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विचार
  • ब्राज़ील में सांबा नहीं तांडव होगा, बोलसोनारो बोलसोनारो होगा
    रवीश कुमार
    ब्राज़ील के नए राष्ट्रपति. ख़ुद को चीली के कुख़्यात तानाशाह अगुस्तो पिनोशे का फ़ैन कहने हैं. वैसे तानाशाह के आगे कुख़्यात लगाने की ज़रूरत नहीं होती. बड़े शान से कहा था कि पिनोशे को और अधिक लोगों को मारना चाहिए था. यह भी चाहते हैं कि अपराधियों को देखते ही पुलिस गोली मार दे.
  • हड़बड़ी में गड़बड़ी...
    अखिलेश शर्मा
    मध्य प्रदेश चुनावों में प्रचार के दौरान राहुल गांधी की फिसली जुबान उन पर मुसीबत का सबब बनती दिख रही है. राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान ने भोपाल की एक अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का दावा कर दिया है.
  • बिहार... अभी पेंच बाकी है
    मनोरंजन भारती
    बिहार में बीजेपी ने भले ही जेडीयू से गठबंधन पक्का कर लिया हो मगर बाकी दलों के साथ अभी भी स्थिति साफ नहीं है. खासकर उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के साथ. कुशवाहा ने प्रेस कांफ्रेंस कर कई बातों पर स्थिति साफ की है, जैसे बिहार में सीटों के बंटवारे पर वो प्रधानमंत्री से भी मिल सकते हैं.
  • अमरीका में 14 लोगों को बम भेजने वाला एक ‘भक्त’ पकड़ा गया है...
    रवीश कुमार
    उसका सीना 56 ईंच का तो नहीं मगर उम्र 56 साल है. वह कगांल हो चुका है. कंगाल होने से पहले कपड़े उतारकर नृत्य करता था. जिम में शरीर को बलशाली बनाता रहा. वह सफल होना चाहता था, फ़ुटबॉल पसंद करता था मगर असफलता ने उसका दामन नहीं छोड़ा. असफलता ने उसके अच्छे शरीर को भीतर से खोखला कर दिया.
  • रोशनी प्रधानमंत्री से आ रही है, इसलिए पुलिस आईबी को पीट रही है
    रवीश कुमार
    “रोशनी नहीं है, अंधेरा दिख रहा है”- प्रधानमंत्री मोदी... “रोशनी आपसे आ रही है प्रधानमंत्री जी”- आनंद महिंद्रा... महान भारत की बर्बादी के दौर में उस खूबसूरत मंच पर हुआ यह संवाद शेक्सपियर के संवादों से भी क्लासिक है.
  • मोदी सरकार के 'संकट मोचन'
    अखिलेश शर्मा
    वे देश के सबसे मशहूर जासूस हैं. पाकिस्तान और चीन के मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. सर्जिकल स्ट्राइक की कामयाबी के पीछे उनका दिमाग माना जाता है. और आज वे देश के सबसे ताकतवर नौकरशाह हैं. बात हो रही है राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की जो अब मोदी सरकार के संकटमोचक के रूप में उभर रहे हैं.
  • सीबीआई में संकट, चलने लगी धरपकड़...अब अदालत का ही आसरा
    मनोरंजन भारती
    सीबीआई के दो बड़े अफसरों के झगड़े में बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो पहले कभी नहीं हुआ. दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर आलोक वर्मा के घर के बाहर से चार इंटेलिजेंस ब्यूरो के लोगों को पकड़ लिया. हालांकि उन्हें बाद में छोड़ दिया गया. मगर उनको यह कहकर पकड़ा गया कि वे आलोक वर्मा की जासूसी कर रहे थे.
  • CBI में तख्तापलट - इन सवालों का जवाब कब मिलेगा...?
    विराग गुप्ता
    CBI डायरेक्टर के दो साल के कार्यकाल को वैधानिक सुरक्षा होने की वजह से उन्हें जबरन छुट्टी पर भेजना गैरकानूनी है. संवैधानिक पदों पर बैठे अन्य लोग यदि सरकार के लिए तकलीफदेह हो जाएं, तो क्या राष्ट्रपति के माध्यम से उन्हें भी जबरन छुट्टी पर भेज दिया जाएगा...?
  • जब संविधान की धज्जियां उड़ती हैं, तब रात को जूते की टाप सुनाई देती है
    रवीश कुमार
    जब भारत की जनता गहरी नींद में सो रही थी, तब दिल्ली पुलिस के जवान अपने जूते की लेस बांध रहे थे. बेख़बर जनता को होश ही नहीं रहा कि पुलिस के जवानों के जूते सीबीआई मुख्यालय के बाहर तैनात होते हुए शोर मचा रहे हैं. लोकतंत्र को कुचलने में जूतों का बहुत योगदान है. जब संविधान की धज्जियां उड़ती हैं, तब रात को जूते बांधे जाते हैं.
  • सीबीआई के अंदर की गंदगी खुले में आई, भरोसा डूबा गहरे नाले में
    मनोरंजन भारती
    सीबीआई पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और वो भी किसी छोटे-मोटे अफसर पर नहीं बल्कि सीबीआई के डायरेक्टर और उनके नंबर दो पर लगे हैं..और आरोप लगाने वाला भी कोई और नहीं वही नंबर एक और नंबर दो हैं. होड़ इस बात में लगी हुई है कि कौन सबसे बड़ा चोर है और किसने सबसे ज्यादा रिश्वत ली है.
  • सीबीआई की पार्वती और पारो में किसे चुनेंगे देवदास हुजूर...
    रवीश कुमार
    आपने फिल्म देवदास में पारो और पार्वती के किरदार को देखा होगा. नहीं देख सके तो कोई बात नहीं. सीबीआई में देख लीजिए. सरकार के हाथ की कठपुतली दो अफ़सर उसके इशारे पर नाचते-नाचते आपस में टकराने लगे हैं. इन दोनों को इशारे पर नचाने वाले देवदास सत्ता के मद में चूर हैं. नौकरशाही के भीतर बह रहा गंदा नाला ही छलका है. राजनीति का परनाला वहीं गिरता है, जहां से उसके गिरने की जगह बनाई गई होती है. चार्जशीट का खेल करने वाली सीबीआई अपने ही दफ़्तर में एफआईआर और चार्जशीट का खेल खेल रही है. महान मोदी कैलेंडर देख रहे हैं, ताकि किसी महान पुरुष की याद के बहाने भाषण देने निकल जाएं.
  • मोदी के बाद योगी, बढ़ता जा रहा प्रभाव
    अखिलेश शर्मा
    बीजेपी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तेजी के साथ दूसरे सबसे बड़े चुनाव प्रचारक के रूप में उभर रहे हैं. गुजरात, त्रिपुरा और कर्नाटक में योगी आदित्यनाथ से चुनाव प्रचार कराने के बाद अब बीजेपी ने तीन हिंदी भाषी राज्यों के चुनावों में भी योगी आदित्यनाथ को आगे कर दिया है. बीजेपी के मुताबिक योगी आदित्यनाथ पीएम मोदी के चुनाव मैदान में कूदने से पहले जमीन तैयार करेंगे.
  • सीबीआई में चल रही उठापटक पर बिहार के नेताओं की निगाहें क्यों टिकीं?
    मनीष कुमार
    भले सीबीआई के इतिहास में एक निदेशक आलोक वर्मा और अतिरिक्त निदेशक राकेश अस्थाना के बीच जारी वर्चस्व की लड़ाई में पूरे देश के नेता और पुलिस अधिकारी हर दिन के घटनाक्रम पर नज़र लगाए बैठे हैं लेकिन बिहार में ये एक मुद्दा बनता जा रहा है.
  • बिहार में चचा बनाम भतीजा
    मनोरंजन भारती
    बिहार में आखिरकार एनडीए के दलों के बीच गठबंधन हो गया. इस समझौते में सबको खुश करने की कोशिश जरूर की गई है खासकर जेडीयू को. लगता है कि बीजेपी आलाकमान फिलहाल नीतीश कुमार को नाराज नहीं करना चाहती है. यही वजह है कि बीजेपी ने पिछले लोकसभा चुनाव में अपनी जीती सीटें भी जेडीयू के लिए छोड़ दी हैं.
  • फिल्मों में झलकते राजनीतिक आशय
    डॉ विजय अग्रवाल
    'स्त्री', 'सुई-धागा' और 'मंटो', इन तीनों फिल्मों में एक बात जो एक-सी है, वह है - नारी की शक्ति और उसके अधिकारों की स्वीकृति. 'स्त्री' भले ही एक कॉमेडी थ्रिलर है, लेकिन उसमें स्त्री के सम्मान और शक्ति को लेकर समाज की जितनी महीन एवं गहरी परतें मिलती हैं, वह अद्भुत है. यही कारण है कि भूत-प्रेत जैसी अत्यंत अविश्वसनीय कथा होने के बावजूद उसने जबर्दस्त कलेक्शन किए.
  • मधुमेह रोगियों के पांव जल्दी ही बहुत खूबसूरत होंगे, जमीन पर रखने लायक!
    रवीश कुमार
    सन 1701 में येल यूनिवर्सिटी की बुनियाद पड़ी थी. चार सौ साल की यात्रा पूरी करने वाली इस यूनिवर्सिटी की आत्मा ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड में बसती है, जबकि है अमरीका के न्यू हेवन शहर में. यहां दो दिनों से भटक रहा हूं. आज भटकते हुए बायो-मेकेनिक्स की प्रयोगशाला में पहुंचा. यहां तीन भारतीय छात्र नीलिमा, निहव और अली हमारे पांव और उंगलियों की स्थिरता और उसके जरिए लगने वाले बल के बीच संतुलन का अध्ययन कर रहे हैं.
  • 'प्रधानसेवक' ही भारत के 'प्रधान इतिहासकार' घोषित हों...
    रवीश कुमार
    प्रधानमंत्री इसीलिए आज के ज्वलंत सवालों के जवाब देना भूल जा रहे हैं, क्योंकि वह इन दिनों नायकों के नाम, जन्मदिन और उनके दो-चार काम याद करने में लगे हैं. मेरी राय में उन्हें एक 'मनोहर पोथी' लिखनी चाहिए, जो बस अड्डे से लेकर हवाई अड्डे पर बिके. इस किताब का नाम 'मोदी-मनोहर पोथी' हो.
  • क्या आजकल मुख्यमंत्री के गांव में रात बिताने का भी नहीं होता असर...?
    राकेश कुमार मालवीय
    मुख्यमंत्री ने इस गांव में रात बिताने के बाद माना था कि इस इलाके में भयंकर गरीबी है. उन्होंने कहा था कि वह चुनाव होने के कारण उस वक्त कोई घोषणा नहीं कर सकते, लेकिन चुनाव के बाद पूरी सरकार लेकर जाएंगे और इलाके की तस्वीर बदल देंगे. इलाके की जनता ने इस वादे के बाद भी यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) को नहीं जिताया. जिस गांव ने मुख्यमंत्री की मेज़बानी की, उस गांव की तस्वीर भी नहीं बदल सकी. प्रधानमंत्री आवास योजना इसका एक उदाहरण मात्र है, और यह गांव कई और योजनाओं से भी अछूता है.
  • अमृतसर ट्रेन हादसा : फिर वही सियासत, मुआवजा और एक अदद जांच आयोग
    प्रभात उपाध्याय
    र 10 माह के उस मासूम का दर्द और दलबीर सिंह के परिवार की पीड़ा का कौन 'खरीदार' होगा. और आप भी यह मुगालते पालना बंद करिये कि सिस्टम, सरकार, विभाग और नेताओं के लिए आपकी पीड़ा का कोई महत्व-मायने है. यह ज्यादा सियासत, थोड़ा मुआवजा और एक अदद आयोग से अधिक कुछ नहीं है.
  • ब्‍लॉग : अनिल मानहानि अंबानी की जय हो...
    रवीश कुमार
    अब समझा रफाल विमान सौदे पर प्रधानमंत्री क्यों चुप हैं? कहीं मां अम्बे के आशीर्वाद से सच निकल गया तो अंबानी जी मानहानि न कर दें. अनिल अंबानी की मानहानि न हो इसलिए प्रधानमंत्री तमाम आरोप झेल गए मगर एक शब्द नहीं बोले. इंतज़ार कर रहे होंगे कि एक ही झोंके में कई चुनाव जीत जाएं फिर जयकारे के बीच हुंकार भर कर निकल जाएंगे. कह देंगे कि जनता ने बोल दिया, हम क्या बोलें.
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