बिहार का मुजफ्फरपुर विरले ही राष्ट्रीय मीडिया में अपनी जगह बना पाता है, मगर 29 बच्चियों से बलात्कार की खबरों से यह राष्ट्रीय फलक पर इस तरह के निगेटिव हेडलाइन्स से शहर का छीछालेदर करवाएगा, इसकी उम्मीद तो हमें कतई नहीं थी. लीचियों के लिए फेमस बिहार का मुजफ्फरपुर इस बार बालिका गृह में बच्चियों के साथ घिनौने कृत्य का गवाह बना हुआ है. असहाय, मजबूर बच्चियों से बलात्कार का गवाह बना मुजफ्फरपुर काफी समय से चीख-चीख कर अपनी दास्तां सुना रहा था, मगर इसकी गूंज को, तंत्र और अपराधियों के षड्यंत्र ने ऐसे दबाए रखा कि महीनों-महीनों तक मीडिया को इसकी भनक तक न लगी. मगर अफसोस, मुजफ्फरपुर की जुर्म की दीवारें इतनी ऊंची हो चुकी हैं कि लाख पुलिसिया मुस्तैदी के बाद भी उसमें दरार पड़ने का नाम नहीं ले रही. बहरहाल, इस बार का मामला नवरुणा कांड से भी ज्यादा सिहरन पैदा करने वाला है.
  • एक कैंपस के भीतर 29 बच्चियों के साथ बलात्कार होता रहा, बिहार सोता रहा
    रवीश कुमार
    बिहार के मुज़फ्फरपुर में एक बालिका गृह है. इसे चलाते हैं एनजीओ और सरकार पैसे देती है. इस बालिका गृह में भागी भटकी हुई लड़कियों को ला कर रखा जाता है, जिनका कोई ठिकाना नहीं होता है, मां बाप नहीं होते हैं. इस बालिका गृह में रहने वाली लड़कियों की उम्र 7 से 15 साल के बीच बताई जाती है. टाटा इस्टिट्यूट ऑफ साइंस जैसी संस्था ने इस बालिका गृह का सोशल ऑडिट किया था जिसमें कुछ लड़कियों ने यौन शोषण की शिकायत की थी. उसके बाद से 28 मई को एफ आई आर दर्ज हुआ और कशिश न्यूज़ चैनल ने इस ख़बर को विस्तार से कवर किया. यहां रहने वाली 42 बच्चियों में से 29 के साथ बलात्कार और लगातार यौन शोषण के मामले की पुष्टि हो चुकी है. एक कैंपस में 29 बच्चियों के साथ बलात्कार का नेटवर्क एक्सपोज़ हुआ हो और अभी तक मुख्य आरोपी का चेहरा किसी ने नहीं देखा है. पुलिस की कार्रवाई चल रही है मगर उसी तरह चल रही है जैसे चलती है. मई से जुलाई आ गया और पुलिस मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर को रिमांड पर नहीं ले सकी.
  • ढूंढने निकले मॉब लिंचिंग का कानूनी उपाय...
    सुधीर जैन
    हालांकि इस बात में शक नहीं कि लिंचिंग ने देश और दुनिया में अपनी केंद्र सरकार और संबधित राज्य सरकारों की छवि मटियामेट कर दी है. लिहाज़ा, मौजूदा सरकार यह ज़रूर चाहेगी कि लिंचिंग की वारदात हाल-फिलहाल रुक जाएं, और फिर सरकार आखिर सरकार होती है, वह जो चाहेगी, वैसा होगा कैसे नहीं.
  • चौकीदार की यह कैसी 'चौकसी' कि चौकी लेकर भागा चौकसी
    रवीश कुमार
    आने दीजिए रवांडा से मोदी जी को, 200 गायों की इंटरनेशनल डिलिवरी में ज़्यादा वक्त नहीं लगता है. ये काम तो अमेजन कर सकता था मगर गाय का मामला है तो मोदी जी ख़ुद लेकर गए हैं. वहां से लौटते ही वे ख़ुद ही वहां के राष्ट्रपति को फोन करेंगे और कहेंगे कि मैं अपने नागरिक को भारत नहीं ला सका, कम से कम तुम अपने नागरिक को भारत भेज दो. तब तक सुषमा जी एंटीगुआ के राजदूत को बुलाकर उन्हें इसलामाबाद भेज दें. एंटीगुआ ने मेहुल चौकसी को पासपोर्ट देकर भारत को चुनौती दी है. उसकी हिम्मत देखिए, इंटरपोल के ज़रिए भारत को नहीं बताया, बल्कि सीधे बताया है. ऐसा इंडियन एक्सप्रेस में सूत्रों के हवाले से छपा है.
  • कानून हाथ में क्यों लेती जा रही है भीड़?
    रवीश कुमार
    भीड़ अपने आप में पुलिस हो गई है और अदालत भी जो किसी को पकड़ती है और मार देने का फैसला कर लेती है. कोई सवाल न करे इसलिए सबसे अच्छा है गौ तस्करी का आरोप लगा दो ताकि धर्म का कवच मिल जाए जबकि संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि धर्म और आस्था की रक्षा के नाम पर किसी की हत्या की जा सकती है.
  • यह जिद नीतीश कुमार को क्यों पड़ सकती है भारी?
    मनीष कुमार
    पिछले दो दिनों से संसद से बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में एक ही मुद्दे पर हंगामा हो रहा है, वह है राज्य के मुजफ्फरपुर में एक बालिका गृह से सम्बंधित स्कैंडल का. खुद पुलिस और समाज कल्याण विभाग द्वारा अब तक 42 बालिकाओं की मेडिकल रिपोर्ट में 29 बालिकाओं के साथ यौन शोषण की जब से पुष्टि हुई है तब से पूरे देश में इस घटना की चर्चा तेज़ हुई है.
  • मॉब लिंचिंग पर केंद्र सरकार बना सकती है मॉडल कानून
    अखिलेश शर्मा
    देश भर में मॉब लिचिंग की लगातार बढ़ रही घटनाओं के बाद दोषियों को सजा दिलाने में तेज़ी और कड़े से कड़ा दंड दिलाने के लिए कानूनों में बदलाव पर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है.
  • प्राइम टाइम : अलवर में रकबर की हत्या का ज़िम्मेदार कौन?
    रवीश कुमार
    क्या अलवर की पुलिस ने रकबर को अस्पताल ले जाने में देरी की और क्या पुलिस ने घायल रकबर को अपनी गाड़ी में रखने के बाद मारा, एक महिला ने बताया है कि पुलिस वाले गाड़ी में रखे रकबर को मार रहे थे. 12 बज कर 41 मिनट पर पुलिस को सूचना मिलती है कि भीड़ ने किसी को मारा है.
  • कांग्रेस का एक ही मिशन- राहुल बने पीएम
    अखिलेश शर्मा
    राहुल का पीएम उम्मीदवार बनना इतना आसान नहीं है. अगर संभावित सहयोगियों की बात करें तो इनमें कई खुद पीएम बनने की कतार में हैं. जैसे ममता बनर्जी, मायावती, शरद पवार आदि.
  • राफेल लड़ाकू विमान को लेकर लड़ाई किस बात की हो रही है...
    रवीश कुमार
    हमने इस विवाद को समझने के लिए 'बिज़नेस स्टैंडर्ड' के अजय शुक्ला और 'टाइम्स ऑफ इंडिया' के रजत पंडित की रिपोर्टिंग का सहारा लिया है. ये दोनों ही रक्षा मामलों के बेहतरीन रिपोर्टर/ विशेषज्ञ माने जाते हैं.
  • अविश्वास प्रस्ताव: संजू से बेहतर मनोरंजन प्रदान किया यूपीए ने!
    मनीष शर्मा
    कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार मिले इस बड़े मंच पर राहुल गांधी के बाद इन सब तमाम बातों के लिहाज से और स्कोर करने का अच्छा मौका था, लेकिन उन्होंने इसे इसे पूरी तरह से गंवा दिया. वास्तव में, यह अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष के प्रहार, प्रधानमंत्री के जवाब से कहीं ज्यादा राहुल गांधी की ‘हगिंग और विंकिंग’ के लिए ज्यादा याद किया जाएगा
  • अविश्वास प्रस्ताव- पक्ष-विपक्ष कमर कस तैयार
    अखिलेश शर्मा
    मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष के पहले अविश्वास प्रस्ताव के लिए सारी तैयारियां पूरी हो गई हैं. बीजेपी चुनावी साल में इसे एक बड़े मौके के तौर पर देख रही है. अभी लोकसभा में स्पीकर को छोड़ कर 533 सदस्य हैं और 11 सीटें खाली हैं. एनडीए के पास 312 सांसद हैं जो बहुमत के आंकड़े 267 से काफी ज्यादा है.
  • संसद के गलियारे से...
    मनोरंजन भारती
    संसद भवन का सेंट्रल हॉल एक ऐसी जगह है जहां सभी सांसद, सभी दलों के नेता साथ-साथ बैठते हैं, साथ खाते हैं और गप्पें मारते हैं. साथ ही देश के राजनैतिक हालात पर खुल कर अपनी राय रखते हैं. संसद के गलियारे में हर जगह चर्चा थी कि अगला लोकसभा चुनाव कब होगा. कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.
  • रेल मंत्री ने ट्वीट किया है...
    रवीश कुमार
    रेलमंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट किया है कि अप्रैल-जून में हुई लेटलतीफी की तुलना में जुलाई में 10 प्रतिशत का सुधार हुआ है.
  • अविश्वास प्रस्ताव लाकर आखिर क्या हासिल करना चाहता है विपक्ष...?
    अखिलेश शर्मा
    नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर बहस और मतदान शुक्रवार को होगा. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मॉनसून सत्र के पहले ही दिन विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को मंजूर कर लिया. पिछले 15 साल में यह दूसरा अविश्वास प्रस्ताव है, और इससे पहले 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव आया था, जो गिर गया था. 2008 में मनमोहन सिंह सरकार न्यूक्लियर डील पर विश्वास प्रस्ताव लाई थी और जीत गई थी.
  • अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार और विपक्ष दोनों फायदे में
    मनोरंजन भारती
    लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव को बहस के लिए लोकसभा अध्यक्ष ने मंजूर कर लिया है. इसका मतलब है कि 10 दिनों के अंदर अविश्वास प्रस्ताव पर बहस होगी और वोटिंग भी. सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने लोकसभा अध्यक्ष से कहा कि सरकार इसके लिए तैयार है. दरअसल सरकार की रणनीति ये है कि हमेशा के लिए इस हथियार को खत्म कर दिया जाए जिसकी धमकी विपक्ष दो बार से दे रहा है.
  • क्या हमारी व्यवस्था भीड़ को हिंसा के लिए उकसा रही है?
    रवीश कुमार
    काश सुप्रीम कोर्ट का दिशानिर्देश न्यूज़ चैनलों के बारे में भी होता जहां आए दिन किसी न किसी बहाने हिन्दू-मुस्लिम टापिक पर डिबेट होता रहता है. चैनलों पर ऐसी बातें लिखी जाती हैं जिनके तेवर सांप्रदायिक होते हैं. एक समुदाय को दूसरे समुदाय से भिड़ाया जाता है. भीड़ का निर्माण चैनलों के ज़रिए भी हो रहा है.
  • पीएम की महत्वाकांक्षा पूरी करने की दिशा में मायावती बढ़ा रही हैं ठोस कदम
    अखिलेश शर्मा
    2019 में विपक्ष के महागठबंधन में प्रधानमंत्री का एक और ताकतवर दावेदार सामने आया है. वह हैं बीएसपी प्रमुख मायावती. लोकसभा चुनावों की तैयारी के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं के पहले सम्मेलन में कल लखनऊ में नवनियुक्त राष्ट्रीय कॉआर्डिनेटर वीर सिंह और जय प्रकाश सिंह ने कहा कि अब बहनजी के प्रधानमंत्री बनने का समय आ गया है. इन नेताओं ने कहा कि कर्नाटक में कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनवाने के बाद मायावती ताकतवर नेता के रूप में उभरी हैं. वे अकेली दबंग नेता हैं जो मोदी के विजय रथ को रोक सकती हैं. जयप्रकाश सिंह तो एक कदम आगे चले गए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी राजनीति में कभी कामयाब नहीं होंगे. उन्होंने व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि राहुल गांधी अपने पिता की तरह नहीं, बल्कि मां सोनिया गांधी की तरह दिखते हैं जो कि विदेशी हैं. इसीलिए वे कभी भी पीएम नहीं बन पाएंगे.
«5678910111213»

Advertisement