साल 1947 में बना कोलकाता का वो सिनेमा हॉल जहां उस्ताद अल्ला रक्खा और पंडित रविशंकर भी पेश कर चुके हैं कार्यक्रम

इस हॉल में सबसे पहले एम एस सुब्बूलक्ष्मी की फिल्म मीरा रिलीज़ हुई थी. उसके बाद उदय शंकर की कल्पना लगी थी.

साल 1947 में बना कोलकाता का वो सिनेमा हॉल जहां उस्ताद अल्ला रक्खा और पंडित रविशंकर भी पेश कर चुके हैं कार्यक्रम

यह हॉल आज भी चल रहा है. सत्य भूषण बोस की बेटी नुपूर मित्रा इसे चला रही हैं.

बाशुश्री सिंगल सिनेमा हॉल. 19 दिसंबर 1947 में बना था. इस हॉल को बनाने वाले सत्यभूषण बोस दसवीं पास भी नहीं थे. लेकिन इससे पहले दो रेस्तरां चला चुके थे जो सफल रहा था. सत्यभूषण बोस ने जब यह सिनेमा हॉल बनाया तब उनकी उम्र 32-33 साल की थी. 1950 में 35 की उम्र में दुनिया से चले गए. इस हॉल में सबसे पहले एम एस सुब्बूलक्ष्मी की फिल्म मीरा रिलीज़ हुई थी. उसके बाद उदय शंकर की कल्पना लगी थी.

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यह हॉल शुरू से मल्टी परपस रहा है. फिल्म रोक कर शास्त्रीय संगीत समारोह हुए हैं. भाषण हुआ है. यहां पर उस्ताद अल्ला रक्खा, भीमसेन जोशी, पंडित रविशंकर, लता मंगेशकर का कार्यक्रम भी हुआ है.

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आप जो बड़ा सा प्रोजेक्टर देखेंगे उसी से पाथेर पाँचाली दिखाई गई थी. 1955 में फिल्म का प्रीमियर इसी हॉल में हुआ था. जो प्रोजेक्टर है वो आज भी चालू हालत में है. 

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ऋत्विक घटक भी अपनी फ़िल्मों का प्रीमियर यहीं करते थे. कई मौक़ों पर सत्यजीत रे के आने की तस्वीरें हैं. 

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यहाँ पर दो अनजाने फिल्म भी शूट हुई थी.

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यह हॉल आज भी चल रहा है. सत्य भूषण बोस की बेटी नुपूर मित्रा इसे चला रही हैं. 

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सरकार को इस हॉल को हेरिटेज घोषित करना चाहिए और बिना अपने नियंत्रण में लिए आर्थिक मदद देनी चाहिए ताकि यह बंद न हो. 

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इसे चलाए रखना सभी सिने प्रेमियों कला प्रेमियों के हित में है. सामाजिक संगठनों के भी हित में है. यह सब जानने का मौका इसलिए मिला क्योंकि इसी हॉल में मेरा कार्यक्रम था. प्रभावशाली फ़िल्मकार ऋतुपर्णो घोष की स्मृति में. वहाँ आए सभी लोगों का शुक्रिया. इतनी भीड़ को संभालने के लिए आयोजकों का भी शुक्रिया.

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रात को सभी के साथ ब्राड वे में खाना खाया. जितनी देर रहा हॉल को निहारता रहा. सत्य भूषण बोस साहब की स्मृति को प्रणाम.

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