NDTV Khabar
होम | ब्लॉग

ब्लॉग

विचार
  • प्रियंका के सहारे राहुल की राजनीति
    मनोरंजन भारती
    प्रियंका गांधी ने आखिरकार ना-ना करते-करते हां कर ही दी. अब वे आधिकारिक तौर पर राजनीति में आ गई हैं और कांग्रेस की महासचिव बनाई गई हैं. प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का जिम्मा दिया गया है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 34 सीटें आती हैं जिनमें से करीब 16 सीटें ऐसी हैं जहां यदि ब्राह्मण और मुस्लिम एक साथ आ जांए तो पासा पलटा जा सकता है.
  • क्या भारत का कोई नेता झूठ बोलने में ट्रंप को नहीं हरा सकता?
    रवीश कुमार
    ट्रंप कितना झूठ बोलते हैं, इसका हिसाब रखने वाला भी खलिहर होगा. वाशिंगटन पोस्ट के दफ्तर में स्टूल पर बिठा दिया होगा कि लो गिनो कि राष्ट्रपति कितना झूठ बोलते हैं. अब उसने गिन दिया है कि अब तक कार्यकाल में 8,158 झूठ और भ्रामक बयान दे चुके हैं. यह ख़बर दुनिया भर में छप गई है.
  • क्या प्रियंका गांधी तुरुप का पत्ता साबित होंगी?
    प्रियदर्शन
    सवाल है, क्या यह पत्ता तुरूप का पत्ता साबित होगा? मुट्ठी जब तक बंद होती है तो वह लाख की मानी जाती है, खुलती है तो समझ में आता है कि जादू की इस पुड़िया में जादू नहीं रेत है. कांग्रेस के इस फ़ैसले के दो तात्कालिक असर तो देखने को मिलने लगे हैं. बीजेपी ने पहला हमला प्रियंका पर नहीं, राहुल गांधी पर किया है. वह प्रियंका के आगमन को राहुल की नाकामी बता रही है. अब तक उसने प्रियंका पर हमला नहीं किया है, लेकिन जल्द ही यह हमला शुरू होगा जिसके एक सिरे पर वंशवादी राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप होगा और दूसरे सिरे पर वाड्रा से जुड़े मामलों को लेकर भ्रष्टाचार की तोहमत मढ़ी जाएगी.
  • ईवीएम को हैक करने के दावों में कितना दम?
    रवीश कुमार
    चुनाव आयोग ने लंदन में ईवीएम मशीन की हैकिंग का दावा करने वाले सैयद शुजा के खिलाफ दिल्ली पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई है. दिल्ली पुलिस इस पर कानूनी राय ले रही है जिसके बाद एफआईआर दर्ज की जा सकती है. आयोग का कहना है कि शुजा ने दावा किया है कि वह ईवीएम मशीन की डिज़ाइन में शामिल था और वह भारत में चुनाव को हैक कर सकता है. चुनाव आयोग ने 21 जनवरी को ही सुजा के लगाए आरोपों को रिजेक्ट कर दिया था.
  • आखिर हो क्या रहा है एमपी में?
    अखिलेश शर्मा
    अभी एक महीना ही हुआ जब धूमधाम से पंद्रह साल बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी. एमपी कमल के हाथ से निकलकर कमलनाथ के हाथों में चला गया. लेकिन सिर्फ एक महीने में ही वहां से ऐसी गजब-गजब खबरें सामने आ रही हैं कि सब पूछने लगे हैं कि आखिर एमपी में हो क्या रहा है?
  • नरेंद्र मोदी को गठबंधन क्यों डराता है?
    प्रियदर्शन
    इसमें शक नहीं कि बीजेपी के ख़िलाफ़ यूपी से बिहार और बंगाल तक जो महागठबंधन तैयार करने की बात हो रही है, उसके बहुत सारे संकट हैं. अलग-अलग राज्यों में सीटों के बंटवारे की चुनौती है, एक-दूसरे के साथ हितों के टकराव हैं, अतीत के अविश्वास हैं, और सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस गठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा.
  • मसला मुख्य चुनावी मुद्दे का : 'मोदी हटाओ' या 'मोदी बचाओ'
    सुधीर जैन
    पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि चुनाव में गिनती के दिन बचे हों और यह पता न चले कि मुख्य मुद्दा क्या बनेगा. हो सकता है, चुनावी पंडितों ने कुछ भांप लिया हो, लेकिन वे अभी बता न रहे हों. हो यह भी सकता है कि इसका इंतजार किया जा रहा हो कि पहले गठबंधनों की एक निश्चित शक्ल बन जाए फिर वाकयुद्ध शुरू हो. फिर भी सत्ता और विपक्ष की तरफ से माहौल बनाए रखने के लिए अब तक जो कहा गया है, उससे एक मुद्दा ज़रूर निकलकर आ रहा है - वह है, सरकार हटाओ या सरकार बचाओ.
  • इस हफ्ते की पीएम उम्मीदवार- ममता बनर्जी
    अखिलेश शर्मा
    वैसे तो ममता बनर्जी बहुत पहले ही पीएम पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर चुकी थीं लेकिन इसकी विधिवत शुरुआत उन्होंने शनिवार को की. कोलकाता के परेड मैदान में एक बड़ी रैली कर उन्होंने अपनी ताकत दिखाई. उन्होंने यह भी दिखाया कि उनके बुलावे पर विपक्ष के वे तमाम नेता एक मंच पर आ सकते हैं जो त्रिशंकु संसद में सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
  • 24 घंटे लेट हो गई ट्रेन, छूट गई परीक्षा, रेलमंत्री बिज़ी हैं प्रचार में
    रवीश कुमार
    18 जनवरी की आधी रात से पहले राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों से नौजवान आनंद विहार स्टेशन पर जमा हो गए थे, क्योंकि 19 जनवरी को सुबह 6:30 बजे भुवनेश्वर जाने वाली नंदनकानन एक्सप्रेस छूट न जाए. यह ट्रेन चलने से पहले ही 9 घंटे लेट हो जाती है. दोपहर 3 बजे दिल्ली से रवाना होती है.
  • कबाड़ से तैयार ताजमहल और एफिल टावर
    रवीश कुमार
    दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए बड़ौदा स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स के कलाकारों को बुलाया है. संदीप और अनुज ने बताया कि इससे पहले भी वे बड़ौदा में 70 से अधिक कलाकृतियां बना चुके हैं. शिल्पकार अनुज और संदीप ने बताया कि कबाड़ देखते ही उनके भीतर का कलाकार जाग जाता है कि इसका कुछ किया जाए. एक भी कबाड़ ख़रीदकर नहीं लाया गया, बल्कि ज़रूरत के हिसाब नगर निगम के गोदामों से ही खोजा गया.
  • गोदाम, चेक पोस्ट, बाइपास के उद्घाटन के लिए मोदी की 100 रैलियां
    रवीश कुमार
    पांच साल में सरकार के काम के विज्ञापन पर पांच हज़ार करोड़ से अधिक ख़र्च करने और लगातार रैलियां करते रहने के बाद भी प्रधानमंत्री सरकारी ख़र्चे से 100 रैलियां कर लेना चाहते हैं. आचार संहिता से पहले उन्होंने 100 रैलियां करने की ठानी है. इस लिहाज़ से 100 ज़िलों में उनकी रैली की तैयारी चल रही होगी.
  • 13 साल में 3-3 जांच एजेंसियों और अदालती मुकदमे के बाद भी नहीं उठ पाया सोहराबुद्दीन की मौत से पर्दा!
    सुनील कुमार सिंह
    इतना ही नहीं तो जज ने तुलसी प्रजापति की पुलिस मुठभेड़ में मौत को सही पाया लेकिन सोहराबुद्दीन शेख के कथित एनकाउंटर को अनसुलझा ही छोड़ दिया. दोनों मुठभेड़ों में कोई लिंक नहीं साबित होने का हवाला दे कथित साजिश की पूरी कहानी को ही दरकिनार कर दिया. पर ये नहीं बताया कि सोहरबुद्दीन को किसने मारा और कौसर बी की मौत कैसे हुई? अलबत्ता तीनों की मौत का दुख जरूर जताया. सवाल है जब मौत हुई है तो किसी ने तो मारा है पर 13 साल में सीआईडी, सीबीआई की जांच और अदालती मुकदमे के बाद भी इसका खुलासा नहीं हो पाया. आखिर क्यों?
  • केएल राहुल और हार्दिक पंड्या को ‘तबाह’ करने पर तुली है COA!
    मनीष शर्मा
    COA के सदस्यों विनोद राय और डायना एडुल्जी के आपसी मतभेद के कारण खुद सीओए और पूरा मामला और उपहास और चिंता के विषय में तब्दील हो गया है. कारण यह है कि इस जांच के 'ड्रामे' ने हार्दिक पंड्या और केएल राहुल के भविष्य को दांव पर लगा दिया है, जो पहले ही कहीं ‘ज्यादा सजा’ भुगत चुके हैं.
  • झूठ के आसमान में रफाल की कीमतों का उड़ता सच- हिन्दू की रिपोर्ट
    रवीश कुमार
    मोदी सरकार का तर्क रहता है कि भारत और फ्रांस के बीच जो करार हुआ है उसकी गोपनीयता की शर्तों के कारण कीमत नहीं बता सकते. मगर उस करार में कहा गया है कि गोपनीयता की शर्तें रक्षा से संबंधित बातों तक ही सीमित हैं. यानी कीमत बताई जा सकती है. कीमत क्लासिफाइड सूचना नहीं है. विवाद से पहले जब डील हुई थी तब सेना और सिविल अधिकारियों ने मीडिया को ब्रीफ किया था और बकायदा कीमत बताई थी.
  • क्या अपने अंतिम बजट में मोदी सरकार खोलेगी खजाना?
    अखिलेश शर्मा
    एक फरवरी को मोदी सरकार अपना अंतिम बजट पेश करेगी. चुनाव से सिर्फ दो महीने पहले आने वाला यह बजट अंतरिम होगा. यानी परंपरा के मुताबिक सरकार इसके जरिए चुनाव होकर नई सरकार बनने तक तीन महीनों के लिए होने वाले खर्च का इंतजाम करेगी. परंपरा यह भी है कि जाती हुई सरकार कोई बड़ा नीतिगत ऐलान इस अंतरिम बजट में नहीं करती है. लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या मोदी सरकार परंपरा को ताक पर रखकर इस अंतरिम बजट या वोट ऑन अकाउंट में आने वाले चुनावों के मद्देनजर बड़े ऐलान कर सकती है, ताकि वोटरों को लुभाया जा सके? कुछ ऐसे ऐलान हैं जिनका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है. सरकार के भीतर इन्हें लेकर चर्चा भी है.
  • हम सबको सींचने वाले नामवर अस्पताल में हैं
    प्रियदर्शन
    नामवर सिंह अस्पताल में हैं. 92 बरस की उम्र में उन्हें सिर पर चोट लगी है. अगर प्रार्थना जैसी कोई चीज़ होती है तो हिंदी के संसार को उनके लिए प्रार्थना करनी चाहिए. हमारी पीढ़ी का दुर्भाग्य है कि हमने उन्हें उनके उत्तरार्द्ध में देखा- उस उम्र में जब उनकी तेजस्विता का सूर्य ढलान पर था.
  • फ़सल बीमा से निजी कंपनियां बम-बम, सरकारी कंपनियों को घाटा
    रवीश कुमार
    सरकार का काम है कि वह ऐसी नीति बनाए कि सरकारी बीमा कंपनियों को प्रोत्साहन मिले. मगर जनता के पैसे से चलने वाले सरकारी बैंक के अधिकारियों को निजी बीमा कंपनी की पॉलिसी बेचने के लिए मजबूर किया गया.
  • सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम के फैसले पर सवाल
    रवीश कुमार
    जजों को नियुक्त करने वाली सुप्रीम कोर्ट की संस्था कॉलेजियम के फैसले को लेकर विवाद हो गया है. कॉलेजियम में सुप्रीम कोर्ट के पांच जज होते हैं. इस कॉलेजियम ने 12 दिसंबर की बैठक में तय किया कि दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेंद मेनन और राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस प्रदीप नंदराजोग का प्रमोशन सुप्रीम कोर्ट में होगा. मगर उस बैठक के बाद सरकार को बैठक का फैसला ही नहीं भेजा गया.
  • कर्नाटक में सियासी नाटक, फायदा किसको?
    अखिलेश शर्मा
    ऐसा लगता है कि बीजेपी का मिशन कर्नाटक सिरे नहीं चढ़ सका है. ऑपरेशन लोटस पार्ट-टू में बीजेपी को फिलहाल कामयाबी मिलती नहीं दिख रही है. बीजेपी की कोशिश थी कि कांग्रेस के कम से कम 13 विधायक इस्तीफा दें, ताकि बहुमत का आंकड़ा कम हो और बीजेपी दो निर्दलीयों की मदद से बहुमत साबित कर सके. कहा जा रहा था कि मुंबई में एक पांच सितारा होटल में रुके कांग्रेस के नाराज तीन विधायक इस्तीफा दे सकते हैं, लेकिन देर रात तक ऐसा नहीं हुआ. उधर कांग्रेस के गायब पांच विधायकों में से दो वापस आ गए हैं.
  • CBI और सुप्रीम कोर्ट के दंगल से संवैधानिक संकट...
    विराग गुप्ता
    भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना आंदोलन में लोकपाल को हर मर्ज़ की दवा बताया गया. 'सुशासन' और 'अच्छे दिन' के नाम पर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली की सत्ता हासिल कर ली, पर लोकपाल का कोई अता-पता नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसके बाद CBI में आधी रात को तख्तापलट की घटना के बाद संस्थाओं में आंतरिक संघर्ष बढ़ता जा रहा है. इन घटनाओं से भारत के लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था पर अनेक सवाल खड़े हो गए हैं.
«5678910111213»

Advertisement