Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com
NDTV Khabar

चीन में पत्रकारों को देना होगा चाटुकारिता का टेस्ट

पत्रकारिता में चाटुकारिता करने वालों के लिए बुरी ख़बर है. अब तक चाटुकारिता को सबसे आसान बीट माना जाता था, लेकिन हर माल को सस्ता बनाकर बेचने वाले चीन ने चाटुकारिता को महंगा यानी मुश्किल बना दिया है.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां

पत्रकारिता में चाटुकारिता करने वालों के लिए बुरी ख़बर है. अब तक चाटुकारिता को सबसे आसान बीट माना जाता था, लेकिन हर माल को सस्ता बनाकर बेचने वाले चीन ने चाटुकारिता को महंगा यानी मुश्किल बना दिया है. चीन में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा होने जा रही है, जिसमें राष्ट्रपित शी जिनपिंग के राजनीतिक विचारों और मार्क्सवाद से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे. जो इस परीक्षा में पास होगा उसी को प्रेस कार्ड मिलेगा. इस खबर को सुनकर भारत के पत्रकारों को घबराने की ज़रूरत नहीं है. एक तो ऐसी कोई परीक्षा नहीं हो रही है और अगर हो भी गई तो परीक्षा का रिज़ल्ट आने में ही चार पांच साल लग जाएंगे. रिज़ल्ट आने से पहले प्रश्न पत्र लीक हो जाएगा और फिर सब कोर्ट में पहुंच जाएगा. भारत में बग़ैर पढ़े लिखे, किसी मेहनत के ही कई पत्रकार चमचा शिरोमणी बने घूम रहे हैं. यहां तो नाम जप कर ही काम हो जाता है लेकिन चीन में परीक्षा देनी होगी. चीन में सरकारी मीडिया संस्थानों में काम करने वाले 10,000 पत्रकारों, संपादकों का टेस्ट होने जा रहा है. अगले महीने यह पायलट टेस्ट होगा.

अक्तूबर में पायलट टेस्ट होगा, उसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा होगी. राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की तारीख नहीं बताई गई है. इस परीक्षा में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की राजनीतिक विचारधारा और मार्क्सवाद से सवाल पूछे जाएंगे. जो इस परीक्षा में पास करेगा उसी को प्रेस कार्ड मिलेगा. जो फेल करेगा, एक चांस और मिलेगा. इस इम्तेहान को निष्ठा परीक्षण बताया जा रहा है. अंग्रेज़ी में लॉयल्टी टेस्ट कहा जा सकता है. बीजिंग में 14 सरकारी ऑनलाइन मीडिया संस्थान हैं. इनमें संपादक से लेकर रिपोर्टर सब मिलाकर 10,000 लोग काम करते हैं. कम्युनिस्ट पार्टी के प्रोपेगैंडा डिपार्टमेंट के दफ्तर में नोटिस चिपका दिया गया है. इसके लिए एक ऐप बनाया गया है, जिसमें सवाल दिए जाएंगे ताकि ये पत्रकार परीक्षा की तैयारी कर सकें. यानी क्वेश्चन बैंक भी आ गया है जैसा कि भारतीय परीक्षाओं से पहले गाइडबुक और क्वेश्चन बैंक आ जाते हैं.


मीडिया के सत्यानाश का हर जगह सरकारी हवन चल रहा है. चमचे अब ऑफिशियल हो जाएंगे. भारत में ऐसे पत्रकार जाने कहां कहां से मिल जाते हैं, दुनिया भी हैरान है. जवाब सिम्पल है. बग़ैर किसी टेस्ट में पास हुए ही मिल जाते हैं.भारत में मीडिया के ऊपर अंकुशों के किस्से का लेवल ही अलग है. मुझे लगता है इस दिवाली पर चीन की इस परीक्षा योजना के ख़िलाफ़ कपड़ा मंडी में ज़रूर विरोध प्रदर्शन होगा. ख़ैर, एडिटर्स गिल्ड इंडिया के नए बयान से काफी कुछ पता चलता है. दो तेलुगू न्यूज़ चैनल TV5 और ABN पर अघोषित रूप से बैन लगा है. 

एडिटर्स गिल्ड इस बात को लेकर बेचैन है कि वाईएसआर कांग्रेस सरकार ने दो तेलुगू न्यूज़ चैनल TV5 और ABN पर अघोषित बैन लगा रखा है. गिल्ड आंधप्रदेश की सरकार से अनुरोध करता है कि वह स्थिति स्पष्ट करे कि क्या वह किसी तरह से इन दो चैनलों के प्रसारण को रोकने में शामिल है? अगर है तो ऐसे किसी आदेश को तुरंत वापस ले. गिल्ड सरकार से अपील करता है कि वह ऐसी स्थिति पैदा न करे जहां संवैधानिक रूप से मीडिया को मिली आज़ादी प्रभावित हो. 

क्या आपको याद है? दिसंबर 2012 की सर्द भरी रातें. रायसीना हिल्स पर जमा हुए लोग. निर्भया के इंसाफ़ के लिए नारे लगाता देश. बलात्कार के ख़िलाफ़ सज़ा सख़्त करने की मांग.सबका इरादा एक था, सबके हाथ में तिरंगा था. कितनी जल्दी, कितना कुछ बदल दिया था आपने, लेकिन उसके बाद से लेकर आज तक कितना कुछ बदल गया है. क्या आपको याद है? जम्मू के कठुआ में जब उस बच्ची के साथ बलात्कार हुआ तो आरोपी को बचाने के लिए लोग सड़क पर आए.
मार दी गई बच्ची के लिए अफ़सोस तक नहीं हुआ. बलात्कारी के लिए आई जुलूस में तिरंगा भी था. क्या आपको याद है?

क्या बीजेपी नेता चिन्मयानंद के मामले में लोग चुप हैं. समाज में वैसी बेचैनी क्यों नहीं है जैसी निर्भया के वक्त थी. क्या बलात्कार के मामले में सक्रियता इस बात से निर्भर होने लगी है कि आरोपी का मज़हब क्या है? जैसे ट्रोल करने वाले कौशाम्बी में बलात्कार की घटना को लेकर अनाप शनाप लिख रहे हैं, इस केस में आरोपी का मज़हब कुछ और है. मगर उनमें से कोई नहीं पूछ रहा है कि चिन्मयानंद को क्यों नहीं गिरफ्तार किया गया है. बीजेपी के पूर्व सांसद और पूर्व गृह राज्य मंत्री चिन्मयानंद के मामले की स्टोरी मीडिया के लिए बड़ी ख़बर नहीं है. है भी तो पीड़िता है जिसे पुलिस ने चिन्मयानंद से 5 करोड़ की रंगदारी मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया है. एसआईटी ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि रंगदारी मांगने का वीडियो फोरेंसिक जांच में सही निकला है. यह वीडियो चिन्मयानंद की तरफ से एसआईटी को दिया गया है. एसआईटी के अनुसार लड़की ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है.

पीड़िता के पिता का कहना है कि ज़बरन पुलिस ने साइन कराया है. उसकी शिकायतों पर पुलिस ध्यान नहीं दे रही है. पीड़िता की अग्रिम ज़मानत खारिज हो गई. आज यानी 26 सितंबर को सत्र न्यायालय में ज़मानत पर सुनवाई होनी थी मगर अब 30 सितंबर को होगी. उसी दिन चिन्मयानंद की ज़मानत पर भी सुनवाई होगी. चिन्मयानंद की गिरफ्तारी देर  से हुई. चिन्मयानंद 23 सितंबर से लखनऊ के पीजीआई में भर्ती हैं. पहले सीने में दर्द की शिकायत की, एंजियोग्राफी हुई मगर धमनियों में गतिरोध नहीं मिला. अभी कमज़ोर बताए जा रहे हैं और पेशाब में तकलीफ है. डॉक्टरों की निगरानी में हैं. बीजेपी कहती है कि चिन्मयानंद पार्टी में नहीं हैं, लेकिन पिछले महीने चिन्मयानंद के आश्रम के बाहर लगा यह पोस्टर कुछ और कहता है. इस पोस्टर पर चिन्मयानंद का चेहरा है. शाहजहांपुर के बीजेपी सांसद का चेहरा है. प्रधानमंत्री की फोटो है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो है. यह पोस्टर सांसद अरुण कुमार सागर की तरफ से लगाया गया है, उसमें चिन्मयानंद क्या कर रहे हैं अगर वह पार्टी में नहीं हैं तो?

पीड़िता ने भी एसआईटी को 43 वीडियो दिए थे. फोरेसिंक जांच में ज्यादातर वीडियो सही पाए गए हैं. पीड़िता ने आरोप लगाया है कि लॉ कॉलेज में एडमिशन कराने में मदद की थी, लेकिन नहाते वक्त का वीडियो बनाया और फिर चिन्मयानंद ने ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया. सुबह कथित रूप से मसाज के लिए मैसेज भेजते थे और दोपहर सेक्स के लिए. यह सब एसआईटी के पास है. पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि चिन्मयानंद के गार्ड बंदूक की नोक पर होस्टल से ले जाते थे. अभी तक उन गार्ड की गिरफ्तारी की कोई सूचना नहीं है. उनका लाइसेंस ज़ब्त हुआ इसकी कोई जानकारी नहीं है. पुलिस ने चिन्मयानंद को गिरफ्तार तो किया मगर हिरासत में लेकर जांच की मांग नहीं की. एसआईटी ने कहा कि इसकी ज़रूतर नहीं हुई, क्योंकि उनके पास से कुछ नहीं मिला. आज सीपीएम नेता वृंदा करात और सुभाषिनी अली शाहजहांपुर पहुंची. वहां जेल में बंद पीड़िता से मुलाकात की. 

चिन्मयानंद के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज नहीं हुआ है. उनके खिलाफ 376 सी लगाया गया है. इस धारा में यौन शोषण और बलात्कार में फर्क किया गया है. अगर कोई ओहदेदार अपनी मातहत महिला को लुभाता है, उसका यौन शोषण करता है, अपनी कुर्सी का इस्तेमाल कर शारीरिक संबंध स्थापित करता है तो उसे बलात्कार नहीं माना जाएगा. इस मामले में कम से कम 5 साल साल और अधिक से अधिक दस साल की सज़ा है. बलात्कार के मामले में 376 का आरोप लगता है. जिसमें अधिकतम आजीवन कारावास की सज़ा है.

वहीं, इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या के मामले में एक और आरोपी बल्कि मुख्य आरोपी योगेश राज को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़मानत दे दी. हत्या से पहले एक वीडियो है, जिसमें योगेश राज इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह से उलझ रहा है. योगेश को पूरे मामले में हिंसा भड़काने का मुख्य आरोपी बनाया गया था. इसी योगेश राज ने मुस्लिम समुदाय के 7 लोगों के खिलाफ झूठी एफआईआर कराई थी जिसे बाद में पुलिस ने भी माना था कि गलत है. अब वह ज़मानत पर बाहर होगा. 3 दिसंबर, 2018 को इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को कुल्हाड़ी से मार कर ज़ख्मी किया गया और फिर उनके ही सर्विस रिवाल्वर से गोली मार दी गई. दस महीने पुराने इस केस में कुल 44 लोग गिरफ्तार हुए थे, जिनमें से 20 से ज्यादा आरोपी ज़मानत पर बाहर आ चुके हैं. पिछले ही महीने आरोपियों में से एक बीजेपी कार्यकर्ता शिखर अग्रवाल जब ज़मानत पर जेल से बाहर आया तो एक भीड़ ने फूल माला पहनाकर पूरे गाजे बाजे के साथ जेल के ठीक बाहर उसका स्वागत किया. वंदे मातरम और जय श्रीराम के नारे लगे थे. आरोपियों के साथ सेल्फी ली गई थी. ज़मानत पर रिहा होने वाले उपेंद्र सिंह राघव अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद के विभाग अध्यक्ष हैं. हमारे सहयोगी सौरव शुक्ला ने इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की पत्नी रजनी सिंह से बात की है. ज़ाहिर है उनका मन कैसा होगा इस वक्त. आख़िर दिसंबर से सितंबर आ गया. एक साल होने में चार महीने रह गए हैं. इंसाफ़ का अता-पता नहीं है. जांच और ज़मानत के खेल में मामला कब अंजाम पर पहुंचेगा किसी को पता नहीं.

उधर, पंजाब एंड महाराष्ट्र कोपरेटिव बैंक लिमिटेड के 50 हज़ार से अधिक खाताधारकों को आज कुछ राहत दी गई है लेकिन क्या वो राहत है? राहत यह है कि पहले आदेश आया कि 6 महीने में एक हज़ार ही निकाल सकेंगे, अब आदेश आया है कि 6 महीने में 10,000 हज़ार ही निकाल सकते हैं. क्या वाकई ये राहत है. रिज़र्व बैंक का दावा है कि नए आदेश से 60 प्रतिशत खाताधारकों को पूरी रकम निकालने का मौका मिलेगा. ज़ाहिर है कम पैसे वालों को राहत दी गई है, लेकिन जिनके अधिक पैसे जमा है उनका क्या गुनाह है? उनका पैसा क्यों बैंक में रुकना चाहिए? क्या खाताधारकों के कारण बैंक की हालत खराब हुई है? अगर किसी के यहां शादी है, खाते में दो लाख जमा है तो क्या छह महीने में 10,000 निकाल कर वह खुश हो सकता है? यह तभी हो सकता है जब टीवी पर केवल पाकिस्तान और राम मंदिर की खबरें चलें, लेकिन तब भी तो शादी की तारीख अपने समय से आ जाएगी. वह व्यक्ति जो रोज़ पाकिस्तान और राम मंदिर पर कार्यक्रम देख रहा है, उसे शादी के लिए पैसे की ज़रूरत तो होगी ही.

रिजर्व बैंक ने आज पीएमसी बैंक के डायरेक्टर और चेयरमैन को निलंबित कर दिया. अब उनकी जगह अपना एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त कर दिया है. खाताधारकों को डर है कि कहीं निलंबित डायरेक्टर देश छोड़कर न भाग जाएं इसलिए पासपोर्ट ज़ब्त हो. बीजेपी के नेता किरीट सोमैया ने पुलिस से मिलकर बैंक प्रबंधन और HDIL के खिलाफ आपराधिक कारर्वाई की मांग की. लेकिन जब पूछा गया कि बैंक के एक सह- निदेशक बीजेपी विधायक के बेटे हैं तो कहने लगे कि इसे राजनीति से न जोड़ा जाए. सह निदेशक राजनीति सिंह बीजेपी के सदस्य बताए जाते हैं. यह सब जानकारी मुंबई मिरर की रिपोर्टर चैतन्य मारपकवर और मकरंद गडगिल की रिपोर्ट में दी गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि राजनीति सिंह को मुलुंद से टिकट देने पर भी चर्चा है. राजनीति सिंह ने कहा कि वे बैंक के रोज़ाना के काम में शामिल नहीं हैं. मुंबई मिरर की रिपोर्ट में कहा गया है कि बताया गया है कि बैंक के 12 निदेशकों का बीजेपी से संबंध है.

टिप्पणियां

नीलम फारुख़ की कहानी हमने बुधवार को दिखाई थी. श्रीनगर की नीलम का एडमिशन नहीं हुआ था. जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने एडमिशन देने से इंकार कर दिया था, क्योंकि वह देर से आई थी. कश्मीर में इंटरनेट बंद है. इस वजह से नीलम को सूचना समय पर नहीं मिली. आज सुशील महापात्रा जामिया के डीन से मिलने गए. उनसे सवाल पूछा कि देरी हो गई तो भी इनका एडमिशन क्यों नहीं हुआ, जबकि वहां विशेष परिस्थिति है. आप खुद देखें कि जवाब ठीक से मिल रहा है या नहीं. इस बीच कश्मीरी छात्रों को एडमिशन देने के समर्थन में छात्रों ने प्रदर्शन भी किया. साढ़े सात बजे शाम को हमने नीलम फारुख से फोन कर पूछा कि एडमिशन हुआ या नहीं तो उसने यही बताया कि अभी तक नहीं हुआ है वो जामिया में ही बैठी हैं. उसे कहा गया है कि एडमिशन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है, इंतज़ार करें.

इस मामले में जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने पहल की है. उन्होंने जामिया के चांसलर से भी बात की है. उन्हें आशा है कि नीलम का एडमिशन हो जाना चाहिए. यही नहीं ऐसे किसी छात्र को परेशानी है तो वे जम्मू कश्मीर भवन में तैनात ज्वाइट सेक्रेट्री से मिल सकते हैं. उनका काम ही है ऐसे मामलों में मदद करना. तो दिल्ली या उत्तर भारत में कश्मीर का कोई छात्र भटक रहा है, उसे कोई परेशानी है तो दिल्ली के पृथ्वीराज रोड पर स्थित जम्मू कश्मीर भवन में अधिकारियों से संपर्क करे और काम न हो तो राज्यपाल महोदय को सूचित करे.



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


 Share
(यह भी पढ़ें)... दिल्ली में तनाव के बीच एक बार फिर बोले कपिल मिश्रा, 'जिन्होंने बुरहान वानी और अफजल गुरु को आतंकी नहीं माना, वो...'

Advertisement