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सुप्रीम कोर्ट के भविष्य को लेकर चिंता क्यों?

21 मार्च को जस्टिस चेलामेश्वर ने सभी जजों को पत्र लिखा था और कहा था कि चीफ जस्टिस को भरी अदालत में जजों की नियुक्ति पर चर्चा करनी चाहिए.

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सुप्रीम कोर्ट के भविष्य को लेकर चिंता क्यों?
सुप्रीम कोर्ट का भविष्य क्या होगा, इस पर चर्चा की मांग को लेकर दो वरिष्ठ जज अगर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को पत्र लिखें तो क्या यह कोई सामान्य घटना है. सुप्रीम कोर्ट के भविष्य को क्या ख़तरा है, जिसे हम अनदेखा कर रहे हैं. किस भरोसे पर हम अनदेखा कर रहे हैं. हो सकता है कि दोनों जज बढ़ाचढ़ा कर कह रहे हों तब भी क्या इसे अनदेखा कर दिया जाना चाहिए. जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मदन लोकुर उन चार जजों में शामिल थे, जिन्होंने 12 जनवरी को प्रेस के सामने आकर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीक नहीं है. न्यायपालिका की स्वतंत्रता को ख़तरा है. न्यायपालिका नहीं बचेगी तो लोकतंत्र नहीं बचेगा.

सात राजनीतिक दलों ने चीफ जस्टिस मिश्रा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया जिसे उप राष्ट्रपति और राज्य सभा के चेयरमैन ने खारिज कर दिया. महाभियोग प्रस्ताव के पेश होने के दो दिन बाद इन दो सीनियर जजों ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा कि भरी अदालत में सांस्थानिक मसलों और सुप्रीम कोर्ट के भविष्य पर चर्चा होनी चाहिए. फुल कोर्ट का मतलब होता है जहां सुप्रीम कोर्ट के सभी जज मौजूद होंगे. पिछले कुछ समय में सीनियर जजों की तरफ से दो और पत्र लिखे जा चुके हैं. ये लोग चाहते हैं कि भरी अदालत में इस बात पर चर्चा हो कि सरकार हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति में दखल दे रही है.

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21 मार्च को जस्टिस चेलामेश्वर ने सभी जजों को पत्र लिखा था और कहा था कि चीफ जस्टिस को भरी अदालत में जजों की नियुक्ति पर चर्चा करनी चाहिए. केंद सरकार ने कर्नाटक हाई कोर्ट को सीधा लिख दिया था कि. सरकार चाहती थी कि उस व्यक्ति के बारे में फिर से जांच हो जिसका नाम कोलेजियम ने हाईकोर्ट के जज के लिए प्रस्तावित किया है. चीफ जस्टिस ने इस पत्र का कोई जवाब नहीं दिया है. न ही भरी अदालत की बैठक बुलाई. 9 अप्रैल को जस्टिस कुरियन जोसेफ ने चीफ जस्टिस और सभी जजों को पत्र लिखा. मांग की कि सात जजों की एक बेंच बने जो इस बात की समीक्षा करे कि कोलेजियम के प्रस्तावित कितने नामों पर सरकार बैठी हुई है. मंज़ूरी नहीं दे रही है. उनका कहना था कि जस्टिस के एम जोसेफ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति क्यों रोकी गई है.

इंडियन एक्सप्रेस के सुशांत सिंह की रिपोर्ट का हिस्सा मैंने आपके सामने पेश किया. इंडियन एक्सप्रेस के सुशांत सिंह की रिपोर्ट से ये सारी जानकारी आप तक पेश कर रहा हूं. क्या वाकई हम ऐसे मोड़ पर आ चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट के भविष्य की चर्चा करनी पड़ जाए? क्या इन चार सीनियर जजों के बार बार पत्र लिखने, पत्र में उठाई बातों को अनदेखा किया जाता रहेगा, अभी तक अनदेखा किया गया, एक बार चर्चा क्यों नहीं हो जाती है. कई बार लगता है कि मामला व्यक्तिगत अहंकार का है मगर ये जज सांस्थानिक सवाल उठा रहे हैं. हम इन सब बातों पर चर्चा करेंगे फैज़ान मुस्तफ़ा से.


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