प्राइम टाइम इंट्रो : तेलंगाना में विधायकों का जितना वेतन बढ़ा, वो वाजिब?

प्राइम टाइम इंट्रो : तेलंगाना में विधायकों का जितना वेतन बढ़ा, वो वाजिब?

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (फाइल फोटो)

अगर आप एक सामान्य कर्मचारी हैं और आप 10 प्रतिशत या 15 प्रतिशत की दर से सैलरी बढ़ने से परेशान हैं तो आप विधायक या सांसद बनने का सपना देख सकते हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में निर्वाचित प्रतिनिधियों ने अपनी सैलरी बढ़ाने के जो कीर्तिमान कायम किये हैं उससे जनता महान को प्रेरणा मिलनी चाहिए कि वो भी कुछ ऐसा करे कि अपनी सैलरी जिसे कभी दरमाहा और तनख्वाह कहते थे, 100 प्रतिशत से अधिक बढ़ा ले। ज़रूर हमारे विधायकों को जनता की सैलरी न बढ़ने का ग़म सताता होगा तभी वो इसका बदला अपनी सैलरी 400 प्रतिशत बढ़ाकर निकालते हैं। 'सैलरी भी कभी बढ़ती थी' ये सीरियल आप आम लोग देखिये हम आपको 'आज भी सैलरी बढ़ सकती है' टाइप की नई फिल्म दिखाते हैं।

दक्कन के नवोदित प्रांत तेलंगाना के ग़रीब विधायकों की सैलरी और सुविधा में 160 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मान लीजिए आपकी सैलरी महीने की 10,000 है वो अप्रैल से बढ़कर 26000 हो जाए तो आप खुशी के मारे कूदेंगे कि नहीं। लेकिन आप चुपचाप देखिये क्योंकि आपके कूदने की बारी अभी नहीं आई है। अब विधायकों की सैलरी 95,000 से बढ़कर ढाई लाख हो गई है। मंत्रियों की सैलरी 2 लाख 40 हज़ार से बढ़कर 4 लाख हो गई है। इस बाबत सोमवार को विधानसभा में एक बिल पेश हुआ और बिना विरोध के पास भी हो गया। प्रस्ताव तो साढ़े तीन लाख प्रति माह करने का था लेकिन विधायकों की संवेदनशीलता देखिये, ढाई लाख ही बढ़ाया। वो भी सर्वसम्मति से।

तेलंगाना एक नवोदित राज्य है। कर्ज़ा सिर्फ 61000 करोड़ है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसके करोड़पति विधायक ढाई लाख की सैलरी न ले सकें। आप जानते हैं कि अप्रैल 2014 में तेलंगाना में पहला चुनाव हुआ और 119 विधायक चुन कर आए। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म ने पता किया 119 में सिर्फ 83 विधायक ही मिले जो करोड़पति हैं। 6 विधायक ऐसे हैं जिनकी चल अचल संपत्ति 30 करोड़ से ज़्यादा है, 36 विधायक ग़ैर करोड़पति हैं।
3 विधायक ऐसे हैं जिनकी संपत्ति 18 लाख से कम हैं। इन तीनों में से एक की संपत्ति मात्र 1 लाख 82 हज़ार की चल संपत्ति है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने मीडिया से कहा है कि वे स्थिति को समझे। बाकी मीडिया का तो मैं नहीं जानता लेकिन मैं उनकी अपील के बाद से समझ गया हूं। तभी आपको समझा रहा हूं कि क्या अच्छा लगेगा कि 83 करोड़पति विधायकों की सैलरी लाख रुपये भी न हो। इनमें से एक विधायक की चल अचल संपत्ति तो 111 करोड़ से अधिक है। बताइये वो किसी को लाज के मारे कह नहीं पाते होंगे कि 95,000 सैलरी है। हम लोग सिर्फ ग़रीबों की तकलीफ़ समझते हैं लेकिन हमें अमीरों की झिझक भी समझनी चाहिए। इस एंगल से सोचेंगे तो आप भी विधायकों की सैलरी बढ़ने की खुशी में शामिल हो पायेंगे। माननीय मुख्यमंत्री ने सैलरी बढ़ने के कारणों को विस्तार से बताया है जिसे डेक्कन क्रोनिकल अख़बार ने छापा है। मैं आप दर्शकों से अपील करता हूं कि प्लीज़ विधायकों के दर्द को भी समझिये। जो मुख्यमंत्री कह रहे हैं वो सुनिये। उन्होंने कहा, तीस साल पहले जब मैं विधायक बना तो 500 रुपये प्रति माह ही सैलरी थी, लेकिन अब आर्थिक परिदृश्य बदल गया है। विधायकों का सैलरी भत्ता बिल राज्य के एक लाख करोड़ के बजट के आगे तो बहुत मामूली है। एक विधायक 30 कमेटियों का सदस्य होता है, उसे इनकी बैठकों में जाना होता है
ज़िला परिषद की बैठकों में जाना होता है, रोज़ सौ-पचास लोग काम लेकर आ जाते हैं, जिन्हें चाय पिलानी पड़ती है वर्ना लोग नाराज़ हो जाते हैं। ड्राइवर और निजी स्टाफ रखना पड़ता है। सुरक्षा कर्मचारी के खाने का खर्चा भी निकालना होता है।

तो अब से विधायकों के सुरक्षा कर्मियों से अपील हैं कि वे जम कर खायें क्योंकि मान्यवर जी की तन्ख्वाह बढ़ गई है। लेकिन जो मुख्यमंत्री ने कहा क्या वो ग़लत है। शायद नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों को मंदिर और त्योहारों के वक्त चंदे देने पड़ते हैं। ये बहुत बड़ी समस्या है। आज कल कई विधायक बताते हैं कि गांव-गांव में क्रिकेट प्रतियोगिता होने लगी है और इसके लिए चंदा मांग मांग कर युवकों ने परेशान कर दिया है। क्या हम एक बार भी सोचते हैं कि चंदा देना विधायक का काम नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिनके ऊपर राष्ट्र निर्माण की ज़िम्मेदारी है उन्हें अच्छी सैलरी मिलनी चाहिए। सवाल तो तब उठता है जब राष्ट्र निर्माण में ही लगे दूसरों लोगों का इतनी तत्परता से ख़्याल नहीं रखा जाता।

मई 2014 में भारत के 29 वें राज्य के रूप में तेलंगाना राज्य का जन्म हुआ, तब से अब तक 2100 किसानों ने आत्महत्या की है। सिर्फ 400 परिवारों को ही मुआवज़ा मिला है।

आप किसी कंपनी के बारे में जानते हैं जहां सबकी सैलरी एक रेट पर बढ़ती है। जैसे विधायकों की बढ़ती है। क्या सभी विधायकों का प्रदर्शन एक समान होता है। पिछले साल दिल्ली सरकार ने अपने विधायकों की सैलरी 400 प्रतिशत बढ़ा दी तो काफी हंगामा हुआ था। 88,000 से बढ़ाकर 2 लाख रुपये प्रति माह कर दी गई। यह बिल केंद्र सरकार के पास लंबित है और अभी तक मंज़ूरी नहीं मिली है अर्थात दिल्ली के विधायकों को बढ़ी हुई सैलरी नहीं मिल रही है। तब बीजेपी के विधायकों ने भावावेश में कह दिया कि वे जनसेवा के लिए आए हैं और एक रुपये की सैलरी पर काम करेंगे। अब जब केंद्र से मंज़ूरी मिल जाएगी तभी पता चलेगा कि ये विधायक एक रुपये में काम करेंगे या पूरी सैलरी लेंगे। तेलंगाना के विधायकों की सैलरी दिल्ली से भी ज्यादा है। इसी तरह मंगलवार को मध्यप्रदेश कैबिनेट ने विधायकों की सैलरी बढ़ाने का फैसला किया है। 71,000 प्रति माह से बढ़ाकर 1 लाख 10 हज़ार करने का प्रस्ताव किया गया है।
मंत्रियों का वेतन 1 लाख सत्तर हज़ार करने का प्रस्ताव किया गया है। मुख्यमंत्री का वेतन 1 लाख 43 हज़ार से बढ़ाकर 2 लाख प्रति माह किया गया है। इसमें वेतन और भत्ता सभी शामिल हैं। 9 साल में चौथी बार विधायकों का वेतन बढ़ा है।

आंध्र प्रदेश विधानसभा में भी मंगलवार यानी 30 मार्च को विधायकों का वेतन भत्ता विधेयक पास किया गया है। अब विधायकों की सैलरी 95,000 से बढ़कर 1 लाख 25 हज़ार हो जाएगी। आवासीय भत्ता 25,000 से बढ़ाकर 50,000 कर दिया गया है। 98,000 से 1 लाख तक के रेलवे कूपन दिये जायेंगे। पत्रिका और किताबों के लिए 20,000 रुपया मिलेगा
विधानसभा क्षेत्र के लिए भत्ता 1 लाख 38 हज़ार मिलेगा जो पहले 83,000 रुपये था।

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तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश के विधायकों ने तो होली के बाद ही दीवाली भी मनानी शुरू कर दी है। मंगलवार को ही छत्तीसगढ़ सरकार की कैबिनेट के फैसले के अनुसार विधायकों की सैलरी 75,000 से बढ़ाकर 1 लाख दस हज़ार प्रति माह कर दी गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में तेलंगाना के विधायकों की सैलरी सबसे अधिक है। हमें विधायकों की सैलरी के मामले को तार्किकता के साथ देखना चाहिए। उन्हें विधायकी के काम के लिए संसाधन की ज़रूरत तो है लेकिन क्या सभी विधायकों का प्रदर्शन एक सा होता है। विधायकों के घर आम लोगों की भीड़ होती है या कार्यकर्ताओं की। उनकी ड्राईंग रूम में किसकी पहुंच होती है ये वो भी जानते हैं और आप भी जानते हैं। कंपिनयों में भी सैलरी बढ़ती है लेकिन वो 160 प्रतिशत के हिसाब से नहीं बढ़ती और सबकी एक समान नहीं बढ़ती है। 26 नवंबर 2015 के दिन एनडीटीवी प्रोफिट की साइट पर ख़बर लगी है कि 2016 के साल में भारतीय कंपनियों में वेतन 10.8 प्रतिशत ही बढ़ेगा। अगर आप 6.1 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर का हिसाब लगा लें तो यह वृद्धि 4.7 प्रतिशत की होगी।

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विधायक ही ठीक है। अपनी सैलरी सौ डेढ़ सौ प्रतिशत बढ़ा लेते हैं इसमें मुद्रास्फीति की 5-6 प्रतिशत कहां गुम हो जाती होगी किसी को पता ही नहीं चलता होगा। ज़ाहिर है हमारे किसान बेहतर मूल्य के लिए तरसते रहते हैं, कर्जे में आ जाते हैं मगर वो कभी नहीं बढ़ता। सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता समय से बढ़ता रहता है। सातवां वेतन आयोग आ ही रहा है। हमारे विधायकों की सैलरी कितनी बढ़नी चाहिए, बढ़ने का आधार क्या होना चाहिए, क्यों नहीं बढ़नी चाहिए और बढ़नी क्यों चाहिए। बहुत सारे चाहिए का जवाब चाहिए तो प्राइम टाइम देखिये।