NDTV Khabar

गुजरात चुनाव में राहुल गांधी का नया अंदाज PODA

पहले भी गुजरात में कांग्रेस खाम का फार्मूला अपना चुकी है यानी क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम, मगर इस बार राहुल पोडा (पाटीदार, ओबीसी, दलित, आदिवासी) पर फोकस कर रहे हैं.

3168 Shares
ईमेल करें
टिप्पणियां
गुजरात चुनाव में राहुल गांधी का नया अंदाज PODA

कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो)

गुजरात में राहुल गांधी एक नए अंदाज़ में हैं. इस बार राहुल गांधी का फोकस खास तौर पर पिछड़ों, दलितों आदिवासी और मुस्लिमों पर है. शायद राहुल गांधी को पाटीदारों के वोटों पर उतना भरोसा नहीं है. शायद उन्हें लगता है कि पाटीदार परंपरागत तौर पर बीजेपी को वोट देते आए हैं. पहले भी गुजरात में कांग्रेस खाम का फार्मूला अपना चुकी है यानी क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम, मगर इस बार राहुल पोडा (पाटीदार, ओबीसी, दलित, आदिवासी) पर फोकस कर रहे हैं. गुजरात में पाटीदार 12 से 15 प्रतिशत है जबकि 14 फीसदी आदिवासी, 9 फीसदी मुस्लिम और 7 फीसदी दलित हैं. राहुल आदिवासी इलाकों में जाते हैं तो किसी आदिवासी युवक को मंच पर बुला कर भाषण दिलवाते हैं. राहुल को मालूम है कि जीएसटी यानी 'गब्बर सिंह टैक्स' हिट हो गया है, इसलिए इस मुहावरे का खूब इस्तेमाल करते हैं. यही नहीं, इस बार राहुल अपने ट्वीट को ले कर भी काफी सुर्ख़ियों में हैं. लगता है कि ट्वीट के किये राहुल ने कोई खास टीम तैयार की है. राहुल का हर ट्वीट खबर बनता है जिससे उनकी इमेज भी मीडिया में बदल रही है.

ज़ीएसटी में जो सरकार ने बदलाव किया है उसका भी श्रेय राहुल खुद को देते हैं. राहुल अपने भाषण में एक संवाद पैदा करने की कोशिश करते हैं. वह लोगों से पूछते हैं कि घर देने का वायदा किया गया, मिला कि नहीं और लोग जवाब भी देते हैं. दरअसल दो दशकों से बीजेपी गुजरात में सत्ता में है, यही उसकी मुसीबत भी बन गयी है. कई जगह लोग अब बदलाव की बात भी करने लगे हैं. उन्हें लगता है कि कांग्रेस को भी एक चांस मिलना चाहिए.

राहुल की राह को वाघेला ने भी आसान बना दिया है. वाघेला ने कांग्रेस की राह आसान कर दी है. दरअसल वाघेला कांग्रेस में रहते तो राहुल पर अतिरिक्त भार पड़ता क्योंकि वाघेला कम से कम अपने समर्थकों के लिए 40 सीट जरूर ले जाते ताकि जरुरत पड़ने पर मुख्यमंत्री की दावेदारी पेश की जा सके. मगर अब यह हालत नहीं है. यही वजह है कि राहुल गांधी को टिकट बांटने में आसानी होगी. वह बिना किसी दबाव में आए टिकट बांट सकते हैं.

दरअसल राहुल गुजरात में सांप्रदायिक ध्रुविकरण से बचना चाहते हैं. उन्हें लगता है इस पर वो बीजेपी से जीत नहीं सकते, यही वजह है कि राहुल मंदिरों की खाक तो छान रहे हैं मगर मस्जिदों पर नज़र भी नहीं डालते हैं. कांग्रेस ने राहुल की सॉफ्ट हिंदुत्व की छवि बनाई है. राहुल के पक्ष में हार्दिक पटेल हैं जो पाटीदार हैं, ओबीसी नेता के रूप में कांग्रेस में भारत सिंह सोलंकी हैं और साथ में अल्पेश ठाकोर रभी हैं, दलित नेता के रूप में जिग्नेश मेवानी हैं तो आदिवासी नेता के रूप में छोटू भाई वसावा हैं, जिसके वोट से अहमद पटेल ने राज्यसभा का चुनाव जीता था. कुल मिला कर राहुल गांधी को समझ में आ गया है कि लालू का माय हो, खाम हो या पोड़ा हो, यदि चुनाव जीतना है तो एक समीकरण का चलना जरूरी है.

(मनोरंजन भारती एनडीटीवी इंडिया में सीनियर एक्जीक्यूटिव एडिटर - पॉलिटिकल, न्यूज हैं.)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement