मोदी सरकार के 1.7 लाख करोड़ के पैकेज को समझे बगैर पैकेजिंग में लग गया मीडिया

बहुत से लोग निराश हैं कि वित्त मंत्री ने EMI को लेकर राहत नहीं दी. किरायेदारों के लिए कुछ नहीं कहा. छोटे बिजनेस के लिए लिए गए बैंक लोन पर रोक नहीं लगाई. कई लोगों ने कर्मशियल गाड़ियां लोन पर ली हैं, उनकी किश्त का क्या होगा?

मोदी सरकार के 1.7 लाख करोड़ के पैकेज को समझे बगैर पैकेजिंग में लग गया मीडिया

एक लाख 70 हज़ार करोड़ के पैकेज का एलान हुआ है. यह पैकेज में बहुत बड़े सामाजिक वर्ग को लाभ मिलने जा रहा है. सूचना, अपनी टिप्पणी और 'राइट टू फूड' पर काम करने वाली दीपा सिन्हा ने जो हिसाब लगाया है उसे भी दूंगा.

1. 8.7 करोड़ किसानों को 2000 रुपए दिए जाएंगे. 2019 के चुनाव में 14.49 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान का लाभ दिया गया था. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की वेबसाइट पर लाभार्थी किसानों की संख्या 14.49 करोड़ बताई गई है, लेकिन वित्त मंत्री ने कहा है कि 8.7 करोड़ किसानों के खाते में 2000 रुपये दिए जाएंगे. बाकी छह करोड़ किसानों को क्यों बाहर कर दिया गया? क्या अप्रैल में पहले से ही किश्त का जाना तय नहीं था? अगर हां तो अलग से पैकेज कैसे हुआ?

2. 22 लाख स्वास्थ्यकर्मियों को तीन महीने के लिए 50 लाख का बीमा मिलेगा. इनमें डॉक्टर, नर्स, सफाईकर्मी, आशा वर्कर हैं. कोरोना कब तक रहेगा किसी को पता नहीं, लेकिन बीमा की राशि से मनोबल बढ़ेगा. वैसे डॉक्टरों और नर्स को इस वक्त सुरक्षा के उपकरण ज्यादा चाहिए. उम्मीद है इस सूची में लैब टेक्निशियन भी शामिल होंगे. कहीं इसका प्रीमियम उस 15000 करोड़ में से तो नहीं दी जाएगी, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने की है? य़ह जानना ज़रूरी है तभी तो पता चलेगा कि आज का एलान इस 15000 करोड़ से अलग का है या बीमा का प्रीमियम नए एलान में जोड़ा गया है.

3. 80 करोड़ ग़रीबों को तीन महीने 5 किलो गेहूं और चावल फ्री दिया जाएगा. उन्हें पहले से 5 किलो मिलता था उसके पैसे देने होंगे. बाकी ये 5 किलो मुफ्त होगा. एक किलो दाल हर महीने मुफ्त मिलेगी. यह काफी तो नहीं है, लेकिन अच्छा है. और अधिक हो सकता था. दाल का बजट 4800 करोड़ हो जाता है.

4. अब यहां एक सवाल है. 25 मार्च को केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने एक ट्वीट किया था. उसमें लिखा था, 'खाद्य सुरक्षा कानून के तहत अब सभी पीडीएस धारकों को 2 किलो अतिरिक्त अर्थात 7 किलो अनाज (गेहूं 2रु और चावल 3रु प्रति किलो मिलेगा. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यह फैसला लिया गया. इस निर्णय का लाभ देश के 81 करोड़ लाभुकों को अगले तीन महीने तक मिलेगा.'

5. 26 मार्च के वित्तमंत्री के एलान में लाभार्थी की संख्या 80 करोड़ है. 25 मार्च के कैबिनेट के फैसले के बाद के एलान में लाभार्थी की संख्या 81 करोड़ है. एक करोड़ का हिसाब क्या सरकार के बोलने लिखने में गायब हो गया? हो भी सकता है.

6. ध्यान रहें कि करीब 80 करोड़ लोगों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत अलग अलग योजनाओं में अनाज मिलता है. इसमें एक श्रेणी में 5 किलो प्रति व्यक्ति प्रति माह अनाज सस्ते दाम पर मिलता है. अंत्योदय वालों को 7 किलो अनाज मिलता है. एपीएल भी इसी 80 करोड़ में आते हैं.

7. कैबिनेट का फैसला एक दिन पहले जो हुआ था, उसे लेकर 24 घंटे के भीतर ही भ्रम पैदा हो गया है. सरकार को स्पष्ट करना होगा.

8.. पत्रकार नितिन सेठी ने ट्वीट किया है कि खाद्य सुरक्षा के तहत कई योजनाएं हैं. जनवितरण प्रणाली सहित. इन पर सरकार एक तिहाई में 28,892 करोड़ खर्च करती है, तो फिर चालीस हज़ार करोड़ कैसे हुआ? दीपा सिन्हा ने करीब 40,000 करोड़ का अनुमान बताया है. 

9. ध्यान रखें कि कई राज्य सरकारों ने राशन व्यवस्था से जुड़े अपने नागरिकों के लिए अनाज से लेकर नगर राशि देने का एलान किया है. राज्य और केंद्र से मिलने पर उन्हें लाभ होगा. अगर राज्य और केंद्र सरकारें मिलकर ये योजना बनातीं तो एक ही आइटम डबल होने की जगह इसी लागत में कुछ और आइटम आ सकते थे. डबल फायदा हो रहा है.

10. 20 करोड़ महिलाओं के जनधन खाते में तीन महीने तक पांच पांच सौ रुपये दिए जाएंगे. इससे काफी बल मिलेगा. महिलाओं के हाथ में भी कुछ पैसे आएंगे. इस हिसाब से इस पर 30,000 करोड़ खर्च होंगे.

11. 3.2 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों, विकलांगों, विधवा पेंशनरों को 1000 रुपये दिए जाएंगे. इसका हिसाब 3200 करोड़ बैठता है.

12. 8 करोड़ गरीब सिलेंडर धारकों को तीन महीने तक मुफ्त में गैस सिलेंडर मिलेगा. इसका बजट होता है 13,570 करोड़ रुपए.

13. 24 मार्च को केंद्रीय श्रम मंत्री ने सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि श्रमिक कल्याण के लिए लिया गया लेबर सेस का पैसा 3.5 करोड़ पंजीकृत कंस्ट्रक्शन मज़दूरों को तुरंत दिया जाए. 26 मार्च को वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि इसमें 31000 करोड़ फंड हैं.

14. 24 मार्च को श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा था कि लेबर सेस का 52000 करोड़ है. 26 मार्च को वित्त मंत्री कह रही हैं कि 31000 करोड़ रुपये हैं.

15. दरअसल ये सरकार को ही साफ करना चाहिए. हमारे सहयोगी का कहना है कि जब केंद्रीय श्रम मंत्री ने एलान कर दिया तब राज्यों ने बताया कि इसमें से 21000 करोड़ की योजनाओं का एलान कर चुके हैं. लेबर सेस का जनता की जेब से ही गया है जो मजदूरों तक पहुंच रहा है. सोचिए दो दिन पहले तक श्रम मंत्री को पता ही नहीं था कि लेबर फंड में कितना रुपया है और उसका क्या हिसाब है?

16. मनरेगा की मज़दूरी 182 रुपये से बढ़ा कर 202 कर दी गई है. इससे 13.62 करोड़ परिवारों को लाभ मिलेगा. सवाल है कि लॉकडाउन में कोई श्रम कार्य तो हो नहीं रहा है तो फिर ये मज़दूरी कैसे दी जाएगी?

17. 1 लाख 70 हज़ार करोड़ की राशि का जोड़ घटाव अभी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन लाभार्थियों की संख्या जोड़ सकते हैं. ग़रीब भारत की तस्वीर दिख जाएगी. अनाज और कंस्ट्रक्शन मज़दूरों के लिए की गई पहले की घोषणा को आज क्यों जोड़ा गया है? क्या इसलिए कि हेडलाइन बड़ी लगे कि 1.70 लाख करोड़ के पैकेज का एलान हुआ है.

बहुत से लोग निराश हैं कि वित्त मंत्री ने EMI को लेकर राहत नहीं दी. किरायेदारों के लिए कुछ नहीं कहा. छोटे बिजनेस के लिए लिए गए बैंक लोन पर रोक नहीं लगाई. कई लोगों ने कर्मशियल गाड़ियां लोन पर ली हैं, उनकी किश्त का क्या होगा? उम्मीद कीजिए कि वित्त मंत्री इस बारे में कोई फैसला लेंगे. सोनिया गांधी ने इस बारे में सरकार को लिखा है. आप फैसलों की प्रक्रिया देखिए. सब कुछ धीरे धीरे आ रहा है. देर से आ रहा है. सब्र कीजिए. क्या पता आपको भी राहत मिल जाए..


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