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प्राइम टाइम इंट्रो : सीबीएसई के पास सभी स्कूलों की निगरानी के लिए क्या कोई तंत्र है?

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प्राइम टाइम इंट्रो : सीबीएसई के पास सभी स्कूलों की निगरानी के लिए क्या कोई तंत्र है?
मेरे खयाल से सरकार को कानून बना देना चाहिए कि हर आदमी दिन के दो घंटे हिंदू-मुसलमान टॉपिक पर बहस करेगा या दो घंटे टीवी पर बहस देखेगा. आप कहीं भी हों हिन्दू मुसलमान टॉपिक पर बहस करें. इसके बड़े फायदे हैं. ट्रैफिक जाम कम हो जाएगा, बेरोजगारी दूर हो जाएगी, ट्रेन टाइम पर चलने लगेंगी, कांट्रेक्ट वालों की नौकरी परमानेंट हो जाएगी. स्कूलों की फीस तो इतनी सस्ती हो जाएगी कि लोग बढ़ाने के लिए आंदोलन करेंगे. बिल्डर भी टाइम से पहले फ्लैट देने लगेगा. सारे दुखों का एक इलाज...हिन्दू-मुसलमान, हिन्दू-मुसलमान... यह नारा होना चाहिए.

कमल दीदी पहलू खान की हत्या के आरोप में बंद युवकों से मिलने अलवर पहुंचीं. कमल दीदी ने हत्या के आरोपियों को आज के भगत सिंह और सुखदेव कहा है. मुझे पूरा यकीन है कि कोई शहीद का अपमान कर दे तो कमल दीदी उसे माफ नहीं करेंगी लेकिन एक आरोपी को शहीद भगत सिंह और सुखदेव बताकर उन्होंने किसका कद बढ़ा दिया है, किसका अपमान किया है, यह आप डिसाइड कीजिए. ऐसे तो अब भगत सिंह को भी पूछना पड़ेगा कि मैं ही हूं या कोई और भगत सिंह हो गया है. दीदी तमाम गौ भक्तों को लेकर आंदोलन करने वाली हैं. वैसे जो आरोपी है उसे आरोपी ही समझना चाहिए, सज़ायाफ्ता नहीं. दूसरी तरफ जिसकी हत्या हुई है उसका साथ देने की जगह मेव नेता गायब हो चुके हैं. जब कोई नहीं आया तो सद्दाम हुसैन जैसे नवयुवकों ने मेवात युवा संगठन बना लिया. पहलू खान की हत्या के मामले में इंसाफ के लिए जंतर मंतर से लेकर जयपुर तक धरना कर चुके हैं. अलवर में शांति मार्च निकाल चुके हैं और 21 अप्रैल को भी करने वाले हैं.

केंद्रीय विद्यालयों में शिक्षकों के 10,000 पद खाली हैं. अगर हम टीवी पर हिन्दू-मुसलमान टापिक पर डिबेट की मात्रा बढ़ा दें तो यह पूछने की ज़रूरत भी नहीं रहेगी कि इतने पद खाली हैं तो पढ़ाई कैसे होती होगी? इनके न भरे जाने से बेरोजगारी का क्या हाल होता होगा. मुझे पता है कि मैं कुछ ज्यादा बोल रहा हूं लेकिन आपको हैरानी नहीं होती कि हर दूसरे दिन टीवी पर हिन्दू-मुसलमान टापिक कहां से आ जाता है.

केंद्रीय विद्यालयों में शिक्षकों के 10,039 पद ख़ाली हैं. गैर शिक्षण स्टाफ के 14,144 पद खाली हैं. नवोदय विद्यालयों में भी शिक्षकों के 2,023 पद खाली हैं. यही नहीं केंद्रीय विद्यालयों में प्रिंसिपल के 200 पद खाली हैं. डिप्टी प्रिंसिपल के 113 पद खाली हैं. यह सूचना पीटीआई की है जिसे कई अखबारों ने छापा है. इसी तरह सुप्रीम कोर्ट ने छह राज्यों से पूछा है कि आपके यहां पुलिस कर्मियों के चार लाख से अधिक पद खाली कैसे हैं, जल्दी बताइए कि इन्हें कैसे भरा जाएगा? यूपी में डेढ़ लाख से अधिक पुलिस कर्मी भर्ती हो सकते हैं, बिहार में 30,000 से ज़्यादा. स्कूलों पर जनसुनवाई जारी है. मिलेनियम, इंटरनेशनल, ग्लोबल नाम वाले स्कूलों से बचिए. इन नामों वाले कई स्कूलों में फीस वृद्धि की जगह फांसी वृद्धि होती है. ये सब मैं अभिभावकों द्वारा भेजे गए हजारों ईमेल पढ़ने के बाद बता रहा हूं. गली-गली में मिलेनियम और ग्लोबल स्कूल खुल गए हैं. आज तमाम ईमेल पढ़ते हुए स्कूलों के कुछ और नए कारनामे पता चले हैं जिनकी सूची आपको इस जनसुनवाई में पेश कर रहा हूं.

गुड़गांव के एक स्कूल में हर साल 350 रुपये की डिक्शनरी लेनी ही पड़ती है. उड़ीसा का एक स्कूल री-एडमिशन की कोई रसीद नहीं देता है, यानी काला धन बनाता है. रुड़की का एक स्कूल सभी बच्चों से हर दिन हैंड सैनिटाइज़र लेकर आने को कहता है. मथुरा के एक स्कूल में ई-सर्विस के नाम पर साल के 550 रुपये लिए जाते हैं, ईमेल और एसएमएस के लिए. खेत्री नगर राजस्थान का एक स्कूल डायरी के लिए 700 रुपये ले रहा है. अलीगढ़ के स्कूल ने कैश में फीस लेने से मना कर दिया मगर चारों तिमाही के एडवांस चेक ले लिए हैं. गुड़गांव के एक स्कूल ने 40 फीसदी और लखनऊ के एक स्कूल ने 60 फीसदी फीस बढ़ा दी है. लुधियाना के एक स्कूल में उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर की बाढ़, नेपाल भूकंप के वक्त छात्रों से 300 से लेकर 500 रुपये लिए गए. छात्रों को चंदे की कोई रसीद नहीं दी गई. अहमदाबाद का एक स्कूल एक्स्ट्रा एक्टिविटी के नाम पर फीस तो लेता है मगर उसके पास प्ले ग्राउंड ही नहीं है.

यह सब दर्शकों के भेजे गए ईमेल से पता चला है. उनके अनुभवों का दस्तावेज़ है. हमने स्कूल से चेक नहीं किया, इन सबके पास रटा रटाया जवाब होता है. हर दल के नेताओं के स्कूलों से शिकायत आई है. एक बात समझनी होगी. स्कूलों को चलाने के लिए पैसे की ज़रूरत होती है. फीस वाजिब भी बढ़ाई जा सकती है मगर 60 प्रतिशत से लेकर 100 फीसदी फीस वृद्धि की बात समझ नहीं आती. मां-बाप की कमाई इतनी नहीं बढ़ती है. दिल्ली, मुंबई या अन्य शहरों के प्रतिष्ठित स्कूलों की फीस तो समझ आती है मगर मैंने जो ईमेल पढ़े हैं उसके आधार पर कह सकता हूं कि गरीब इलाकों में भी स्कूल वही फीस वसूल रहे हैं जो बड़े शहरों के बड़े स्कूल वसूलते हैं. यूपी का सोनभ एक गरीब इलाका है मगर यहां के एक स्कूल की फीस 8000 प्रति माह बताई गई है. महाराष्ट्र का नंदूरबार गरीब इलाका है लेकिन एक स्कूल की फीस 40 फीसदी बढ़ गई. यह नहीं चलना चाहिए. छत्तीसगढ़ के बस्तर में सिर्फ नक्सल समस्या नहीं है वहां भी स्कूलों की ऐसी लूट चल रही है. कोरबा, जगदलपुर, कांकेर से भी ईमेल आए हैं. वैसे नवी मुंबई के एक अभिभावक ने केजी क्लास के बच्चे की फीस के लिए बैंक से पर्सनल लोन लेने की बात कही है.

हमारी इस जनसुनवाई से लोगों के ईमान जाग रहे हैं. पंजाब से एक बैंक कर्मचारी ने ईमेल किया है कि उनके बैंक में कुछ प्राइवेट स्कूल के एकाउंट हैं. स्कूल अपने करेंट एकाउंट से टीचर के खाते में 15,200 रुपये जमा करते हैं. साथ ही साथ उन्हीं शिक्षकों के साइन किए हुए चेक भी लेकर आते हैं और 15,200 रुपये निकाल लेते हैं. फिर स्कूल 4000 या 5000 रुपये कैश में सैलरी दे देता है. जो आवाज़ उठाता है उससे कहा जाता है कि आप नौकरी छोड़ दो.

मेरी राय में तो इस साल शिक्षक दिवस मनाइए ही नहीं. गुलाम की तरह आपके शिक्षकों के साथ व्यवहार हो रहा है और हम शिक्षक दिवस के मौके पर लेक्चर देते हैं. हैरानी की एक और बात है. बहुत कम शिक्षकों ने ईमेल किए हैं. जो भी मेल आए हैं सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के आए हैं. उनके पत्रों को पढ़कर यही लगा कि उस खराब सिस्टम में भी कोई जिंदा है. तमाम ईमेल को पढ़ते हुए देश के सैकड़ों स्कूलों के भीतर क्या हो रहा है, जान गया हूं. इतना तो पूरी जिंदगी लगा देता तो भी नहीं जान पाता. आप दर्शकों का शुक्रिया. मैं किसी की पहचान उजागर करने वाला नहीं हूं. किसी को हाथ न लगे इसलिए ईमेल डिलीट करता जा रहा हूं.

मुंबई, लुधियाना, झारखंड के प्रदर्शन के ईमेल आए हैं. मुंबई के आजाद मैदान में कुछ अभिभावकों ने सरकार के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू की है. उनका कहना है कि मुंबई के सात स्कूलों ने बिना अभिभावकों की सहमति के फीस बढ़ा दी जो महाराष्ट्र स्कूल फीस रेगुलेशन एक्ट का उल्लंघन है. 18 अप्रैल के मिड डे में महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े का बयान छपा है कि सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड वाले स्कूल राज्य सरकार के तहत नहीं आते हैं, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत आते हैं तो अभिभावक हमें क्यों फीस बढ़ने का दोषी मान रहे हैं. उनका यह बयान कई अखबारों में छपा है. इसी तरह राजस्थान के झालावाड़ के अकलेरा में अभिभावकों ने जिला प्रशासन को स्कूलों की मनमानी के खिलाफ ज्ञापन दिया है. देश के कई जिलाधिकारियों के पास ऐसे ज्ञापन दिए गए हैं जिससे पता चलता है कि स्थिति कितनी चिंताजनक है. गुजरात के कानून की बात हो रही है मगर वहां से कई ईमेल आए हैं जिनसे पता चलता है कि अधिकतम सीमा तय करने के बाद भी स्कूल उससे भी अधिक फीस ले रहे हैं. लुधियाना में भी कुछ माता-पिता ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ डीसी आफिस के बाहर प्रदर्शन किया. झारखंड के बोकारो से आया एक पर्चा बताता है कि वहां स्कूलों की मनमानी के खिलाफ जूता-चप्पल रैली निकाली गई है. किसी रैली का ऐसा नाम पहली बार सुन रहा हूं. जूता-चप्पल रैली. जल्दी ही लोग टाई-बेल्ट रैली करेंगे.

एक छात्र ने ईमेल किया है कि स्कूल ने उससे दो साल तक जेईई और नीट की तैयारी के लिए 3000 प्रति माह लिए ताकि एक्स्ट्रा क्लास हो सके. जबकि वह इंजीनियर और डॉक्टर बनना ही नहीं चाहता था. जाहिर है स्कूलों में अनुशासन के नाम पर एक रंग का बैग खरीदने के लिए कहा जा रहा है और सबसे एक्स्ट्रा क्लास के नाम पर पैसे लिए जा रहे हैं. सीबीएसई ने 13 स्कूलों को नोटिस जारी किया है. डीपीएस भोपाल, पीलर्स पब्लिक स्कूल गोरखपुर, रजनी पब्लिक स्कूल बुलंदशहर, बाल निकेतन जूनियर हाई स्कूल और सर सैय्यद पब्लिक स्कूल, वाराणसी को नोटिस जारी किया है. दिल्ली के भी दो स्कूल हैं डीपीएस आरके पुरम और डीपीएस मथुरा रोड. सबके खिलाफ अलग-अलग शिकायतें हैं.

सीबीएसई ने फिर से दोहराया है कि स्कूल किताब, नोटबुक, स्टेशनरी, यूनिफार्म नहीं बेचेंगे और बोर्ड के नियमों का पालन करेंगे. स्कूल बिजनेस नहीं है बल्कि समाज सेवा है. सभी स्कूलों से कहा गया है कि वे एनसीईआरटी या सीबीएसई की किताबों का ही इस्तेमाल करें. अभिभावकों पर अलग किताबें खरीदने का दबाव न बनाएं. इस तरह के निर्देश तो राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने भी जारी किए हैं. अब सवाल है कि जिन्हें बाध्य किया गया है अधिक दाम पर चीज़ें खरीदने के लिए, क्या उनके पैसे वापस होंगे? जिन्हें 800 की जगह 2000 के जूते खरीदने के लिए कहा गया है क्या उन्हें वापस होंगे? क्या सीबीएसई के पास सभी स्कूलों की निगरानी करने का कोई तंत्र है भी या हम सिर्फ उम्मीद करते रहते हैं?


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