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विचार
  • डॉलर अंडरवियर नहीं अमरीकी डॉलर महंगा हुआ है, 72.55 रु का हो गया है
    रवीश कुमार
    सोमवार को 12 बज कर 03 मिनट पर डॉलर ने भारतीय रुपये को फिर धक्का दिया है. इस समय पर रुपये का भाव ऐतिहासिक रूप से नीचे चला गया. एक डॉलर 72 रुपये 55 पैसे का हो गया. वाकई अब श्री श्री रविशंकर से कहना होगा कि वे आएं और कुछ भभूत-वभूत छिड़कें ताकि डॉलर का नशा उतर जाए.
  • सोने की दोगुनी खरीद का माजरा क्या है...?
    सुधीर जैन
    इस हफ्ते सूचना मिली कि देश में सोना खूब खरीदा जा रहा है, और बिक्री इतनी बढ़ गई है कि पिछले महीने दोगुने से भी ज़्यादा सोना विदेश से भारत में आया. यह सामान्य घटना नहीं है, लेकिन मीडिया में इस ख़बर का विश्लेषण ज्य़ादा नहीं दिखा. क्या इस घटना का आगा-पीछा नहीं देखा जाना चाहिए...?
  • एक पत्र आया है, चर्चा इस पर कीजिए
    रवीश कुमार
    यह व्यवस्था किसी साहूकार या निजी कंपनियों द्वारा नहीं चलाई जा रही है बल्कि यह व्यवस्था स्वयं शासन के द्वारा चलाई जा रही है. जी हां, मैं बात कर रहा हूं मध्य प्रदेश पॉलिटेक्निक अतिथि व्याख्याताओं के लिए बनाए गए नियमों के बारे में इन नियमों के तहत अतिथि अध्यापकों को प्रति कालखंड सिर्फ 275 का भुगतान किया जाता है. अगर किसी दिन किसी भी कारण से कक्षा नहीं लगती है तो उस दिन अतिथि व्याख्याताओं को कोई भी भुगतान नहीं किया जाता है.
  • आईटी सेल के नौजवानों तुम ये काम मत करो, छोड़ दो
    रवीश कुमार
    आईटी सेल आईटी सेल होता है. पिछले साल मेरे बयान का आधा हिस्सा काट कर ग़लत संदर्भ में पेश किया गया और उसे शेयर कर दिया था आईटी सेल के सरदार ने. ग़नीमत है कि प्रतीक सिन्हा ऑल्ट न्यूज़ वाले ने पकड़ लिया. आप भी देखिए ये काम कैसे होता है.
  • आखिर अगड़ी जातियों में इतना उबाल क्यों हैं?
    मनीष कुमार
    आज भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक दिल्ली में हो रही है. सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि आखिर पार्टी एससी-एसटी एक्ट के मुद्दे पर देशभर में अगड़ी जातियों में असंतोष के माहौल का क्या निदान ढूंढती है. किसी भी भाजपा नेता को इस बात में कोई गलतफहमी नहीं है कि 90 के दशक से अब तक हिंदी पट्टी के राज्यों में मंडल की शक्तियों और दलों से मुक़ाबला करने में भाजपा का अगर किसी वर्ग ने जमकर साथ दिया है तो वे हैं अगड़ी जातियां और इनके समूह.
  • कहां खो गए वो धरना प्रदर्शन
    रवीश कुमार
    राम नाम सत्य है... राम का नाम तब भी सत्य था अब भी सत्य है मगर जो साल था तब भी झूठ था अब भी झूठ है. वो 2013 का साल था. अजीब साल था वह. किसी भूत की तरह श्मशान से निकल आता है. सिलेंडर की अरथी निकली थी. दाम 600 के आस पास था. अब उसी सिलेंडर का दाम 833 रुपया हो चुका है, मगर शवयात्रा निकालने वाले गायब हैं. दरअसल वो अरथी का अर्थ समझ चुके हैं. वो जानते हैं कि राजनीति झूठी है, राम का नाम सत्य है.
  • 'हिंदू' राहुल से बीजेपी क्यों बेचैन?
    अखिलेश शर्मा
    क्या बीजेपी को राहुल गांधी के हिंदू दिखने से परेशानी है? यह सवाल इसलिए क्योंकि जब से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंदिरों के दर्शन शुरू किए और अब कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हैं, बीजेपी उनकी हर छोटी-बड़ी बात पर नुक्ताचीनी कर रही है.
  • समलैंगिकता के फैसले पर अनेक सवाल
    विराग गुप्ता
    सुप्रीम कोर्ट के प्रांगण में मीडिया द्वारा फोटोग्राफी निषेध है. इसके बावजूद समलैंगिकता पर फैसले के बाद पूरा परिसर इन्द्रधनुषीय रंग से सराबोर हो गया. दो वयस्‍क लोगों का निजी सम्बन्ध मानते हुए समलैंगिकता को सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया परन्तु इस फैसले के लिए अपनाई गयी कानूनी प्रक्रिया पर अनेक सवाल खड़े हो गये हैं.
  • निजता में घुसपैठ सरकार का काम नहीं
    रवीश कुमार
    कई बार सर्वोच्च अदालत के कुछ फैसलों को इसलिए नहीं पढ़ा जाना चाहिए कि वो आपके हिसाब से आया है, बल्कि इसलिए भी पढ़ा जाना चाहिए कि फैसले तक पहुंचने से पहले तर्कों की प्रक्रिया क्या है. उसकी भाषा क्या है, भाषा की भावना क्या है.
  • समलैंगिकता पर सियासत...
    अखिलेश शर्मा
    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसले में समलैंगिक संबंधों को अपराध ठहराने वाली आईपीसी की धारा 377 को समाप्त कर दिया. इस फैसले का जमकर स्वागत हो रहा है. लेकिन इस पर सियासत भी शुरू हो गई है.
  • रेलवे की परीक्षा देने से चूक गए 11 लाख नौजवान, यूपी में बीटीसी बनाम बीएड का विवाद
    रवीश कुमार
    11 लाख परीक्षार्थी रेलवे की परीक्षा नहीं दे सके. 11 लाख क्या छोटी संख्या है? 47 लाख परीक्षार्थियों में से 11 लाख परीक्षा में शामिल नहीं हो सके, यह बात हर दर्ज़े से शर्मनाक़ है. आप जानते हैं कि रेलवे ने अगस्त में 64,037 पदों के लिए परीक्षा ली है.
  • तेलंगाना में कौन मारेगा बाज़ी?
    अखिलेश शर्मा
    एक देश एक चुनाव शायद अभी न हो, लेकिन एक राज्य में समय से पहले चुनाव जरूर हो सकते हैं. यह राज्य है तेलंगाना जहां के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने गुरुवार को अपने राज्य की विधानसभा भंग करने का फैसला किया ताकि समय से पहले चुनाव हो सकें.
  • क्या आपने हिन्दी का कूड़ा अख़बार बंद किया या बदला?
    रवीश कुमार
    अंबानी जी पाठकों को लेकर हमेशा उदार रहे हैं. उन पर कभी मानहानि नहीं करते. कैरवान ने भी उन्हें मानहानि देने के लिए ये अंक निकाला है. आप पढ़कर ख़ुद से अंबानी की मानहानि की भरपाई करें.
  • गौरी लंकेश की हत्या को एक साल पूरा, बेंगलुरु में स्मृति सभा का हुआ आयोजन
    रवीश कुमार
    5 सितंबर 2017 को बेंगलुरु में गौरी लंकेश की हत्या कर दी गई थी. धार्मिक कट्टरता के ख़िलाफ़ लिखने वाली गौरी लंकेश ने हमेशा हिंसा और हत्या की राजनीति का विरोध किया. अपनी लेखनी में वो कर्नाटक के भीतर उभर रही ऐसी ताकतों की पहचान कर रही थीं और उनके बारे में खुलकर लिख रही थीं. ज़ाहिर है इसी तबके से उनकी हत्या के बाद सोशल मीडिया में जश्न मनाया गया था और किसी की मौत पर अफसोस प्रकट करने की परंपरा को तोड़ते हुए खुशी ज़ाहिर की गई थी. उस दिन सिर्फ गौरी लंकेश की हत्या नहीं हुई थी बल्कि यह भी पता चला था कि हमारे समाज में हत्या को उचित ठहराने वाले लोगों की कमी नहीं है जो समय समय पर एक खास राजनीतिक विचारधारा का भी समर्थन करते हैं जिसका संबंध सत्ता से है.  
  • सवर्णों की नाराज़गी दूर करने में जुटी बीजेपी
    अखिलेश शर्मा
    बीजेपी सवर्ण वर्ग की नाराजगी को दूर करने की कोशिशों में जुट गई है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने वरिष्ठ मंत्रियों और पार्टी नेताओं के साथ एससी/एसटी ऐक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के बाद बने हालात पर विस्तार से चर्चा की है. पार्टी आधिकारिक रूप से इस संवेदनशील मुद्दे पर टिप्पणी करने को तैयार नहीं है, लेकिन पार्टी नेता इस मुद्दे को तूल देने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बता रहे हैं. पार्टी ने इस मुद्दे पर उठ रहे सवालों का जवाब देने का मन भी बनाया है. बताया जा रहा है कि इस सप्ताहांत दिल्ली में होने वाली बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है.
  • एक लाख स्कूल के बच्चों के पास नहीं प्रिय शिक्षक चुनने का विकल्प 
    राकेश कुमार मालवीय
    आज शिक्षक दिवस है. देश के तकरीबन 14 लाख स्कूलों के बच्चे अपने प्रिय शिक्षक को तरह-तरह से शुभकामना दे रहे होंगे. किसी ने अपने प्रिय शिक्षक के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने के लिए घर के बगीचे से फूल तोड़कर दिया होगा, कुछ ने ग्रीटिंग कार्ड बनाकर दिया होगा. किसी भी आधारभूत सुविधा से ज़्यादा बड़ी ज़रूरत शिक्षक का होना है. हम सभी के ज़हन में अपने-अपने प्रिय या अप्रिय भी शिक्षक की छवि कैद ज़रूर होती है, लेकिन देखिए कि देश की एक बड़ी विडम्बना है कि देश के लाखों बच्चों के पास अपने प्रिय शिक्षक चुनने का विकल्प ही नहीं है, क्योंकि वहां उन्हें पढ़ाने के लिए केवल एक ही शिक्षक मौजूद है. एक ही शिक्षक के भरोसे पूरा स्कूल है, सारी कक्षाएं हैं, ऐसे में आप खुद ही सोच लीजिए कि हमारे देश के ऐसे स्कूल का क्या होने वाला है...? बिना शिक्षक के स्कूल कैसे चलने वाले हैं, भविष्य का भारत कैसे और कैसा बनने वाला है...?
  • नोटबंदी से काले धन पर कितनी लगाम लग पाई?
    रवीश कुमार
    8 नवंबर 2016 को जब नोटबंदी हुई थी तो बतौर प्रधानमंत्री किसी को पता नहीं था. सबको एक ही बार रात आठ बजे टीवी से पता चला था. लेकिन नोटबंदी फिर से हो सकती है इसका पता सबको चल चुका है और वो भी टीवी से. नीति आयोग के चेयरमैन प्रधानमंत्री होते हैं और उपाध्यक्ष होते हैं राजीव कुमार. राजीव कुमार ने श्रीनिवासन जैन से कहा है कि अर्थव्यवस्था की सफाई के लिए वे किसी भी दिन नोटबंदी करना चाहेंगे, ताकि ये औपचारिक हो सके. टैक्स भरने की आदत में सुधार हो. नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार के अनुसार टैक्स भरने की आदत में सुधार के लिए वे कभी भी नोटबंदी करना चाहेंगे. दुनिया भर में कई देश हैं जहां टैक्स भरने की आदत इस वक्त भी भारत से बेहतर से होगी, लेकिन क्या वहां आदत में ये सुधार नोटबंदी से आई है. तब तो जहां भी टैक्स चोरी होती है वहां नोटबंदी होनी चाहिए.
  • क्या गोरक्षा का मुद्दा हथियाने की फ़िराक़ में है कांग्रेस? 
    अखिलेश शर्मा
    देश की राजनीति की धारा बदलती हुई दिख रही है. अब तक बीजेपी कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाती आई है. छद्म धर्मनिरपेक्षता के नाम पर बीजेपी दूसरे विपक्षी दलों पर हमला करती आई है. इफ्तार पार्टियां सियासत का बड़ा हिस्सा बन गईं थीं और बीजेपी का आरोप था कि मुसलमानों को खुश करने के लिए इन पार्टियों ने हिंदुओं के हितों को चोट पहुंचाई. बीजेपी खुद को हिंदू हितों के सबसे बड़े रक्षक के तौर पर पेश करने लगी और हिंदू ह्रदय सम्राट के तौर पर नरेंद्र मोदी ने अपने बूते बीजेपी को 282 सीटें दिलवा दीं. अब कांग्रेस भी इसी बदली धारा का हिस्सा बनती दिखना चाह रही है. बात सिर्फ राहुल गांधी के मंदिरों के दौरों तक सीमित नहीं रह गई है. एक तरफ राहुल गांधी कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस बीजेपी के हिंदुत्व का एक बड़ा मुद्दा गोरक्षा हथियाने की फिराक में है. मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने एक ट्वीट में कहा प्रदेश की हर पंचायत में गौशाला बनाएंगे. ये घोषणा नहीं वचन है.
  • पेट्रोल-डीज़ल के बढ़ते दाम- क्यों ज़ख्मों पर नमक छिड़क रही है सरकार?  
    अखिलेश शर्मा
    पेट्रोल डीजल की कीमतें नई ऊंचाई पर और डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर. 8.2 फीसदी की जीडीपी के बीच आम लोगों से जुड़ी अर्थव्यवस्था की ये खबरें सरकार के सामने चुनौती पेश कर रही हैं, लेकिन पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में लगी आग के बीच सरकार ने जले पर नमक छिड़कते हुए कीमतें घटाने से इनकार कर दिया है. आला सरकारी सूत्रों ने एनडीटीवी से कहा कि मौजूदा समय में कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों को देखते हुए कीमतें कुछ और समय तक बढ़ी रह सकती हैं, लेकिन सरकार उन्हें कम करने के लिए एक्साइज़ ड्यूटी में अब कोई कटौती नहीं करेगी. 
  • अब इस समुदाय को कैसे पुकारें...?
    प्रियदर्शन
    सरकार जिन्हें अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखती है, वे कौन लोग हैं...? क्यों उनके लिए ऐसी सूची बनाने की ज़रूरत पड़ी...? क्योंकि समाज ने बरसों नहीं, सदियों तक उन्हें हाशिये पर रखा, अस्पृश्य बनाए रखा, उनसे अपने सबसे ज़रूरी - मगर हाथ गंदे करने वाले - काम करवाए. उनकी छाया तक को अपवित्र माना गया.
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