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नागरिकता कानून के विरोध में सड़कों पर नागरिक असम से केरल तक

समस्त भारत में इसके विरोध का व्यापक स्वरूप इस बात पर जाकर टिकता है कि यह कानून धर्म के आधार पर भेदभाव करता है

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नागरिकता कानून के विरोध में सड़कों पर नागरिक असम से केरल तक

नागरिकता कानून के विरोध में नागरिकों का बड़ा समूह देश के अलग-अलग हिस्सों में सड़कों पर उतर आया है. सभी प्रदर्शनों को कवर करना मुश्किल है क्योंकि इनका स्केल इतना बड़ा है और संगठनों की संख्या बहुत अधिक है. यह प्रदर्शन पूर्वोत्तर, खासकर असम में जाकर भाषा और संस्कृति का सवाल लेता है तो दक्षिण में भी यह तमिल प्रश्न बन जाता है. लेकिन समस्त भारत में इसके विरोध का व्यापक स्वरूप इस बात पर जाकर टिकता है कि यह कानून धर्म के आधार पर भेदभाव करता है. सरकार ने बार-बार संसद में कहा कि यह भेदभाव नहीं है लेकिन इसके बाद भी सड़कों पर हो रहे प्रदर्शनों की तस्वीरें बता रही हैं कि इन्हें रिजेक्ट करने का एक ही तरीका है. इनका कवरेज ही न हो लेकिन अगर आप इन प्रदर्शनों की तस्वीरों में झांककर देखें तो बहुत कुछ दिखता है. दिखता है कि सरकार को अभी भी अपना पक्ष आम जनता के लिए साफ करना है. सड़कों के अलावा इस बिल का विरोध कानून के मोर्चे पर भी हो रहा है. सुप्रीम कोर्ट में कई संगठनों और व्यक्तियों ने याचिका दायर कर दी है. कहीं कानून की प्रतियां जलाई जा रही हैं तो कहीं नागरिकता कानून के बाद नागरिकता रजिस्टर की आहट का विरोध हो रहा है. पूर्वोत्तर की हालत यह है कि गृहमंत्री ने शिलांग की यात्रा स्थगित कर दी है. वे रविवार को नार्थ ईस्टर्न पुलिस एकेडमी की पासिंग आउट परेड में जाने वाले थे. यही नहीं गुवाहाटी में होने वाली भारत और जापान की शिखर वार्ता रद्द कर दी गई है.

गुवाहाटी में 15 से 17 दिसंबर के बीच प्रधानमंत्री मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंज़े आबे की मुलाकात होने वाली थी. लेकिन दोनों पक्षों ने फैसला किया कि यह शिखर वार्ता निकट भविष्य में होगी. यानी जिस तारीख को होने वाली थी उस तारीख को नहीं होगी. हिन्दू अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सरकार तो दिल्ली में शिखर वार्ता चाहती थी लेकिन जापान के पक्ष ने समझा कि इसकी थीम पूर्वोत्तर में जापान के निवेश को लेकर थी, इसलिए बेहतर है हालात के सुधरने का इंतज़ार किया जाए. गुवाहाटी में शिखर वार्ता होने से अलग संदेश जाता.


जापान के मीडिया में इस बात लेकर ख़बरें छप रही थीं कि टोक्यो यात्रा रद्द करने पर विचार कर रहा है. यही नहीं बांग्लादेश के विदेश मंत्री और गृह मंत्री ने भी भारत यात्रा रद्द कर दी है. द हिन्दू के कल्लोल भट्टाचाजी ने लिखा है कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री अब्दुल मोमिन ने बांग्लादेश में जापान के राजदूत को असम को लेकर हुई घटनाओं के बारे में जानकारी दी है.

संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी बयान जारी किया है कि संस्था नागरिकता कानून के असर का अध्ययन कर रही है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि मानवाधिकार को लेकर जो अंतरराष्ट्रीय घोषणा है उसका सम्मान किया जाना चाहिए. भारत में एमनेस्टी इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक अविनाश कुमार ने कहा है कि इस धर्मांध कानून को वापस लिया जाना चाहिए. यह बिल एक समुदाय को नागरिकता की परिभाषा से बाहर कर रहा है. कोई शरण मांगे तो उसे शरण देना स्वागत योग्य कदम है लेकिन भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में उत्पीड़न के शिकार मुसलमानों और अन्य समुदायों के लिए दरवाज़ा बंद करना उनके बीच भय पैदा करना है. इस कानून के बाद जो NRC नागरिकता रजिस्टर आने वाला है वो दुनिया में एक बड़ा संकट लाने वाला है जो बड़ी संख्या में लोगों को राज्यविहीन बना देगा.

भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और अन्य देश भी भारत की सीमाओं से लगे हैं. श्रीलंका से आए तमिल भारत में सबसे बड़े शरणार्थी समूह हैं. तीन दशकों से वे नागरिकता का प्रयास कर रहे हैं. इस कानून में म्यांमार के सताए गए रोहिंग्या का ज़िक्र नहीं है. जिन्हें संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया का सबसे प्रताड़ित अल्पसंख्यक कहा है. यह कानून पाकिस्तान में अहमदिया, हज़ारा और बांग्लादेश में बिहारी मुसलमानों की यातना को नज़रअंदाज़ करता है. इन समुदायों को बाहर रखना बताता है सरकार भेदभाव कर रही है.

राष्ट्रपति के दस्तखत के बाद यह कानून बन चुका है. इस कानून का विरोध भारत के कई शहरों में हो रहा है. उन शहरों की तस्वीरें भले आप तक न पहुंच पाएं लेकिन सैंकड़ों संगठन इसके विरोघ में प्रदर्शन कर रहे हैं. दिल्ली में भी जंतर मंतर पर शनिवार को तीन बजे प्रदर्शन होने वाला है.

महाराष्ट्र के बीड में जमीयत उलेमा ए हिन्द के तत्वाधान में विरोध प्रदर्शन किया गया है. जमीयत ने धुले में भी प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के बाद ज़िलाधिकारी को ज्ञापन दिया. यह ज्ञापन राष्ट्रपति के नाम पत्र है. पत्र में इस कानून की निंदा की गई है और कहा गया है कि यह कानून धर्म के आधार पर नागरिकता को तय करता है. आज़ादी के समय हमारे राष्ट्रपिता की कल्पनाओं से अलग है. संविधान के आदर्शों के अनुकूल नहीं है. यह बिल असम समझौते की भावना का भी उल्लंघन करता है. इस बिल में राष्ट्रपति से मांग की गई है कि वे इन बातों को नोटिस में लें. नांदेड़, हिंगोली,सांगली, शोलापुर में भी नागरिकता कानून का विरोध हुआ है. सभी जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा है. नागरिकता कानून के विरोध में नारे लगाए गए और लोग काले झंडे लेकर निकले. तमिलनाडु के सेलम में भी इस बिल का विरोध हुआ है जहां 100 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. कर्नाटक के कलबुरगी में धारा 144 लगानी पड़ी. डीमके पार्टी ने इस बिल के खिलाफ चेन्नई में विरोध किया है. डीएमके यूथ विंग के नेता उदय निधि स्टालिन ने बिल की कापी फाड़ दी. उनके साथ कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है. डीएमके ने ऐलान किया है कि 17 दिसंबर को पूरे तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन करेगा. स्टालिन ने कहा कि राज्य की एआईडीएमके सरकार केंद्र की एंटी तमिल और एंटी माइनारिटी सरकार को सपोर्ट दे रही है. हैदराबाद में बड़ा प्रदर्शन हुआ है. बड़ी संख्या में लोगों ने नो सीएबी और नो एनआरसी के बैनर लेकर मार्च किया है. लोगों ने कानून के विरोध में काले बैंड बांधे थे. इस विरोध प्रदर्शन में कई सारे मुस्लिम संगठन शामिल हैं. जमीयत ए उलेमा ए हिन्द, जमीयत ए इस्लामी, तहरीक मुस्लिमीन शब्बान, वहादत ए इस्लामी ने शुक्रवार की नमाज़ के बाद मक्का मस्जिद के सामने प्रदर्शन किया. विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा. पंजाब के मलेरकोटला में भी नागिरकता कानून का विरोध हुआ है. बिल के विरोध में यह शहर पूरी तरह ठप्प हो गया. इस कानून के साथ नागरिकता रजिस्टर का विरोध भी जुड़ गया है. यूपी के झांसी में बड़ी संख्या में लोगों ने ज़िला कलेक्ट्रेट पर जाकर इस बिल के विरोध में नारे लगाए. यहां कांग्रेस पार्टी ने विरोध का नेतृत्व किया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन और इम्तियाज़ हुसैन ने कहा कि इस देश की पहचान आज़ादी बंधुत्व और समता से है जिसे इस कानून के ज़रिए मिटाया जा रहा है. सहारनपुर में भी प्रदर्शन हुए हैं. इन प्रदर्शनों को देखते हुए उत्तर प्रदेश गृह विभाग और डीजीपी मुख्यालय ने अलर्ट जारी किया है कि सभी ज़िलों में ज़ोन और सेक्टर व्यवस्था बहाल की जाए. अराजक तत्व और माहौल खराब करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. कई संगठनों ने नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शनों का ऐलान किया है. जिन ज़िलों में प्रदर्शन हुए हैं वहां की रिपोर्ट मांगी गई है.

दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में भी शुक्रवार को दोपहर में छात्रों का आंदोलन तेज़ हो गया. बड़ी संख्या में छात्रों ने नागरिकता कानून और नागरिकता रजिस्टर के खिलाफ संसद मार्च का ऐलान कर दिया. पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च को रोका और धारा 144 लगा दी. छात्रों की संख्या काफी थी जिस कारण टकराव की नौबत आ गई. यूनिवर्सिटी का कहना है कि इस प्रदर्शन में बाहरी लोगों के आ जाने के कारण ऐसी स्थिति हो गई. पुलिस ने लाठीचार्ज की और आंसू गैस के गोले चलाए. जिसमें डेढ़ दर्जन से अधिक छात्र घायल हो गए. लाठी चार्ज में लड़कियों को भी चोटें आई हैं. इस प्रदर्शन को कवर कर रहे रवीश रंजन शुक्ला ने बताया कि जामिया शिक्षक संघ के महासचिव माजिद जमील लगातार लाउडस्पीकर से अपील करते रहे कि छात्र लौट जाएं. हमारा प्रदर्शन शांतिपूर्ण है. छात्रों ने नागरिकता कानून और नागरिकता रजिस्टर दोनों का विरोध किया है. इस प्रदर्शन में जामिया में पढ़ने वाले पूर्वोत्तर के छात्र भी शामिल हुए. हालात जल्दी ही सामान्य हो गए. छात्रों का दावा है कि इस प्रदर्शन में यूनिवर्सिटी के स्टाफ, शिक्षक और छात्र भी शामिल हुए. छात्रों के तेवर को देखते हुए कनाट प्लेस से आगे पटेल चौक मेट्रो स्टेशन के एंट्री एग्ज़िट गेट बंद कर दिए गए. मेट्रो कारपोरेशन ने ट्विट किया था कि दिल्ली पुलिस की सलाह पर ऐसा किया गया है. लेकिन एक घंटे बाद एक और ट्विट आया कि गेट खोल दिया गया. स्टेशन बंद नहीं है. दोपहर से लेकर शाम तक जामिया में नागरिकता कानून के खिलाफ नारेबाज़ी होती रही. छात्रों का कहना है कि यह कानून उनके साथ भेदभाव है.

मुंबई के टाटा इंस्टिट्यूट आफ सोशल साइंस में भी नागरिकता कानून का विरोघ हुआ है. वहां छात्रों ने बृहस्पतिवार और शुक्रवार को प्रदर्शन किया है. प्रदर्शन के लिए छात्रों ने अपने लिए नियम भी बनाए हैं कि इस प्रदर्शन में कानूनी तरीके से व्यवहार करना चाहिए. हिंसा नहीं होनी चाहिए. कोई भी वहां मौज मस्ती नहीं करेगा. अगर पुलिस के साथ धक्कामुक्की की नौबत आती है तो अपने हाथ पीछे रखें. सीनियर मेंबर के पीछे आ जाएं. पुलिस के साथ कौन-कौन बात करेगा इसके लिए नाम भी तय किए हैं. पूर्व आईएएस कन्नन गोपीनाथन,फहद अहमद और फिरोज़ मिठीबोरवाला है. मीडिया में बात करते हुए ध्यान रखना है कि यह विषय हिन्दू-मुस्लिम का नहीं है. यह भारतीय संविधान का है जिसके खिलाफ यह कानून आया है. यह अप्रवासी और शरणार्थी को लेने की बात नहीं है, सरकार धार्मिक आधार पर भेदभाव कर रही है यह बड़ा सवाल है.

अलीगढ़ शहर में आज इंटरनेट बंद रहा. वहां अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नागरिकता कानून का भी बड़ा विरोध हो रहा है. छात्रों ने अपने शिक्षकों को नोटिस दे दिया था कि अगर वे इस आंदोलन का समर्थन नहीं करेंगे तो उनका बहिष्कार कर देंगे. छात्रों ने शिक्षकों को चौबीस घंटे का समय दिया था.
मंगलवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की डायनिंग हाल का भी बहिष्कार किया था. हज़ारों छात्रों का दावा है कि किसी ने खाना नहीं खाया. बना हुआ खाना ग़रीबों में बांट दिया गया है. छात्रों ने विरोध मार्च में शिक्षकों के शामिल होने की अपील का जवाब शिक्षक संघ के अवैतनिक सचिव ने दिया कि वे शामिल नहीं हो सकते लेकिन शुक्रवार को शामिल हुए. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष सलमान इम्तियाज़ ने कहा कि शुक्रवार के प्रदर्शन में शिक्षक और गैर शिक्षक स्टाफ भी शामिल हुए. कैंपस में भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच हज़ारों छात्रों और शिक्षकों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के रेज़िडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने भी इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया है. एएमयू गर्ल्स कालेज की छात्राओं ने यूनिवर्सिटी की हिदायतों को नज़रअंदाज़ कर इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया है. छात्रों ने ज़िलाधिकारी को मेमोरेंडम दिया है. यह मेमोरेंडम भारत के मुख्य न्यायाधीश के नाम है. शिक्षकों ने प्रधानमंत्री को मेमोरेंडम भेजा है. शाम छह बजे तक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में इंटरनेट बंद था. छात्रों ने बुधवार और शुक्रवार की परीक्षा का भी बहिष्कार किया है.

केंद्र सरकार का कहना है कि राज्य सरकारों को नागरिकता कानून का विरोध करने का कोई अधिकार नहीं हैं. राज्यसभा में भी स्वपन दासगुप्ता ने यही सवाल गृहमंत्री से पूछा था तो अमित शाह ने कहा था कि सभी राज्यों को लागू करना पड़ेगा. फिर भी यह मामला विरोध के स्तर पर टकराव का कारण बन गया है. गैर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने कहा है कि वे अपने राज्य में नागरिकता कानून को नहीं लागू करेंगे. केरल, पंजाब, छत्तीसगढ़ ने ऐलान कर दिया है. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी जो फैसला करेगी हम वही करेंगे. क्या हम ऐसी प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहेंगे जो बंटवारे का बीज बो रहा हो. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा है कि इसे लागू नहीं करेंगे. बंगाल में ममता बनर्जी ने कहा है कि किसी भी हालत में नागरिकता कानून को लागू नहीं करेंगे और 16 दिसंबर से अंबेडकर प्रतिमा के सामने तीन दिनों के लिए प्रदर्शन करेंगी. यही नहीं पूरे राज्य में इस बिल के विरोध में रैलियां करेंगी. ममता ने कहा कि बंगाल में नागरिकता रजिस्टर की प्रक्रिया लागू नहीं होने देंगे. जब तक वे सत्ता में हैं, किसी भी बांशिदें को देश छोड़कर नहीं जाना होगा.

सेंट्रल कोलकाता के मेयो रोड के अलावा बंगाल में कई जगहों पर प्रदर्शन हुआ है. नेशनल हाईवे 6 पर भी प्रदर्शन हुआ है. हाईवे कई घंटे तक बंद था. बेलडांगा से खबर है कि वहां के रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों ने प्लेटफार्म, दो-तीन इमारतों और रेलवे दफ्तरों पर आगजनी की. उलुबेरिया और सियालदाह में ट्रेन की आवाजाही पर असर पड़ा.

अब आते हैं पूर्वोत्तर पर. अरुणालच प्रदेश में भी प्रदर्शन शुरू हो गया है. स्क्रोल ने रिपोर्ट किया है कि राजीव गांधी यूनिवर्सिटी स्टुडेंट यूनियन और नार्थ ईस्टर्न रीजन इंस्टीट्यूट आफ साइंस एंड टेक्नालाजी के छात्र संघ ने राजभवन तक मार्च किया. कई छात्र संगठनों ने परीक्षा का बहिष्कार किया है. एक्सप्रेस ने लिखा है कि अरुणाचल प्रदेश में तीस किलोमीटर लंबा मार्च हुआ है, वो भी पहाड़ी इलाके में. इटानगर में असम के स्थानीय समुदाय के लोगों ने भी हिस्सा लिया. अरुणाचल छात्र संगठनों ने पूछा है कि जो चकमा हाजोंग शरणार्थी हैं, क्या उन्हें नागरिकता मिलेगी, इसका साफ जवाब मिलना चाहिए. अगर नागरिकता दी जाएगी तो कहां बसेंगे. पीटीआई के अनुसार गृहमंत्री अमित शाह सोमवार को अरुणाचल प्रदेश जाने वाले थे, दौरा रद्द हो गया है. शनिवार को नागा स्टुडेंट फेडरेशन ने छह घंटे के बंद का ऐलान किया है. इनका मानना है कि यह कानून पूर्वोत्तर के जनजातीय समुदाय के हितों के खिलाफ है. असम में शुक्रवार को हिंसा नहीं हुई. गुरुवार को दो नौजवानों की मौत हो गई थी. शुक्रवार को भी असम में कई जगहों पर व्यापक प्रदर्शन हुए हैं.

आल असम स्टुडेंट यूनियन ने ऐलान किया है कि अब से शाम को प्रदर्शन नहीं होंगे. अगले पांच दिनों तक प्रदर्शन दिन के दौरान होंगे. आसु ने कहा है कि आंदोलन अहिंसक होगा. मुख्यमंत्री सोनवाल पर आरोप लगाया कि उन्होंने दिल्ली के सामने समर्पण कर दिया है. यह कानून सांप्रदायिक है. हम इस कानून को कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे. भले ही सांसदों ने इसके पक्ष में वोट किया है लेकिन लोगों ने इसे रिजेक्ट कर दिया है. पूर्वोत्तर जाने वाली छह ट्रेनों को रद्द किया गया है. असम के मशहूर गायक पापोन ने दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम को रद्द कर दिया है. पापोन ने ट्विट किया है कि जब उनका घर जल रहा हो तो वो कैसे कार्यक्रम कर सकते हैं. असम के कई बड़े कलाकार भाषा और संस्कृति के सवाल को लेकर इस कानून के विरोध में आ गए हैं. असम में 22 तारीख तक सारे शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया है. तेज़पुर यूनिवर्सिटी से छात्रों का संदेश आया है कि प्रदर्शन के कारण खाना खत्म हो गया है. असम के मुख्यमंत्री ने शांति बनाए रखने की अपील की है. जो हिंसा करेगा, सख्त कार्रवाई होगी. मुख्यमंत्री ने मां बाप से कहा है कि बच्चों को राय दें कि ऐसे प्रदर्शन में हिस्सा न लें.

रेलवे के नार्थ ईस्ट फ्रंटियर ज़ोन की तरफ से बयान आया है कि कई सारी ट्रेनें रद्द हो सकती हैं. उनका समय बदल सकता है. रूट बदल सकता है. प्रभावित ट्रेनों की संख्या 50 के आस पास हो सकती है. मेघालय की राजधानी में भी प्रदर्शन होने लगे हैं. लेकिन वहां कारण अलग है. शिलांग में शुक्रवार को बाज़ार बंद रहा. शिलांग के कुछ हिस्सों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू है. विलियमनगर में हेलिकाप्टर से उतरते वक्त मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाज़ी हुई. उनके वापस जाओ के नारे लगे.

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लोगों का हुजूम मेन शिलांग में राजभवन के बाहर जमा हुआ. पुलिस को आसूं गैस छोड़नी पड़ी. लाठी चार्ज भी हुई. एक मैसेज घूम रहा है कि जिन लोगों ने पथराव का प्रयास किया तो प्रदर्शन के बीच से ही लोगों ने उसका विरोध किया कि हिंसा का रास्ता नहीं अपनाना है. शिलांग में दो गाड़ियों को आग लगाई गई है. पूरे मेघालय में दो दिनों के लिए मोबाइल फोन बंद है. एसएमएस बंद है. इंटरनेट बंद है. इतनी जगह से इतनी बार इंटरनेट बंद होने की खबरें आ रही हैं कि लोग भूल गए हैं कश्मीर में सौ से अधिक दिनों से इंटरनेट बंद है. शिलांग के लोगों ने शाम के वक्त मशाल जुलूस ही निकाला है. मेघालय में भी नागरिकता कानून का विरोध हो रहा है. वहां लोग इनर लाइन परमिट की मांग कर रहे हैं. सभी जगहों पर मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और अमित शाह के खिलाफ नारे लगे हैं.

बीजेपी ने फैसला किया है कि इस मसले पर देश की जनता को बताने के लिए प्रचार अभियान चलाएगी. पार्टी के नेताओं और प्रवक्ताओं को तैयार करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा.



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