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राजीव मिश्रा की कलम से : 'बीजेपी का ब्रह्मास्त्र' किरण बेदी, 'शस्त्रविहीन' हुई केजरीवाल और टीम...

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राजीव मिश्रा की कलम से : 'बीजेपी का ब्रह्मास्त्र' किरण बेदी, 'शस्त्रविहीन' हुई केजरीवाल और टीम...

बीजेपी मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ किरण बेदी

नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी के हाथों पूरे देश में आम चुनाव में मिली करारी हार के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान दावेदार अरविंद केजरीवाल को जुबानी जंग में भी नरेंद्र मोदी पर हमले की हिम्मत जुटाने में इतना वक्त लग गया, तब सवाल है कि किरण बेदी पर हमले कब तक शुरू हो पाएंगे... उधर, पार्टी के वरिष्ठ नेता और अब तक नरेंद्र मोदी के बड़े प्रशंसकों में से एक कुमार विश्वास जिसे जयचंद की उपाधि दे रहे हैं, यानि शाजिया इल्मी, वह भी पार्टी में आ रही हैं। ऐसे में पार्टी चुनाव प्रचार में जिन हथियारों का प्रयोग कर रही थी, उनकी धार पर थोड़ा-बहुत नहीं, बहुत ज़्यादा असर पड़ना लाजमी है।

पार्टी के ही कई लोग कह रहे हैं कि भीतर की कुछ बातें बाहर तो आएंगी और शाजिया से ऐसी उम्मीद पार्टी कर रही है। शाजिया जिस प्रकार इंटरव्यू में खुलेआम दावा कर रही हैं, उसे देखकर तो ऐसा ही लग रहा है। 'आप' के तमाम पूर्व नेताओं की तरह शाजिया भी केजरीवाल को पहले ही तानाशाह के समान बता चुकी हैं... तो दूसरी तरफ पार्टी के वर्तमान कर्ताधर्ता इसे झुठलाने के लिए तमाम बयान जारी करते रहे हैं और अब भी यही करने में समय बरबाद करेंगे।

दिल्ली में किरण बेदी के बीजेपी में शामिल होने के साथ ही सब के सब एक सुर में कहने लगे हैं कि बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अपना ब्रह्मास्त्र चला दिया है। यानि अब बीजेपी के पास दिल्ली में केजरीवाल के जवाब में कुछ नहीं बचा है।

किरण बेदी को ऐसा क्यों कहा जा रहा है... यह बताने वाले केजरीवाल और बीजेपी में तमाम समानताएं और अंतर बताने में लगे हैं... अपने-अपने विश्लेषण दे रहे हैं... कोई कह रहा है कि अब बीजेपी से केजरीवाल को दिक्कत होगी। कथित जानकार तो यह भी कह रहे हैं कि केजरीवाल के खेमे में अब कुछ हलचल मच गई है। कई लोगों को लगने लगा है कि अब तक जो भी प्रचार किया गया था, चाहे वह जगदीश मुखी का नाम लेकर किया गया, सतीश उपाध्याय का नाम लेकर किया गया है, पिछले चुनाव में विजय गोयल को लेकर किया गया, विजेंद्र गुप्ता को लेकर किया गया, सारे प्रचार, सारे हथियार नाकाम हो गए... अब किरण बेदी के खिलाफ क्या बोलकर हमला करेंगे। कौन-सा भ्रष्टाचार का मामला लाएंगे...

किरण बेदी, पहले अन्ना की टीम में थीं, जिसमें केजरीवाल भी शामिल थे। रामलीला मैदान पर प्रदर्शन के दौरान सरकार पर जब दबाव बढ़ा था, उसी दौरान किरण बेदी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब देने के लिए खुद केजरीवाल और वर्तमान टीम के तमाम सदस्य सामने आए थे और सीना ठोककर उनकी ईमानदारी, बेदाग छवि और कार्यक्षमता और राष्ट्र तथा समाज के प्रति निष्ठा की दुहाई देते रहे थे।

अब जब किरण बेदी का आगमन बीजेपी में हो गया है और वह यह स्वीकार कर रही हैं कि पार्टी और पीएम मोदी ने उन पर काफी भरोसा दिखाया है, तब केजरीवाल और अब की उनकी टीम के चेहरे पर शिकन पड़ना तो लाजमी ही है।

दिल्ली में पिछले विधानसभा चुनाव में जब आम आदमी पार्टी की हवा होने की बात कही जा रही थी, तब पार्टी दूसरे नंबर की पार्टी बन पाई थी। अब जब मोदी लहर में पूरा देश मोदीमय होता जा रहा है, ऐसे में केजरीवाल का दावा कि वह 45 सीटों के साथ सरकार बनाएंगे, ज्यादा बड़े बोल प्रतीत हो रहे हैं। केजरीवाल की कोशिश है कि वह सरकार बनाने लायक बहुमत जुटा लें, लेकिन अब उन्हें दिक्कत होनी तय है...

मोदी फैक्टर से तो वह पहले ही डरे हुए थे, उनके अपने कई साथी यह मान भी रहे थे... दो दिन पहले ही मोदी की तारीफ करने वाले कुमार विश्वास पार्टी के प्रचार में दिखने लगे हैं। केजरीवाल जहां तमाम इंटरव्यू में मोदी के खिलाफ बोलने से बचते रहे हैं, कई बार तो वह मोदी पर पूछे सवालों पर बौखला तक गए और सवालों के जवाब में सवाल ही पूछने लगे... वहीं, कुमार विश्वास ने हमला शुरू किया है। मोदी का बल यही रहा है कि ऐसे हमलों पर तवज्जो नहीं देते हैं और अपना काम करते रहे हैं और उनकी यही बात लोगों को पसंद आती रही। मई, 2014 के बाद से लेकर अब मोदी पर हमले करने की हिम्मत आम आदमी पार्टी ने जुटाई है... फिर सोचिए किरण बेदी पर हमले की हिम्मत कितने दिनों में जुटा पाएगी... शायद यही वजह है कि तमाम कथित जानकार किरण बेदी को 'बीजेपी के ब्रह्मास्त्र' की उपाधि दे रहे हैं...


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