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प्राइम टाइम इंट्रो : आखिर रैगिंग को क्यों छिपा रहे हैं कुलपति?

इस देश में आप जिसे चाहें लाइन में खड़ा कर सकते हैं, उसे हांक सकते हैं. इसी की नुमाइश है यह वीडियो और कतार में चले आ रहे मेडिकल के छात्र.

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इस देश में आप जिसे चाहें लाइन में खड़ा कर सकते हैं, उसे हांक सकते हैं. इसी की नुमाइश है यह वीडियो और कतार में चले आ रहे मेडिकल के छात्र. यूपी के सैफई आयुर्विज्ञान महाविद्यालय में मेडिकल कालेज के छात्र हैं, जिनकी रैगिंग हुई है और सिर मुड़वा दिया गया है. सिर मुंडवाने के बाद इन्हें सिर झुकाने के लिए भी कहा गया होगा और सिर झुकाए ये आते जाते दिख भी रहे हैं. इससे भी जी न भरा तो जी हुज़ूर जी हुज़ूर करते हुए चलने को कहा गया. इन्हें पता है कि यूजीसी की गाइडलाइन है. सुप्रीम कोर्ट के सख्त फैसले हैं. न भी पता हो तो सोचिए मेडिकल कॉलेज के इतने सारे छात्र मिलकर एक ग़लत का विरोध नहीं कर सके, उसी तरह लाखों करोड़ों भारतीय मिलकर एक ग़लत का विरोध नहीं कर पाते हैं. हमारे लोकतंत्र में चुप रहना, बर्दाश्त करना इन्हीं सब अभ्यासों के ज़रिए मज़बूत हुआ है.  मज़बूत लोकतंत्र के ये कमज़ोर डाक्टर पता नहीं इस वीडियो को देखते हुए क्या सोचते होंगे. रिकार्डिंग देखने के बाद लगा कि सिर मुंडा कर इन्हें कैमरे के कई एंगल के हिसाब से चलवाया भी गया है.

आज़ाद भारत के ये मेडिकल छात्र ग़ुलाम होने की बाध्यता को कितनी स्वाभाविकता के साथ निभाए चले जा रहे हैं. आप इनके चेहरे पर पसरा डर देख सकते हैं. घर परिवार से डरने और चुप रहने का संस्कार मिला है जो यूनिवर्सिटी में आकर सिलेबस का हिस्सा हो गया है. इसीलिए जब ज़िलाधिकारी ने जांच टीम भेजी तो इन छात्रों ने कहा कि कोई रैगिंग नहीं हुई है. इनका मुकरना हमारे लोकतंत्र में पढ़ी लिखी जनता के होने की क्वालिटी पर भी सवाल उठाता है. तो क्या यह मुनादी करवा दी जाए कि सैफई आर्युविज्ञान महाविद्यालय में मेडिकल कालेज के छात्र अपनी मरजी से सिर मुंडा कर सिर झुकाए कतार में चले जा रहे हैं. वाइस चांसलर का जवाब और लाजवाब है.  यही कि उन्होंने अपने ज़माने में जिनती रैगिंग झेली है, उसका दस प्रतिशत भी ये नहीं झेल सकते. सीनियर का इतना रेसपेक्ट था कि दीवार से कूद जाते थे और वही सीनियर बाद में समोसा खिलाता था. आप इन तस्वीरों को देखते हुए महान भारत से चाहें तो बहुत सी उम्मीदें कर सकते हैं.


2009 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि रैगिंग मानवाधिकार का उल्लंघन है. सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद सख्त कानून हैं. देश भर के कालेजों में रैगिंग विरोधी कमेटी हैं और निर्देश टांगे गए हैं. क्योंकि रैंगिग के कारण कई छात्रों की जान गई है और कइयों ने खुदकुशी की है. लेकिन आज के ज़माने में जब सरकार और सिस्टम का वरदहस्त, अंग्रेज़ी में सपोर्ट हो तो आप कुछ भी बोल सकते हैं. अरशद जमाल और कमाल ख़ान की रिपोर्ट की यह तस्वीर बता रही है कि मेडिकल कालेजों के तहखाने में कितना कचरा जमा है जिसे सीनियर जूनियर के नाम पर संस्कार और संस्कृति का रूप देकर पाला जा रहा है. बहरहाल इससे पहले कि 21 अगस्त की रात बीत जाए, वाइस चांसलर डॉ राजकुमार जी का अमर बयान सुन लें. उसके बाद हम इस स्टोरी को आपके विवेक पर छोड़ते है.  देश में अगर कहीं कोई सिस्टम होगा तो कुछ होगा वरना छात्रों ने तो कह ही दिया है कि उनकी रैगिंग नहीं हुई है. 

युगों युगों में ऐसे वाइस चांसलर आते हैं. ऐसे दुर्लभ विद्वानों की राय से हमारे समाज में अनैतिकता नैतिकता से भी ज़्यादा प्रतिष्ठित हैय मगर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने सैफई मेडिकल कालेज को एक पत्र भेज दिया है और रैंगिंग के इस मसले पर कालेज के व्यवहार पर असंतोष जताया है. काउंसिल ने पूछा है कि क्यों न सारे सीनियर को सस्पेंड कर दिया जाए. क्यों न हर सीनियर पर एक एक लाख का जुर्माना लगाया जाए. काउंसिल ने कहा है कि 150 मेडिकल छात्रों की रैगिंग हुई है तो इस हिसाब से 150 यानि डेढ़ करोड़ की फाइन सीनियर से वसूली जाए. जब तक ऐसी सख़्ती नहीं होगी मेडिकल कालेजों के तहखाने में रैगिंग की क्रूर दास्तानें न तो बाहर आएंगी और न ही ख़त्म होंगी. यहां तक कि जब ज़िलाधिकारी ने जांच टीम भेजी तो प्रथम वर्ष के छात्रों ने इंकार कर दिया. इसके बाद भी ज़िलाधिकारी ने लखनऊ यही रिपोर्ट भेजी है कि रैगिंग को छिपाने की कोशिश हुई है. यह सामान्य घटना नहीं है. इतनी भी छोटी घटना नहीं है कि किसी किनारे लगा दी जाए. उम्मीद है कि कालेज के सीनियर अपनी आदतों में संशोधन करेंगे और समझेंगे कि उन्होंने क्या किया है. इस वक्त वे पैरवी सिफारिश की चिन्ता छोड़ ईमानदारी से सोचें कि ऐसा करने का ख़्याल उन्हें क्या बनाता है. क्या 150 जूनियर छात्रों के सिर मुंडा देने से अच्छा डाक्टर बनाता है. 

दूसरी तरफ, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं. सुबह दस बजे उनसे पूछताछ शुरू हुई और पौने दो बजे तक चलती रही. सीबीआई के अधिकारी आर पार्थसारथी उनसे पूछताछ कर रहे थे. उसके बाद उन्हें चार बजे के करीब सीबीआई की विशेष अदालत के जस्टिस अजय कुमार के चेंबर में पेश किया गया. यहां पर सीबीआई की वकील पद्मिनी सिंह ने दलील दी और जवाब में कपिल सिब्बल, विवेक तन्खा और अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सरकार की तरफ से बहस की. सीबीआई की वकील ने कहा कि चिदंबरम जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. अन्य आरोपियों के साथ आमने-सामने बिठा कर पूछताछ करना ज़रूरी है. चिदंबरम से जो दस्तावेज़ मांगे गए हैं वो उन्होंने नहीं दिए हैं. सीबीआई ने कहा कि इस केस की जांच चार्जशीट तैयार करने से पहले के चरण में हैं क्योंकि उन्हें कुछ और दस्तावेज़ चाहिए. सीबीआई ने यह भी कहा कि यह क्लासिक मनी लांड्रिंग का केस है. पूछताछ से ही सारी जानकारी मिल पाएगी. सीबीआई के वकील ने कहा कि वह केस डायरी देने के लिए तैयार हैं और डायरी कोर्ट को सौंप भी दी.

अज्ञात अधिकारियों ने अपनी हैसियत का ग़लत इस्तमाल किया है और इंद्राणी मुखर्जी ने 50 लाख डॉलर देने की बात मानी है. सीबीआई ने यह भी कहा कि  इंद्राणी मुखर्जी ने बयान दिया है कि फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड की मंज़ूरी का उल्लंघन हुआ था जिसे रफा दफा करने के लिए कार्ति चिदंबरम ने दस लाख डॉलर की मांग की थी जिसे पीटर मुखर्जी और  इंद्राणी मुखर्जी ने कबूल कर लिया था.  इंद्राणी मुखर्जी इस केस में सरकारी गवाह बन गई हैं. सीबीआई ने 5 दिन की रिमांड मांगी. इसके बाद चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने उनका पक्ष रखा. कपिल सिब्बल ने कहा कि इसी केस में सह-अभियुक्त कार्ति चिदंबरम को 23 मार्च 2018 को ज़मानत मिल गई थी. इसी कोर्ट से एक और आरोपी चार्टड अकाउंटेंट भास्कर रमण को अग्रिम ज़मानत दी गई है. अन्य अभियुक्त  इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी भी डिफाल्ट बेल पर हैं. सिब्बल ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से लगता है कि ड्राफ्ट चार्जशीट तैयार है और जांच पूरी हो गई है. INX में 6 सचिवों ने FIPB मंज़ूरी दी, कोई गिरफ़्तार नहीं हुआ. इस मामले में 10 साल बाद केस दर्ज हुआ है. चिदंबरम कभी पूछताछ से भागे नहीं. अगर सवालों से बच रहे हैं तो कोर्ट में रखे सीबीआई.

आज 12 सवाल पूछे गए जिनमें से छह सवाल जून में ही पूछे जा चुके हैं. चिदंबरम जवाब भी दे चुके हैं. सिर्फ एक दिन पूछताछ हुई है. सीबीआई चाहती तो फिर से बुला सकती थी. आज भी अरेस्ट होने से लेकर सुबह 12 बजे तक सीबीआई ने कोई पूछताछ नहीं की जबकि चिदंबरम पूछताछ के लिए बोलते रहे. अगर पैसा मिला है तो वो किसी अकाउंट में गया होगा, वो अकाउंट कहां है. किसने पैसा दिया है. पांच मिलियन डॉलर दिया गया है तो कहां पर दिया गया है. सीबीआई बार बार वही सवाल कर रही है. कोर्ट में चिदंबरम की पत्नी नलिनि चिदंबरम और उनके बेटे कारति चिदबंरम भी मौजूद थे. चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने कोई पैसा नहीं लिया है. मेरा विदेश में कोई अकाउंट नहीं है. बेटे का विदेश में अकाउंट है जो सीबीआई को पता है और हर सवाल का जवाब दिया है. सिब्बल ने कहा कि विदेशी फंड की मंज़ूरी 6 सचिव मिलकर देते हैं, उनमें से किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. यह केस दस्तावेज़ों के आधार का है. सचिवों ने वित्त मंत्री के पास भेजा और उन्होंने मंज़ूरी दी. दस साल बाद एफ आई आर हुई है. 2017 के बाद उनसे कभी भी पूछताछ हो सकती थी. नहीं की गई. सीबीआई ने कोई पत्र तक नहीं लिखा कि अमुक दस्तावेज चाहिए. सीबीआई ने ऐसा क्यों नहीं किया. यह सब सिब्बल चिदंबरम की तरफ से बोल रहे थे. 

सिब्ब्ल ने कहा कि सात महीने तक ज़मानत पर फैसला रिज़र्व था. जिस तरह से अभियुक्त के साथ व्यवहार हो रहा है उससे गंभीर एतराज़ है. केस डायरी में जो भी लिखा है वो सबूत नहीं है. इस केस का सबूत से कोई लेना देना नहीं है. किसी और चीज़ से लेना देना है. सिब्बल के बाद अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की. सिंघवी ने कहा कि सारा मामला  इंद्राणी मुखर्जी के बयान और केस डायरी पर आधारित है.  इंद्राणी मुखर्जी के बयान दर्ज होने के चार महीने बाद चिदंबरम को बुलाया गया. गिरफ्तार करने के लिए इंद्राणी मुखर्जी को सरकारी गवाह बनाया गया है. 2018 में बयान दिया था उसके आधार पर इंद्राणी 2019 में सरकारी गवाह बनीं. सीबीआई की सारी दलील इस पर टिकी है कि चिदंबरम जवाब नहीं दे रहे हैं. क्या सहयोग नहीं करने के आधार पर पुलिस रिमांड मांगा जाना सही है. सिंघवी ने कहा कि जिन 6 सचिवों ने मंज़ूरी दी थी उनमें से एक को रिज़र्व बैंक का गवर्नर बनाया गया. चिदंबरम ने तो मात्र फारेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड के 6 सचिवों में प्रस्ताव भेजा और चिदंबरम ने मंज़ूरी दी. उन पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ के आरोप नहीं लगाए गए. जांच एंजेसी के पास मज़बूत केस नहीं है. 

अभियोजन पक्ष से इस पर कोई जवाब नहीं आया कि जब 6 सचिवों ने विदेशी निवेश को मंज़ूरी दी थी उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई है, उनमें से एक को रिज़र्व बैंक का गवर्नर क्यों बनाया गया. ये डी सुब्बा राव की बात हो रही है, जो रिज़र्व बैंक के गवर्नर बने. इनसे भी सीबीआई ने 14 अप्रैल 2018 को पूछताछ की है. सिब्ब्ल और सिंघवी की बहस के बाद सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने फिर बहस की. उन्होंने कहा कि हम ऐसे अभियुक्त के साथ डील कर रहे हैं जो जवाब न देने की क्षमा रखता है. अभी जांच चल रही है. हमने हाई कोर्ट के सामने हलफमाना दिया. उनसे पूछताछ ज़रूरी है. अभियोजन अपने सारे सवाल नहीं बताएगा और पूछने का उसका अधिकार है.  इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी, शीना वोरा की हत्या के मामले में आरोपी हैं और जेल में हैं. शीना इंद्रानी की बेटी थी जो 2012 में गायब हो गई. बाद में पता चला कि उसकी हत्या हो गई है. 2015 में  इंद्राणी मुखर्जी की गिरफ्तारी हुई और पीटर मुखर्जी भी गिरफ्तार हुए. क्या उनके किसी और केस में गवाह बन जाने पर उनकी बात का इतना वज़न होगा कि चिदंबरम को गिरफ्तार किया जाए. यह सवाल बार बार कांग्रेस की तरफ से उठाया जा रहा है. तुषार मेहता ने कहा कि हम इंटेलिजेंट आदमी के साथ निपट रहे हैं. ये अच्छा है. चिदंबरम इंटेलिजेंट हैं. इसलिए भी उन्हें जेल जाना चाहिए. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि कानून की बात नहीं कर रही हूं मगर कई बार प्रक्रिया गलत हो जाती है. चिदंबरम वरिष्ठ नेता हैं. उनके साथ जैसा बर्ताव हो रहा है उसे देखकर दुख हो रहा है. लोकतंत्र के चार खंभे होते हैं. इस वक्त लोकतंत्र रो रहा है. केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है इसमें सियासत कहां से आ गई. 

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अब आते हैं दिल्ली के गुरु रविदास मंदिर तोड़े जाने की घटना पर. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद डीडीए ने मंदिर तोड़ा. इसे लेकर देश भर के रविदासी समाज में नाराज़गी फैल गई. बुधवार को दिल्ली में हज़ारों की संख्या में रविदासी समाज के लोग विरोध प्रदर्शन करने आए. करोलबाग के अंबेडकर भवन से लंबा मार्च निकला. मार्च जब रामलीला मैदान पहुंचा तो मैदान भर गया. दिल्ली के अलावा पंजाब में भी इस मुद्दे को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हुआ है. इन सभी की मांग है कि रविदास मंदिर जहां पर था, वहीं पर बनाया जाए. डीडीए का दावा है कि मंदिर और उसका परिसर अवैध ज़मीन पर था. सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया था कि तोड़ा जाए. कोर्ट में केस गुरु रविदास जयंती समारोह समिति ने किया था, डीडीए ने नहीं किया था. रविदास समाज के लोगों का कहना है कि 40 करोड़ लोगों की भावना उस मंदिर से जुड़ी थी और मंदिर उनका मुख्य तीर्थ जैसा था. न्यूज़ क्लिक में सुशील गौतम का कहना है कि 1948 में तुगलकाबाद रविदास सोसाएटी रजिस्टर हुई थी जबकि डीडीए तो 1957 में बना था. रविदास सोसायटी के दस्तावेज़ चोरी कर लिये गए. अदालत के सामने इन तथ्यों को नहीं रखा जा सका.

कहा जा रहा है कि संत रविदास मंदिर 15वीं सदी का बना है. सिकंदर लोधी के ज़माने का है. यहां पर संत रविदास ने तीन दिनों का प्रवास किया था. यहां पर एक स्कूल भी है जिसका उद्घाटन पूर्व रेल मंत्री बाबू जगजीवन राम ने किया था. इस विरोध प्रदर्शन में आए नेताओं का कहना था कि दिल्ली में कई जगहों पर अवैध मंदिर बने हैं क्या उन्हें तोड़ा जा सकता है. फिर रविदास मंदिर को क्यों ढहाया गया. इसी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तुगलकाबाद के वन क्षेत्र में बने गुरु रविदास मंदिर को लेकर उनके आदेश को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की सरकार से कानून व्यवस्था बनाए रखने को कहा है. लेकिन इस रैली के बाद तुगलकाबाद में हिंसा हो गई. 100 से ज्यादा वाहन तोड़े गए. इस कारण 90 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई है. भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर को भी गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि पुलिसकर्मियों पर हमला हुआ है. 15 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. मायावती ने हिंसा पर कहा कि यह दुखद घटना है. इस हिंसा में बसपा का कोई हाथ नहीं है. उन्होंने कहा कि महापुरुषों के सम्मान में बेकसूर लोगों का नुकसान न करें. 



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