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नौकरी सीरीज का 22वां अंक : सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की सुस्ती टूटी?

सरकार यह नहीं कहती है कि हमारा भरोसा मत रखो, हम नौकरी नहीं देंगे, उल्टा भरोसा रखने वाले से ही पूछती है कि ये तो बताओ की तुम हम पर भरोसा क्यों करते हो.

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नौकरी सीरीज का 22वां अंक : सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की सुस्ती टूटी?
नौकरी सीरीज़ का 22वां अंक आप देखने जा रहे हैं. सिस्टम के भीतर सड़न और मौसम नहीं बदलता है. सरकार बदलती है जो बादलों की तरह उड़ती हुई आती है और धूप छांव खेलती हुई चली जाती है. जिस सिस्टम के कमरों में बैठने के लिए नेता सारा ज़ोर लगा देते हैं वही अब पूछते हैं कि नौजवान सरकार की नौकरी के भरोसे क्यों बैठे हैं. सरकार यह नहीं कहती है कि हमारा भरोसा मत रखो, हम नौकरी नहीं देंगे, उल्टा भरोसा रखने वाले से ही पूछती है कि ये तो बताओ की तुम हम पर भरोसा क्यों करते हो. नौजवानों ने कभी पूछा नहीं कि तुम भी तो बताओ कि सरकार में जाने के लिए फिर क्यों दिन रात मरते हो. सवालों के दौर में इस राजनीति के पास कोई आइडिया नहीं बचा है. वह लगातार थीम की तलाश में है जिसपर बहस हो सके.

फिलहाल हिन्दू मुस्लिम थीम ही सबसे बड़ी थीम है. इसी थीम के भीतर सारे प्रयोग हो रहे हैं. कभी धमकी दी जाती है, कभी नफ़रत बोई जाती है तो कभी नेक सलाह दी जाती है. हर किसी के बस की बात नहीं है हिन्दू मुस्लिम थीम से आज़ाद होना. भारत की राजनीति ने जनता को इस थीम में फंसा दिया है. नेता बहुत चालाकी से कभी-कभी अच्छी बात करने का ढोंग कर जाते हैं मगर आप थोड़ी चतुराई से समझ लें तो दिख जाएगा कि यह तो वही थीम है जिसका नाम हिन्दू मुस्लिम टॉपिक है. हमारी राजनीति के पास आपके रोज़गार भविष्य के लिए कोई ठोस आइडिया नहीं है. इसलिए ऐसे आइडिया की तलाश है जो आपको बहस में उलझा सके. आपको ख़ुराक दे सके कि वो आपको मिल रहा है.

इस बीच में कुछ नौजवानों से अफीम का नशा उतरा है तो वे अपने नौकरी के सवाल को लेकर पूछ रहे हैं मगर जो जवाब मिल रहा है उसे आप भी सुनिये. आपने जिन्हें सुना वे झारखंड के बोकारो के भाजपा विधायक बिरंची नारायण हैं. विधायक जी ने हाथ जोड़ लिया कि उनके पास नौकरी नहीं है. चुनावों के दौरान मुंबई से ठगों का एक गिरोह आता है. जो पैसे लेकर आपके लिए स्लोगन लिखता है. पलायन नहीं होगा, घर-घर रोज़गार होगा. चुनाव के बाद वो गिरोह स्लोगन लिखने का पैसा लेकर सबसे पहले पलायन कर जाता है. रह जाती है जनता और चुनाव जीत कर विधायक.

बिरंची नारायण जी की एक खूबी पसंद आई कि वे नौजवानों के गुस्से को छोड़कर नहीं गए, बल्कि उनके बीच में टिक कर बोलते रहे. उनके साथ बने रहे. यह नेता की अच्छी क्वालिटी है. मगर नौजवान क्या कह रहे थे. नौजवानों का सवाल करने का तरीका भी बहुत अच्छा था. एक बार भी अपने विधायक का अपमान नहीं किया, बल्कि अपने सवाल पर टिके रहे. इससे हुआ ये कि विधायक और जनता के बीच संवाद का रिश्ता बना रहा. नौजवानों झारखंड सरकार की एक नीति का विरोध कर रहे हैं.

झारखंड सरकार ने राज्य को दो हिस्से में बांट दिया है. 11 ज़िले की नौकरी में शेष भारत के लोगों को भी हिस्सा मिलेगा. 13 ज़िले ऐसे होंगे जहां की नौकरी में वहीं के लोगों के लिए रिज़र्व रहेगी. एक ही राज्य में दो स्थानीय नीतियों के खिलाफ छात्रों आंदोलित हो रहे हैं. हाल ही में 20,000 छात्रों ने कई ज़िलों में रैली निकाली थी. 11 मार्च को इनका फिर से आंदोलन होने वाला है.

नौकरी सीरीज़ हमारी चल रही है. होली से एक दिन पहले एक नौजवान का मैसेज आया है कि उसे अप्वाइंटमेंट लेटर मिल गया है. SSC (CPO) का इम्तहान 2016 के साल होता रहा और अंत में जाकर 31 जनवरी 2017 को निकला. उसके तीन महीने बाद मेडिकल जांच हुई. सितंबर 2017 में अंतिम परिणाम आता है मगर ज्वाइनिंग का कुछ पता नहीं. कारण एक लड़के ने केस कर दिया. 4350 नौजवानों की ज्वाइनिंग रूक गई. दिसंबर 2017 में अदालत से आदेश भी आ गया. जो ज्वाइंनिंग 2017 में होनी थी वो अब अप्रैल 2018 में होगी, क्योंकि 1 मार्च 2018 को जो पत्र आया है उसमें यही लिखा है कि 23 अप्रैल को ज्वाइन करना है. SSC (CPO) की परीक्षा अर्धसैनिक बल और दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर की होती है. 4000 लोगों के घर होली के दिन आने वाली खुशियां मुबारक. 

21 वें अंक में हमने जोड़ा था कि 7000 से अधिक नौजवानों को काडर मिलने, ज्वाइनिंग लेटर मिलने, ज्वाइनिंग से पहले की प्रक्रिया पूरी होने के पत्र आने लगे हैं, आ चुके हैं और आएंगे. अब आप इसमें 4350 जोड़ लीजिए. इस सीरीज़ के दौरान जिन नौकरियों के लिए नियुक्ति पक्रिया शुरू हुई है अब उसकी संख्या 11000 से अधिक पहुंच रही है. शायद यही उत्साह का कारण है कि प्रोपेगैंडा के हिसाब से सजा कर पेश की ख़बरों से दूर रह कर आपकी ज़िंदगी के सवालों से भिड़ा रहा. इस दौरान हमने हज़ारों छात्रों के मेसेज पढ़े, उनकी बातें सुनी. ज़बरदस्त अनुभव हुआ. बड़ी संख्या में छात्रों ने कहा कि वे कभी हिन्दू मुस्लिम डिबेट नहीं करेंगे न इसका हिस्सा होंगे. कुछ छात्रों ने बताया है कि छात्रों ने बताया एससीसी सीजीएल 2016 की परीक्षा पास किए हुए अभी बहुत से नौजवान नियुक्ति पत्र का इंतज़ार कर रहे हैं. क्ट्रोलर जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट में 3125 नौकरियां होनी हैं. ये सब इम्तहान पास कर चुके हैं. ज्वाइनिंग का इंतज़ार कर रहे हैं. 

हमारे सहयोगी सोहित मिश्र भी होली के एक दिन पहले इन छात्रों का हाल लेने गए. दिन भर उनके साथ भटकते रहे. बतियाते रहे. 15-16 घंटे की ये छात्र तैयारी करते हैं. इन्हें एक एक खबर पर नज़र है कि कब भर्ती निकली, चेयरमैन के अधिकार क्या है, क्यों परीक्षा में देरी हो रही है. सोहित चाहते हैं कि आप दर्शक देखें कि आपके नौजवान किस मुश्किल स्थिति में रहकर तैयारी करते हैं और इनके साथ सरकारें किस तरह से धोखा करती हैं.

आखिर सरकार नौकरियां क्यों नहीं दे रही है, नहीं देनी है तो साफ साफ कह दे कि नहीं देंगे मगर फॉर्म निकालकर योग्यता परीक्षाएं पास कराकर कई-कई साल तक लटकाने का क्या तुक है. सोहित मिश्र का धन्यवाद जो होली के एक दिन पहले भी ज़रूरी स्टोरी लेकर आ गए, आमतौर पर इस दिन चैनलों के रिपोर्टर किसी गायक को खोज रहे होते हैं जो होली पर गा दे, जिसे लेकर टीवी का स्पेस भरा जा सके. सोहित ने खाली पेट की खाली आकांक्षों से इस स्पेस को भरने के लिए मुंबई से स्टोरी भेजी है.

किसी भी राज्य का चयन आयोग हो, इसने हमारे नौजवानों को रूला दिया है. उनसे सपने तोड़ दिये हैं. चार-चार साल तक परीक्षा का चक्र पूरा नहीं होता है. हमारी नौकरी सीरीज़ एसएससी के कारण शुरू हुई थी. अगस्त से लेकर अक्तूबर 2017 तक करीब 15000 नौजवानों के रिज़ल्ट आ गए थे. मेरिट लिस्ट में नाम आने के बाद चुप्पी पसर गई. कोई बता नहीं रहा था कि उनकी नियुक्ति कब होगी. प्रक्रिया कब शुरू होगी. परेशान होकर नौजवान फोन करने लगे फिर भी कोई जवाब नहीं.

छात्रों ने बताया कि हमें नियुक्ति पत्र नहीं मिलेगा, क्योंकि 12 जनवरी को एक आदेश निकला है कि नियुक्ति की प्रक्रिया रोक दी जाए. हमें यकीन नहीं हुआ और न ही हम इसकी पुष्टि कर सके. तभी 29 जनवरी को संचार मंत्रालय से एक चिट्ठी जारी होती है. इसकी पहली लाइन में लिखा है कि 12 जनवरी को पोस्टल विभाग के निदेशक का आदेश था कि सभी सर्किलों को एसएससी 2015 की परीक्षा पास करने वालों की नियुक्ति रोक दी जाए, अगले आदेश तक के लिए. छात्रों की 12 जनवरी वाले आदेश की बात सही थी. इसी आदेश में निकला था कि अब आदेश यह जारी हुआ है कि पोस्टल विभाग के 5205 नौजवानों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए. 

जब हम यह सीरीज़ शुरू कर रहे थे तब सीएजी में जिन छात्रों का हुआ था वो खूब मेसेज भेज रहे थे. फोन कर रहे थे. तंग कर दिया था. उन्होंने बताया कि सीएजी से कोई बात नहीं कर रहा है. हमें काफी हैरानी हुई. विनोद राय बोल नहीं पा रहे हैं, मगर उनके बाद सीएजी तो बोल ही सकती है. पता चला कि अलग-अलग पदों के करीब 1700 नौजवानों की नौकरी का सवाल वहां अटका पड़ा है. हमारी सीरीज़ के दौरन सीएजी को पहली बार बोलना पड़ा कि एसएससी ने इनके डोजियर भेज दिए हैं. इसमें सर्टिफिकेट, पास होने का प्रमाण पत्र वगैरह होता है. अगस्त 2017 में रिजल्ट आ गया था, छह महीने तक डोजियर नहीं पहुंचा था. ये हाल है एसएससी का. मगर उसके बाद से फिर खामोशी. हम बीच-बीच में सीएजी का ज़िक्र करते रहे. मगर 1 मार्च को डबल खुशखबरी आई है. करीब 700 छात्रों की ज्वाइनिंग का नोटिफिकेशन सीएजी की साइट पर आ गया है. 

पहले ख़बर आई की 200 ऑडिटर को राज्य सीएजी का बंटवारा कर दिया गया है. राज्य मुख्यालयों से अब नियुक्ति पत्र मिलना शुरू हो जाएगा. शाम होते-होते दूसरी खबर आ गई कि 500 एकाउंटेंट का भी राज्यों का बंटवारा हो गया है. राज्यों को इनका डोसियर भेजा जा रहा, ताकि नियुक्ति पत्र जारी हो सके.

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इस सीरीज़ के दौरान सीएजी के चैयरमैन ने अपनी वेबसाइट पर एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें मेरी तरफ इशारा किया गया कि एक चैनल बुरी नीयत से यह सब काम कर रहा है. मेरी नीयत बुरी नहीं थी, मेरा इरादा पक्का था कि जब तक इन्हें लेटर नहीं मिलेगा यह सीरीज़ चलती जाएगी. एसएससी के चेयरमैन अशीम खुराना जी ने एक और पत्र वेबसाइट पर डाला कि इनकी नियुक्ति में एसएससी की कोई भूमिका नहीं है, एनडीटीवी के एंकर को इस स्थिति की जानकारी नहीं है. अब सारे आदेश में यही लिखा आता है कि एसएससी ने छात्रों के डोजियर भेज दिए हैं, नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो रही है. 8 से 9 हज़ार छात्रों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है. आप खुद उन नौजवानों से इस सीरीज़ के बारे में पूछ सकते हैं. उसके पहले कितने हताश थे, अब कितनी आशाओं और उमंगों से भरे हैं. वे होली के रंगों की तरह खिल उठे हैं.

उम्मीद की जानी चाहिए कि हमारी नौकरी सीरीज़ के बाद चयन आयोग सुधरेंगे. अगर अगले साल ऐसा हुआ तो हम अगले साल भी इसे बीस दिन करेंगे बशर्ते तब तक मैं एंकरिंग करता रहा तो. बहुत से छात्र अब डर रहे हैं. नौकरी मिल गई है. मैं समझता हूं. नौकरी में जाकर ईमानदार बने रहिएगा. सोचिए मैं भी डर गया होता या एक ही दिन यह रिपोर्ट कर आगे बढ़ गया होता तो इंतज़ार की यह रात कितनी लंबी हो गई होती. डरना नहीं है. गांधी जी ने आजादी किसी से डरने के लिए नहीं दिलाई थी. हम आज़ादी के नायकों का जन्मदिन इसलिए नहीं मनाते कि किसी से डर जाएंगे. बैंक पर आज कुछ नहीं मगर बैंकरों से यही कहूंगा कि अगर उन्हें लगता है कि उनसे ग़ुलामी कराई जा रही है तो वे किसी को होली के संदेश न भेजें, न होली खेले. जब रंग ही नहीं है जीवन में रंग का क्या ढोंग करना. आपके बैंकर वाकई गुलाम की ज़िंदगी जी रहे हैं वरना वे एक एंकर को फोन कर फूट-फूट कर नहीं रोते. आप उनसे बात कीजिए. उन्हें गुलामी से निकालिए. उनकी पीड़ा को बाहर लाइये.


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