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राहुल गांधी के चौंकाने वाले फैसले

राहुल गांधी द्वारा लिए गए कुछ फैसले काफी चौंकाने वाले हैं, अंग्रेजी में जिसे कहते हैं आउट ऑफ बॉक्स आइडिया यानि लीक से हट कर लिया गया फैसला. हाल के दिनों में लिए गए ये सभी फैसले कांग्रेस के हित में जाते दिख रहे हैं..

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राहुल गांधी के चौंकाने वाले फैसले

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की फाइल फोटो.

नई दिल्ली:

कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का जिम्मा दिए जाने के फैसले को कई जानकार तुरूप का इक्का बता रहे हैं,कोई कहता है कि यह राजनीति में गेम चेंजर यानि राजनाति का परिदृश्य बदलने वाला फैसला है.मगर प्रियंका को लेकर जिस तरह से कुछ नेताओं के बयान आ रहे हैं वो चौंकाने वाले हैं..खासकर बीजेपी के नेताओं के, क्योंकि ये अपने को संस्कारी पार्टी का सदस्य बताते हैं..मगर प्रियंका को लेकर दिए जा रहे ये बयान दरअसल महिलाओं को लेकर इनकी सोच को दर्शाता है.तो क्या अब यह माना जाए कि बीजेपी के अंदर प्रियंका को लेकर खौफ है.खौर इसपर चर्चा तो होती रहेगी मगर मैं आपका ध्यान पिछले दिनों राहुल गांधी द्वारा लिए गए कुछ फैसलों की ओर दिलाना चाहता हूं जो काफी चौंकाने वाले हैं अंग्रेजी में जिसे कहते हैं आउट ऑफ बॉक्स आइडिया यानि लीक से हट कर लिया गया फैसला और हाल के दिनों में लिए गए ये सभी फैसले कांग्रेस के हित में जाते दिख रहे हैं..जैसे सबसे ताजा फैसला प्रियंका के बारे में लिया गया..

शायद कुछ लोग ये कहें कि उन्हें इस फैसले का अंदाजा था तो वो या तो नेता होंगे या फिर पत्रकार..मगर आम जनता के लिए और आम कांग्रेस कार्यकत्ता के लिए यह अवाक कर देने वाला फैसला था..लोग अब मान भी रहे हैं कि यह सही फैसला सही है खासकर कांग्रेस के लिहाज से..जाहिर है उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की जो हालत है उसे संभालने के लिए पार्टी को एक बूस्टर डोज की जरूरूत थी जो प्रियंका को लाकर राहुल ने पूरी कर दी..कुछ ऐसा ही चौंकाने वाला फैसला राहुल ने चंद दिनों पहले लिया था उन्होंने 80 साल की उम्र में शीला दीक्षित को दिल्ली की कमान सौंप दी.लोग भले ही कहें कि उतनी बड़ी उम्र में शीला दीक्षित पर इतना बड़ा दांव क्यों..मगर जो दिल्ली में रहते हैं उन्हें मालुम है कि अपने 15 साल के कार्यकाल में शीला दीक्षित ने क्या क्या किया था..दिल्ली आज जितनी चमकती दिख रही है चाहे वो फ्लाई ओवर हो या मेट्रो या फिर इम्तिहान के पहले बच्चों को तनाव न लेने की नसीहत देने का रेडियो संदेश लोग कुछ भी नहीं भूले हैं..


वैसे भी दिल्ली में कांग्रेस को शून्य से शुरूआत करनी है ऐसे में शीला दीक्षित से बेहतर दावेदार हो नहीं सकता.यदि कांग्रेस का दिल्ली में कुछ भी होना है तो शीला दीक्षित के बहाने ही हो सकता है क्योंकि उनके होते कोई गुट नहीं बचेगा और सभी को वो बच्चों की तरह स्वीकार्य करेंगी और सभी उनकी अपनी मां की तरह.कुछ ऐसा ही फैसला राहुल गांधी ने कनार्टक के संबंध में लिया जब कांग्रेस ने यह तय किया कि वह जेडीएस के साथ मिल कर सरकार बनाएगी.चलिए यहां तक तो ठीक है मगर जब यह खबर आई कि कनार्टक के मुख्यमंत्री जेडीएस के कुमारास्वामी होगें और कांग्रेस का उपमुख्यमंत्री होगा जबकि कनार्टक में कांग्रेस के पास 80 विधायक हैं और जेडीएस के पास 37..है न चौकाने वाला फैसला.

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राहुल ने काफी लोगों को उस वक्त भी चौंकाया जब कांग्रेस ने तीन राज्यों मध्य प्रदेश.राजस्थान और छत्तीसगढ में जीत कर सरकार बना ली .मगर लोग उस वक्त और भी चौंके जब उन्होने मुख्यमंत्री पद के लिए अनुभवी लोगों को तरजीह दी और युवा चेहरों को इंतजार करने के लिया कहा..एक और उदाहरण है कि हरियाणा के जींद विधानसभा उपचुनाव के लिए राहुल ने रणदीप सुरजेवाला को भेजा जो पहले से ही कैथल से विधायक है.पूछने पर पता चला कि उन्होने सुरजेवाला को कहा कि हर चुनाव जीतने के लिए नहीं लड़ा जाता .जाहिर है राहुल ने सुरजेवाला को हरियाणा भेजने का फैसला पार्टी की वहां बहुत ही खस्ता हालत को लेकर किया . खबर है कि सुरजेवाला जींद में अच्छा चुनाव लड़ रहे हैं और बाकियों को टक्कर दे रहे हैं वरना वहां कांग्रेस पांचवें नंबर पर थी.2019 के लोक सभा चुनाव में अभी थोड़ा ही वक्त है तो क्या कुछ और चौंकाने वाले फैसले राहुल की तरफ से आ सकते हैं या राहुल गांधी को लगता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के चौंकाने वाले नतीजे के लिए ये चौकाने वाले फैसले ही काफी हैं.

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.



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